UZMA Baithak - उज़मा बैठक

UZMA Baithak - उज़मा बैठक

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उजमा बैठक यानि उदारवादी जमींदारी माटी के खाप (Socio-cultural) -खेड़े (Psychic-Spiritual) - खेतों (Ethi

03/03/2026

उज़मा बैठक द्वारा आयोजित 'फागण-गाण खापरते - 2026' की कुछ हाइलाइट्स:

1 - प्रतिभागियों बारे: नौ दिन में कुल 376 IDs से 750 के करीब लोगों ने भाग लिया| प्रतिदिन का औसतन पार्टिसिपेशन 42 IDs व् 83 प्रतिभागी रहा! इसमें आधे के करीब रेपेटेड ऑडियंस रही, जिसमें कुछ हर रोज जुड़ने वाले थे, कुछ एक से ज्यादा खापरतों में जुड़े; तो इस हिसाब से आधे घटाएं जाएं तो कुल यूनिक-पार्टिसिपेशन 380-390 के बीच रहा! प्रतिभागी दिल्ली, यूपी, राजस्थान, हरयाणा के ग्रामीण व् शहरी क्षेत्रों व् NRI (England, France, Canada, USA, Ireland, Netherland, Portugal, Australia, UAE) रहे! इस प्रकार खाप-खेड़ा-किनशिप की तीनों लेयर्स यानि ग्रामीण-शहरी-NRI ने बराबरी से व् रुचिकर भाग लिया!
2 - प्रेसेंटेशन्स व् लोकगीत: प्रेंटेशन्स व् गीत सभी उम्दा स्तर के रहे, जहाँ कई स्वरचित नए गीत आए वहीँ psychology व् philosophy की गहनता लिए कई प्रेसेंटेशन्स पेश हुई! रोज के 2 के हिसाब से कुल 18 प्रेसेंटेशन्स (5 NRIs द्वारा, 6 शहरी, 7 ग्रामीण, इनमें दो खाप-पदाधिकारियों द्वारा रही), व् इसी हिसाब से ज्यादा होते हुए 24 लोकगीत (फागण, जकड़ी, उज़मा गीत) हुए!
3 - Gender पार्टिसिपेशन एंड रिप्रजेंटेशन: महिला व् पुरुष दोनों का साझा व् बराबरी का पार्टिसिपेशन रहा! जहाँ विभिन्न खाप पदाधिकारियों (महिला-पुरुष दोनों) ने रोज इवेंट को आशीर्वाद व् आशीष दे उसका आगाज किया, वहीँ रोज दो लेडी-एंकरस ने प्रोग्राम को संचालित किया| एंकरिंग में 4 NRI रही, 7 शहरी व् 7 ग्रामीण अंचल से रही! प्रेसेंटेशन्स में 2 लेडीज की व् 16 जेंट्स की रही!
4 - प्रेजेंटेशन विषयों का दर्शनशास्त्र: खाप-खेड़ा-खेत किनशिप से संबंधित इन विषयों Art and Life, Khap Chivalry, Languages and Literature, Love Nuptial Cases, Spirituality, Archeological Land and Estate Heritage, History, Social Brand Equity, Philosophy and Psychology पर Self-realization देने वाली Eye-Opening प्रेसेंटेशन्स व् roundtables हुई!

Declaration: प्राइवेसी क्लॉज के तहत किसी भी प्रतिभागी के नाम पब्लिश नहीं किये हैं!

कुल मिलाकर इवेंट के टाइटल " Literature and Culture Conclave on Khap-Kheda-Khet Kinship Philosophy and Psychology " की सरोकारिता सिद्ध होती दिखी! दादा/बाबा नगर खेड़ों/भैयों/भूमियों की अनुकंपा व् उसका माधुर्य बरसता रहा!

सौजन्य से: सरजोड़क टीम, उज़मा बैठक

24/02/2026

*गौर से पढ़ना सच्चाई है-* ग्रेटर नोएडा के किसान रामेश्वर सिंह की। 12 एकड़ जमीन सरकार ने ली और बदले में उन्हें सवा 5 करोड़ रुपए दिए। पैसा खाते में आते ही जिंदगी बदल गई।
मुआवजे के पैसे से सबसे पहले उन्होंने बागपत में तीन करोड़ की जमीन खरीदी। गांव में दो बड़े मकान बनवाए- 1 करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ। दो महंगी गाड़ियां आ गईं। फिर बच्चों की शादियों का सिलसिला शुरू हुआ- तीन बेटियों, दो पोतियों और बाद में तीन पोतों की शादी की। पोतियों को 20-20 तोला सोना और 20-20 लाख की गाड़ियां दीं। एक शादी में ही करीब 80 लाख खर्च हो गए। बहुओं को भी 20-20 तोला सोने के जेवर दिए गए।
आज वे मानते हैं- ‘पैसा संभालना नहीं आया।’
वजह पूछने पर बताते हैं कि जैसे ही पैसा मिला, हमारा दिमाग आसमान छूने लगा।यह कहानी ग्रेटर नोएडा के सिर्फ एक परिवार की नहीं। 1979 से न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने जमीन अधिग्रहण शुरू किया। 1991 में ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी बनी और 2007-2012 के बीच 39 से ज्यादा गांवों की जमीन ली गई।
15-20 साल बाद वही जमीन 70 से 200 करोड़ की हो चुकी है, लेकिन अब लगभग 95% परिवारों का मुआवजा खत्म हो चुका है। कई किसान अपनी ही जमीन पर बनी फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड हैं। कोई वहीं बनी इमारतों में दूध बेच रहा है।
ब्लैकबोर्ड में इस बार ग्रेटर नोएडा में मुआवजे की रकम से करोड़पति बने और अब बर्बादी की कगार पर पहुंचे किसानों की स्याह कहानियां।
90 साल के रामेश्वर सिंह चौपाल में बैठे मिल जाते हैं। सरकार ने उनकी 12 एकड़ जमीन ली, जिसके बदले में उन्हें सवा पांच करोड़ रुपए दिए। लेकिन आज उनकी उसी जमीन की कीमत 80 करोड़ रुपए है।
वह बताते हैं, ‘हमने पैसा हाथ में आते ही बागपत के अलावा हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में जमीन खरीदी। मैं जानता था- जमीन का पैसा जमीन में ही टिकता है। मेरी ही तरह करीब 95 फीसदी बड़े किसानों ने आसपास के इलाकों में दूसरी जगह जमीन खरीदी।
हां, कुछ लोगों ने पैसा संभाला नहीं… लापरवाही में खर्च कर दिया।’
वह दोहराते हैं- 'अब 90 फीसदी से ज्यादा लोगों का मुआवजा खत्म हो चुका है। कोई दूध बेच रहा है, कोई छोटी-मोटी नौकरी कर रहा है। जिनके पास कभी खेत थे, अब वे रोज की कमाई जोड़कर घर चला रहे हैं।
हमारी जमीन पर फैक्ट्रियां लगी हैं। लेकिन हमारे बच्चों को नौकरी नहीं मिलती। फैक्ट्री मालिकों को लगता है कि लोकल लड़के बदमाश होते हैं। सोचिए, जमीन हमारी गई और हम ही पराए हो गए।’
अब अगली पीढ़ी के लिए क्या बचा? न जमीन, न पैसा, न पढ़ाई के सहारे पक्की नौकरी का रास्ता? बड़ी तनख्वाह वाली नौकरी मिलती नहीं, छोटी नौकरी बच्चे करते नहीं। पहले कम से कम जमीन का सहारा तो था।’ - By Suman Hooda, BKU Chadhuni

17/02/2026

सूचना व् निमंत्रण: फागण-गाण खापरते 2026 - आयोजक उज़मा बैठक

कॉपीराइट कल्चर मनाओगे तो ही सम्मान व् स्थान पाओगे,
शेयर्ड कल्चर में अपना स्टेक ढूँढोगे तो कहीं ना टिक पाओगे!

देश-धर्म-समाज के भीतर अपने कल्चर-किनशिप के सबसेट को सही से पहचानो,
अच्छी बात है कि आगंतुकों को होमफील कराते हो, परन्तु साथ-की-साथ अपने पुरख कल्चर को सम्भालो!

"From Social Remains to Social Professionalism" के विजन पर चलते हुए उज़मा बैठक पिछले छह साल से अपने कॉपीराइट कल्चर को संजो-संवार, इसकी रिब्रांडिंग कर रही है! इसी सिलसिले में इस बार के फागण-गाण खापरते आगामी 22 फरवरी से 2 मार्च तक मनाए जाएंगे, जिनका schedule सलंगित पोस्टर में है! इसमें हमारे कल्चर-किनशिप की Rural-Urban-NRI सभी लेयर्स भाग लेते हैं; इस बार आप भी इसमें भाग ले के समझें कि हम क्या कर-कह रहे हैं! हर दिन के लिए एक दिन पहले गूगल मीट लिंक जारी किया जाता है, जो कि आप उज़मा बैठक से जुड़ के रोज प्राप्त कर सकते हैं!

इस बार का थीम टाइटल है, "Literature and Culture Conclave on Khap-Kheda-Khet Kinship Philosophy and Psychology"

सौजन्य से: सरजोड़क समूह - उज़मा बैठक

09/01/2026

मात्र किसान शब्द सोच-समझ के इस्तेमाल किया करो:

आज सर छोटूराम निर्वाण दिवस विशेष:

*सर छोटूराम को भी 'किसान मसीहा' नहीं अपितु 'दीनबंधु' व् 'जमींदारी-उत्थानक' तरीके से शब्द ज्यादा सूट करेंगे; वह कैसे यह नीचे समझें:*

क्योंकि एक तो आप जो वेस्ट-यूपी-हरयाणा-पंजाब-उत्तरी राजस्थान में जो खेती-बाड़ी वाले हो; आप सिर्फ किसान नहीं अपितु उसके साथ साथ जमींदार भी हो!

दूसरा इसलिए क्योंकि बिहार-बंगाल-उड़ीसा साइड 'किसान' उसको कहते हैं जो जमींदार के यहाँ हल चलाता है, उसकी बेगारी करता है| यानि वहां दोनों शब्द के अर्थ भिन्न हैं|

इसलिए वहां के जो प्रवासी यहाँ आ रहे हैं वह आपकी पूरी व् सही तस्वीर ले ही नहीं पा रहे हैं व् आपको सिर्फ किसान मान के, उनके वहां के सिस्टम-कल्चर वाला किसान मानते हैं|

और वहां ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां है 'सामंती-जमींदारी' जो वर्णवाद पर आधारित होती है, जिसमें जमींदार सामंत होता है, जो अमूमन खुद खेत में काम नहीं करता अपितु उसके लिए किसान करता है व् वह डोळे/मैन्ड पे खड़ा हो के आदेश देता है बस|

जबकि आपके यहाँ ऐसा सिस्टम रहा ही नहीं अपितु आपके यहाँ आपके खाप-खेड़े-खेत के दर्शनशास्त्र में "उदारवादी जमींदारी" कल्चर रहा है; इसलिए आप सिर्फ किसान नहीं हो, उसके साथ साथ आप खुद ही जमींदार भी रहे हो!

अत: अपनी पहचान व् परिभाषा को सही-सही शब्द दीजिये!

वेस्ट-यूपी-हरयाणा-पंजाब-उत्तरी राजस्थान इस क्षेत्र को एकमुश्त शब्द में विनेश राणा भाई वाले शब्द सप्ताब से भी सम्बोधित कर सकते हो; यानि पांच आब पंजाब की व् दो आब गंगा-जमना यानि कुल सप्ताब!

जय यौधेय! - फूल मलिक

01/01/2026

*ऐतिहासिक सर्वखाप किसान क्रांति दिवस - 1 जनवरी 1670!*

विशाल हरयाणा के उदारवादी जमींदारों की वह क्रांति जिसने 1907 के "पगड़ी संभाल जट्टा" किसान आंदोलन व् 2020-21 के किसान आंदोलन की भांति ही पूरे विश्व में ख्याति पाई थी व् देश के हालातों व् आयामों को नई दिशा दी थी|

उसी क्रांति के नायक यौधेय समरवीर अमरज्योति गॉड-गोकुला जी महाराज व् 21 खाप चौधरियों के बलिदान दिवस (01/01/1670) पर उन ज्योतिपुंजों को कोटि-कोटि गौरवपूर्ण नमन के साथ उनको समर्पित है यह विशेष आर्टिकल!

गॉड-गोकुला के नेतृत्व में चले इस विद्रोह का सिलसिला May 1669 से लेकर December 1669 तक 7 महीने चला और अंतिम निर्णायक युद्ध तिलपत, फरीदाबाद में तीन दिन चला| यह हिंदुस्तान के उस वर्ग यानि सर्वखाप की कहानी है जिसमें मिलिट्री-कल्चर पाया जाता है|

कहानी बताने का कुछ कविताई अंदाज से आगाज करते हैं:

हे री मेरी माय्यड़ राणी, सुनणा चाहूँ 'गॉड-गोकुला' की कहाणी,
गा कें सुणा दे री माता, क्यूँकर फिरी थी शाही-फ़ौज उभाणी!

आ ज्या री लाडो, हे आ ज्या मेरी शेरणी,
सुण! न्यूं बणी या तेरे पुरखयां की टेरणी!

एक तिलपत नगरी का जमींदार, गोकुला जाट हुया,
सुघड़ शरीर, चुस्त दिमाग, न्याय का अवतार हुया!
गूँज कें बस्या करता, शील अर संतोष की टकसाल हुया,
ब्रजमंडल की धरती पै हे बेबे वो तै, जमींदारी का सरताज हुया!!
यू फुल्ले-भगत गावै हे लाडो, सुन ला कैं सुरती-स्याणी!

1) यह खाप-समाजों में पाए जाने वाले मिल्ट्री-कल्चर की वजह से सम्भव हो पाता है कि जब-जब देश-समाज को इनके पुरुषार्थ की जरूरत पड़ी, इन्होनें रातों-रात फ़ौज-की-फौजें और रण के बड़े-से-बड़े मैदान सजा के खड़े कर दिए (एक उदाहरण विगत 28 जनवरी 2021 को ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर हुआ था, अभी तरोताजा होगा ही दिमाग में)| आईये जानें उसी मिलिट्री कल्चर से उपजी एक ऐतिहासिक लड़ाई की दास्ताँ, जिसकी अगुवाई करी थी 1 जनवरी 1670 के दिन शहीद हुए 'गॉड-गोकुला जी महाराज' ने|

यह हुई थी औरंगजेब की अन्यायकारी किसान कर-नीति के विरुद्ध ‘गॉड गोकुला’ की सरपरस्ती में|
जाट, मेव, मीणा, अहीर, गुज्जर, नरुका, पंवारों आदि से सजी सर्वखाप की हस्ती में||

2) राणा प्रताप से लड़ने अकबर स्वयं नहीं गया था, परन्त "गॉड-गोकुला” से लड़ने औरंगजेब तक को स्वयं आना पड़ा था।

3) हल्दी घाटी के युद्ध का निर्णय कुछ ही घंटों में हो गया था| पानीपत के तीनों युद्ध एक-एक दिन में ही समाप्त हो गए थे, परन्तु तिलपत (तब मथुरा में, आज के दिन फरीदाबाद में) का युद्ध तीन दिन चला था| यह युद्ध विश्व के भयंकरतम युद्धों में गिना जाता है|

4) अगर 1857 अंग्रेजों के खिलाफ आज़ादी का पहला विद्रोह माना जाए तो 1669 मुग़लों की कृषि कर-नीतियों के खिलाफ प्रथम विद्रोह था|

5) एक कविताई अंदाज में तब के वो हालत जिनके चलते God Gokula ने विद्रोह का बिगुल फूंका, इस प्रकार हैं:

सम्पूर्ण ब्रजमंडल में मुगलिया घुड़सवार, गिद्ध, चील उड़ते दिखाई देते थे|
हर तरफ धुंए के बादल और धधकती लपलपाती ज्वालायें चढ़ती थी|
राजे-रजवाड़े झुक चुके थे; फरसों के दम भी जब दुबक चुके थे|
ब्रह्माण्ड के ब्रह्मज्ञानियों के ज्ञान और कूटनीतियाँ कुंध हो चली थी|
चारों ओर त्राहिमाम-2 का क्रंदन था, ना इंसान ना इंसानियत के रक्षक थे|
तब उन उमस के तपते शोलों से तब प्रकट हुआ था वो महाकाल का यौद्धेय|
उदारवादी जमींदार समरवीर अमरज्योति गॉड-गोकुला जी महाराज|

6) इस युद्ध में खाप वीरांगनाओं के पराक्रम की साक्षी तिलपत की रणभूमि की गौरवगाथा कुछ यूँ जानिये:

घनघोर तुमुल संग्राम छिडा, गोलियाँ झमक झन्ना निकली,
तलवार चमक चम-चम लहरा, लप-लप लेती फटका निकली।
चौधराणियों के पराक्रम देख, हर सांस सपाटा ले निकलै,
क्या अहिरणी, क्या गुज्जरी, मेवणियों संग पँवारणी निकलै|
चेतनाशून्य में रक्तसंचारित करती, खाप की एक-2 वीरा चलै,
वो बन्दूक चलावें, यें गोली भरें, वो भाले फेंकें तो ये धार धरैं|

7) God Gokula के शौर्य, संघर्ष, चुनौती, वीरता और विजय की टार और टंकार राणा प्रताप से ले शिवाजी महाराज और गुरु गोबिंद सिंह से ले पानीपत के युद्धों से भी कई गुणा भयंकर हुई| जब God Gokula के पास औरंगजेब का संधि प्रस्ताव आया तो उन्होंने कहलवा दिया था कि, "बेटी दे जा और संधि (समधाणा) ले जा|" उनके इस शौर्य भरे उत्तर को पढ़कर घबराये औरंगजेब का सजीव चित्रण कवि बलवीर सिंह ने कुछ यूँ किया है:

पढ कर उत्तर भीतर-भीतर औरंगजेब दहका धधका,
हर गिरा-गिरा में टीस उठी धमनी धमीन में दर्द बढा।

8) राजशाही सेना के साथ सात महीनों में हुए कई युद्धों में जब कोई भी मुग़ल सेनापति God Gokula को परास्त नहीं कर सका तो औरंगजेब को विशाल सेना लेकर God Gokula द्वारा चेतनाशून्य उदारवादी जमींदारी जनमानस में उठाये गए जन-विद्रोह को दमन करने हेतु खुद मैदान में उतरना पड़ा| और उसको भी एक के बाद एक तीन हमले लगे थे उस विद्रोह को दबाने में|

9) आज उदारवादी जमींदारी (सीरी-साझी कल्चर वाली व् समातंवादी जमींदारी के विपरीत जमींदारी) की रक्षा का तथा तात्कालिक शोषण, अत्याचार और राजकीय मनमानी की दिशा मोड़ने का यदि किसी को श्रेय है तो वह केवल 'गॉड-गोकुला' को है।

10) 'गॉड-गोकुला’ का न राज्य ही किसी ने छीना लिया था, न कोई पेंशन बंद कर दी थी, बल्कि उनके सामने तो अपूर्व शक्तिशाली मुग़ल-सत्ता, दीनतापूर्वक, संधी करने की तमन्ना लेकर गिड़-गिड़ाई थी।

11) हर धर्म के खाप विचारधारा (सिख धर्म में मिशल इसका समरूप हैं) को मानने वाले समुदाय के लिए: बौद्ध धर्म के ह्रास के बाद से एक लम्बे काल तक सुसुप्त चली खाप थ्योरी ने महाराजा हर्षवर्धन के बाद से राज-सत्ता से दूरी बना ली थी (हालाँकि जब-जब पानी सर के ऊपर से गुजरा तो ग़ज़नी से सोमनाथ की लूट को छीनने, पृथ्वीराज चौहान के कातिल मोहम्मद गौरी को मारने, कुतबुद्दीन ऐबक का विद्रोह करने, तैमूरलंग को हराकर हिंदुस्तान से भगाने, राणा सांगा की मदद करने हेतु सर्वखाप अपनी नैतिकता निभाती रही)| और ऐसे में 1669 में जब खाप थ्योरी का समाज "गॉड-गोकुला" के नेतृत्व में फिर से उठा तो ऐसा उठा कि अल्पकाल में ही भरतपुर और लाहौर जैसी भरतपुर और लाहौर के बीच दर्जनों शौर्य की अप्रतिम रियासतें खड़ी कर दी| ऐसे उदाहरण हमें आश्वस्त करते हैं कि खाप विचारधारा में वो तप, ताकत और गट्स हैं जिनका अनुपालन मात्र करते रहने से हम सदा इतने सक्षम बने रहते हैं कि देश के किसी भी विषम हालात को मोड़ने हेतु जब चाहें तब अजेय विजेता की भांति शिखर पर जा के बैठ सकते हैं|

12) हर्ष होता है जब कोई हिंदूवादी या राष्ट्रवादी संगठन किसी भी अन्य नायक के जन्म या शहादत दिवस पर शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं| परन्तु जब यही लोग "गॉड गोकुला" जैसे अवतारों को (वो भी हिन्दू होते हुए) याद तक नहीं करते, तब समझ आता है कि इनकी दोगली नियत है व् यह अपने धर्म के कल्चरों में भी भेदभाव करते हैं| ऐसे में इनकी धर्मभक्ति व् राष्ट्रभक्ति थोथी लगती है| दुर्भाग्य की बात है कि हिंदुस्तान की इन वीरांगनाओं और सच्चे सपूतों का कोई उल्लेख, दरबारी टुकडों पर पलने वाले तथाकथित इतिहासकारों ने नहीं किया। बल्कि हमें इनकी जानकारी मनूची नामक यूरोपीय यात्री के वृतान्तों से होती है। अब ऐसे में आजकल भारत के इतिहास को फिर से लिखने की कहने वालों की मान के चलने लगे और विदेशी लेखकों को छोड़ सिर्फ इनको पढ़ने लगे तो मिल लिए हमें हमारे इतिहास के यह सुनहरी पन्ने| खैर इन पन्नों को यह लिखें या ना लिखें (हम इनसे इसकी शिकायत ही क्यों करें), परन्तु अब हम खुद इन अध्यायों को आगे लावेंगे| और यह प्रस्तुति उसी अभियान का एक हिस्सा है| आशा करता हूँ कि यह लेख आपकी आशाओं पर खरा उतरा होगा|

जय यौधेय! - फूल मलिक

27/12/2025

*Phaagan-Gaan Khapratey 2026 | फागण-गाण खापरते 2026*

*Organized by* UZMA Baithak from 22nd Feb to 2nd March 2026

*Conclave Themes* (Psychology, Philosophy and History) on which you can send your Paper/Presentation/Folklore:

*Theme-1:* आध्यात्मिक प्रेम शोहरतें विषय: गाम-गौत-नियम में रहते हुए प्रेमविवाह/आयोजित विवाह करने के सकारात्मक-नकारात्मक पहलू; इस थ्योरी के विरुद्ध षड्यंत्र व् मिथ्याप्रचार और उनके हल; ऐसे प्रेमी जोड़े जो उदारवादी जमींदारी में हुए व् आध्यात्मिक प्रेम के आदर्श उदाहरण बन गए; उनकी केस-स्टडीज।
*Theme-2:* खापशाही शौर्य विषय: खाप-खेड़ा-खेत (3ख); दर्शनशास्त्र के इंसानियत-शाही के पहलू; उदारवादी जमींदारी से निकली रियासतें, राजा और महाराजा; अनुकरणीय राज्य, शासक; दुनिया पर राज करने में 3ख नातेदारी की यात्रा पर शोध।
*Theme-3:* 3ख भाषा विषय: उदारवादी जमींदारी की भूमि पर बोली जाने वाली भाषाओं के उत्थान और निरंतरता को सुनिश्चित करने पर शोध व् चर्चा जैसे कि हरयाणी/हरयाणवी भाषा, पंजाबी भाषा, राजस्थानी भाषा, हिंदी भाषा, उर्दू भाषा, अंग्रेजी भाषा, जातकी/हरयाणी/ हरयाणवी लिपि, व्याकरण और शब्दकोश; मातृभाषा व् प्रोफेशनल भाषा के अंतर्; हरयाणी, पंजाबी और उर्दू के बीच साझे शब्द और अर्थ।
*Theme-4:* 3ख साहित्य विषय: खाप-खेड़ा-खेत के ऐतिहासिक दस्तावेजों और ताम्रपत्रों की वास्तविकता आधारित लेखन व् लोक-इतिहास की चर्चा! जैसे कि साहित्य में खाप-खेड़ा-खेत नातेदारी; सर्वखाप यौधेयों, रिसालों, टकसालों पर शोध; हरयाणवी साहित्य के प्रकार।
*Theme-5:* 3ख कला और जीवन शैली विषय: भित्तिचित्र, बुनकर, धाड़ बनाम गैब कल्चर, कृषि से पैदा हुई कला, गीत-रत्नावली पर संगीत कार्यक्रम। सप्ताब धरती की भवननिर्माण की प्राचीन कलाएं और शिल्प; थिएटर और मनोरंजन में खाप-खेड़ा-खेत नातेदारी।
*Theme-6:* 3ख पुरातत्व विरासत विषय: राखीगढ़ी, हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, उपजाऊ क्रीसेंट आदि से ऐतिहासिक परस-चौपालों, हवेलियों, खेड़ा भवनों की आयु और कलाकृतियों पर वृत्तचित्र अध्ययन, जैसे कि राखीगढ़ी और खाप-खेड़ा-खेत नातेदारी; खापलैंड में सबसे पुराने गामों के नाम और उनकी बसासत का खाका।
*Theme-7:* 3ख भूमि और संपत्ति विषय: विश्व स्तरीय बसासत, सामलात- प्रबंधन, बगड़ रिहायशी सिस्टम, उदारवादी जमींदारी पर्यावरण और हरयाणव का प्रसार! जैसे कि भूमि अधिग्रहण यात्रा, गाम प्रतिष्ठान। हर गाम-गौत एक स्वछंद गणराज्य के साथ-साथ लोकराज्य।
*Theme-8:* 3ख सत्तात्मक राजनीति विषय: उदारवादी जमींदारी से बना राजनैतिक इतिहास, इसके चरण और ऊंचाइयां! जैसे कि महाराजा हर्षवर्धन द्वारा खापों को 643 ईस्वी में वैधानिक मान्यता देने के बारे में अधिकतम संभावित शोध व् संदर्भ से ले के मुग़लकाल, ब्रिटिशकाल, सर छोटूराम की यूनियनिस्ट पार्टी राज से होते हुए आज़ादी के बाद इस पृष्ठभूमि से निकल चौधरी चरण सिंह जैसे नेताओं के प्रधानमंत्री बनने वाली नीतियों की जांच-परख के शोध व् इस प्रकार की राजनीति की भविष्य की संभावनाएं व् मार्ग।
*Theme-9:* उज़मा विस्तारण विषय: उज़मा बैठक के वंश-फैलाव का पारस्परिक परिचय और बैठक। खाप-खेड़ा-खेत किनशिप के प्रचार-प्रसार व् विस्तारण हेतु दिशापत्र, विचारपत्र व् शोधपत्र।

*फागण-लोकगीत व् जकड़ी गीत भेजें*; सेलेक्ट हुए गीतों में से 2 न्यूतम इस दौरान हर रोज प्रस्तुत किए जाएंगे! गीत शुद्ध उदारवादी जमींदारी सभ्यता से हों; मिथ आधारित गीत ना हों!

Send us your proposal/draft via [email protected] before 26th Jan. 2026.

25/12/2025

एक ऐसी रियासत जिसका झंडा कभी अंग्रेज नहीं झुका-हरा सके; कभी मुग़ल नहीं झुका सके; कभी कोई स्थानीय रियासत वाले नहीं झुका सके; और उसकी इस बात की ख्याति विश्वप्रसिद्ध है; इंग्लैंड में जिसके नाम से स्मारकें हैं व् रिसोर्ट हैं| खाप-खेड़े-खेतों के दर्शनशास्त्र ने निकली, ऐसी उस रियासत को, उसकी असीम बुंलदी के चिरकाल तक ले जाने वाले महाराजा सूरजमल जी की आज पुण्यतिथि है! यूरोपियन व् अरबियन लेखकों-इतिहासकारों में कुछ ने महाराजा सूरजमल जी को एशियाई Odysseus लिखा तो कुछ ने उनको जाटों का Plato लिखा! वह जाट थे, सिर्फ इस वजह से उनसे कोई मुंह मोड़े तो यह उनका व् जिस समाज से वो आते हैं उनको नकारना नहीं अपितु एक देश के तौर पर भारत में कोई ऐसा यौद्धेय हुआ जिसकी तुलना Odysseus व् Plato की गई; उस गौरव से खुद को वंचित करना है| हमें उनको मानना व् मनाना भी इसी उपलब्धि के कारण चाहिए, ना कि इस कारण कि वह किस जाति के थे! शत-शत नमन ऐसे पुरख यौधेय को!

15/12/2025
06/12/2025

अपनी दादा खेड़ा लाइब्रेरी बेलरखा से *CET* हरियाणा का पेपर 45+ छात्र छात्राओं का बहुत ही शानदार अंकों के साथ क्वालीफाई हुआ ।
जिनमें से 15+ छात्र छात्राओं के अंक 70+ हैं । अमन ने सबसे ज्यादा 88.9144129 स्कोर किया । सभी छात्र छात्राओं को आगे की परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं ।

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