07/06/2026
‘गुरूरमंद हुक्मरानों’ तक पहुँचे ये आवाज़
सुनो दरवाज़े पर खटखटा रहा है ‘बदलाव’
दरारें पड़ गईं क़िलों में, दरक रही बुनियाद
अब नौजवानों ने भी कर दिया है इंक़लाब!
ज़हरीली साज़िशों से तब तक न निजात मिल पाएगी जब तक केवल शाख पर उँगली उठाई जाएगी और सिर्फ़ वो शाख हटाई जाएगी, असली आज़ादी, तरक़्क़ी और इंसाफ़ तब मिलेगा जब इस गुनाह का असली तना और ज़मीन के अंदर गहरी छुपी दीमकी जड़ उखाड़ी जाएगी।
एक देश-एक आवाज़ मतलब इंक़लाब!
ाम_CJP