04/03/2023
social activist, fight for the right of migrant worker in Gujrat.
as well as dedicated and committed to promote small scale industry and self employment towards developing village in Bihar
04/03/2023
26/01/2022
Happy republic day
16/01/2022
एक तो पशु पक्षियों को लेकर हम वैसे भी अतिसंवेदनशील है कई दिन से हम खुद ही अस्वस्थ चल रहे है आज सुबह थोड़े ठीक महसूस कर रहे थे कि ज्योति आई "चाची बालकनी मे कबूतर पड़ा है उसे ठंड लग गई है"।
हम बोले कम्बल मे लपेट कर मेरे कमरे मे रख जाओ फिर हमने सोचा थोड़ा इसको कुछ खाने को रख आते है देखा तो इसके सर मे घाव हो रखा है हमारे लिए तो यह वैसे भी हृदय से जुडा मुद्दा है। मुझे उसके दर्द की अनुभूति से मन व्याकुल होने लगा पर हिम्मत उतनी नही है कि इलाज कर सकू।
चुकी गुजरात मे एक बड़ा राहत यह है कि लोग पशु-पक्षी को लेकर केयरिंग है इनके हास्पिटल भी है और कई लोग मुफ्त मे सेवा भी करते है पर दुर्भाग्य से सभी इतनी सुबह बन्द थे।
फिर गूगल से जानकारी ली और बेटी को जगाकर बड़े जतन से दवाई मगाई अमूमन कुछ ही मेडिकल और हॉस्पिटल 24 घण्टे खुले होते है।
खैर पति देव से साफ सफाई कराके मलहम पट्टी करा दिये अब जब हॉस्पिटल खुल गए ,'संजोग से एक और बीमार कबूतर मिल गया फिर दोनो को भर्ती करा दिया क्योकि बिहार मे हॉस्पिटल नही होने के कारण कई जानवर बच न सके उनकी भाषा तो हम समझ नही सकते नतीजा वह उससे ख़तम हो जाते है या बिल्ली कुत्तो और कौओ के शिकार हो जाते है।
पशुओ के प्रति हो रही हिंसा चाहे वह मानवीय हो या अन्य इस पर काम करना हमारे एजेंडे मे है जैसे समय मिलेगा हम इस पर काम करेंगे खास कर बिहार मे।
मासिक धर्म और उनसे होने वाली कठिनाइयों पर महिलाओ के साथ खुलकर बातचित।
हमे इस पर बात करनी चाहिए इसलिए नही कि झूठी नारी वादी की फौज खड़ी हो सके बल्कि इसलिए कि हर महिला इस के प्रति सहज हो सके,अपने शरीर से प्रेम कर सके और बीमारियो से बच सके।।।।।
12/01/2022
सरकार बहुत सारी योजना तो लागू करती है पर वह वास्तव मे जरूरतमंद तक पहुँचती कहा??
यह सड़क किनारे मटके और पौधे बेचती है बिहार से है जिले का नाम याद नही आ रहा अभी मुझे। कुछ ही महीने पहले पति गुजर गए अब गाँव मे क्रिया कर्म करके यहा आ गई बोली गाँव मे जमीन है पर घर है नही ! कहा रहु यही आ गई पति बड़े बंगलो मे काम करते थे तो सेठानी सब कपड़े खाने को दे जाती है और थोड़ी बहुत अपनी भी कमाई हो जाती है।
पांच बच्चे लेकर जिसमे बड़ी बच्चियाँ भी है और खुद भी यह युवा ही है सड़क किनारे कपड़े तांन कर रहती है। सरकारी स्कूल भी है और विधवा पेंशन भी पर जरूरत है हर जागरुक और पढ़े लिखे लोगो को अपने इर्द गिर्द नजर रखने की। अभी कोरोना के बाद कोशिश रहेगी इनके बच्चे हमारे स्कूल आ जाए और इनकी भी विधवा पेंशन चालू हो जाय।
@35
नमस्कार
🙏🙏🙏🙏🙏
जैसा कि आप सभी जानते है कि मंजरी उधोग ग्रामीण उद्मिता को बढ़ावा देने का काम कर रही है, और भी कई तमाम तरह के कार्यो के साथ ही वह सेनेटरी पैड निर्माण मे भी अपना कदम बढ़ा चुकी है।
टीम #मंजरी जब इसके मार्केटिंग मे लगी तो इस नतीजे पर पहुची की इस क्षेत्र मे जागरुकता की बहुत कमी है, जिसके कारण महिलाएं गंभीर यौन संक्रमण से ग्रसित हो रही है। साथ ही बाजारीकरण के इस दौर मे वह महंगे सेनेटरी पैड और अन्य उपकरण की कीमत वहन नही कर पाती जिससे वह सस्ता घटिया क्वालिटी के नैपकिन या गंदा कपड़ा इस्तेमाल को मजबूर है।
जहा बाजार मे अल्ट्रा पैड (एक प्रकार का लेटेस्ट सेनेटरी नेपकीन जो लिक्विड फ्लो को तुरुन्त जैल मे परिवर्तित कर देता है) जो आम आदमी के बजट से बाहर है उसे मंजरी उधोग कही उससे बेहतर गुणवत्ता के साथ आम पैड के कीमत मे जरूरतमंद महिलाओ और लड़कियों को उपलब्ध करा रही है पर यह अकेले के हमारे प्रयास से संभव नही हो पा रहा अब जरूरत आपकी भी होगी।
बस आप हमे मात्र @35 का सहयोग करे और हरेक महीने केवल एक लड़की की जवाबदारी उठाये आपका हर महीने का एक छोटा सा योगदान लाखो बच्चियों को कई तरह के गम्भीर रोगों से बचाएगा।
आप हमारे व्हाटसप ग्रुप से जुड़कर लाभार्थी महिला/युवती से अपने योगदान की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते है।
अगर आप हमारे इस छोटे से अभियान से जुड़ना चाहते है तो इस
एकाउंट डिटेल पर
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मात्र @35 का एक छोटा योगदान कर सकते है।।
आपका यह योगदान कई मासूम को गम्भीर बीमारियों से दूर तो रखेगा साथ ही कई हाथो को काम भी मिलेगा।
धन्यवाद।।
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टीम मंजरी
91427-85025
09/01/2022
स्कूल एक बार पुनः कोरोना को लेकर 31जनवरी तक बंद हो गए और जाने कब तक बन्द होंगे।
महानगरो मे तो #आनलाइन क्लासेज एक वैकल्पिक साधन हो चुका है पर छोटे छोटे गाँवो, कस्बो मे बच्चो की पढाई अभी भी एक गम्भीर समस्या बनी हुई है कार्गो श्रमिक बहुल झोपड़पट्टी मे श्रमिक भाइयो के बच्चो के लिए हमारे द्वारा संचालित एक स्कूल है। पूरे कोरोना काल मे पढाई अस्त व्यस्त ही रही।
कारण बच्चो और उनके अभिभावक को आन लाइन क्लासेज की कुछ समझ ही नही पर कोरोना तो दिनचर्या का अब हिस्सा बन चुका है अब कितने दिन बच्चो की पढाई कोरोना का रोना रोती रहे।
आज उसी के लिए बच्चो के साथ साथ उनके अभिभावक को भी #जूम के माध्यम से बच्चो को आन लाइन क्लास कैसे होगी??उनकी पूरी ट्रेनिग दी गई। साथ ही एक हप्ते के लिए एक टीचर को हेल्प लाइन डेस्क पर बैठाया गया जो आनलाइन और ऑफलाइन उनकी मदद करेगा।
02/12/2021
हमने खुद को ही छुट्टियां दी थी जो लगभग अब पूरी हो चुकी है हालांकि हमारी छुट्टियां मतलब बाहरी काम-काज से पूर्ण विराम लगाकर घर की पूरी सफाई करना। हम इस बार दस महीने बाद आये थे तो हमे पता था की घनघोर गंदगी तो होगी तो गाँव से एकाध स्टाफ भी ले ही लिए थे।
अब आज बिहार के लिए निकलना था पर पता चल रहा है पुरा बीस दिन तो सफाई मे ही निकल गए एक हप्ते अहमदाबाद और दूसरे हप्ते कच्छ!!! बाकी कुछ ऑफिशियल काम तो हुआ ही नही!!नतीजा न चाहते आज की टिकट कैंसिल 😂😂😂
जब आप अकेले होते है तो प्राथमिकता बस आपका काम होता है पर पारिवारिक जवाबदारी होती है तो पहली प्राथमिकताये बदल जाती है।
कान्हा Trinetra Virat Mishra के चले जाने के बाद हम मानसिक और शारीरिक दोनो तौर पर बीमार हो चले थे हर काम मे पर्फेक्शन के बावजूद पति और बेटी को भगवान भरोसे छोड़ हम अपने को रिकवर करने गाँव की सुरम्य वातावरण की तरफ खुद को मोड लिए। दो वर्ष बीत गए मुझे खुद सामान्य होने मे। उसमे भी स्वभाव मे सृजन है तो उसका प्रभाव वहा भी मिला एक इंडस्ट्री Manjari - मंजरी की शुरुआत की जिससे कुछ महिलाओ को रोजगार की उम्मीद जगी जहाँ ग्राउंड जीरो पर सबकुछ हो चुका है और वह अपने अगले पड़ाव की तरफ तैयार है।
अब हमारे सभी कार्यो का मदर कंसर्न गुजरात से है साथ ही परिवार भी यही है तो अभी मेरी प्राथमिकताये मुख्यता यही रहेंगी हमने पहले भी कहा है की रोजगार के लिए मुझे कार्य करना होता तो हम गुजरात चुनते । वहा बिहार मे एक आर्थिक बदलाव की जरूरत है मुझे अगर वहा व्यापार करना है तो एक बस मार्केटिंग मैनेजर की जरूरत होगी और दो चार महीने का एक्स्ट्रा पेमेंट का रिस्क जब तक मेरा ढांचा तैयार न हो जाये।
पर जब यही काम एक सामान्य आदमी को करना होगा तो उसको तमाम तरह की दिक्कते होंगी क्योंकि वहा वर्किंग कल्चर डवलप ही नही हुआ है तो वहा हमारा अगला पड़ाव फुल टाइम ओरिएंटेड जॉब है और अभी कही से भी उतना समय देना सम्भव नही है। अभी मुझे थोड़ा वक़्त बेटी को आर्थिक निर्भर बनाने मे देना है हमारे न होने से पति का भी स्वास्थय ठीक नही रहता तो उन्हे भी समय देना होगा।
साथ ही कोरोना के बाद श्रमिकों की स्थिति और भी बदतर हो गई है सत्ता सुख तो सभी भोगना चाहते है पर विपरीत धारा मे कोई नही बहना चाहता। और मजदूर नेता तो विलुप्त होने के कगार पर है और मजदूर नेत्री तो विलुप्त हो ही गई है ऐसा करिअर कौन चाहेगा जिसकी शुरुआत ग्लैम्बर के अंत होने से है।
आवाज तो उठानी होगी कच्छ इंडस्ट्रीयल स्मार्ट ज़ोन घोषित हो गया है यहा एक ही व्यवस्था है जो बस पूँजी के लिए काम करती है हमारे खड़े होने से भी न्याय नही हो सकता क्योकि हवा विपरीत दिशा मे बह रही है सभ्य लोग लगे हाथो गंगा नहाने मे लगे है, मजदूरों को समझ नही फिर भी आस तो बची रहेगी.........................
तो अभी समय यही देना है बिहार भी लगभग हर महीने आना जाना रहेगा काम वहा भी हो ही रहा है पर कुछ समय के लिए प्राथमिकताये बदली है।
🙏🙏
शुभम करोति कल्याणम,
अरोग्यम धन संपदा,
शत्रु-बुद्धि विनाशायः,
दीपःज्योति नमोस्तुते।
🌷🌷🌷🌷
शुभ दिवाली
08/10/2021
जितना अलग बात है और जितने के बाद पहले वाली अवस्था मे होना वह बड़ी बात है। अमरजीत जी हमारे मैनेजर हुआ करते थे अभी वह पंचायत चुनाव मे विजयी हुए है कितनी बार हमसे डांट सुने है की आप प्रोफेसनल नही है आपको कल्कुलेशन नही जाने क्या क्या..........
आज अपनी जित का भाण्डा हमारे सर फोर गए की आप लोग के संगत का नतीजा है.... वैसे हमारे यहाँ का इतिहास रहा है हमारे साथ रहे सब नेता ही बने है सिवा हमारे😊 खैर अमरजीत तुम्हे हृदय से प्रेम ऐसे ही आगे बढे और समाज का कल्याण करे।
पिण्डजप्रवरारुद्रा
चण्डकोयास्त्रकैर्युता!
प्रसाद तनुते महयं
चंद्रघण्टेति विश्रुता!!
जय मां चंद्रघण्टा!
नवरात्रि की शुभकामनाएं
05/10/2021
आज मंजरी उधोग ने दर्जनो महिलाओं को लघु उधोग लगाने मे सहायता की है उन्हे बैंक या सरकार से मिलने वाली सहायक राशि विभिन्न प्रकार की योजनाओं को उनके तक पहुंचाया है।
वित्तिय सहयोग किया है उन्हे सही जानकारी दी है आज उधोग विभाग इतना आश्वस्त है हमारे कामों को लेकर की हर नये आदमी को हमारा नम्बर दे देता है।
आज इसी क्रम मे पंचोंभ गांव के कुछ लोगो से मुलाकात हुई।