Congress AICC.Gujarat

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Congress AICC Gujarat is dedicated to democracy, social justice, youth empowerment, education, employ

17/07/2026
17/07/2026

145-માંજલપુર વિધાનસભા પેટાચૂંટણી માટે ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસના ઉમેદવાર તરીકે પૂર્વ મંત્રી, ગુજરાત પ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિના ઉપપ્રમુખ અને કોંગ્રેસ પક્ષના વરિષ્ઠ આગેવાન શ્રી ભીખાભાઈ રબારીની પસંદગી બદલ ખૂબ ખૂબ અભિનંદન સહ પ્રચંડ વિજયની હાર્દિક શુભકામનાઓ.

માંજલપુરની જનતાના આશીર્વાદ અને કોંગ્રેસના સમર્પિત કાર્યકરોના સાથથી શ્રી ભીખાભાઈ રબારી પ્રચંડ બહુમતી સાથે વિજયી બને તેવી હાર્દિક શુભકામનાઓ.

જય હિંદ
જય કોંગ્રેસ

22/06/2026

*12 साल से मोदी सिर्फ बड़ी–बड़ी बातें कर रहा है। इससे हो कुछ नहीं रहा, मगर लंबी चौड़ी बातें करने से बाज भी नहीं आ रहा।*
*जबकि इसे पता है कि जुमलों और ख्याली पुलाव से पेट नहीं भरने वाला.... फिर भी हर बार जुमलों की बौछार, भावनाओं का व्यापार कर रही है ये बेशर्म और निकम्मी सरकार...!*

*जबकि सच तो ये है कि:*

सरकार रोजगार दे,
👉 युवा मंदिर-मस्जिद की बहस खुद कर लेंगे।

सरकार महंगाई कम करे,
👉 पूजा-पाठ, व्रत-उपवास जनता खुद कर लेगी।

सरकार स्कूल-कॉलेज बनाये,
👉 भंडारे और जगराते जनता खुद कर लेगी।

सरकार पेपर लीक रोके,
👉 परीक्षा पे चर्चा छात्र और शिक्षक खुद कर लेंगे।

सरकार अस्पताल बनाये,
👉 प्रवचन और सत्संग जनता सुन लेगी।

सरकार किसानों को उचित दाम दिलाये,
👉 जय-जयकार जनता कर लेगी।

सरकार नदियाँ साफ करे,
👉 दीपदान जनता कर लेगी।

सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त करे,
👉 विकास की तारीफ़ जनता कर लेगी।

सरकार बिजली-पानी की व्यवस्था करे,
👉 आरती जनता खुद कर लेगी।

सरकार कानून-व्यवस्था सुधारे,
👉 नैतिकता का पाठ जनता पढ़ लेगी।

सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे,
👉 संस्कारों की चर्चा जनता कर लेगी।

सरकार युवाओं को रोजगार दे,
👉 राष्ट्रभक्ति के नारे जनता लगा लेगी।

सरकार उद्योग लगाए,
👉 तिरंगा यात्रा जनता निकाल लेगी।

सरकार छोटे व्यापारियों को सहारा दे,
👉 उत्सव जनता मना लेगी।

सरकार भ्रष्टाचार रोके,
👉 ईमानदारी के भाषण जनता सुन लेगी।

सरकार सरकारी विभागों में खाली पद भरे,
👉 मोटिवेशनल स्पीच जनता देख लेगी।

सरकार सरकारी स्कूलों, यूनिवर्सिटी में शिक्षक भेजे,
👉 ज्ञान की बातें जनता कर लेगी।

सरकार आम आदमी की जिंदगी आसान करे,
👉 देशभक्ति जनता निभा लेगी।

सरकार युवाओं का भविष्य सुरक्षित करे,
👉 इतिहास के गौरव पर जनता गर्व कर लेगी।

सरकार संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करे,
👉 लोकतंत्र का उत्सव जनता खुद मना लेगी।

सरकार बलात्कारियों को संरक्षण देना छोड़ दे,
👉 बेटियों को खुद जनता बचा लेगी।

सरकार भ्रष्टाचारियों को पालना बंद कर दे,
👉देश को बिकने से जनता खुद बचा लेगी

सरकार जनता के सवाल सुने,
👉 मन की बात खुद जनता बता देगी।

सरकार प्रेस कॉन्फ्रेंस तो करे,
👉 देश की स्थिति खुद पता चल जाएगी।

सरकार डेटा और तथ्य बताए,
👉 प्रचार जनता खुद कर लेगी।

सरकार सरकारी संपत्तियाँ बेचने की जगह बनाए,
👉 सरकार की महिमा जनता सुन लेगी।

सरकार युवाओं को कौशल और अवसर दे,
👉 सेल्फी और इवेंट जनता देख लेगी।

सरकार विज्ञान और शोध को बढ़ावा दे,
👉 चमत्कारों की कहानियाँ जनता सुन लेगी।

सरकार सामाजिक सौहार्द बनाए रखे,
👉 धार्मिक आयोजन जनता कर लेगी।

सरकार सीमा की सुरक्षा करे,
👉 देशभक्ति जनता दिखा देगी।

सरकार विदेश नीति मजबूत करे,
👉 विदेशी डंका जनता सुन लेगी।

सरकार देश को मजबूत करे,
👉 चुनावी नारों का काम जनता कर लेगी।

सरकार वोटचोरी करना छोड़ दे ,
👉लोकतंत्र खुद देश की जनता बचा लेगी

सरकार जवाबदेही निभाए,
👉 ताली और थाली जनता बजा लेगी।

सरकार आंकड़ों में नहीं, ज़मीन पर विकास दिखाए,
👉 विज्ञापन जनता देख लेगी।

सरकार देश का भविष्य बनाए,
👉 अतीत का गौरव गान जनता खुद कर लेगी।

🔴क्योंकि लोकतंत्र में जनता का काम सरकार चुनना है, जनता ने अपना काम किया। मगर सरकार अपना काम नहीं कर रही। सरकार का काम देश चलाना है, सिर्फ बहाने बनाना नहीं। झूठ के बूते सपने दिखाना नहीं।

➡️और जब सरकार अपने कर्तव्य छोड़कर केवल झूठ, नफ़रत,सपने और भावनाएँ बेचने लगे, तब देश का वर्तमान भी कमजोर होता है और भविष्य भी। इसलिए अगर देश को बचाना है, अगर अपनी और अपने बच्चों की भविष्य को सुरक्षित रखना है तो इस सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कीजिए.......वर्ना भविष्य अशुभ नजर आ रहा है!!

*जय हिन्द* 🇮🇳🇮🇳

22/06/2026

*मेरे युवा साथियों,*

यह सिर्फ़ एक रैली या किसी कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं है। यह उन करोड़ों सपनों की पुकार है,जो आज सरकार की क्रूर लापरवाही, भ्रष्टाचार और अन्याय के बोझ तले दबाए जा रहे हैं।

👉सोचिए...

जब कोई छात्र रात-रात भर जागकर पढ़ता है, जब किसी किसान का परिवार अपनी ज़मीन गिरवी रखकर बेटे या बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाता है, जब कोई मज़दूर अपने हिस्से की खुशियाँ छोड़कर अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष करता है — तब उनके मन में सिर्फ़ एक भरोसा होता है कि मेहनत का फल मिलेगा, ईमानदारी का सम्मान होगा और उनका भविष्य सुरक्षित होगा।

*लेकिन आज क्या हो रहा है?*

पेपर लीक हो रहे हैं। भर्तियाँ रद्द हो रही हैं। परीक्षाएँ वर्षों तक लटक रही हैं। रिक्त पद खाली पड़े हैं। शिक्षा महंगी होती जा रही है, नौकरियाँ कम होती जा रही हैं।

और सबसे दुखद बात यह है कि जिन युवाओं के कंधों पर भारत का भविष्य टिका है, उनकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं दिखता।

हर पेपर लीक सिर्फ़ एक ख़बर नहीं होती। वह किसी छात्र के टूटे हुए आत्मविश्वास की कहानी होती है। हर रद्द भर्ती सिर्फ़ एक प्रशासनिक फैसला नहीं होता। वह किसी परिवार की अधूरी उम्मीदों का दर्द होती है।

हर बढ़ती फीस सिर्फ़ एक आर्थिक बोझ नहीं होती। वह लाखों प्रतिभाशाली युवाओं के सपनों के दरवाज़े बंद कर देती है।

👉सवाल यह है कि आखिर कब तक?

कब तक युवा अपनी मेहनत की कीमत चुकाते रहेंगे और व्यवस्था अपनी गलतियों से बचती रहेगी? कब तक सपनों का गला घोंटा जाएगा?

कब तक भविष्य को अनिश्चितता के हवाले किया जाएगा?

*साथियों,*

जब सत्ता युवाओं की आवाज़ सुनना बंद कर देती है, तब युवाओं को अपनी आवाज़ इतनी बुलंद करनी पड़ती है कि वह देश के हर कोने में गूंजे।

आज आपकी इसी लड़ाई को सड़क से संसद तक उठाने का काम कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी लगातार कर रहे हैं।

जब पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार चुप थी, तब राहुल गांधी युवाओं के साथ खड़े थे।

जब बेरोज़गारी पर सवाल उठाने वालों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा था, तब कांग्रेस युवाओं की आवाज़ बनकर सामने आई।

जब छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ, तब राहुल गांधी ने संसद से लेकर सड़कों तक आपके अधिकारों की लड़ाई लड़ी। क्योंकि यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ की नहीं है।

👉यह लड़ाई उस भारत की है जहाँ मेहनत करने वाले युवा को न्याय मिले। जहाँ नौकरी पाने के लिए सिफारिश नहीं, योग्यता चाहिए। जहाँ परीक्षा देने वाला छात्र डर और अनिश्चितता में नहीं, आत्मविश्वास के साथ अपना भविष्य बना सके।

लेकिन इतिहास गवाह है कि कोई भी बदलाव सिर्फ़ नेताओं के भाषणों से नहीं आया। उसके लिए देश के लोगों को नेता के साथ मिलकर लड़ाई लड़नी होती है।

बदलाव तब आया है जब युवा खुद मैदान में उतरे हैं। जब उन्होंने अपनी उपस्थिति से व्यवस्था को यह संदेश दिया है कि अब उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

👉इसलिए 17 जून को कोटा में होने वाली "छात्रों की गूंज" महारैली सिर्फ़ एक आयोजन नहीं है, यह देश के युवाओं का संकल्प है।
यह उन लाखों छात्रों की आवाज़ है जो कहना चाहते हैं कि हमारे सपनों की कीमत राजनीति से बड़ी है।

यह उन परिवारों की उम्मीद है जिन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगाया है। यह उन युवाओं का हुंकार है जो अपने अधिकार, सम्मान और अवसरों के लिए एकजुट होकर खड़े होना चाहते हैं।

✅आइए, अपने सपनों के लिए आइए, अपने अधिकारों के लिए आइए, अपने भविष्य के लिए आइए।

और उन करोड़ों युवाओं के लिए आइए, जिनकी आवाज़ आज भी दबाने की कोशिश की जा रही है।

आइए, कोटा की धरती से ऐसा संदेश दें कि दिल्ली की सत्ता तक उसकी गूंज पहुंचे। आइए, साबित करें कि भारत का युवा अब चुप नहीं रहेगा।

*17 जून | कोटा महारैली छात्रों की गूंज*

आपकी लड़ाई, आपकी आवाज़, आपका भविष्य.....और इस लड़ाई में आपके साथ कांग्रेस और राहुल गांधी मजबूती से खड़े हैं।

*कोटा आइए......इतिहास गवाह बनेगा कि जब युवा उठता है, तो देश की दशा और दिशा बदल जाती है।* ✊🇮🇳

22/06/2026

*अगर BJP- RSS बीमारी है, तो इस बीमारी का एक मात्र इलाज कांग्रेस है…*
*अगर BJP- RSS नासूर है, तो कांग्रेस इस नासूर का ऑपरेशन है…*

👉अगर कांग्रेस का इतिहास देश के लिए संघर्ष और बलिदान का रहा है तो BJP- RSS का इतिहास माफी और मुखबिरी का रहा है। इसलिए अगर आप गद्दारों और मक्कारों को हटाना चाहते हैं, अगर आप संघी-भाजपाई लुटरों से देश बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको कांग्रेस के साथ खड़ा होना पड़ेगा।

👉आपको समझना पड़ेगा कि भारत को कांग्रेस पार्टी ने ही बनाया और संवारा है। मजबूत भारत की नींव अगर नेहरू जी ने रखी तो उस नींव पर शक्ति, संभावना और समावेशी समाज की इमारत इंदिरा, राजीव और डॉ डां मनमोहन सिंह ने खड़ी की है।

*आज देश को राष्ट्रवाद की घूटी पिलाने वाले लोग कितने नकली हैं, इनके पुरखे कितने बौने थे, इनका इतिहास कितना दागदार है….. ये बात देश को कायदे से पता है*

👉 आजादी के आंदोलन के दौरान जब पूरा देश एक साथ खड़ा होकर वंदे मातरम् गा रहा था, तब RSS-हिंदूमहासभा ने इस वंदे मातरम् का विरोध किया। जब कांग्रेस के सभी अधिवेशनों में वंदे मातरम् गाया जा रहा था तब संघ की शाखाओं में इसके उलट नमस्ते सदा वत्सले गाया जा रहा था।

👉आजादी के समय जब कांग्रेस के साथ पूरा देश तिरंगा लहरा रहा था, तब संघ ने अपनी शाखाओं में तिरंगा नहीं फहरने दिया। यहां तक कि संघ अपने हेडक्वार्टर में कई दशकों तक तिरंगा नहीं फहरने दिया। ये लोग भारत के शान तिरंगे को अशुभ बताकर इसके विरोध में एकरंगी भगवा ध्वज लहरा रहे थे

👉जब देश बाबा साहेब के संविधान को स्वीकार कर रहा था, तब ये लोग संविधान की प्रतियों को जला रहे थे। संघ ने कहा था कि बाबा साहेब के संविधान से देश नहीं चल सकता।
संघ और हिंदूमहासभा ने संविधान का बहिष्कार करके मनुस्मृति से देश चलाने की वकालत की थी।

*इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के संविधान, देश के तिरंगा, देश की आजादी से भाजपाईयों और संघियों की तकलीफ कितनी पुरानी है। अगर इस देश में कांग्रेस पार्टी न होती तो मोदी कब का संविधान और लोकतंत्र की हत्या कर चुका होता।*

इसीलिए मैं कह रहा हूं कि कांग्रेस के कण-कण में भारत है, कांग्रेस की विचारधारा में सबसे पहले भारत है, कांग्रेस की डिक्शनरी में देश को बचाने के लिए बलिदान देना है, संघियों की तरह सरेंडर करना नहीं।

👉 जब कांग्रेस पार्टी के तमाम नेता सहित गांधी-नेहरू और भगत सिंह जेल जा रहे थे, तब सावरकर अंग्रेज अधिकारियों और वायसराय को माफीनाम लिख रहे थे। जब भारत छोड़ो आंदोलन अपने उफान पर था, तब RSS इस आंदोलन को कमजोर करने के लिए अंग्रेजों के साथ मिलकर काम क्यों कर रहा था ?
और अगर आजादी के लिए संघियों ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी, तो फिर नेहरू-गांधी को जेल औऱ सावरकर को अंग्रेजों की तरफ से पेंशन क्यों दिया जा रहा था?

🇮🇳कुछ लोग कांग्रेस मुक्त भारत का सपना दिन में देखते थे। वे ये भूल जाते थे कि कांग्रेस इस देश के लोगों की आत्मा में बसी है, कांग्रेस सिर्फ विचारधारा नहीं बल्कि कांग्रेस जनता के जीवन जीने का तरीका है। तुम जितना जोर से लोकतंत्र और संविधान को मिटाने की कोशिशें करोगे, कांग्रेस उससे दोगुनी जोर से तुम्हारा मुकाबला करेगी।
कांग्रेस का इस देश की मिट्टी से खून और बलिदान नाता है। इस देश की एकता, अखंडता को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी के दो-दो प्रधानमंत्रियों ने अपनी जान इस मिट्टी में न्यौछावर की है।

🔴जब अंग्रेजों ने भारत को गुलाम बनाया और RSS ने ग़द्दारी करते हुए अंग्रेजों का ख़ूब साथ तब कांग्रेस के नेताओं ने बलिदान देकर इस देश को आजाद कराया। आज फिर देश विरोधी RSS और BJP इस देश को बेच रहे हैं, बर्बाद कर रहे हैं…और आज फिर कांग्रेस ही देश बचाने के लिए जनता के साथ और जनता के बीच खड़ी है। आज जब सारी पार्टियों ने तानाशाह सरकार से समझौता कर लिया है, तब सिर्फ राहुल गांधी इस तानाशाह की आंख में आंख डालकर निर्भीक होकर सवाल पूछ रहे हैं।

*भारत के कण कण में कांग्रेस का देश प्रेम नजर आता है, वहीं पग पग पर BJP और RSS की ग़द्दारी से देश शर्मिंदा और शर्मसार होता है। इसलिए आज प्रण कीजिए कि भारत के गौरव, एकता, अखंडता की रक्षा के लिए, देश के भविष्य की सुरक्षा के लिए हम सब मिलकर गद्दारी और कायरता के शर्मनाक इतिहास को उखाड़कर फिर से देश में कांग्रेस की सरकार लाएंगे। क्योंकि जिस पार्टी ने इस देश को बनाया है, वही कांग्रेस पार्टी ही इस देश का भला कर सकती है। वही कांग्रेस ही आपका और आपके बच्चों का जिंदगी सुधार सकती है।*

*जय हिंद*🇮🇳

22/06/2026

*चोरी की सीट से बना राज्यसभा सांसद कितना “माननीय”?*

लोकतंत्र में “माननीय” शब्द केवल किसी पद के कारण नहीं मिलता, बल्कि उस पद तक पहुँचने की प्रक्रिया की नैतिकता और वैधता से भी जुड़ा होता है। यदि कोई व्यक्ति छल, कपट, राजनीतिक दबाव, संस्थागत मिलीभगत या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग के सहारे संसद पहुँचता है, तो सबसे बड़ा प्रश्न उसके पद पर नहीं, उसकी वैधता पर खड़ा होता है।

मध्यप्रदेश के राज्यसभा चुनाव को लेकर जो सवाल उठे हैं, वे केवल एक सीट का विवाद नहीं हैं। यह उस मूल भावना का प्रश्न है जिस पर लोकतंत्र खड़ा होता है। यदि किसी उम्मीदवार को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के बजाय संदिग्ध और विवादित परिस्थितियों का लाभ मिले, तो वह केवल एक राजनीतिक दल का लाभार्थी नहीं होता, बल्कि वह स्वयं उस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी बन जाता है।

*माननीय पद का अपमान*
👉 राज्यसभा देश का सर्वोच्च विधायी सदन है। वहाँ पहुँचने वाला प्रत्येक सदस्य संविधान, लोकतंत्र और जनप्रतिनिधित्व की गरिमा का प्रतीक माना जाता है।

👉 लेकिन यदि किसी व्यक्ति की सदस्यता पर ही यह प्रश्न खड़ा हो जाए कि वह वहाँ निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पहुँचा है या नहीं, तो फिर “माननीय” शब्द सम्मान नहीं, बल्कि एक विडंबना बन जाता है।

👉 कुर्सी मिल जाने से कोई सम्मानित नहीं हो जाता। सम्मान लोकतंत्र और संविधान के पालन से अर्जित करना पड़ता है।

👉 और जो व्यक्ति विवाद, संदेह, पक्षपात और बेईमानी के आरोपों की छाया में सदन तक पहुँचे, उसे सम्मान से पहले जवाब देना चाहिए।

*लोकतंत्र का सबसे बड़ा अपराध*

लोकतंत्र में चोरी केवल धन की नहीं होती। मतदान की चोरी होती है। जनादेश की चोरी होती है। प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता की चोरी होती है…और जब सत्ता के प्रभाव से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मोड़ा जाता है, तब सबसे बड़ी चोरी जनता के विश्वास की होती है।

यदि किसी राज्यसभा सीट पर निष्पक्षता के बजाय शक्ति, प्रभाव और संस्थागत पक्षपात का आरोप लगे, तो उस सीट पर बैठा व्यक्ति केवल सांसद नहीं रहता, बल्कि उस विवाद का जीवित प्रतीक बन जाता है।

*सम्मान नहीं, सवाल चाहिए*

ऐसे नेताओं को फूल-मालाएँ नहीं, सवाल मिलने चाहिए। उनसे पूछा जाना चाहिए -

* क्या वे सचमुच लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए हैं?
* क्या उनकी सदस्यता जनता के विश्वास पर आधारित है या सत्ता की कृपा पर?
* क्या वे सदन में संविधान की रक्षा करेंगे या उसी प्रक्रिया का बचाव करेंगे जिसने उन्हें वहाँ पहुँचाया?

लोकतंत्र में जनता का अधिकार है कि वह अपने प्रतिनिधियों से प्रश्न पूछे, और जब प्रतिनिधित्व पर ही प्रश्नचिह्न हो, तब सवाल पूछना कर्तव्य बन जाता है।

*सबसे बड़ा लाभार्थी कौन?*

👉 इस पूरे विवाद का लाभ किसी राजनीतिक दल को मिला हो सकता है, लेकिन सबसे बड़ा लाभार्थी वह व्यक्ति है जिसने राज्यसभा की सदस्यता प्राप्त की।

*पार्टी को एक सीट मिली है।*

👉 *लेकिन उस व्यक्ति को छह वर्ष का कार्यकाल, संवैधानिक दर्जा, विशेषाधिकार और राजनीतिक प्रतिष्ठा मिली है।*

इसलिए नैतिक जवाबदेही भी सबसे पहले उसी की बनती है। यदि उसे लगता है कि उसकी सदस्यता पूरी तरह निष्पक्ष और निर्विवाद है, तो उसे सवालों से भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए।

*लोकतंत्र केवल कानून की किताबों से नहीं चलता, बल्कि नैतिक वैधता से भी चलता है। जिस सीट पर छल, कपट, पक्षपात या बेईमानी का संदेह हो, उस सीट से बने प्रतिनिधि को जनता आँख बंद करके “माननीय” नहीं कह सकती।*

सम्मान का अधिकार उसी को है जो सम्मानजनक तरीके से वहाँ पहुँचा हो, और यदि कोई व्यक्ति लोकतांत्रिक मूल्यों को कलंकित करने वाले विवाद का लाभार्थी बनकर संसद पहुँचे, तो उसे सम्मान की नहीं, जनता के कठोर सवालों और लोकतांत्रिक जवाबदेही की आवश्यकता है।

*आख़िर सवाल वही है-*

🚨*यदि कोई व्यक्ति छल, कपट और बेईमानी के प्रतीक के रूप में सदन तक पहुँचा हो, तो उसे “माननीय” क्यों कहा जाए?*🚨

22/06/2026

*देश को सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं, भीतर से है*

महान राजनीतिक चिंतक निकोलो मैकियावेली ने कहा था कि जिस देश की जनता अन्याय, भ्रष्टाचार और बदहाली को अपनी किस्मत मानकर चुप बैठ जाए, उस देश को बर्बादी से कोई नहीं बचा सकता।

आज यह बात भारत पर पहले से कहीं अधिक लागू होती दिखाई देती है।

🔴 *जब जनता मौन हो जाती है* 👇👇

* सरकार जवाबदेह होना छोड़ देती है।
* न्यायपालिका पर सवाल उठने लगते हैं।
* जांच एजेंसियां सत्ता की सेवक बन जाती हैं।
* मीडिया सच दिखाने के बजाय सत्ता का प्रचार करने लगता है।
* लोकतंत्र धीरे-धीरे केवल एक दिखावा बनकर रह जाता है।

🔴 *सवालों से घिरा आम भारतीय* 👇👇

आज देश का आम नागरिक समस्याओं के पहाड़ के नीचे दबा हुआ है।

➡️ पढ़ा-लिखा युवा डिग्री लेकर रोजगार की तलाश में भटक रहा है।
➡️ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र लगातार पेपर लीक और परीक्षा घोटालों से टूट रहे हैं।
➡️ किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
➡️ मध्यम वर्ग महंगाई, करों और बढ़ते खर्चों के बोझ तले दबता जा रहा है।

🔴 *जवाबदेही आखिर कहाँ गई?* 👇👇

एक समय था जब-

* नाकामी पर मंत्री इस्तीफा देते थे।
* सरकारें जनता के गुस्से से डरती थीं।
* विपक्ष के आरोपों पर निष्पक्ष जांच होती थी।

🔸 लेकिन आज ऐसा लगता है कि किसी भी विफलता का कोई जिम्मेदार नहीं है।

🔸 न पेपर लीक का दोषी मिलता है, न भ्रष्टाचार का, न व्यवस्था की विफलताओं का।

🔴 *संस्थाओं पर बढ़ता अविश्वास* 👇👇

लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता। लोकतंत्र उन संस्थाओं से चलता है जो सत्ता को सीमित करती हैं।

लेकिन जब-

* मीडिया सत्ता से सवाल पूछना छोड़ दे,
* जांच एजेंसियां चुनिंदा कार्रवाई करें,
* और न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर होने लगे,

तब लोकतंत्र का आधार ही हिलने लगता है।

🔴 *इतिहास की सबसे बड़ी सीख* 👇👇

किसी भी देश को बाहरी दुश्मन उतना नुकसान नहीं पहुंचाते, जितना उसकी कमजोर होती संस्थाएं और जागरूकता खो चुकी जनता पहुंचाती है।

*जब नागरिक सवाल पूछना बंद कर देते हैं, तब सत्ता जवाब देना भी बंद कर देती है।*

⚠️ *इसलिए सावधान रहिए*

देश को बचाने की जिम्मेदारी केवल नेताओं, अदालतों या मीडिया की नहीं है।

*देश तब बचता है जब नागरिक-* 👇👇

✔ सवाल पूछते हैं
✔ जवाबदेही मांगते हैं
✔ सच जानने की कोशिश करते हैं
✔ और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हैं

याद रखिए, लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता होती है। अगर जनता ही सो जाए, तो कोई संविधान, कोई अदालत और कोई संस्था देश को नहीं बचा सकती।

*सोचिए जरूर… क्योंकि यह केवल राजनीति का नहीं, आपके भविष्य और आने वाली पीढ़ियों का सवाल है।*

07/06/2026

किस-किस को हटाऊँ?

07/06/2026

*आज से सैकड़ों साल पहले महान विचारक मैकियावेली ने कहा था कि जिस देश की जनता मौन हो जाए, जिस देश के लोग भ्रष्टाचार और बदहाली को अपना किस्मत मानकर बैठ जाएं, उस देश को बर्बादी के सिवाय कुछ नहीं मिलता।*

👉क्योंकि जिस देश की जनता मौन हो जाती है, उस देश की सरकार , उस देश का सिस्टम, उस देश की न्यायपालिका भ्रष्टाचार में डूब जाती हैं। जिम्मेदार एजेंसियां अपना कर्तव्य निभाने की जगह सत्ता की चाकरी करने लगती है और देश गर्त में चला जाता है।

🔴आज हमारे देश की भी कुछ यही हालत है। भारत की अर्थव्यवस्था से लेकर राजव्यवस्था तक सब चौपट हो चुकी है। अखबार बिक कर छप रहे हैं, न्यायपालिका नीलाम हो चुकी है। चुनाव आयोग भाजपा का कार्यकर्ता बनके लोकतंत्र को दफन कर रहा है। जिन्हें सच बोलने और दिखाने की जिम्मेदारी मिली थी, सब दलाली करने में बिजी हैं। देश के सारे विश्वविद्यालय भाजपा- संघ के और न्यायालय अपराधियों के कब्जे में आ चुका है। कोर्ट में गोलियां चल रही हैं, पुलिस चौकियों में बेटियों के साथ रेप हो रहा है।

🔴आज आम आदमी के सामने सवालों का पहाड़ खड़ा है। पढ़ने वाला युवा डिग्री लेकर भटक रहा है, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला छात्र पेपर लीक की खबरों से टूट रहा है, किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, और मध्यम वर्ग महंगाई के बोझ तले हर रोज दबता जा रहा है। रूपये लगातार गिर रहा है, अमेरिका और चीन के बाद अब नेपाल जैसे पिद्दी देश भी भारत को आंख दिखाने लगे हैं।

👉पहले नाकामी पर मंत्रियों का इस्तीफा होता था, पहले फेल सरकारों को जनता गिराती थी, मगर अब राहुल गांधी को छोड़ दिया जाए तो किसी को किसी चीज से मतलब नहीं है। देश की दुर्गति का कोई जिम्मेदार नहीं मिल रहा, छात्रों के सपने का हत्यारा नहीं पकड़ा जा रहा, बेटियों की अस्मत लूटने वाले भाजपाई दरिंदे को दंड नहीं मिल रहा.......ऐसा लगता है कि देश में अंधेर मचा हुआ है।
👉पहले जब विपक्ष सरकार के ऊपर उंगली उठाता था, तब जांच एजेंसियां सरकार और सत्ता की जांच करती थी। मगर अब भ्रष्टाचार, लूट-खसोट और घोटाला दिनहाड़े किया जा रहा है, लेकिन BJP नेताओं के भ्रष्टाचार पर जाँच एजेंसियाँ मौन क्यों हैं ? प्रधानमंत्री से लेकर BJP शासित राज्यों के तमाम मुख्यमंत्रियों पर भ्रष्टाचार के अनेक आरोप हैं…लेकिन BJP का “भ्रष्टाचार करो और भारत माता की जय बोलो” वाला मॉडल सफल है।

👉मैं कभी-कभी सोचता हूं कि जिस देश में जनता को कीड़ा-मकोड़ा मानकर अदालतें समझौता कर लें और एजेंसियाँ बेईमान होने के साथ-साथ सांप्रदायिक भी हो जाएँ, उस देश को बाहरी दुश्मन नहीं, उसकी अपनी संस्थाओं का पतन ही बर्बाद कर देता है। क्योंकि पहले भारत भविष्य के बारे में सोचता था, मगर अब भारत को भाजपाई दीमक खोखला कर रहे हैं।

*अगर देश को बचाना है, अगर अपना भविष्य बचाना है तो देश की जनता को अब दिल और दिमाग़ चौकन्ना रखना चाहिए, क्यों सरकार, न्यायपालिका और मीडिया मिलकर देश को बेच रहे हैं, सच दिखायेगा कौन, न्याय दिलायेगा कौन?*

*सोचना जरूर............ये आपके देश और भविष्य का सवाल है भाई!*

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