अगले २० साल तक मोदी.

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12/04/2026

कैसे भेष बदलकर 7 महिला पुलिस कॉप्स ने नासिक की आईटी कंपनी में यौन उत्पीड़न का किया भंडाफोड़
नाशिक की एक IT कंपनी के छह कर्मचारियों के खिलाफ यौन अपराध के 9 मामलों की जांच जारी है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने शुक्रवार इनमें से एक मामले में कंपनी की एक असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM-HR) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि एचआर ने महिला कर्मचारी की शिकायत को नज़रअंदाज़ करके आरोपी कर्मचारियों की मदद की।
नाशिक: सात महिला पुलिस अधिकारियों ने भेष बदलकर नाशिक की एक मल्टी-नेशनल कंपनी में प्रवेश किया। उन्होंने यौन उत्पीड़न के एक मामले में मुख्य आरोपी को महिला कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। इस खुलासे के बाद कई गिरफ्तारियां हुईं। जब ये महिला अधिकारी कंपनी के अंदर चल रही एक मीटिंग में पहुंचीं, तो आरोपी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और अनुचित व्यवहार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। पुलिस फिलहाल आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत जुटाने के लिए 40 से अधिक CCTV फुटेज क्लिप्स की जांच कर रही है।
यह मामला नाशिक की एक मल्टी-नेशनल कंपनी में पिछले चार वर्षों से महिला कर्मचारियों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों में छह लोगों के खिलाफ नौ मामले दर्ज किए गए हैं। इन आरोपियों में एक टीम लीडर और कंपनी का एचआर भी शामिल हैं। शिकायत दर्ज कराने वाली महिलाओं की उम्र आम तौर पर 18 से 25 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
क्या हैं आरोप?
इस मामले में नौ FIR दर्ज की गई हैं। लगाए गए आरोपों में यौन उत्पीड़न, शादी का वादा करके बार-बार शारीरिक संबंध बनाना, जबरन धर्म परिवर्तन का प्रयास और धार्मिक अपमान शामिल हैं। इसके तहत कर्मचारियों को नमाज़ पढ़ने और मांसाहारी भोजन करने के लिए मजबूर करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस ने एक बयान में कहा कि जब शिकायतकर्ता ने इन घटनाओं के बारे में कंपनी के हेड ऑफिसर से बार-बार मौखिक शिकायतें कीं, तो उन्होंने छेड़छाड़ से जुड़ी उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बजाय उन्हें काम को लेकर साइडलाइन कर दिया गया।
केस 1 (जुलाई 2022 - फरवरी 2026)
आरोपियों - दानिश शेख, तौसीफ अत्तार और निदा खान पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करके एक महिला कर्मचारी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। आरोपी तौसीफ अत्तार ने शादी का झूठा वादा करके पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जबकि दानिश शेख ने ऑफिस की लॉबी में उसके साथ अश्लील हरकतें करके उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की।

केस 2 (मई 2023 - 19 मार्च, 2026)
आरोपियों- रज़ा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर एक महिला कर्मचारी को घूरने, उसे गलत तरीके से छूने और उसकी निजी वैवाहिक जीवन के बारे में शर्मनाक टिप्पणियां करने का आरोप है। औपचारिक शिकायत के बावजूद, कंपनी के हेड ऑफिसर ने कार्रवाई करने के बजाय, कथित तौर पर आरोपियों को बढ़ावा दिया।
केस 3 (2022- फरवरी 2026)
आरोपी शफी शेख पर आरोप है कि उसने पीड़िता को अश्लील तरीके से घूरा और मीटिंग के दौरान उसका मज़ाक उड़ाया। वहीं, तौसीफ ने पीड़िता के वैवाहिक जीवन में बच्चों की कमी को लेकर बेहद शर्मनाक टिप्पणियां कीं और शारीरिक नज़दीकी बनाने की कोशिश करके उसे अपमानित किया।
केस 4 (4 मई, 2025 - दिसंबर 2025)
आरोपी, तौसीफ अत्तर ने पीड़िता की निजी ज़िंदगी के बारे में अश्लील सवाल पूछे और अश्लील इशारे किए। इसके अलावा, उसने ऑफिस में, अन्य हिंदू महिला कर्मचारियों की मौजूदगी में, हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई।

केस 5 (2022 - 23 मार्च, 2026)
आरोपियों - तौसीफ अत्तर, दानिश, शाहरुख शेख और रज़ा मेमन ने पीड़िता के धर्म का अपमान किया और ज़बरदस्ती उसे नमाज़ पढ़ने के लिए मजबूर किया। उसे ज़बरदस्ती मांसाहारी खाना खिलाकर उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई, और एक खास धर्म की महिलाओं के खिलाफ अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया।
केस 6 (6 सितंबर, 2024 - फरवरी 2026)
आरोपियों - आसिफ अंसारी और शफी शेख - ने महिला कर्मचारी के शरीर के बारे में अश्लील टिप्पणियाँ कीं और जान-बूझकर उसे गलत तरीके से छुआ। इस घटना में भी, आरोपी तौसीफ अत्तर ने पीड़िता के धर्म से जुड़े देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
केस 7 (2025 - मार्च 2026)
आरोपियों - आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, रज़ा मेमन, तौसीफ अत्तर और शफी शेख - पर पीड़िता का पीछा करने, अश्लील टिप्पणियाँ करने और गलत इरादे से उसे छूने का आरोप है। आपस में मिलकर, उन्होंने उसके धर्म के खिलाफ गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल करके माहौल खराब करने की कोशिश की।

केस 8 (जनवरी 2025 - अब तक)
आरोपियों रज़ा मेमन और शफी शेख ने पीड़िता की मर्ज़ी के खिलाफ उसके साथ शारीरिक नज़दीकी बनाने की कोशिश की। आरोपी शफी ने ज़बरदस्ती उसे प्रपोज़ किया, जबकि रज़ा मेमन ने उसके शरीर के बारे में अश्लील टिप्पणियाँ कीं और उसे गलत तरीके से छूने की कोशिश की।
केस 9 (जनवरी 2026 - 1 अप्रैल, 2026)
आरोपियों रज़ा मेमन और शाहरुख कुरैशी ने पीड़िता के साथ अश्लील बातचीत की और अश्लील हरकतें कीं। पीड़िता के मना करने के बावजूद, वे उसकी निजी ज़िंदगी में दखल देते रहे, उस पर नज़र रखते रहे, और उसके शरीर के बारे में अश्लील टिप्पणियाँ करके उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते रहे।
अब आगे क्या?
पांच आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया और अगले दिन उन्हें एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया। उन्हें 10 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। एक आरोपी न्यायिक हिरासत में है। गिरफ्तार की गई सातवीं आरोपी एक महिला है जो HR विभाग से जुड़ी है। उस पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े नियमों के अनुसार कार्रवाई न करने का आरोप है।

एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक के निर्देशों पर, ACP (अपराध) संदीप मितके के नेतृत्व में इन मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह का कोई बड़ा रैकेट सक्रिय है। पुलिस ने अन्य महिलाओं से भी आगे आने की अपील की है, यदि उन्हें भी किसी तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो। उन्होंने महिलाओं से 9923323311 नंबर पर WhatsApp के माध्यम से संपर्क करने को कहा है।
अगर एचआर ने ध्यान दिया होता तो बच जाता इतना बड़ा कांड
असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अनिकेत अवहाद ने बताया कि इनमें से एक मामले में पीड़ित महिला ने अपने दो सहकर्मियों द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न की शिकायत AGM (HR) से की थी, लेकिन उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की और शिकायत को नज़रअंदाज़ कर दिया। अगर इस HR अधिकारी ने शिकायत पर ध्यान दिया होता, तो दूसरे अपराध नहीं होते। HR अधिकारी की लापरवाही ने ही आरोपी को पीड़ितों का यौन उत्पीड़न करने के लिए बढ़ावा दिया।

कंपनी के सामने विरोध प्रदर्शन
इधर IT कंपनी के सामने काफी हंगामा हुआ, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया और पिछले दरवाज़ों से कंपनी परिसर में घुसने की कोशिश की। मौके पर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने समय रहते दखल दिया और प्रदर्शनकारियों को दूर रखा। इसके बाद, आंदोलनकारी सदस्यों ने कंपनी के गेट के सामने धरना दिया।
साभार 🙏

12/04/2026

सही जवाब दीजिए

12/04/2026

'दफ्तर में महिला साथी के स्तन को देखना अपराध नहीं'

बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द की FIR

एक निजी बीमा कंपनी में काम करने वाली सेल्स डिवीजन की महिला कर्मचारी ने अपने सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पर यह कहते हुए FIR किया किया मेरे स्तनों को देखते हैं

जबकि सच्चाई यह थी कि महिला अपने टारगेट को पूरा नहीं कर पाती थी इसीलिए उसे कंपनी से निकलने का नोटिस जारी कर दिया गया था

मामला मुंबई हाई कोर्ट तक पहुंचा और मुंबई हाई कोर्ट ने कहा कि अपने साथ काम करने वाली किसी महिला कर्मचारी के स्तनों को देखना यह किसी भी अपराध के श्रेणी में नहीं आता

और मुंबई हाई कोर्ट में एफआईआर रद्द कर दिया

लगता है पुरुषों को कहीं चैन नहीं मिलेगा

घर में पत्नियां कल बोलकर मार रही हैं की तुम काले हो

ऑफिस में महिलाएं स्तन देखने का आरोप लगा कर FIR कर रही है

😂😂😂

12/04/2026
11/04/2026

सही उत्तर दीजिए

11/04/2026

इस्लामाबाद में बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है।

ये आज से शुरू होंगी,

लेकिन Benjamin Netanyahu ने ऐसा माहौल बना दिया है कि शायद कोई समझौता हो ही न पाए। 9 अप्रैल को एक ही दिन में क्या हुआ, आसान भाषा में समझिए।

नेतन्याहू ने लेबनान के साथ सीधी द्विपक्षीय बातचीत की घोषणा कर दी, जिनका मुख्य उद्देश्य हिज़्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण है।

ये बातचीत वॉशिंगटन में होंगी, इस्लामाबाद में नहीं, और न ही ईरान के जरिए।

इसी समय Israel Defense Forces ने साफ कहा कि लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है। हमले पूरी ताकत से जारी रहेंगे। मतलब एक तरफ बातचीत, दूसरी तरफ बमबारी।

अब इसका असर समझिए। ईरान की पूरी रणनीति इस बात पर टिकी थी कि लेबनान का मुद्दा भी इस्लामाबाद की बातचीत में शामिल रहे। उनकी मांग थी कि हर मोर्चे पर युद्ध खत्म हो, जिसमें लेबनान भी शामिल है। यही उनका दबाव बनाने का तरीका था। अगर लेबनान का मामला अलग से वॉशिंगटन में सुलझ गया, तो ईरान की ताकत कम हो जाएगी।

नेतन्याहू ने असल में लेबनान को इस्लामाबाद की बातचीत से अलग करने की कोशिश की है। लेकिन समस्या ये है कि ये प्रस्ताव लेबनान की सरकार को दिया गया है, जो पहले ही हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने में असफल रही है।

जनवरी 2026 में लेबनान ने कहा था कि निरस्त्रीकरण का पहला चरण पूरा हो गया। लेकिन एक महीने बाद United States Central Command को एक बड़ा सुरंग नेटवर्क मिला, जिसमें मिसाइलें और ड्रोन छिपे हुए थे। लेबनान की सेना को कमजोर माना जाता है, और विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर समझौता हो भी जाए, तो उसे लागू कौन करेगा, ये साफ नहीं है।

हिज़्बुल्लाह के सांसदों ने भी बातचीत को खारिज कर दिया। उनका कहना है पहले युद्धविराम हो, फिर बातचीत हो। जब तक इज़राइली सैनिक लेबनान में हैं, तब तक कोई बातचीत नहीं।

मतलब नेतन्याहू ऐसी सरकार से बात करना चाहते हैं जो खुद इस समस्या को हल नहीं कर सकती, और ये मुद्दा पिछले 40 साल से हल नहीं हुआ है।

इसी दिन Pentagon ने Lockheed Martin के साथ 11.4 मिलियन डॉलर का समझौता किया, ताकि इज़राइल के F-35I Adir लड़ाकू विमानों को उन्नत किया जा सके। यही विमान हाल ही में बेरूत पर बड़े हमलों में इस्तेमाल हुए थे।

मतलब एक तरफ युद्धविराम की बात, दूसरी तरफ हथियारों को और मजबूत करना।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khwaja Asif ने स्थिति को और खराब कर दिया, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इज़राइल के खिलाफ कड़ा बयान दे दिया। इससे इज़राइल ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए।

तो कुल मिलाकर क्या हुआ, मध्यस्थ की विश्वसनीयता कमजोर हो गई, इज़राइल ने अलग रास्ता खोलकर ईरान की ताकत कम करने की कोशिश की, और अमेरिका ने उसी समय सैन्य समर्थन बढ़ा दिया।

अब शनिवार से इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होगी। लेकिन स्थिति ऐसी है कि तीन अलग-अलग युद्ध चल रहे हैं, तीन अलग-अलग जगहों पर बातचीत हो रही है, और किसी एक जगह पर पूरा समाधान नहीं दिख रहा। युद्धविराम घोषित हुआ, उसी दिन टूट गया, और अगले ही दिन पूरी योजना बिखर गई।
साभार 🙏

11/04/2026

दूध पिलाने से सांप की फितरत नहीं बदलती...!!

इंदौर की राजनीति में पिछले दो दिनों से जो 'मजहबी रंग' घोलने की कोशिश की जा रही है, उसने शहर के प्रबुद्ध नागरिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है नगर निगम की दो महिला पार्षदों ने जिस तरह का व्यवहार दिखाया है, वह न केवल निंदनीय है बल्कि उनकी मानसिकता पर भी बड़े सवाल खड़े करता है...!!

बड़ी विडंबना है कि आप इंदौर की धरती पर सुरक्षित रहकर ईरान के 'अयातुल्ला खमेनेई' को तो भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं, लेकिन जब बात हमारे अपने देश के सम्मान वंदे मातरम की आती है, तो आप हंगामा खड़ा कर देती हैं जिस मिट्टी का अन्न खा रहे हैं, जहाँ की हवा में सांस ले रहे हैं, उसके गौरव गान राष्ट्रगीत से इतनी आपत्ति क्यों...!!

देश की आजादी का इतिहास गवाह है कि अशफाक उल्ला खान जैसे अनगिनत मुस्लिम क्रांतिकारियों ने 'वंदे मातरम' का उद्घोष करते हुए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर रसखान तक, इस कौम में ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने 'भारत माता की जय' बोलने में कभी संकोच नहीं किया और राष्ट्र को सर्वोपरि रखा...!!

वतन की मोहब्बत ईमान का हिस्सा है, लेकिन आज कुछ 'बाबर की संतान' जैसी सोच रखने वाले लोग समाज में जहर घोलकर देश को पीछे ले जाने का काम कर रहे हैं...!!

लोकतंत्र में आपको पद और प्रतिष्ठा जनता की सेवा के लिए मिली है, न कि किसी बाहरी एजेंडे को थोपने या राष्ट्रगीत का अपमान करने के लिए सियासत अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रवाद के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए..!!
वंदे मातरम! भारत माता की जय! 🇮🇳
साभार 🙏

Photos from अगले २० साल तक मोदी.'s post 11/04/2026

खबर धमाकेदार लाया हूँ : 🇮🇳🇮🇷

चमचों, गुलामों, सपाइयों, लिबरान्डुओं अगर पास में बरनॉल है, तभी इस पोस्ट को पढ़ना।

और हां, अगर विश्वगुरु के “विदेशनीत” का रोना रोकर थक चुके हो तो बता दूँ कि -जहाँ एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए भिखारिस्तान में दुनिया भर का जमावड़ा लगा है,

वहीं समुन्दर में “विश्वगुरु” के जहाज बिना किसी रोक टोक के हार्मुज के आर-पार आ और जा रहे हैं।

अभी अभी भारत के तिरंगा लगा हुआ LPG टैंकर, “जग विक्रम” ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया है, जो अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाला पहला जहाज बन गया है।

सब लोग वार्ता करो,
चाहें पाकिस्तान के झंडे के नीचे वार्ता करो, चाहे पाकिस्तान के झंडे में छपे चांद पर बैठ कर वार्तालाप करो...

विश्वगुरु के तेल और गैस के टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आर-पार आते जाते रहेंगे। क्योंकि भारत विश्वगुरु है, उसके जहाज को रोकने वाला सौ बार सोचता है।

कमेंट में जय हिन्द लिखना ना भूलें... 🫡

जय हिंद.. 🇮🇳

11/04/2026

वे आये थे साहब दो तीन लोग थे, बोल रहे थे मंत्री जी का खाना है तुम्हारे घर, तुम्हे चुना है हजारो में, खुशकिस्मत हो तुम...

मैंने कहा बहुत कि मंत्री जी लायक नही है मेरा घर, बिजली नही है, पानी नही है, भात भी सिर्फ चावल उबाल कर खाते हैं, कभी एक टेम, कभी कभी दो टेम, मेरा घर उनके काबिल नही साहब...

मैंने कहा बहुत मगर मेरे कहने का कब मोल था मेरे देस में, मेरे देस के सफेदपोश के सामने वे बोले, सब हो जाएगा, तुम बस कोने में बैठ जाना, फ़ोटो के बखत...

वे आये साहब, घर पोत गए, सब हरा भरा दिखने लगा साहब, जनरेटर उठा लाये वे, कूलर ले आये, खाना भी ले आये, पत्तल-दोना सब था उनके पास, पानी भी था अलग, ठंडा औऱ साफ, उन्होंने खुद किया सब इन्तजाम...

मैंने नही छुआ कुछ भी, ना उन्हें, ना उनका खाना ना उनके बर्तन, वे मुझसे बतियाये भी नही साहब, बस खाये खाते रहे, मेरे सामने फेंका कुल्ले का पानी, और हाथ धो कर चले गए आख़िर में...

मुझे तो यह भी नही पता साहब, वे क्यो आये थे, तुम ही बता दो साहब, वे अपनी भात, मेरे घर बैठकर क्यो खा कर गए...

यही नौटंकी भारतीय राजनीति की कड़वी सच्चाई है, आपकी राय का कमेंट बॉक्स में हमे इंतजार रहेगा। 🙏

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