26/06/2022
यह तस्वीर बता रही है कि जब भी आपके हाथों में किताब आएगी,आप हथियार से दूर हो जाओगे यानि शिक्षा सदैव हिंसा के विपरीत खड़ी रहती है।
आज समाज/देश मे जो भी हिंसा/अराजकता का माहौल नजर आता है वो शिक्षा की कमी से है।
एक शिक्षित इंसान सबसे पहले हिंसा के बाद के परिणाम को अपने दिमाग मे पहले सोचता है।इसलिए वो सदैव हिंसा से बचने/बचाने की सलाह देता है।
ज्यादातर आपराधिक मामलों में शामिल लोगों की शिक्षा स्तर देखिये।सिर्फ साक्षर या बेहद कम पढ़े लिखे लोग मिलेंगे।
अपने आसपास के नशे के कारोबार से लेकर चोरी,डकैती आदि के मामलों में शामिल लोगों के बारे में जानकारी जुटाकर समझा जा सकता है।
चाहे खुद आधी रोटी खाएं लेकिन अपने बच्चों के हाथों में किताब जरूर थमाए।शिक्षा ही मानवीय जीवन की बेहतरी का सर्वश्रेष्ठ रास्ता है।
शिक्षा ही एकमात्र विकल्प हे जो अंधकार से प्रकाश की ओर अहिंसा के मार्ग पर लेकर जाती हे शिक्षा समाज में अज्ञानता वैमनस्यता व अपराध को दुर कर प्रेम सौहार्द भाईचारेव मानवीयता को स्थापित कर समाज को उन्नति की ओर ले जाती हे ।
24/06/2022
रोज पेरेन्टिंग कीजिए
(अभिभावकों के साथ ऐसी परिस्थितियाँ बहुत बार सामने आती है) कि जब वे पेरन्ट टीचर मीटिंग में जाते हैं या अध्यापक जब उनसे उनके बच्चे की पढाई में प्रदर्शन पर चर्चा करने के लिए बुलाते हैं। तथा जब परीक्षा का परिणाम आता है तो माता-पिता को सदमा सा लग जाता है कि अरे यह कैसे हो गया मेरा बच्चा तो सारा साल पढ़ाई कर रहा था। उसके इतने कम अंक कैसे आए और वह अध्यापक या स्कूल को इसका कारण बताते हैं।
अगर आप अपने बच्चे के कम अंकों या उसके परीक्षा परिणाम को देखकर हैरान है तो इसका अर्थ है कि आप अच्छे अभिभावक नहीं हैं। अगर आप पूरा वर्ष पढ़ाई के प्रदर्शन पर ध्यान देते हैं, अगर आप उसकी स्कूल डायरी नियमित रूप से देखते हैं, अगर आप उसके गृहकार्य को हर रोज जांचते हैं और अगर आप अपने बच्चे के स्कूल व ट्यूशन के अध्यापक से लगातार सम्पर्क में रहते हैं तो आपको अपने बच्चे के परिणाम को देखकर कभी हैरानी नहीं होगी। क्योंकि इन सब कार्यों से आपको पता रहेगा कि आपका बच्चा कैसी पढ़ाई कर रहा है, कक्षा में उसका प्रदर्शन कैसा है और उसके कितने अंक आएंगे । हर स्कूल में वर्ष में चार-पांच बार पेरन्ट टीचर मीटिंग होती हैं तब अभिभावक स्कूल नहीं आते लेकिन अंत में आते हैं और कहते हैं कि बच्चे ने साल भर में कुछ नहीं सीखा। जबकि स्कूल से बार-बार फोन आते हैं बताया जाता है कि आपका बच्चा अपना गृहकार्य नहीं करके आ रहा। अपनी डायरी नहीं लेकर आ रहा या अपनी काॅपी भी स्कूल नहीं लाता, कभी कभी तो किताबें भी नहीं लाता। तब अभिभावक अपने कार्यों में इतने व्यस्त होते हैं कि ध्यान नहीं देते अंत में स्कूल को दोष देते हैं कि मेरे बच्चे के साथ यह हो गया, वह हो गया ।
अभिभावक के तौर पर यह बहुत जरूरी है कि आप उसके स्कूल और अध्यापक के संपर्क में रहें अपने बच्चे के बारे में लगातार पूछते रहें उसकी परीक्षा की तैयारी आदि के विषय में सजग रहें। इसमें आपको ज्यादा कुछ नहीं करना बस आप उसकी स्कूल डायरी लगातार जांचते रहें । उसका गृहकार्य भी पूरा है या नहीं यह ध्यान रखें उसकी कक्षा के अध्यापक से संपर्क में रहें तो आपको अपने बच्चे के प्रदर्शन के बारे में पता रहेगा और अंत में जो हैरानी या सदमा उसके अंक जानकर लगता है वह नहीं होगा।
13/05/2022
बच्चे की लक्ष्मण रेखा होना जरूरी है
यह एक बहुत अहम प्रश्न है कि क्या हमें अपने बच्चों की सीमाएँ तय करनी चाहियंे? सीमा का अर्थ है कि बच्चे को क्या खाना है, कब खेलना है, कब टी.वी. देखना है, कब पढ़ाई करनी है कब क्या करना है इसकी एक सीमा तय होनी चाहिए और इस पर अभिभावकों का नियंत्राण होना चाहिए। अगर आप आज बचपन में ही अपने बच्चे की इन सब आदतों की सीमाएँ तय नहीं करते तो बाद में वह आपको ही कोसेंगे।
अगर आप बच्चे को पूरी आजादी दे देंगे कि वह जो चाहे वह करेगा। हर बच्चा इधर-उधर घूमना, जंक फूड खाना पसंद करता है उसे फल आदि सब समझ नहीं आते यह तो हमें बताना पड़ेगा।
किसी भी बच्चे के लिए एक दम से टी.वी से हटना मुमकिन नहीं होता। टीवी. देखने बैठते हैं बच्चे तो उसी में बहुत समय लगा देते हैं हमें ही उसके लिए समय की सीमा निर्धारित करनी होगी कि उसे कितने समय टी.वी देखना है? आज के समय में हर माता-पिता की सबसे बड़ी परेशानी मोबाईल है। मोबाइल में बच्चे गेम खेलना शुरू करते हैं तो उसे छोड़ते नहीं। समय तो खराब होता है साथ ही बच्चे अपने आस पास की असली दुनिया से हटकर आभासी दुनिया में चले जाते हैं परन्तु जबवह उससे हट कर अपनी असली दुनिया में वापिस आते हैं तो उन्हें परेशानी आती है। उसको कितनी देर मोबाईल या टी.वी देखना है उसकी समय सीमा अभिभावकों को तय करनी होगी। यह बहुत महत्वपूर्ण है। बच्चा कब सोएगा, कब उठेगा यह भी निर्धारित होना चाहिए । अगर वह अपनी मर्जी से टी.वी., मोबाईल देखेगा तो देर से सोएगा, देर से सोने पर देर से उठेगा। अगर उसे जल्दी उठा भी दिया तो फिर स्कूल में उसे नींद आएगी वह कक्षा में वह ठीक से सीख नहीं पाएगा जो सिखाया जा रहा है।
इन सब पर आपका नियन्त्रण होना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि बचपन से ही इन सब पर नियंत्रण करके चलें। यह नहीं कि वह कुछ भी माँगे और हम उसे दे दें।। अभिभावक होने के नाते हमारी जिम्मेदारी हे कि हम उस पर नियंत्रण रखें इससे उसकी आदतें अच्छी रहेगीं और वह बड़े होने पर निश्चित ही आपको धन्यवाद बोलेगा।
याद रखें यह तभी सम्भव होगा जब आप अभिभावक होकर भी बच्चों के सामने स्वयं के लिए भी एक सीमा तय करें और अनुशासित होकर उनकी पालना करें।
14/04/2021
Rajasthan government has declared that all children of class 1 to 8 and class 9 ,11 will be promoted in this session also . Bord examination of 10 ,12 are postpond too.
19/03/2021
The tribes people of the Thar desert do not usually have the opportunity of schooling. If you would like to help educate and improve the circumstances of these incredible people please donate to the fundraiser via Instagram, our page, or PayPal to [email protected]🙏
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With thanks to for today’s beautiful phograph.
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