20/05/2026
पता नहीं अच्छी खासी पढ़ी लिखी ,आत्मनिर्भर लङकियां शादी होते ही क्यों स्वयं को इतनी बेबस समझने लगती हैं ,शादी में कोई समस्या है तो क्यों वो और उनके माता पिता समय रहते कोई निर्णय नहीं ले पाते ।घरेलु हिंसा से महिलाओं के संरक्षण के लिए बाकायदा कानून है ,शादी में नहीं रहना चाहते तो कुटुंब न्यायालय,कांउसिलिंग और अंत में तलाक का प्रावधान है ।समय रहते सही निर्णय लेकर जीवन बचाया ,संवारा और फिर से शुरू किया जा सकता है ।जितनी भागदौङ लङकी के घर वाले उसके मरने के बाद करते हैं उसकी आधी भी उसके जीवनकाल में समय रहते कर ली जाए तो लङकी को जान न गंवानी पङे ।जरूरत है एक माईंडसेट से बाहर निकल कर सोचने और निर्णय लेने की ।