17/07/2026
इंकलाब की आंधी आयेगी.....
बेचते-बेचते देश की थाती,
अब नया पैंतरा ये लाये हैं,
संपत्ति सब नीलाम हुई,
तो मंदिर लूटने आये हैं।
जिन्हें खून-खराबा रास आये,
जो मौत का भी हैं जश्न मनाते,
वो सत्ता की इस अंधी भूख में,
इंसानों को ही खूब लड़वाते।
भगवा चोला ओढ़ लेने से,
हर कोई संत नहीं होता,
सीता का हरण करने को,
रावण भी यहां साधु बनता।
माथे के चंदन और दाढ़ी से,
मत आंको किसी की सच्चाई,
इतिहास गवाह है देख लो भाई,
ढोंगियों ने ही सबसे ज्यादा कहर ढाई।
जो देश की संपत्तियों को बेच चुके,
वो अब धर्म का सौदा करते हैं,
मसनद पर बैठे ये हाकिम अब,
बस लाशों की गिनती करते हैं।
तुम सोए रहो गहरी नींद में,
वो बस्तियाँ राख बना देंगे,
जो आज तुम्हारे रक्षक हैं,
कल वही तुम्हें दफना देंगे।
तिलक लगाकर माथों पर,
जो नफरत का विष बोते हैं,
वो संत नहीं, वो भेड़िए हैं,
जो राम के नाम पर रोते हैं।
पहचानो असली चेहरों को,
मजहब की आड़ में जो छिपते हैं,
यहाँ ईमान तो कौड़ियों का है,
और भगवान के घर भी अब ब�