ओबीसी आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और पहुंचते ही चिल्लाने लगा।
कि "शोषण के नाम 35% आरक्षण दे न बाबा" , बहुत तगड़ा शोषण हो गया बाबा ...
कोर्ट ने चश्मा उतारकर पूछा “क्या शोषण हुआ है बेटा?”
ओबीसी आयोग - "मत पूछिए माई लाड़, हम बोल देंगे तो धरती फट जाएगी आसमान गिर जाएगा...
कोर्ट- अबे भूमिका न बनाओ सीधा सीधा बताओ क्या शोषण हुआ है।
ओबीसी आयोग - माईबाप जब घर के सामने से जनरल कास्ट वाले निकलते हैं तो हमे खड़ा होना पड़ता है।
कोर्ट - हें , क्यों खड़ा होना पड़ता है, जनरल वाला बोलता है क्या खड़े होने को , नाम बताओ उसका ,अभी वारंट जारी करते हैं।
ओबीसी आयोग - नही बोलता तो नही है! लेकिन माईलाड़ जनरल वाले हमे पढ़ाई से वंचित रखते हैं।
कोर्ट - लेकिन सरकारी स्कूल तो सरकार चलाती है,और प्रायवेट स्कूलों मे तो जिसके पास भी देने के लिए फीस हो वो सभी जा सकते हैं ! तुमको पढने से कौन जनरल रोक सकता है।
ओबीसी आयोग - माईलाड आप समझ नही रहे हैं , हमको अछूत बोलकर मारा पीटा जाता है ! इसलिए हमे 35 प्रतिशत दो।
कोर्ट - “अच्छा... लेकिन ये जौनपुर का रामखेलावन हरिजन तो कह रहा है ! कि यादव जी हमें अछूत कह के मारे हैं ; और मेरा घर जला दिए हैं।
ये कौन-सा लाचारी है ओबीसी की?”
ओबीसी आयोग हकलाकर— "माईबाप, वो... वो तो... सामाजिक समरसता और जातिए एकता के लिए हम खाली रामखेलावन को प्यार से समझा रहे थे कि ! पूजा-पाठ सब ढोंग है, हिंदू देवियां गंदी हैं और देवता लंपट हैं।
इनका पूजा पाठ न करके बौद्ध बनो।
कोर्ट मुस्कुराया — तो उसके लिए सबको मारते फिरोगे?
और अभी ले चल रहे हैं ! रामखेलावन को तुम्हारे घर ,उसको अपने साथ मे बिठाकर अपने बर्तनों मे खिलाओगे?
ओबीसी आयोग- 🤔अम्मा नही मानेंगी माईलाड😐
कोर्ट -फिर किस समानता कि बात कर रहे हो और किस शोषण की भरपाई मांग रहे हो?”
ओबीसी आयोग ने तुरंत जवाब दिया —“माईबाप, बात सामाजिक न्याय की है।
“हमारे समाज के लोग बहुत पिछड़े हैं!”
हमारा राजनीतिक नेतृत्व बहुत कम है।
कोर्ट — वर्तमान मे पूरे देश मे सत्रह मुख्यमंत्री पिछड़े समुदाय से आते हैं।
यहां तक कि प्रधानमंत्री भी ओबीसी समुदाय से हैं।
और बहुत जगह OBC ही स्थानीय शक्ति-संरचना (प्रधान, ठेकेदार, थानेदार, नेता) में हैं।
और कौन सा राजनीतिक नेतृत्व चाहते हो भाई।
सब खामोश।
कोर्ट ने कलम रख दी और बोला - तुम कहते हो कि “जनरल निकलते हैं तो OBC खड़े हो जाते हैं” ! जबकि सच्चाई पूरी तरह से उल्टी है।
हकीकत ये है कि गाँवों में सामाजिक आर्थिक प्रभुत्व OBC जातियों (यादव, कुर्मी, जाट, लोध, पटेल आदि) का ही है।
दलितों की रोज़मर्रा की दिक्कतें इन्हीं वर्गों से ज्यादा हैं।
और टकराव भी इनसे ही ज़्यादा दिखती है।
तुम कहते हो कि “OBC पर छुआछूत होती है”! जो कि ऐतिहासिक रूप से असत्य है।
क्योंकि लगभग सभी ओबीसी जातियों के राजा रहे हैं ! और खुद को क्षत्रिय ही मानती हैं।
सिर्फ आरक्षण के लिए पिछड़ा बन जाती हैं।
छुआछूत का सीधा निशाना SC समुदाय रहा है ! जैसे कि चमार, खटिक, मुसहर,आदि जो भी चमड़ा या सफाई व्यवसाय से जुड़े थे।
संविधान और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़े भी यही बताते हैं —
SC/ST अत्याचारों के मामलों में आरोपी प्रायः OBC या स्थानीय प्रभुत्वशाली जातियों से होते हैं।
जो वाकई मे छुआछूत के शिकार हैं, शोषित हैं उनको उस दलदल से निकालने के बजाय ! अपने स्वार्थ मे अंधे होकर तुमने बहस का मुद्दा ही मोड़ दिया।
मतलब जो आरक्षण पिछड़ापन दूर करने के लिए दिया जा रहा था उसको जनसंख्या आधारित कर दिया।
ताकी तुम जैसे लठैत और अमीर हो जाएं ! और जो वाकई मे पिछड़ा है वो पिछड़ा ही रह जाए।
और इसके लिए तुम असली पीड़ित (SC,st) की जगह “OBC को पीड़ित” दिखाकर आरक्षण के विस्तार के लिए नैरेटिव गढ़ रहे हो।
ओबीसी आयोग - “हमने क्या किया ! हमारी क्या गलती है माईलाड?”
कोर्ट - “तुमने शोषण के नाम पर सत्ता पायी और अपना पेट भरने मे लग गये।
गरीब उसी हालत में रहा ! जाति बदल गयी , पर भूख नही मिटी।”
अब देश में सिर्फ दो ही जातियाँ बची हैं।
पहला जो खाता है, और दूसरा जो "खाए जाने के लिए" आंकड़े बनता है।
35%, 27%, 15% ये सब सिर्फ सियासी शेयर मार्केट के इंडेक्स हैं।
जहाँ इंसान की कीमत, वोटबैंक से तय होती है।
और अंत में कोर्ट का आदेश - “अब जो भी खुद को अगला शोषित घोषित करेगा,
वो फॉर्म भरते समय अपनी जाति के साथ बैंक बैलेंस भी लगाएगा।”
क्योंकि अब जाति नहीं, इनकम स्लिप ही असली प्रमाणपत्र है।
नोट- ऐसे मुद्दों पर बिना एग्रेसिव हुए या बिना गाली दिए लिखना बड़ा ही मुश्किल है भाई।
खैर होई हैं सोई जे राम रचि राखा
Sanatani Anup Raj Pandey
Jai Mahakal... Jai Hind
22/09/2025
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सही कहा या गलत????
जेन जी को लेकर राहुल गांधी सोच रहे हैं कि वह भारत को तोड़ने में जेड जेनरेशन को बहला लेंगे तो मुझे गौरी का एक दृष्टांत याद आ गया।
एक जगह चर्चा के लिए आमंत्रित थे, साथ में एक और सज्जन थे जो शायद किसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे, उन्होंने अज्ञेय को कोट किया कि पुल बनाने वाले वानर कहलाएंगे और निर्माता राम बताए जाएंगे, ऐसा कह कर उन्होंने शाहजहां और ताजमहल का किस्सा भी सुना दिया बोले ठीक इसी तरह श्रमिकों का श्रम इतिहास से गायब कर दिया जाता है।
गौरी श्रोताओं में बैठी थी, तत्काल खड़ी हुई बोली, जिन्होंने पुल बनाया उनका नाम नल, नील, अंगद, जामवंत, सुग्रीव, केसरी और हनुमान था। जिन्हे आप वानर कहकर व्यंग्य कर रहे हैं उन्हें हम राम से पहले पूजते हैं, जिन्होंने पुल बनाया वह पीछे नहीं हैं, हनुमान चालीसा मैं रोज पढ़ती हूं मानस कभी कभी, बाकी मैं चुनौती देती हूं आपको कि एक भी वर्कर का नाम बता दें ताजमहल का।
वक्ता ने कहा यह सब बात किसी व्हाट्सेप युनिवर्सिटी ने बताई होगी, गौरी ने कहा मेरे पिताजी ने बताई जो आपके बगल में बैठे हैं ।
वक्ता का चेहरा देखने लायक था, उसने मुझसे पूछा क्या यह किसी सरस्वती स्कूल में पढ़ती है, मैने हंसकर कहा नही, वह विश्व की दूसरे सबसे बड़ी गर्ल्स यूनिवर्सिटी में पढ़ती है।
बच्चे अब कोलोनियल मानसिकता से बाहर आ रहे हैं। वे हमारी पीढ़ी से कहीं अधिक अपनी विरासत और संस्कृति को समझते हैं।
*प्रायः मैं दिन में दो बार चाय पीता हूँ लेकिन न जाने क्यों, कल शाम की चाय के बाद सोचने लगा और फिर ख्याल आया कि :*
*☆यूपी से सरकार चले जाने के बाद अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव क्यों नहीं मनाया ??*🤔
*☆बसपा सरकार जाने के बाद मायावती के जन्मदिन पर उसे हीरे, ताज, नोटों से क्यों नहीं तौला गया ???? 🤔*
*☆यूपी में योगी जी के सीएम बनने के बाद अब अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी जैसा बाहुबली क्यों नहीं पैदा हुआ है ????? 😍*
*☆मोदीजी के आने के बाद , पी. चिदंबरम अपने बंगले के गमलों में 6 करोड़ की गोभी क्यों नहीं उगा पा रहा है ??? 🤔🤔*
*☆आजकल सुप्रिया सुले अपनी दस एकड़ जमीन में 670 करोड़ की फसल क्यों नहीं उगा पाती हैं ???😀*
*☆हरियाणा में कांग्रेस की सरकार चले जाने के बाद रोबर्ट वाड्रा ने वहाँ कोई जमीन क्यों नहीं खरीदी ???😡*
*☆कांग्रेस सरकार जाने के बाद मुंबई में फिर कोई हाजी़ मस्तान, करीम लाला, दाऊद इब्राहिम पैदा क्यों नहीं हुआ ???😡*
*☆यस बैंक के मालिक राणा कपूर को ढाई करोड़ की पेंटिंग बेचने के बाद, प्रियंका गांधी ने फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बेची ??😡*
*☆ए. के. एंटनी ने अपनी पत्नी के हाथ की पेंटिंग सरकार को 28 करोड़ में बेचने के बाद अपनी पत्नी से फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बनवाई ???😡*
*☆यूपीए के दस वर्षीय (2004-14) शासनकाल में सोनिया अपनी अज्ञात बीमारी के इलाज के लिये प्रत्येक छ: माह के अन्तराल पर "अज्ञात" देश को नियमित रुप से जाती थी.वह रहती दिल्ली में है पर उसकी उडा़न हमेशा केरल के एयरपोर्ट से होती थी और उसके लगेज में 4-5 बडे़-बडे़ ट्रंक हमेशा हुआ करते थे किसी प्रकार की सिक्योरिटी-चेक का सवाल ही नहीं था क्योंकि वह उस समय भारत की "सुपर पीएम" थी. 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद आश्चर्यजनक रुप से सोनिया की "अज्ञात" बीमारी उड़न छू कैसे हो गई ???😡*
*कल फिर कडक चाय पिऊंगा और फिर सोंचूँगा! आप भी एक बार इस बारे में जरूर सोचना!! प्रश्न वाकई गंभीर है.😡*
*ऐसे और अनगिनत सवाल हैं, जिनके बारे में हम सबको सोचना ही चाहिए।😡*
सिक्युरिटी ने मेरा ID कार्ड हाथ में लेकर गौर से मुझे देखा, मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई थी कहीं आज मेरा चेहरा मेरे ID कार्ड से नहीं मैच हुआ तो? इसलिए मैं कोशिश करके ID कार्ड के मुताबिक ही अपना हुलिया रखता हूँ। खैर सुरक्षा कर्मी ने अपनी सहमति देते हुए अंततः मुझे एयरपोर्ट में प्रवेश दे दिया।
अब बारी थी लगेज को चेक इन करने की। मन लगातार अपनी गणित कर रहा था। अगर एक दो किलो की बात होगी तो शर्ट्स को हैंड बैग में रख लूंगा। ज्यादा हुआ तो? तो क्या डॉक्यूमेंट्स को बाहर निकाल लूंगा सिंपल। लेकिन फिर बैग में रहा क्या जाएगा? इसी उधेड़बुन में बैगेज सिक्योरिटी को मेरे ट्रॉली बैग में ढेर सारे डॉक्यूमेंट दिखे। वो बोला सर इसमें डॉक्यूमेंट्स हैं क्या? मैने बोला हाँ है? सर क्या डॉक्यूमेंट्स हैं? मैने कहा कोई समस्या है कागज ले जाने में? नहीं सर कोई नहीं। तो भाई बैग दे ना क्यों टाइमपास कर रहा है।
मैने जैसे ही कन्वेयर बेल्ट पर बैग रखा, 14.6 दिखते ही दिल को करार आया। खैर आगे सुरक्षा जाँच में बच बचा कर, ढेरों चार्जर,वायर, बेल्ट, पावर बैंक, इयरपोड, घड़ी से पार पाकर बोर्डिंग गेट को पहुंच गए।
1 से 10 तक सीट वालों को पुकारा गया, मारा मारी मच गई लाइन में लगने को। सामने वाले की बोर्डिंग पास पर सीट नं २४ था। मैने बताया उनको की भाई १ से १० वालों को बुलाया है। वो बोले चलता है। मैने मन ही मन सोचा अभी इसको आगे रोक लेंगे तब समझ आयेगा। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ उसका बोर्डिंग पास स्कैन हुआ और वो मुस्कुराते हुए बस में दाखिल हो गया।
मैने फ्लाइट बोर्ड की और आइल साइड की अपनी सीट पर बैठ गया। हैंड बैग मैं अपना सदैव ऑपोजिट साइड में रखता हूँ, सर के ऊपर वाले में नहीं। इसके फायदा तब मिलता है जब फ्लाइट रुकते ही आप लपक के अपना बैग ले सकते है, और बाकी लोग जद्दोजहद में लगे रहेंगे। फिर एक व्यक्ति आए और बोले ये मेरी सीट है, खाली सीट पर इशारा कर के बोले। मैने पूछा आपको बैठना है इधर या निकाल के दूं सर? अब वो मेरे बाहर निकलने का इंतजार किए बिना अपने आपको अंदर ठूंसने लगे। मैं अलार्म हो गया और समझ गया ये व्यक्ति पूरे दो घंटे झेलना है। वो अपनी सीट पर धम्म से बैठा और क्योंकि मैं तब तक खड़ा होकर बाहर आ चुका था ,मेरी सीट के एक तिहाई हिस्से पर अपनी तशरीफ़ रख चुके थे। उनके पत्नी और २२-२३ साल का बेटा पीछे बैठे थे। अब उनको अंकल कहूँ या भैया समझ में नहीं आ रहा था। क्योंकि अपनी उम्र भी अब अंकल वाली हो चली है। बड़ी अजीब स्थिति हो जाती है, क्योंकि हम अभी भी अपने को बांका नौजवान समझते है और सामने वाला भी वही समझता है। पर अंकल और भैया का अंतर बहुत ही संकीर्ण हो गया है। मैने उनको कुछ भी न बुलाने का फैसला लिया। तब तक वो अपने मोबाइल का फ्रंट कैमरा चालू कर चुके थे और पूरी स्क्रीन पर उनकी बड़ी नाक और घनी मूछें छाई हुई थीं। उनके बीवी और बेटा भी बची स्क्रीन पर एडजस्ट होने की कोशिश कर रहे थे। मैं बाकी की दो तिहाई सीट पर बैठा और पहला रणनीतिक कदम उठाते हुए बीच का हैंडरेस्ट नीचे किया। इससे सीमा का निर्धारण तो हो गया, पर उनकी तशरीफ़ की घुसपैठ जारी थी। मैने आंखों और हाथों से थोड़ा इशारा किया, और उन्होंने अपने सेल्फी कार्यक्रम से थोड़ा समय निकल कर वहीं हिलने का प्रयास किया। अभी भी १ चौथाई सीट उनके कब्जे में थी। मैं सोच रहा था फ्रैक्शन चैप्टर समझाने का सही मौका था यदि बच्ची यहाँ होती।
खैर मैने अब इसे ही नियंत्रण रेखा मान कर व्यवस्थित होने का प्रयास करने लगा। एक भी फिर सोचा को भैया या अंकल बोल के व्यवहार बना लूं शायद काम आ जाए। पर समझ नहीं पा रहा था क्यों बुलाऊं!
फ्लाइट उड़ी, और मुझे झपकी आने लगी। इनको भी आने लगी और वो अपना पूरा नियंत्रण अपने शरीर का छोड़ चुके थे। पैर फैल कर पूरे तरीके से मेरे अधिकार क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे थे और बाकी एक चौथाई तो कब्जे में था ही। अब आर्म रेस्ट भी उन्हीं के कब्जे में था। ये बात अलग है कि हल्की शरीर होने के कारण मुझे विशेष समस्या न थी पर शारीरिक संपर्क से बहुत खेदजनक स्थिति पैदा हो रही थी। और यह आम संपर्क नहीं था, यह घुसपैठ वाला संपर्क था। मतलब वो वापस एक तिहाई हिस्से पर अपना अधिकार चाहते थे। मैने भी अपने पैर से पूरी ताकत लगाकर उनको आगे बढ़ने से रोक रखा था।
मैं ठंडी सैंडविच का इंतजार कर रहा था, इतने में होस्टेस ने कहा, ठंडी सैंडविच नहीं है और कॉर्न चिप्स, अनार का जूस और बेरी मिक्स थमा गई।
मैने सोचा लाओ ३० मिनट तो इसी में पास हो जाएंगे। मैं ट्रे टेबल खोली और सब कुछ सजा लिया। वो व्यक्ति अब पूरी मजबूती से आर्म रेस्ट पर हाथ टिकाए सोने का छद्म नाटक कर रहा था।
इसी बीच एक किशमिश उनके पैर पर गिर गई और वो पैर मेरे क्षेत्र में ही था। अब मुझे समझ नहीं रहा कि क्या करूं? हाथ से हटा दूं? नहीं मै क्यों हटाऊं। अगर इसने देखा और मुझे कुछ बोला तो। मैने जल्दी से बचा खुचा निबटाया और अपनी आँख बंद कर ली। १५ मिनिट बाद मुझे अपने पैरों पर दबाव कम लगा तो मैने आंखे खोली तो देखा किशमिश वहां नहीं थी और पैर भी। मैने जल्दी से रिक्त स्थान की पूर्ति करते हुए अपने पैर वहां जमा दिए और आँखें बंद कर ली। अब जब आँखें खुली तो लैंडिंग की तैयारी हो रही थी। ये जनाब आगे की तरफ झुके हुए अजीब सी मुद्रा में थे। मैने कहा अंकल, फ्लाइट रुक जाने दो तब उठ लेना। अरे मेरी कनेक्टिंग फ्लाइट है। ओके, उसके लिए भी फ्लाइट रुकने का इंतजार करना होगा।
09/09/2025
सफ़र में हूं। एक महिला अपनी मां से फ़ोन पर बात कर रही है। भाषा इतनी नकारात्मक कि लगता है आज भाइयों को लड़ाकर ही छोड़ेगी। हसबैंड बगल में बैठा हुआ आंख मार रहा है। फिर हसबैंड से अपने पिता से बात कराई। वो लड़की वहां, पैसा, कलेश और न जाने क्या-क्या बातें करती रही।
लड़की की उम्र 25 के करीब होगी।
मैं सोचता रहा कि आदमी कितना चालाक, फरेबी और झूठा बनेगा। इसी को लोग समझदारी समझ बैठे हैं।
अपना जब झूठ और फरेब करता है तो कितना दुख होता है।
ख़ैर, लड़की अपने सिरहाने अध्यात्म की किताबें भी रखी हुई हैं।
ग़ज़ब चल रहा है।
08/09/2025
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