मेरा सम्मान मेरी कॉंग्रेस
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02/06/2025
जननायक श्री राहुल गांधी जी भोपाल में मध्यप्रदेश कांग्रेस के "संगठन सृजन अभियान" का शुभारंभ करेंगे।
🗓️3 जून 2025
📍भोपाल
हैलो, मैं पप्पू ..
नहीं, चौकिये मत। कोई तंज नही, कोई तल्खी नही। जब आपने ये खूबसूरत नाम दिया है, मुझे क्या एतराज हो सकता है।
सबकी जिंदगी में कोई पप्पू, राजू, बबलू, गुड्डू, बिल्लू तो जरूर होता है। जो बेहद करीब होता है। आप उससे खुलकर मिलते हैं, डरते नहीं। मैं भी वही हूँ..
भाई, भतीजा, भांजा, दोस्त।
पप्पू, राजू, बबलू और गुड्डू..
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वो जो आपको हंसाते हैं, बतियाते हैं और संभालते हैं। आपकी खुशियों को, और आपके बिखराव को, जब अकेले न सँभल रहा हो। और आप हाथ थामने वाला, कंधे दबाने वाला तलाश रहे हों, पहली कॉल किसे लगाते है?
पप्पू? गुड्डू? राजू.???
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यकीन कीजिये, जब से होश संभाला है, बस संभालता आया हूँ। उम्र नही थी, छोटा था.. कोई दस साल का। घर पर दो अंकल के साथ बैडमिंटन खेलता था।
एक सुबह उन अंकल के हाथ मे रैकेट नही, मशीनगन थी। दादी को मेरे घर मे, दोनों अंकल ने मार डाला।
हादसों को सम्भालने का मेरा सफर तब से शुरू हुआ। अपनों से घाव खाना, सहना, माफ़ कर, मुस्कुराकर आगे बढ़ना, यही सीखा है।
पर तब पिता ने समेटा, सम्भाला।
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सफदरजंग रोड के उस घर मे रहना, हर रोज घायल करता था। हमने घर बदल लिया। दस जनपथ। हम अब प्रधानमंत्री के बच्चे थे, बेहद सुरक्षित। फिर एक दिन पिता लौटे।
सफेद चादर से ढंके।
हम उनका आखिरी चेहरा भी नही देख सके।
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मां टूटी हुई थी। हमने सम्हाला, सम्बल दिया।
हमारा जिंदा रहना मां की सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। हम घर मे बन्द रहे, सारी सुविधायें, लेकिन जेल.. !!
आप लॉकडाउन में जैसे कुछ महीने, बेबस से घर मे बन्द थे। अपनी उम्र के नाजुक बरस, हम उसी लॉकडाउन में रहे।
बाहर निकलने पर आपको डंडों का डर था, हमे गोलियों और बम का। आप पूछेंगे की भला हमे कोई क्यों मारेगा। तो मां पूछती- दादी या पापा को क्यो मारे गये ??
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हम नही चाहते थे की माँ राजनीति से जुड़े। मां नही चाहती थी, की हम राजनीति से जुड़ें। पर इस परिवार में जन्म की कुछ मजबूरियां हैं।
हम पुरखों की विरासत को मिट्टी में मिलते नही देख सकते। विरासत, ये देश है, .. जो नफरत में उलझा था, कांग्रेस कमजोर थी।
काग्रेस राजीव की विरासत थी। तो मां ने जिम्मेदारी ली। टूटी फूटी कांग्रेस एक फिर सत्ता में आई। मां को थामे रखने मैं भी आया। राजकुमार की तरह स्वागत हुआ। मोस्ट इलिजबल बैचलर, फ्यूचर पीएम, और जाने क्या क्या कहा आप लोगो ने..
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पांच साल बाद हम फिर जीते। तो मौका था, मंत्री बनने का, प्रधानमंत्री बनने का। पर मुझे रुचि न थी।
सत्ता जहर है, और पीने वाले हमारे अपनो की लाशें, हमारे आंगन में हम गिनते रहे हैं।
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दस साल बाद हम चुनाव हारे। पहले पहल लगा कि महज एक चुनाव की हार है। पर इस बार कुछ अलग था। सिर्फ सरकार नही बदली थी। यह देश बदला था, बड़ी तेजी से...
इसका रंग, इसकी तासीर, इसकी दिशा.. राजनीति मे भाषा नही, पूरी व्यवस्था ही बदलने लगी। यह महज राजनीति, कुर्सियों की उठापटक नही थी। यह बेहद खतरनाक खेल था।
जो जारी है, जिसका निशाना, लोकतन्त्र है, आजाद जिंदगी है, बराबरी और मोहब्बत का फलसफा है..
तो इसलिए निशाने पर मैं हूँ, आप भी हैं।
दरअसल वो सब निशाने पर हैैंं, जिनका फलसफा मोहब्बत और बराबरी है।
और मुझसे ज्यादा... मेरा सरनेम, उनकी राह का रोड़ा है। मेरा होना, जिन्दा... और सामने खड़ा, उनका भय है।
खड़ा रहना मेरी जिम्मेदारी है, और यही मेरी ताकत भी।
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मानता हूँ मैंने चुनाव हारे हैं। एक बड़ी, बेहद बड़ी ताकत के हाथों मेरी हार हो रही है। बार बार हो रही है। पर मुझे हराने वाली ये ताकत, भाजपा नही है, ये सरकार नही है।
हराने वाली ताकत, ये जनता है।
आप हैं, इस देश का युवा है, छात्र, व्यापारी, किसान , कर्मचारी है। जो अपनी भूमिका, कर्म, आदर्श, इतिहास, अपनी खुद की जरूरत और ईश्वर प्रदत्त जिम्मेदारियों से मुंह फेरे बैठा है।
वो हिंदुस्तानी तो नफरत के आगोश मे गांधी, नेहरू, बुध्द, नानक और निजामुद्दीन को नकार चुके है। जिनके दिल मे अल्लाह के बन्दों से निजात पाने का ख्वाब चलता है।
जो "फाइनल सॉल्यूशन" के सपने देखता है। जिसे नफरत और खून की नदी के पार, समृद्ध भारत का नक्शा बेचा गया है। समाज के विभाजन और दिलों की टूट पर..
खेलता, किलकारी भरता,
बिखरता हुआ भारत है।
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और मेरी नियति.. बिखरे हुए को सम्भालना है, हंसना है, दिलासा देना है।
जोड़ना है। भूलना, माफ करना, मुस्कुराना, हाथ थामना, गले लगाना, बस यही आता है। यही मेरी राजनीति है। आपको यह कमजोरी लगे, तो ठीक है। आपका फैसला सर माथे..
पर जब आप नफरत कर कर के थक जाएं, दिल डूबने लगे, तो घबराएं नही।
मैं यही हूँ।
आसपास ही चल रहा हूं, जोड़ रहा हूं।
जब जी करे? आ जाऐं।
या एक काल लगाएं और कहें;
हैलो.. पप्पू ??
मणिपुर में जिन दो महिलाओं को निर्वस्त्र परेड करवाया गया उन में से एक का पति असम रेजिमेंट में सूबेदार था उसने कारगिल युद्ध में देश की रक्षा की अब कहाँ गए वो फ़र्ज़ी राष्ट्रभक्त?
17/07/2023
वाह रे मेरे देश!!
वाह !! 4 बच्चों की माँ ,एक मुस्लिम महिला पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत पहुँच जाती है , अपने से कई साल छोटे पब्जी वाले प्रेमी से मिलने !!जबकि जितना मुझे जानकारी है पब्जी 2020 में भारत मे बेन हो गया था ।।
मीडिया और एक विशेष वर्ग उसको हीरो हीरोइन बना देता है ,वीरजारा की कहानी बना देता है !!
सब एक ही भेड़ चाल में चल रहे है। पत्रकार दिन भर माइक ले कर हीरोइन का इंटरव्यू ले रहे है । पुलिस , खुफिया एजेंसी raw ,cbi ,, सीमा सुरक्षा वाले , बड़े बड़े अधिकारी , देशप्रेमी , लीडर कहाँ है, ??
सीमा हैदर खुद को 5वी पास बताती है , पर्दे में रहने वाली महिला को इतना कॉन्फिडेंस कैसे की चार बच्चों को साथ मे ले कर चल दी?? इतनी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा दे दिया एक साधारण महिला ने??
बताया जा रहा है कि पब्जी की शौकीन सीमा के पास 3 मोबाइल और कई सिम भी है ।आखिर 4 बच्चों कि माँ को इतना समय और जानकारी कैसे मिल जाती होगी ??
क्या सीमा के पास 5 देशों के पासपोर्ट है ??आखिर किस अमीर ख़ानदान और बिजनेस से सम्बंधित थी सीमा की उसके गयाब होने पर भी उसकी खोजबीन नहीं हुई??
फंराटेदार इंगलिश के साथ हिंदी भी बोलना, भाषा मे उर्दू लफ्जों का बहुत कम प्रयोग होना ।
सीमा ने एक इंटरव्यू में नमाज के कलमे तक नहीं सुना पायी ,ना ही वो ज्यादा नमाज पढ़ती है ये उसका कहना है ।
आते ही एक दम ठेठ हिंदुस्तानी नारी जैसे ,साड़ी, नमस्ते, कैमरे के सामने बिंदास अंदाज , दूसरे देश , दूसरे परवेश में आने के बाद भी कोई झिझक नहीं कोई डर नहीं ?? आखिर कैसे??
जिस देश मे भारत और हिन्दू धर्म के खिलाफ़ इतनी नफरत बोयी जाती है वहाँ से आकर एक दम राधे राधे नाम जपना, तुलसी जी को पानी देना, सिंदूर, मंगसूत्र को अपनाना गले नहीं उतर रहा।।
बार बार भारत नागरिकता की मांग करना जैसे कि यहाँ की नागरिकता रेवड़ी मूगफली हो ।
आज के आधुनिक दौर में जहाँ शक्ल सूरत , पैसा समाजिक पहचान सबसे जरूरी है तो सचिन नाम का एक मामूली सा लड़के पर कौन से हीरे जवाहरात की खदान इन मैडम को दिखी की लाखों खर्च कर एक झोपड़ी में पहुच गयी ।
मीडिया इंटरव्यू में ये सचिन इतना खोया खोया और डरा सहमा क्यों नजर आता है, इंटरव्यू के समय क्यों सीमा की नजर सचिन पर होती है ??
सीमा के कथित पति का एक वीडयो शोषलमीडिया पर तैर रहा है जो बिल्कुल बनावटी लग रहा है ।
कई महान लोग उत्सव मना रहे है कि एक मुस्लिम महिला हिन्दू बन गयी , खुशी मनाई जा रही है कि 5 हिन्दू बन गये !! मूर्खता की चरम देखिये की सीमा को भारत की नागरिकता दिलाने के लिये शोशल मीडिया पर अभियान तक छेड़ दिया गया है ।।
मेरा सवाल सीमा हैदर के स्वागत करने वालो से क्या आपने कभी मानव बम का नाम सुना है ??
2 साल के बच्चों को भी जासूसी के लिये प्रयोग किया जा सकता है कभी ये ख्याल आया दिमाग मे?
यदि सीमा प्यार में सचमुच है तो ठीक है उनकी अपनी स्वतंत्रता है लेकिन नियम नियम होते है ।
और अगर सीमा किसी विशेष कारण भारत मे दाखिल हुई तो आप सिर्फ एक सीमा को देख रहे हो मैं 5 जासूसों , 5 खतरों को देख रहा हूं !!
09/07/2023
मध्यप्रदेश शासन के पूर्व केविनेट मंत्री राघौगढ़ विधायक जन नायक मृदुभाषी जनता के सुख दुःख में सदेव तत्पर साथ रहने वाले लोकप्रिये नेता श्री जयवर्धन सिंह जी को जन्म दिन की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई
जयवर्धन सिंह मप्र कांग्रेस
Digvijaya singh
Rahul Gandhi
Priyanka Gandhi Vadra
Congress Madhyapradesh
06/07/2023
स्कूटर था डिजिटल कैमरा भी था स्टेशन पर चाय की दुकान भी थी पेरिस घूमने के पैसे भी थे M A की डिग्री भी थी शरीर भी हट्टा कट्टा था 4 भाई थे गुजरात जैसा प्रगति शील प्रदेश था फिर भी मां दूसरों के घरों में बर्तन मांजती थी मतलब साफ़ हे ...........?
नफरत के बाजार में
राहुल जी मोहब्बत की दुकान ❤️
जी
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