सरकारी तंत्र में जैसे ही कोई फंड रिलीज होता है तो उसके हिस्सेदारी तय हो जाती है।
इसीलिए कहा जाता है : -
कद्दू कटेगा तो सब में बटेगा।
लेकिन यह वाला कद्दू मेरा निजी है😜😅😜😅
Rahul Singh
To promote RTI act. Empowering the common man. Promote transparency, making Government officials acc
15/01/2026
भारतीय न्याय प्रणाली: जहाँ इंतज़ार में ज़िंदगी हार जाती है
1️⃣ 1988
31st May 1988
वी॰ एम॰ सौदागर, रेलवे के TTE, Dadar Nagpur Express, पर आरोप लगे कि उन्होंने यात्रियों से ₹50 रिश्वत ली। विभागीय जांच शुरू हुई। Vigilance team ने कहा कि 3 पैसेंजर से 50 रुपये लिए और उनमें से एक पैसेंजर को ₹18 वापस नहीं लौटाया। हालांकि बाद में inquiry के दौरान दो पैसेंजर ने कहा कि TTE ने अगले डब्बे से सबका टिकट बनाने के बाद रसीद काटने की बात कही थी।
2️⃣ 1996
8 साल बाद विभागीय जांच के आधार पर सौदागर को सेवा से निलंबित/निष्कासित कर दिया गया।
3️⃣ 2002
14 साल बाद Central Administrative Tribunal (CAT) ने फैसला दिया — निष्कासन अनुचित है; पुनर्स्थापना और पेंशन सहित सभी फायदे देने को कहा।
4️⃣ 2002 – 2017
सरकार ने CAT के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी — और मामला 15 साल तक हाईकोर्ट में अटका रहा।
5️⃣ 2017
हाईकोर्ट ने CAT का आदेश पलट दिया —
अब अदालत ने सौदागर के निष्कासन को सही माना।
6️⃣ इस बीच…
सौदागर की मृत्यु हो गई —
यह लंबी कानूनी लड़ाई जारी रहने के बीच हुई; वे उस फैसले को स्वयं नहीं देख पाए। परिवार वाले न्याय की लड़ाई को सुप्रिम कोर्ट ले गए।
7️⃣ 2025 (27 October 2025)
सुप्रीम कोर्ट ने 37 वर्षों बाद फैसला सुनाया:
✔ CAT का आदेश फिर लागू किया गया।
✔ रेलवे को सौदागर के कानूनन वारिसों को सभी पेंशन/सेवा लाभ और बकाया दिए जाने का निर्देश दिया गया।
✔ कोर्ट ने कहा कि पुराने निष्कासन का कोई ध्रुव प्रमाण नहीं है। आरोप साबित नहीं हुए।
बहरहाल सुप्रिम कोर्ट को लख-लख बधाई ₹50 की रिश्वत का मसला आख़िरकार 37 साल में हल कर दिया गया। 🙏🏼🫡
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