13/12/2025
साथियो और मित्रों,
शोषण, उत्पीड़न, भेदभाव, घृणा और हिंसा के विरुद्ध समाज और जनता की मुक्ति के साथ एक समाजवादी समाज के निर्माण के उद्देश्य से २६ दिसंबर १९२५ को भारत के स्वतंत्रताकामी और क्रांतिकारी संगठनों एवं व्यक्तियों का अखिल भारतीय सम्मेलन कानपुर शहर में आयोजित हुआ, जिसमें इन क्रांतिकारियों ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया।
दीर्घकालीन संघर्ष के माध्यम से भारत को एक संप्रभु (पूर्ण प्रभुत्व संपन्न), समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित करने तथा इसके सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; स्थिति और अवसर की समानता; और उनके बीच व्यक्ति की गरिमा, एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाले बंधुत्व को बढ़ावा देने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ असीम त्याग और आत्मबलिदान के सौ वर्षों की यात्रा तय करने वाली पार्टी है भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी।
आजादी के संघर्ष के बिच ओडिशा में छात्र और किसान आंदोलनों के साथ-साथ ब्रिटिश औपनिवेशिक विभाजन की सभी चालों को विफल करते हुए, राजे-रजवाड़ों के अधीन ५६५ से अधिक रियासतों में से कम्युनिस्टों के निर्भीक और रोमांचकारी संघर्ष के जरिए सबसे पहले नीलगिरि को राजशाही के स्वामित्व से मुक्त कर भारत में सम्मिलित कराया गया। इसके बाद अधिकांश राजे-रजवाड़ों के अधीन राज्यों के जनसाधारण को लेकर चले जनआंदोलनों और संघर्षों के माध्यम से उन्हें भारत में शामिल किया गया।
“हल जिसका, जमीन उसकी” के संघर्ष के तहत बटाईदारों को भूमि का स्वामित्व दिलाने में सीपीआई की ऐतिहासिक भूमिका ने भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को गति प्रदान की है।
पार्टी का शताब्दी समारोह गांधी स्मृति भवन, बालेश्वर में दिनांक १८ दिसंबर २०२५ को आयोजित किया जाएगा। त्याग और आत्मबलिदान का उदाहरण प्रस्तुत करने वाले जन आंदोलनों और नेतृत्वकारी साथियों को स्मरण और सम्मान के साथ, शोषण, उत्पीड़न, भेदभाव, घृणा और हिंसा-मुक्त नए समाज के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लिया जाएगा।
बालेश्वर, मयूरभंज और भद्रक जिलों से आने वाले साथी १८/१२/२०२५ को पूर्वाह्न १० बजे बालेश्वर स्टेशन से शोभायात्रा निकालेंगे। ११ बजे गांधी स्मृति भवन परिसर में शहीद पीठों से लाई गई क्रांतिकारी संघर्ष की मशाल यात्रियों से ग्रहण की जाएगी, इसके बाद पार्टी का क्रांतिकारी लाल झंडा फहराया जाएगा।
१८ दिसेम्बर ११:३० बजे से शताब्दी समारोह में त्याग और आत्मबलिदान की गाथाओं पर आधारित स्मारिका का लोकार्पण होगा और अधिवेशन प्रारंभ होगा। इस क्रांति को गति देने वाले साथियों के परिवारों को सम्मानित किया जाएगा।
इसके पश्चात क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक संकल्प लिया जाएगा।
अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का अनुरोध।

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