Sharab band karke kya Bihar ko suraksh*t bana diya gaya?
Bihar mein sharabbandi ko “samaj sudhar” ka naam diya gaya tha. Lekin aaj ground reality kya hai?
Aaj yuvaon ke haath mein rozgaar nahi, balki nasha pahunch raha hai. G***a, charas, he**in jaise zehar khule aam ghoom rahe hain. Illegal hathiyaar market mein mil rahe hain. Din-dahaade goli chal rahi hai.
To sawal seedha hai —
Sharab band hui ya sirf legal dukaan band hui aur black market ko khula chhod diya gaya?
Sarkar ko jawab dena hoga:
❓ Drugs aur illegal arms par itni dheel kyon?
❓ Law & Order par itna kamzor control kyon?
❓ Yuvaon ko sudharne ke naam par unhe nasha aur apradh ki taraf dhakelne wali sthiti kyon?
Yeh rajneetik mudda nahi, Bihar ke bhavishya ka sawal hai.
Agar policy fail ho rahi hai, to use maanne ki himmat bhi honi chahiye.
Hum sirf itna chahte hain —
Suraksh*t Bihar, Nasha-mukt Yuva, aur Mazboot Kanoon Vyavastha.
Satya Kali Voice of Truth
Satya The Kali Voice of Truth – “Sirf aur Sirf Such”
A digital platform dedicated to truth, logic, and the voices that matter. College, Patna .
We uncover stories ignored by the mainstream — stories of people, society, and justice.
🔹 Unbiased • Fearless • People-centric I am an Architect in DevOps with over 10 years of experience in the IT industry. I hold a Bachelor of Engineering in Computer Science from Nagpur University , Did Secondary in Science fro A.N. My professional journey has been dedicated to building reliable, scalable, and s
सादर आमंत्रण
आपको यह जानकर अत्यंत हर्ष होगा कि
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह त्रि-दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट
का आयोजन दिनांक 24 जनवरी 2026 से 26 जनवरी 2026 तक किया जा रहा है।
इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं में खेल भावना, अनुशासन तथा राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रोत्साहित करना है।
द्वितीय सेमीफाइनल:
नासरीगंज बनाम डालमियानगर (25 जनवरी 2026)
फाइनल मैच:
26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस)
आपकी गरिमामयी उपस्थिति से यह आयोजन और भी सफल एवं प्रेरणादायक बनेगा।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि सपरिवार पधारकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करें।
धन्यवाद सहित,
🙏 भवदीय
आदर्श फुटबॉल क्लब, दरिहट
20/01/2026
Awesome... respect your country, respect your people.. ❤️💕🙏
आप सोन नदी को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं…
आज सोन नदी की हालत बेहद चिंताजनक हो चुकी है। जिस तरह से अंधाधुंध बालू निकासी की जा रही है, वह केवल नदी ही नहीं, बल्कि शाहाबाद और मगध – दोनों क्षेत्रों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। इसके अलावा, बालू का अवैध भंडारण पहाड़ों की तरह किया जा रहा है, जो आने वाले समय में और भी विनाशकारी साबित हो सकता है।
आइए, हम और आप मिलकर सोचें —
हम अपने भविष्य को क्या दे रहे हैं?
आज से सिर्फ 10 साल पहले, हमारे गाँवों में पानी की परत 40 फीट पर मिल जाती थी। पानी साफ, मीठा और स्वास्थ्य के लिए उत्तम था।
आज स्थिति यह है कि:
पानी की गुणवत्ता पूरी तरह खराब हो चुकी है (TDS 300+ हो चुका है)
पानी 60 फीट से भी नीचे मिल रहा है
गर्मियों में चापाकल सूख जाते हैं
हालात डरावने हो चुके हैं।
हवा और पानी — दोनों प्रदूषित हो चुके हैं।
इन्हीं कारणों से आज हमारे और आपके घरों में थायराइड, लीवर की बीमारियाँ और कई अन्य गंभीर रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।
हमारे पूर्वज सोन नदी के किनारे इसलिए बसे थे क्योंकि प्रकृति हमारे साथ थी।
यह नदी सिर्फ पानी नहीं, हमारे जीवन की आधारशिला है।
जो बालू कभी 200–500 रुपये में आसानी से मिल जाती थी, आज वही बालू सोन नदी के किनारे बसे गाँवों में भी 4000 रुपये से अधिक, वह भी काली बाज़ारी के ज़रिये, एक ट्रैक्टर में खरीदनी पड़ रही है।
हमसे हमारी सोन छीन ली गई है।
हमसे हमारे अधिकार छीन लिए गए हैं।
यकीन मानिए, जो हाल आज झारखंड में खनन के कारण हो रहा है, उससे कहीं ज़्यादा भयावह स्थिति यहाँ बनने वाली है।
जब भी सरकार द्वारा बालू खनन चालू किया जाता है:
आम जनता परेशान होती है
100% ट्रैफिक जाम रहता है
न पैदल चलने की जगह बचती है, न साइकिल चलाने की
70 सालों में बनी सड़कें और इमारतें चंद महीनों में ध्वस्त हो जाती हैं
अगर इसी तरह सोन नदी से बालू निकाली जाती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी ज़मीन छोड़कर कहीं और ठिकाना ढूँढना पड़ेगा।
🙏 कृपया अपनी आवाज़ बुलंद करें।
🌊 Save the Sone.
🌱 Save the Future
Matter is about how you are looking at the subject.
Hahaha, Great 👍! Congratulations Mr Trump..
Muje v prize chiye.. :(
“आपको ‘हिन्दू राष्ट्र’ चाहिए… लेकिन याद रखिए, देश को टुकड़ों में बाँटने के जो बीज आज बोए जा रहे हैं, उनकी फसल काटना बहुत महँगा सौदा साबित होगा।
आज़ादी की लड़ाई के समय आप कहाँ थे? शुक्र मनाइए कि मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनाया; यदि बाबा साहेब अम्बेडकर जैसे लोग भी अपना अलग राष्ट्र चाहते, तो आप क्या कर लेते?
हिन्दू सिर्फ कुछ लोग नहीं हैं—बाकी दलित और ओबीसी क्या हिन्दू नहीं कहलाते?
जिस तरह भारतीय राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है, मुझे डर है कि कहीं आप फिर से इस देश को टुकड़ों में बाँटने वाले बीज न बो दें।
संसद में 10 घंटे बैठकर किसान, युवा, स्वास्थ्य—इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा तक नहीं होती।
क्या आपको सच में लगता है कि हम सब अनजान या मूर्ख हैं?”
__Er Chandan kr Bhagat
“Today we stand together—India and Pakistan—mourning the innocent who lost their lives to terror. Humanity suffers, not nations.
A tribute to the children, mothers, fathers, and families who became victims of terror in India and Pakistan. May their souls rest in peace.
Back-to-Back Terror Strikes: India on 10th Nov, Pakistan on 11th Nov 2025
आज हम सब भारी दिल से एक ऐसे दर्द की बात कर रहे हैं
जिसने न जाने कितने घरों की रोशनी छीन ली,
कितनी माँओं की गोद सूनी कर दी,
और कितने परिवारों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी—
आतंकी हमले।
भारत ने आतंकवाद का ज़हर कई बार झेला है—
26/11 जैसे ज़ख्म आज भी सीने में ताज़ा हैं,
पुलवामा जैसे हमले हमें हर पल याद दिलाते हैं
मुंबई, दिल्ली, कश्मीर, पंजाब…
और अब हाल ही में दिल्ली में हुआ हमला,
जिसने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया।
राजधानी की सड़कों पर गूँजी चीखें,
धुएँ और डर से भरी हवा,
और मासूमों पर बरपा गया कहर—
इन सबने भारत की आत्मा को गहरे सदमे में डाल दिया।
दिल्ली का यह हमला हमें याद दिलाता है
कि आतंकी किसी भी शहर, किसी भी परिवार,
किसी भी इंसान को निशाना बना सकते हैं…
लेकिन भारत की हिम्मत, एकता और हौसले को
कभी तोड़ नहीं सकते।
जब भी भारत की पवित्र धरती पर कोई आतंकी वारदात होती है,
दिल सिर्फ़ एक नागरिक का नहीं,
बल्कि एक इंसान का रोता है।
हर शहीद की शहादत,
हर बच्चे की चीख,
और हर परिवार के आँसू
हमारे दिल को चीर कर रख देते हैं।
हम उन सभी भाइयों–बहनों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं
जिन्होंने ऐसे कायराना हमलों में अपनी अनमोल जान गंवा दी।
दुख सिर्फ़ इस बात का नहीं कि वे चले गए—
दुख यह भी है कि उनके घर का चिराग बुझ गया,
उनकी हँसी खामोशी में बदल गई,
और समाज को एक बार फिर
भय और असुरक्षा के साये से गुज़रना पड़ा।
लेकिन एक सच्चाई हमेशा याद रखिए—
**आतंकी किसी देश से बड़े नहीं होते।
ना वो भारत से बड़े हैं, ना पाकिस्तान से।
आतंक की औकात इतनी नहीं कि मानवता को हरा सके।**
भारत और पाकिस्तान—दोनों देश मजबूत हैं,
दोनों की सेनाएँ बहादुर हैं,
और दोनों देशों के लोगों का असली सपना एक ही है—
सुख, शांति और चैन।
इसलिए—
नफरत नहीं, मोहब्बत को जगह दीजिए।
युद्ध नहीं, शांति को चुनिए।
खून नहीं, इंसानियत को बचाइए।
दोनो देशों के लोग शांति चाहते हैं,
सुरक्षा चाहते हैं,
और एक ऐसा भविष्य चाहते हैं
जहाँ बच्चे डर के साये में नहीं,
उम्मीद की रोशनी में जी सकें।
आइए मिलकर प्रण लें—
**हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
हम शांति का संदेश फैलाएँगे।
और हम आने वाली पीढ़ियों के लिए
एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और खुशहाल संसार छोड़कर जाएँगे।**
क्योंकि—
**आतंक का कोई मजहब/धर्म नहीं होता,
और इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती।**
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