05/08/2026
आज ठीक एक साल हो गया।
पांच अगस्त की वो सुबह मैं कभी नहीं भूल सकता — जब धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई आपदा ने कुछ ही पलों में इतना कुछ छीन लिया। आज, इस पहली बरसी पर, मैं धराली के अपने लोगों के बीच था — उन परिवारों के साथ जिन्होंने अपनों को खोया, अपना घर खोया, अपनी आजीविका खोई।
हमने आज दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। दो मिनट का मौन रखा, सोमेश्वर देवता की पूजा की, और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। ग्रामवासियों ने अपने बिछड़े अपनों की याद में 101 पौधे रोपे — मैंने भी उनके साथ एक देवदार का पौधा लगाया। यह पेड़ धराली की धरती में उतनी ही गहराई से जड़ें जमाएगा, जितनी गहराई से हमारी स्मृतियों में वे लोग हमेशा रहेंगे।
कल्प केदार मंदिर समिति और ग्रामवासियों ने मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भी रखा। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी पहले ही इस दिशा में हर संभव सहयोग का आश्वासन दे चुके हैं, और शासन से वार्ता के बाद यह कार्य शीघ्र शुरू होगा।
लेकिन आज का दिन सिर्फ स्मृतियों का दिन नहीं था।
बीते एक साल में, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के मार्गदर्शन में, हमने खुद को सिर्फ राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रखा। हमने कोशिश की कि हर प्रभावित परिवार का जीवन फिर से सामान्य बने — पुनर्वास, आवास सहायता, आजीविका की बहाली, कृषि-बागवानी को दोबारा गति, सड़क-बिजली-पानी की बहाली — हर मोर्चे पर काम हुआ। मुख्यमंत्री जी ने खुद सुनिश्चित किया कि कोई भी परिवार खुद को अकेला महसूस न करे, और उसी भरोसे के साथ हमने यह साल गुज़ारा।
धराली की त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी — यह हम सबके लिए एक गहरा भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण समय था। लेकिन आज जब मैं इन परिवारों की आंखों में देखता हूं, तो सिर्फ दुख नहीं, हिम्मत भी दिखती है। यह बरसी उसी साहस, धैर्य और संघर्ष को नमन करने का दिन है।
हमारा संकल्प सिर्फ पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं है। हम धराली को पहले से ज़्यादा सुरक्षित, सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं — नदी तटों की सुरक्षा से लेकर आजीविका के नए साधनों तक। जिला प्रशासन यह काम रुकने नहीं देगा, जब तक हर पात्र परिवार तक मदद न पहुंच जाए।
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