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Dr Raza Quadir
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It is by acts and not by ideas that people live
Roohani Utsav
Utsav
Path to Divine Love and Enlightenment.
The greatest of richness is the richness of the soul.
Eid Mubarak
Eid Mubarak
Eid Mubarak from
Rauza-e-Rasool ﷺ
Mubarak
Riyaz-ul-Jannah (ریاض الجنہ) Al-Masjid an-Nabawi के अंदर एक बहुत ही मुबारक जगह है।
क्या है Riyaz-ul-Jannah?
• यह जगह नबी ﷺ के मिंबर (Minbar) और घर/क़ब्र शरीफ़ के बीच में है।
• इसे “जन्नत का बाग़” कहा जाता है।
हदीस
Muhammad ﷺ ने फरमाया:
“मेरे घर और मेरे मिंबर के बीच की जगह जन्नत के बागों में से एक बाग है।”
(सहीह हदीस – Sahih al-Bukhari)
जबल-ए-रुमा I
जबल-ए-रुमा मदीना शरीफ में Mount Uhud (जबल-ए-उहुद) के पास एक छोटी पहाड़ी है। इसे इतिहास में “तीरंदाजों की पहाड़ी” भी कहा जाता है।
1️⃣ नाम का मतलब
अरबी में “रुमा / रुमात” का मतलब होता है तीर चलाने वाले (archers)।
इसलिए इसका नाम जबल-ए-रुमा पड़ा।
2️⃣ इस जगह की ऐतिहासिक घटना
सन 625 ईस्वी में यहां Battle of Uhud (ग़ज़वा-ए-उहुद) हुआ था।
• Prophet Muhammad ﷺ ने लगभग 50 तीरंदाजों को इस पहाड़ी पर खड़ा किया था।
• उन्हें आदेश दिया था कि किसी भी हालत में अपनी जगह न छोड़ना।
• लेकिन जब युद्ध में शुरू में मुसलमानों को जीत मिलती दिखाई दी तो कुछ तीरंदाज नीचे उतर आए।
3️⃣ क्या हुआ उसके बाद
इस मौके का फायदा उठाकर Khalid ibn al‑Walid (जो उस समय इस्लाम नहीं लाए थे) ने पीछे से हमला कर दिया।
इससे युद्ध का रुख बदल गया और मुसलमानों को नुकसान हुआ।
4️⃣ आज की स्थिति
आज भी यह पहाड़ी उहुद पहाड़ के सामने मौजूद है और लोग इसे तीरंदाजों की पहाड़ी के नाम से जानते हैं।
उमरा या ज़ियारत के लिए आने वाले लोग यहां जाते हैं और ग़ज़वा-ए-उहुद की घटना को याद करते हैं।
✅ संक्षेप में:
जबल-ए-रुमा वह जगह है जहां ग़ज़वा-ए-उहुद के समय नबी ﷺ ने तीरंदाजों को तैनात किया था।
बाग़-ए-मुस्तादिल I
स्थान: मदीना, सऊदी अरब। यह बगीचा पुराने मदीना के इलाके में है, जो नबी ﷺ के समय का है।
• इतिहास: जब नबी ﷺ मक्का से हिजरत कर मदीना पहुँचे, तो स्थानीय लोग उन्हें खुशी और सम्मान के साथ स्वागत करने के लिए तैयार थे। इसी क्षेत्र में बगीचा था, जहां लोग जमा होते और “Ahlan wa Sahlan ya Rasool Allah” जैसी खुशामदीद बातें कहते थे।
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विशेषताएँ
1. कुवा (Well / Bir Azaq):
• बगीचे में एक कुआँ था जिसे Bir Azaq या Well of the Prophet ﷺ कहते हैं।
• यह कुआँ लोगों के लिए पानी का स्रोत था।
• नबी ﷺ के समय, लोग यहाँ से पानी लेते थे और बगीचे में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह उपयोगी था।
2. सजावट और पेड़-पौधे:
• बगीचे में पेड़, फूल और हरियाली थी।
• यह बगीचा लोगों के मिलने और आराम करने की जगह भी था।
• नबी ﷺ के समय, लोग इस बगीचे में आकर खुशी और दुआओं के साथ स्वागत करते थे।
3. धार्मिक महत्व:
• यह जगह केवल सौंदर्य और विश्राम के लिए नहीं, बल्कि इस्लामी इतिहास और नबी ﷺ की यादों के कारण महत्वपूर्ण है।
• यहाँ का कुआँ और बगीचा आज भी धार्मिक यात्रियों के लिए एक ज़ियारा का स्थल है।
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लोकप्रिय कथा
• जब नबी ﷺ मदीना पहुँचे, तो बगीचे में लोग जमा हुए।
• बच्चों और महिलाओं ने उन्हें खुशी और सम्मान से घेरा।
• कुछ लोग dafli या ताल बजा कर जश्न मनाते थे, जबकि सभी दुआ और सलाम के साथ उनका स्वागत करते थे।
• यही वातावरण बगीचे और कुएँ को इतिहास में महत्वपूर्ण स्थल बनाता है।
गुम्बद-ए-ख़ज़रा
गुम्बद-ए-ख़ज़रा (गुम्बद-ए-सब्ज़) मदीना शरीफ़ में Masjid an-Nabawi की छत पर बना हुआ हरा गुम्बद है। इसी गुम्बद के नीचे Prophet Muhammad ﷺ का रौज़ा मुबारक है।
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