बिदर चेस क्लब से जुड़ें और अपने भविष्य को नई दिशा दें
https://youtu.be/_HS27RFsptM
Bidar District Chess Association द्वारा वर्ष 2008 से लगातार शतरंज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है तथा वर्ष 2012 से संगठित रूप से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्ष 2017 से सुबह से रात तक नियमित रूप से संचालित होने वाला बिदर चेस क्लब खिलाड़ियों को अभ्यास, अध्ययन और प्रतियोगी तैयारी के लिए उत्कृष्ट वातावरण प्रदान कर रहा है।
यहाँ खिलाड़ियों को:
नियमित चेस कोचिंग
चेस लाइब्रेरी की सुविधा
प्रतिदिन अभ्यास का अवसर
जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी
रेटिंग प्राप्त करने का मार्गदर्शन
उपलब्ध कराया जाता है।
शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता, एकाग्रता, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ाने का सशक्त माध्यम है। BidarChess.com के माध्यम से खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर नकद पुरस्कार, उपहार, चार पहिया वाहन, फ्लैट तथा रोजगार के अवसर जीत सकते हैं।
आज ही बिदर चेस क्लब से जुड़ें, नियमित अभ्यास करें, टूर्नामेंट खेलें और अपने जीवन को सफलता की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ।
"शतरंज खेलें, सोच को तेज़ बनाएं, और जीत को अपना लक्ष्य बनाएं!"
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चेन्नई युसीपी वॉइस न्युज
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17 Talukas: Alandur,Ambattur,Aminjikarai,Ayanavaram,Egmore,Guindy,Kolathur, Madhavaram,Maduravoyal,Mambalam,Mylapore,Perambur,Purasaiwalkam, Sholinganallur,Tondiarpet,Tiruvottiyur,Velachery.
13/05/2026
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🎯 टूर्नामेंट शुल्क: ₹1000
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📞 8748888103 विनय बिरादर
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सोना खरीदना बंद कीजिए, खाने का तेल, पेट्रोल,डीज़ल,गैस का इस्तेमाल कम किजिये से बेहतर बढोतरी करे
https://youtube.com/shorts/GsZa8JHkEcQ
सोना खरीदना बंद कीजिए।
खाद्य तेल, पेट्रोल, डीज़ल, गैस जैसी सीमित प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग कीजिए।
गरीब व्यक्ति तो पहले ही महंगाई के कारण सोना खरीद नहीं सकता।
वह तो अपनी रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुएँ भी मुश्किल से खरीद पाता है।
यदि सरकार अमीर वर्ग पर प्रभावी कर नीति लागू करे और अत्यधिक उपभोग को नियंत्रित करे,
तो संसाधनों का अधिक न्यायसंगत वितरण संभव है।
अच्छा शासन (Good Governance) का अर्थ केवल टैक्स वसूलना नहीं,
बल्कि ऐसी नीतियाँ बनाना है जो—
महंगाई को नियंत्रित करें,
प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करें,
गरीब और मध्यम वर्ग को राहत दें,
और आर्थिक असमानता को कम करें।
जब कुछ लोग असीमित मात्रा में संसाधनों का उपभोग करते हैं,
तो उसका भार अंततः आम नागरिक पर पड़ता है।
सही नीति यह होनी चाहिए कि विलासिता पर नियंत्रण हो,
और आवश्यक वस्तुएँ हर नागरिक की पहुँच में रहें।
सशक्त सरकार वह है जो केवल समस्याओं पर प्रतिक्रिया न दे,
बल्कि दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से समस्याओं को उत्पन्न होने से ही रोके।
— विनय बिरादार
Universe Citizen Party (UCP)
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#यूनिवर्स सिटीजन पार्टी (अध्यक्ष और वक्ता )
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10/05/2026
यूनिवर्स सिटीजन पार्टी (यूसीपी) के अध्यक्ष विनय बिरादार द्वारा दिनांक ( 1095740/116 ) 07 मई 2026 को महानगरपालिका अधिकारी, जिला बीदर को एक महत्वपूर्ण पत्र प्रस्तुत किया गया। इस पत्र का मुख्य उद्देश्य सरकारी संपत्तियों को पोस्टर, बैनर, झंडों और अन्य अवैध प्रचार सामग्री से होने वाले नुकसान से बचाना है।
मुख्य विषय :
पत्र में अनुरोध किया गया है कि:
सभी सरकारी खंभों पर बैनर और पोस्टर लगाने पर रोक लगाई जाए।
रैली, जुलूस, बारात आदि को सार्वजनिक सड़कों पर इस प्रकार संचालित किया जाए कि सरकारी संपत्ति को कोई नुकसान न हो।
सरकारी भवनों की दीवारें, कंपाउंड वॉल, टेलीफोन पोल, ट्रैफिक संकेत बोर्ड और बिजली के खंभे सुरक्षित रखे जाएँ।
झंडे, रस्सियाँ, पोस्टर और विज्ञापन सामग्री लगाने के लिए वैकल्पिक एवं सुरक्षित स्थान निर्धारित किए जाएँ।
पत्र में उल्लिखित प्रमुख चिंताएँ
पत्र के अनुसार, पोस्टर और बैनर लगाने के कारण निम्न समस्याएँ उत्पन्न होती हैं:
सरकारी संपत्ति की क्षति
बिजली और दूरसंचार सेवाओं में बाधा
ट्रैफिक संकेतों की दृश्यता में कमी
नगर की स्वच्छता और सौंदर्य पर प्रतिकूल प्रभाव
आम जनता और सरकारी कर्मचारियों को असुविधा
पुलिस और कानून की भूमिका
पत्र में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि:
कानून के अनुसार सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना दंडनीय अपराध है।
आवश्यकता होने पर पुलिस विभाग को भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा अन्य लागू कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई करनी चाहिए।
सभी विभागों का दायित्व है कि वे सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करते हुए कानून एवं व्यवस्था बनाए रखें।
यूसीपी की मांग
यूसीपी अध्यक्ष विनय बिरादार ने यह भी मांग की है कि:
अब तक हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवज़ा दिया जाए।
संबंधित विभाग त्वरित कार्रवाई कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।
सार्वजनिक प्रचार के लिए निर्धारित स्थानों की व्यवस्था की जाए।
सरकारी संपत्ति की रक्षा करना केवल प्रशासन का ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है।
— विनय बिरादार, अध्यक्ष, यूनिवर्स सिटीजन पार्टी (UCP)
“जनप्रतिनिधि कानून बनाते हैं, सरकारी विभाग उनका पालन करते है और शासन ठिक से चले इसपे नजर रखने का काम प्रतिनिधि करते है”
https://youtube.com/shorts/lkmn1bVkFm0
भारत का संविधान स्पष्ट कहता है कि देश और राज्यों का प्रशासन निर्वाचित सांसदों और विधायकों द्वारा नहीं, बल्कि संविधान, कानूनों और सरकारी विभागों द्वारा चलाया जाता है।
सांसद (MP) और विधायक (MLA) का मुख्य कार्य है:
* कानून बनाना,
* सरकारी विभाग के कार्यों पर नजर रखना ,
* समाज कि बेहतरी के लिए सरकारी विभाग द्वारा काम करवाना,
* और कानुन मे कमी है तो कानुनों मे बदलाव कर उन्हे लागु करवाना।
* शासन सरकारी विभाग चलाते है, लेकिन उन पर प्रतिनिधि नजर रखते है ।
* जनता प्रतिनिधी चुनती है बेहतर कानुन बनाने के लिए , अगर कानुन अच्छे है तो चुनाव कि जरुरत नही होनि चाहिए।
याद रखिए:
* सड़क बनाना, स्कूल चलाना, अस्पताल संचालित करना, सीमा सुरक्षा करना, कानून-व्यवस्था जैसे समाजीक जरुरत कार्य, सरकारी विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
* सीमा सुरक्षा → केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी।
* कानून-व्यवस्था → पुलिस की जिम्मेदारी।
* आपातकाल में → राष्ट्रपति (अध्यक्ष ) शासन लागू कर सकता है, पर सामान्य शासन हमेशा सरकारी विभाग के अनुसार ही चलता है।
सच्चाई यह है:
देश किसी व्यक्ति विशेष, नेता, सांसद या विधायक से नहीं चलता।
देश चलता है—
* कानूनों से,
* संस्थाओं से,
* और जनता की जागरूकता से।
जनता के लिए संदेश:
* नेताओं को भगवान मत बनाइए।
* उन्हें समाज के बेहतरी के लिए काम करने वाला जनसेवक समझिए।
* जब जनता अपने अधिकार और शासन व्यवस्था को समझेगी, तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत होगा।
“देश व्यक्तियों से नहीं, कानून से चलता है।”
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—
विनय बिरादार
राष्ट्रीय अध्यक्ष, यूनिवर्स सिटीजन पार्टी (UCP)
--
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09/05/2026
“जनप्रतिनिधि कानून बनाते हैं, सरकारी विभाग उनका पालन करते है और शासन ठिक से चले इसपे नजर रखने का काम प्रतिनिधि करते है”
भारत का संविधान स्पष्ट कहता है कि देश और राज्यों का प्रशासन निर्वाचित सांसदों और विधायकों द्वारा नहीं, बल्कि संविधान, कानूनों और सरकारी विभागों द्वारा चलाया जाता है।
सांसद (MP) और विधायक (MLA) का मुख्य कार्य है:
* कानून बनाना,
* सरकारी विभाग के कार्यों पर नजर रखना ,
* समाज कि बेहतरी के लिए सरकारी विभाग द्वारा काम करवाना,
* और कानुन मे कमी है तो कानुनों मे बदलाव कर उन्हे लागु करवाना।
* शासन सरकारी विभाग चलाते है, लेकिन उन पर प्रतिनिधि नजर रखते है ।
* जनता प्रतिनिधी चुनती है बेहतर कानुन बनाने के लिए , अगर कानुन अच्छे है तो चुनाव कि जरुरत नही होनि चाहिए।
याद रखिए:
* सड़क बनाना, स्कूल चलाना, अस्पताल संचालित करना, सीमा सुरक्षा करना, कानून-व्यवस्था जैसे समाजीक जरुरत कार्य, सरकारी विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
* सीमा सुरक्षा → केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी।
* कानून-व्यवस्था → पुलिस की जिम्मेदारी।
* आपातकाल में → राष्ट्रपति (अध्यक्ष ) शासन लागू कर सकता है, पर सामान्य शासन हमेशा सरकारी विभाग के अनुसार ही चलता है।
सच्चाई यह है:
देश किसी व्यक्ति विशेष, नेता, सांसद या विधायक से नहीं चलता।
देश चलता है—
* कानूनों से,
* संस्थाओं से,
* और जनता की जागरूकता से।
जनता के लिए संदेश:
* नेताओं को भगवान मत बनाइए।
* उन्हें समाज के बेहतरी के लिए काम करने वाला जनसेवक समझिए।
* जब जनता अपने अधिकार और शासन व्यवस्था को समझेगी, तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत होगा।
“देश व्यक्तियों से नहीं, कानून से चलता है।”
— विनय बिरादार
राष्ट्रीय अध्यक्ष, यूनिवर्स सिटीजन पार्टी (UCP)
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#सांसद #विधायक #राष्ट्रनिर्माण #शिक्षाकाअधिकार
#संवैधानिकज्ञान #राजनीतिकजागरूकता
#भारत
#देशकीआवाज
“2.5 लाख सैनिक बंगाल चुनाव में तैनात किए जा सकते हैं,
हजारों करोड़ रुपये चुनावों में खर्च किए जा सकते हैं,
लेकिन सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए
न समय है, न पैसा।
आखिर क्यों?
सीमा सुरक्षा किसी राज्य सरकार की नहीं, बल्कि केन्द्रीय सरकार की जिम्मेदारी होती है।
अगर देश की सीमाएँ सुरक्षित नहीं होंगी, तो देश के अंदर की राजनीति और चुनाव किस काम के?
जब चुनाव आते हैं, तब सुरक्षा बलों की भारी तैनाती संभव हो जाती है,
लेकिन सीमा पर लगातार हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए वही गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जाती?
देश की जनता को यह सवाल पूछने का पूरा अधिकार है कि —
क्या राष्ट्र सुरक्षा सिर्फ चुनावी भाषणों और नारों तक सीमित रह गई है?
क्या “राष्ट्रीय सुरक्षा” का मुद्दा केवल वोट लेने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है?
अगर हजारों करोड़ रुपये चुनावी व्यवस्थाओं पर खर्च हो सकते हैं,
तो सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए क्यों नहीं?
राष्ट्र पहले होना चाहिए, राजनीति बाद में।
सीमाएँ सुरक्षित होंगी, तभी देश सुरक्षित होगा।”
https://youtube.com/shorts/rKGeO1ZOQh0
--
विनय बिरादर ( अध्यक्ष ) जन नेता
18/04/2026
संविधान निर्माता के प्रश्न पर एक विचार :
“सही जानकारी का प्रसार होना चाहिए” —
इसी उद्देश्य के साथ यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या भारतीय संविधान के निर्माण को केवल एक ही व्यक्ति तक सीमित करना उचित है?
इतिहास के अनुसार, बाल गंगाधर तिलक ने 1895 में “स्वराज बिल” के माध्यम से भारत के लिए एक प्रारंभिक संवैधानिक ढांचा प्रस्तुत किया, जिसमें लगभग 113 अनुच्छेद बताए जाते हैं। यह भारत में संवैधानिक सोच की एक प्रारंभिक पहल मानी जाती है।
इसके बाद एम. एन. रॉय ने 1928 और 1944 में संवैधानिक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, जिसमें लगभग 13 अध्याय और 137 अनुच्छेदों का उल्लेख मिलता है।
फिर 1947 में बी. एन. राव ने संविधान का एक विस्तृत मसौदा तैयार किया, जिसमें लगभग 240 अनुच्छेद, 25 भाग और 13 अनुसूचियाँ शामिल थीं।
यह मसौदा आगे चलकर संविधान सभा के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बना।
स्वतंत्रता के बाद, संविधान सभा के तहत डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर और उनकी समिति के सदस्यों ने 1949 मे अंतिम मसौदा तैयार किया,
जिसमें 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ शामिल थीं।
* संविधान के मसौदे पर हस्ताक्षर के समय, डॉ. भीमराव आंबेडकर के हस्ताक्षर 29वें क्रम था।
* संविधान की सोच व निर्माण का कार्य आंबेडकर के जन्म से पहले ही शुरू हुई थी, तो संविधान निर्माता उन्हें कहना ठीक नहीं।
इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व उस समय संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया।
* नेतृत्व: डॉ. प्रसाद ने संविधान के निर्माण में सद्भाव, धैर्य व दूरदर्शिता का परिचय दिया।
* अंतिम भाषण: 26 नवंबर 1949 को, संविधान को अपनाने के दिन, उन्होंने अध्यक्ष के रूप में समापन भाषण दिया था।
* भूमिका: उनके मार्गदर्शन में ही संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के लिए सर्वोच्च कानून तैयार किया।
यह भी उल्लेख किया जाता है कि महात्मा गांधी ने संविधान निर्माण समिति के लिए डॉ. आंबेडकर के नाम का समर्थन किया था, जिससे उन्हें इस महत्वपूर्ण कार्य में भूमिका निभाने का अवसर मिला।
हालाँकि, यह समझना आवश्यक है कि संविधान निर्माण एक सामूहिक, संस्थागत और चरणबद्ध प्रक्रिया थी। इसमें अनेक व्यक्तियों और विचारों का योगदान रहा है। इसलिए किसी एक व्यक्ति को “संविधान का एकमात्र निर्माता” कहना एक सीमित दृष्टिकोण हो सकता है।
1950 से लेकर आज (2026) तक भारतीय संविधान में 100 से अधिक संशोधन किए जा चुके हैं, और वर्तमान में इसमें 448 अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ हैं। ये संशोधन संसद द्वारा समय-समय पर किए गए हैं, जिनमें विभिन्न सरकारों और दलों की भूमिका रही है।
आज के संदर्भ में एक प्रश्न उठाया जा सकता है—यदि संशोधन और अद्यतन को ही आधार माना जाए, तो क्या वर्तमान पदाधिकारियों जैसे अर्जुन राम मेघवाल या देश के राष्टपति द्रौपदी मुर्मू को भी “संविधान निर्माता” की श्रेणी में रखा जाना चाहिए?
यह एक विचारणीय विषय है, जिसका उत्तर तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रिया को समझते हुए ही दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष:
भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक सामूहिक राष्ट्रीय प्रयास का परिणाम है। इसमें अनेक महान व्यक्तित्वों का योगदान रहा है और सभी को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुख्य उद्देश्य:
“संविधान के निर्माण में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों के साथ न्याय हो।”
– विनय बिरादार ( जन नेता )
--
13/04/2026
👉
🇮🇳 यह प्रयास आगे चलकर भारत के आधुनिक संविधान की नींव बना।
🔗 अधिक जानकारी:
https://politicsforindia.com/2-making-of-the-indian-constitution-psir/
https://www.dailyexcelsior.com/a-peep-into-history-of-indian-constitution/ #:~:text=The%20first%20non%2Dofficial%20attempt,of%20the%20local%20legislative%20council.
Yes, Bal Gangadhar Tilak is widely recognized as the inspiration behind the first attempt to draft a constitution for India, known as the Constitution of India Bill (1895) (often referred to as the Swaraj Bill).
--
#भारत_का_इतिहास #तिलक #स्वराज #संविधान
#भारत
15/03/2026
प्रेस नोट
बिदर में एक मानसिक रोगी द्वारा चिकित्सीय लापरवाही का आरोप
https://khabaronline.top/news_week.php?view=69b65ff8104e2
कमलनगर / बिदर:
कमलनगर निवासी श्री गणेश कनाडे ने बिदर में प्रैक्टिस कर रही एक मनोचिकित्सक डॉक्टर के खिलाफ चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
श्री कनाडे के अनुसार, कई वर्ष पहले उन्हें एंग्जायटी और पैनिक अटैक की समस्या हुई थी, जिसके उपचार के लिए उन्होंने माइंड केयर हॉस्पिटल, बिदर का रुख किया। उपचार के दौरान उनकी मुलाकात डॉ. श्वेता कुन्निकेरी पाटिल से हुई, जो कथित रूप से सरकारी अस्पताल बिदर में भी सेवाएं दे रही हैं।
श्री कनाडे का कहना है कि शुरुआत में उन्हें उचित परामर्श और उपचार मिला। लेकिन समय के साथ उन्हें दी जाने वाली दवाओं से गंभीर साइड इफेक्ट्स होने लगे। उनका कहना है कि बाद में डॉक्टर ने एक अन्य निजी अस्पताल उटागे हॉस्पिटल में भी प्रैक्टिस शुरू की, जहां उन्होंने अपना इलाज जारी रखा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वे लगभग पांच वर्षों तक हर महीने एक बार नियमित रूप से अस्पताल जाते रहे और इस दौरान उन्होंने इलाज और दवाइयों पर लगभग ₹4 से ₹5 लाख तक खर्च किए।
श्री कनाडे का आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें दी गई दवाओं के सेवन के बाद कई गंभीर दुष्प्रभाव महसूस हुए। उनके अनुसार इनमें शामिल हैं:
• व्यवहार में अचानक बदलाव
• बच्चे जैसी बोलने और सोचने की स्थिति
• अस्थायी लकवे जैसे लक्षण
• मानसिक भ्रम
• चलने में कठिनाई
• चेहरे के भावों में बदलाव
• दूर की आवाजें असामान्य रूप से सुनाई देना
• अत्यधिक संदेह और बेचैनी
• काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
श्री कनाडे का कहना है कि शुरुआत में उन्हें लगा कि ये सभी समस्याएं उनकी बीमारी का हिस्सा हैं। लेकिन बाद में जब उन्होंने उस अस्पताल में उपचार बंद कर दिया और अन्य जगह पर परामर्श लिया, तब उन्हें एहसास हुआ कि इन समस्याओं का संबंध दी गई दवाओं से हो सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में इलाज बंद करने के बाद वे दोबारा काम करने में सक्षम हुए और दो वर्षों तक नौकरी भी की, जिसमें उन्हें प्रमोशन भी मिला।
श्री कनाडे ने चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
• उपचार प्रक्रिया की निष्पक्ष चिकित्सा जांच
• दी गई दवाओं की जांच
• इलाज पर खर्च हुई राशि की वापसी
• यदि लापरवाही साबित होती है तो उचित कार्रवाई
श्री कनाडे ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने पहले ही जिला स्वास्थ्य कार्यालय, बिदर तथा ड्रग्स कंट्रोलर विभाग में शिकायत दर्ज कराई है और वर्तमान में जांच के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि न्याय मिल सके और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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