Doon Library & Research Centre

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The Doon Library and Research Centre is an autonomous institution registered as a Society under the Societies Registration Act.

Photos from Doon Library & Research Centre's post 03/06/2026

शुक्रवार,5 जून 2026,
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र
आपको सादर आमंत्रित करता है

मीडिया और लोकतंत्र
उद्यमी पत्रकारिता एवं डिजिटल जन-परिसर

प्रो. अनुप कुमार का
एक व्याख्यान

शुक्रवार,5 जून 2026,
सायं 5:00 बजे
दून पुस्तकालय का सभागार

Photos from Doon Library & Research Centre's post 01/06/2026

बुधवार, 3 जून 2026

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून द्वारा 3 जून 2026 को एक सचित्र व्याख्यान आयोजित किया जा रहा है।

व्याख्यान का विषय है—“चार धाम यात्रा का बदलता पर्यटन स्वरूप: गंगा घाटी में बढ़ती चुनौतियाँ”।

इस व्याख्यान को पर्यावरण एवं हिमालय पर समझ रखने वाले स्वतंत्र पत्रकार संदीप गुसाईं प्रस्तुत करेंगे।

व्याख्यान में चार धाम यात्रा के बदलते स्वरूप, तीर्थाटन से पर्यटन की ओर बढ़ते रुझान, गंगा घाटी पर पड़ रहे पर्यावरणीय प्रभावों तथा क्षेत्र में उभरती चुनौतियों पर चर्चा होगी।

यह कार्यक्रम बुधवार, 3 जून 2026 को शाम 5:00 बजे दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के सभागार में होगा

Photos from Doon Library & Research Centre's post 01/06/2026

‘कॉम्बैट चकल्स’ पुस्तक का लोकार्पण : वर्दी के पीछे छिपे हास्य और मानवीय पक्ष की रोचक झलक

देहरादून,30 मई, 2026.दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र कीओर से आज शनिवार की सायं सेना के जीवन में हास्य, मित्रता और मानवीय संवेदनाओं को समर्पित पुस्तक ‘कॉम्बैट चकल्स : द लाइटर साइड ऑफ लाइफ इन यूनिफॉर्म’ के लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, साहित्य प्रेमियों, पाठकों तथा बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं ने भाग लिया।

पुस्तक का लोकार्पण राधा रतूड़ी, डॉ. संजीव चोपड़ा और अनिल रतूड़ी ने संयुक्त रूप से किया। रत्ना मनूचा द्वारा संपादित इस पुस्तक में 21 लघु कथाएं और 3 कविताएं शामिल हैं, जो सशस्त्र बलों के जीवन के हल्के-फुल्के, रोचक और हास्यपूर्ण अनुभवों को पाठकों के सामने प्रस्तुत करती हैं।
अपने स्वागत वक्तव्य में अनिल रतूड़ी ने कहा कि हास्य जीवन का सार है और पुस्तक की प्रत्येक रचना यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, हास्य मनुष्य के मनोबल को बनाए रखने और उसे ऊर्जा देने का कार्य करता है।

इसके बाद रत्ना मनूचा के संचालन में एक रोचक परिचर्चा आयोजित हुई, जिसमें पुस्तक के योगदानकर्ताओं एवं पूर्व सैन्य अधिकारियों ब्रिगेडियर स्टीव इस्माइल (एसएम), ब्रिगेडियर पी.पी. सिंह (एवीएसएम, वीएसएम) तथा कर्नल सी.एम.एस. कलाकोटी ने भाग लिया।

रत्ना मनुचा ने कहा कि यह पुस्तक इस बात का प्रमाण है कि सशस्त्र बल केवल कठिन परिस्थितियों का सामना ही नहीं करते, बल्कि उनके बीच मुस्कुराना और हंसना भी जानते हैं। परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने सेना के जीवन से जुड़े अनेक रोचक और हास्यपूर्ण प्रसंग साझा किए तथा बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी हास्य किस प्रकार तनाव को कम करने और साथियों के बीच आत्मीयता को मजबूत बनाने का कार्य करता है।

पुस्तक के लेखकों ने अपनी रचनाओं के पीछे की वास्तविक घटनाओं और प्रेरणाओं को भी साझा किया। इस दौरान सभागार में कई बार ठहाके गूंजे और श्रोताओं ने सैनिक जीवन के उस पक्ष को जाना, जो आमतौर पर नागरिक समाज की दृष्टि से ओझल रहता है।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण प्रश्नोत्तर और रैपिड फायर सत्र रहा, जिसने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। पूरे आयोजन में स्मृतियों, व्यंग्य, हास्य और प्रेरक अनुभवों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
रत्ना मनुचा ने कहा कि इस पुस्तक को संकलित करने का उद्देश्य युवाओं को सशस्त्र बलों के जीवन का एक अलग और मानवीय पक्ष दिखाना है। उन्होंने कहा कि सेना को सामान्यतः अनुशासन, शौर्य और बलिदान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन हास्य भी सैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने शिक्षकों और प्राध्यापकों से युवाओं को इस पुस्तक के अध्ययन के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

समापन वक्तव्य में डॉ. संजीव चोपड़ा ने सभी वक्ताओं और पैनल सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्होंने सेना में सेवा की है, वे जानते हैं कि कठिन भूभाग, प्रतिकूल मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी हास्य ही मनोबल को जीवित रखता है। उन्होंने हास्यपूर्ण अंदाज में कहा कि यदि सैनिक कठिन फील्ड पोस्टिंग और निरीक्षणों का सामना कर सकते हैं, तो हम सभी भी ट्रैफिक जाम और व्हाट्सऐप समूहों पर आने वाले संदेशों को सहजता से झेल सकते हैं।

कार्यक्रम का समापन पुस्तक हस्ताक्षर सत्र और अनौपचारिक संवाद के साथ हुआ। पूरे आयोजन के दौरान दून पुस्तकालय का वातावरण मुस्कुराहटों, आत्मीयता और सौहार्द से सराबोर रहा।

Photos from Doon Library & Research Centre's post 26/05/2026

दून पुस्तकालय में अध्ययनरत युवाओं को
वैदिक गणित पर महत्वपूर्ण सूत्र

देहरादून, 26 मई, 2026. दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून में आयोजित “वैदिक गणित” विषयक विशेष व्याख्यान में प्रसिद्ध गणित विशेषज्ञ डॉ. योगेश चांदना ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं व अध्ययनरत छात्रों को वैदिक गणित की उपयोगी एवं सरल तकनीकों से परिचित कराया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बैंक की व अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

अपने व्याख्यान में डॉ. चांदना ने बताया कि वैदिक गणित केवल गणनाओं को सरल और तीव्र बनाने का माध्यम ही नहीं, बल्कि यह मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और तार्किक क्षमता को भी विकसित करता है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में समय प्रबंधन और त्वरित समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण सूत्र एवं व्यावहारिक तकनीकें साझा कीं।

उन्होंने युवाओं से कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मबल, एकाग्रता, निरंतर अभ्यास, नई जानकारियाँ प्राप्त करने की जिज्ञासा तथा विषय के प्रति रुचि अत्यंत आवश्यक है। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने अनेक प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. चांदना ने सहज और प्रेरक ढंग से उत्तर दिया।

कार्यक्रम का प्रारम्भ दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डी.के. पाण्डे के स्वागत एवं परिचय वक्तव्य से हुआ। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय युवाओं के बौद्धिक विकास और मार्गदर्शन हेतु निरंतर ऐसे उपयोगी कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।

इस अवसर पर डॉ. पंकज नैथानी, चन्द्रशेखर तिवारी, कर्नल डिमरी, डॉ.लालता प्रसाद,सुंदर सिंह विष्ट सहित अनेक शिक्षाविद, साहित्यप्रेमी एवं युवा छात्र उपस्थित रहे।

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र ने भविष्य में भी युवाओं के लिए इस प्रकार के ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

Photos from Doon Library & Research Centre's post 26/05/2026

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र
आपको सादर आमंत्रित करता है

“कॉम्बैट चकल्स”
सेनाओं में हास्य प्रसंग

पुस्तक का लोकार्पण
संपादन एवं संकलन
रत्ना मनूचा

पुस्तक का लोकार्पण
एवं चर्चा

शनिवार, 30 मई 2026
सायं 5:00 बजे

दून पुस्तकालय का सभागार

23/05/2026

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र
प्रतियोगी परीक्षा के सभी उम्मीदवारों को
सादर आमंत्रित करता है

वैदिक गणित पर
डॉ. योगेश चांदना का एक व्याख्यान

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सभी युवा छात्रों के लिए यह एक उपयोगी सत्र साबित होगा

मंगलवार, 26 मई 2026,
प्रातः 11:00बजे से 1:00 बजे तक
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र का सभागार.

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Photos from Doon Library & Research Centre's post 19/05/2026

मनुष्यता की घनीभूत पीड़ा के कवि मंगलेश डबराल को याद किया गया

देहरादून,18 मई, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र तथा जन संस्कृति मंच द्वारा प्रख्यात कवि मंगलेश डबराल की स्मृति में आज दून लाइब्रेरी के सभागार में एक दिवसीय कार्यक्रम“ आवाज़ भी एक जगह “ का आयोजन किया गया। आयोजन के पहले सत्र में स्मृति, विस्थापन और प्रतिरोध” विषय पर विचार सत्र में वक्ताओं ने मंगलेश डबराल की कविताओं की विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। दूसरे सत्र में 20 कवियों ने अपनी कविताएँ पढ़ीं।

विचार सत्र में ‘ आलोचना’ के संपादक आशुतोष कुमार ने कहा कि मंगलेश डबराल की कविताओं में विस्थापन सिर्फ़ भौगोलिक विस्थापन नहीं बल्कि उनके यहाँ विस्थापन आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक है। उनके यहाँ विस्थापन अस्मितामूलक है।

उन्होंने कहा कि मंगलेश की कविताओं में पीड़ा, अकेलापन व्यक्तिगत नहीं है। यह मनुष्य की पीड़ा, मनुष्य का अकेलापन है। मंगलेश जी ने पहाड़ की जो रोमांटिक छवि को नये रूप में गढ़ कर पहाड़ का डिस्टोपिया रचा। उनकी कविताओं में साधारण में असाधारण, उत्पीड़ित में विद्रोह की संभावनाओं की खोज करती हैं।

उन्होंने मंगलेश डबराल की कविताओं को सामाजिक संवेदना की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया. कहा कि उनकी कविताओं के महत्व को समझना 80-90 के समय और उसके बदलाव को महसूस करना है।

मंगलेश डबराल की कविताओं में गीतात्मकता की चर्चा करते हुए कहा कि इसे ठीक से समझा नहीं गया। संगीत केवल ताल, धुन, लय नहीं है बल्कि वह मुझे पर्दों के पार ले जाती है। वहाँ जहाँ सच्चाई और मनुष्यता की खोज है।

अनुवादक-संपादक दिगंबर मंगलेश डबराल के गद्य की चर्चा करते हुए उनके यात्रा वृत्तांत, संस्मरण को काव्य मय बताया। उन्होंने कहा कि मंगलेश जी पूरे जीवन समाज की तल्ख़ सचाइयों से टकराते रहे।

समकालीन जनमत के संपादक रामजी राय ने ग़ालिब के हवाले से कहा कि कविता की परिणति संगीत हो जाना है। मंगलेश भाषा को संगीत के स्तर पर उठाने की कोशिश करते रहे। घनीभूत पीड़ा स्मृतियों में छायी रहती है और घनीभूत पीड़ा केवल अपनी पीड़ा नहीं हो सकती बल्कि हम सबकी पीड़ा होती है खामोश आवाज और संगीत की तरह बजते हुए पहुंचता है। घनीभूत पीड़ा निरंतर चोट से पैदा है। यह चोट निजी, अतीत, सार्वजनिक और वर्तमान की है। उन्होंने कहा कि मंगलेश की भाषा पारदर्शी है जिसमें आर में कविता आती है और पार में कथ्य होती है। उनकी कविता अमूर्तन की अवस्था में में भी विषय वस्तु ओझल नहीं होती।

विचार सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ आलोचक रविभूषण ने कहा कि मंगलेश की कविता शब्दों से निकलती-फैलती बहुआयामी ध्वनियाँ हैं। ध्वनियाँ कविता को सशक्त बनाती हैं। उनकी कविता में विस्थापन सांस्कृतिक है। ऋत्विक घटक का सिनेमा इसी सांस्कृतिक विस्थापन को दिखाती हैं। मंगलेश की कविताओं में संगीत, चित्रकला, सिनेमा सहित कई कलायें आकर जुड़ती हैं। उनके यहाँ स्मृति, विस्थापन और प्रतिरोध अलग-अलग नहीं एक साथ हैं।

विचार सत्र का संचालन युवा आलोचक प्रेमशंकर ने किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रतिरोध का सिनेमा के संयोजक संजय जोशी द्वारा निर्मित वीडियो दिखाया गया जिसमें मंगलेश डबराल अपनी सात कविताओं का पाठ किया।

आयोजन के दूसरे सत्र कविता पाठ में जन संस्कृति मंच मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वरिष्ठ रंगकर्मी व कवि जहूर आलम की अध्यक्षता में वरिष्ठ कवि इव्वार रब्बी, राजेश सकलानी, कल्पना पंत, प्रतिभा कटियार, रेखा चमोली, रूपम मिश्र, रुचि बहुगुणा उनियाल, अतुल शर्मा, ऋतु डिमरी नौटियाल, राजेश पाल, पराग पावन, संदीप तिवारी, मृत्युंजय ने अपनी कविताएँ पढ़ीं। कविता पाठ का संचालन युवा कवि मृत्युंजय ने किया।
इस दौरान शहर के कई लेखक,साहित्यकार, रंगकर्मी, साहित्य प्रेमी व प्रबुद्धजन शामिल रहे।

Photos from Doon Library & Research Centre's post 17/05/2026

दून पुस्तकालय में इरविन एलन सीली की पुस्तक “फ्लाइंग योगिनीज़” का लोकार्पण एवं विचारोत्तेजक परिचर्चा आयोजित

देहरादून, 16 मई, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र (डीएलआरसी) द्वारा आयोजित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत शनिवार को दून पुस्तकालय सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार इरविन एलन सीली की नई पुस्तक “फ्लाइंग योगिनीज़” का लोकार्पण एवं उस पर एक विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, इतिहास और स्त्री विमर्श से जुड़े अनेक बुद्धिजीवी, लेखक, शोधार्थी तथा साहित्य-प्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि “फ्लाइंग योगिनीज़” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति, सांस्कृतिक स्मृति, आध्यात्मिकता और प्रतिरोध की चेतना पर आधारित एक गहन वैचारिक यात्रा है। पुस्तक में उन योगिनियों की कथा और सांस्कृतिक उपस्थिति को केंद्र में रखा गया है, जिनकी प्राचीन प्रतिमाएँ भारत के मंदिरों से विस्थापित होकर आज विदेशी संग्रहालयों में संरक्षित हैं।

अपने वक्तव्य में इरविन एलन सीली ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया, योगिनी परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक स्मृतियों के संरक्षण के प्रश्नों पर विस्तार से विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि इतिहास और संस्कृति केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि लोगों की स्मृतियों, मिथकों और कलात्मक अभिव्यक्तियों में भी जीवित रहते हैं।
परिचर्चा में प्रख्यात कवि, अनुवादक एवं साहित्य आलोचक अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा ने पुस्तक को भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य की विशिष्ट परंपरा का महत्वपूर्ण विस्तार बताते हुए कहा कि सीली की लेखन शैली भारतीय अनुभवों को वैश्विक संदर्भों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में इतिहास, दर्शन और साहित्य का अत्यंत संवेदनशील समन्वय दिखाई देता है।

लेखिका, फिल्मकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता गीता सहगल ने पुस्तक में उपस्थित स्त्री विमर्श और प्रतिरोध की चेतना को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि योगिनियों की अवधारणा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक नहीं, बल्कि स्त्री स्वतंत्रता और आत्म-अभिव्यक्ति की सशक्त प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने भी पुस्तक और उसके विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे तथा अपने विचार साझा किए। परिचर्चा का वातावरण अत्यंत संवादपरक और विचारोत्तेजक रहा।

इरविन एलन सीली का जन्म वर्ष 1951 में इलाहाबाद में हुआ। वे भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य के महत्वपूर्ण कथाकारों में गिने जाते हैं। उनकी चर्चित कृतियों में The Trotter-Nama, Hero, The Everest Hotel और Asoca: A Sutra आदि शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज, क्रॉसवर्ड बुक अवॉर्ड तथा पद्मश्री सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

अंग्रेजी साहित्य के लेखक / कवि प्रो.अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा का जन्म 1947 में लाहौर में हुआ। उन्होंने अंग्रेज़ी में कविता के छह संग्रह तथा अनुवाद की दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित की हैं। उनकी चर्चित कृतियों में The Absent Traveller तथा Songs of Kabir शामिल हैं। वर्ष 1992 में प्रकाशित Oxford India Anthology of Twelve Modern Indian Poets अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

वर्ष 2009 में उन्हें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘प्रोफेसर ऑफ पोएट्री’ पद हेतु नामित किया गया था। उन्होंने प्राकृत, हिंदी, बंगाली और गुजराती भाषाओं से 200 से अधिक साहित्यिक कृतियों का अनुवाद किया है।

वहीं गीता सहगल लेखिका, पत्रकार, फिल्म निर्देशक, नारीवादी चिंतक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वे अनेक महिला संगठनों की सह-संस्थापक एवं सक्रिय सदस्य रही हैं।

गीता सहगल अपनी चर्चित फिल्मों Women Leaving Islam (2021), Dispatches (1987) तथा London is Burning (2012) के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं

कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने सभी लोगों का स्वागत किया.अंत में आभार श्री निकोलस हॉफलैण्ड ने दिया.

कार्यक्रम में शहर के अनेक साहित्य प्रेमी, लेखक व साहित्यकार, हिमांशु आहूजा, शांता एन रविशंकर,अरविन्दर सिंह, नादिर बिलमोरिया, काशीसिंह, इरा सिंह, योगेन्द्र सिंह नेगी, आलोक सरीन, . मंजरी मेहता, कुल भूषण, आलोक बी लाल, विजय भट्ट, ओमप्रकाश जमलोकी, सुंदर सिंह बिष्ट,व अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे.

Photos from Doon Library & Research Centre's post 17/05/2026

युवाओं को प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त करने के सूत्रों पर व्याख्यान का आयोजन

देहरादून, 16 मई, 2026,दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से आज प्रातः श्री जयराज, आईएफएस,पूर्व प्रमुख वन संरक्षक - वन बल प्रमुख, उत्तराखण्ड द्वारा एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया गया. केन्द्र के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री जय राज ने
युवाओं को सेवा-सम्बन्धी प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त करने के सूत्रों पर एक व्याख्यान दिया.

60 मिनट के इस व्याख्यान श्री में जय राज ने युवाओं को परीक्षाओं की सही रूप से तैयारी कर ने, सटीक उत्तर लिखने, भाषा शैली, नियमित अभ्यास प्रक्रिया तथा विविध प्रमाणिक स्रोतों, पुस्तकों व संदर्भों से जानकारी लेने आदि विषयों पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होनें सफलता प्राप्त करने के कई छोटे - छोटे सूत्र भी युवाओं को दिये जिसके बल पर उन्हें सहायता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि नियमित पढ़ाई के साथ एक विशेष रणनीति के साथ तैयारी कर सकें तो निश्चित ही अभ्यर्थियों को विविध परीक्षाओं में प्राप्त होने वाली सफलता के स्तर में आशातीत वृद्धि मिल सकती है।

व्याख्यान बाद 30 मिनट का सवाल जबाब का सत्र भी हुआ. जिसमें कई युवाओं ने अपनी जिज्ञासाओं को सामने रखकर उसका समाधान भी प्राप्त किया.

कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डी. के. पाण्डे ने श्री जय राज और युवा छात्रों का स्वागत किया. उन्होने श्री जय राज का संक्षिप्त परिचय भी दिया. अंत में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के चन्द्रशेखर तिवारी ने आज के अतिथि कक्ता और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया.उन्होंने युवाओं से अपील की और कहा कि दून पुस्तकालय की ओर से इस तरह कार्यक्रमों में नियमित तौर पर प्रतिभाग करना उनके लिए लाभदायी रहेगा.

श्री जय राज 1983 बैच के *भारतीय वन सेवा* के अधिकारी रहे हैं जिनका कैडर उत्तराखंड रहा है। उन्होंने लगभग साढ़े 37 वर्षों की अपनी उत्कृष्ट सेवाएँ राज्य को प्रदान की हैं। उनकी सेवा निवृत्ति राज्य वन विभाग के शीर्षस्थ पद - *प्रमुख वन संरक्षक _एवं_ वन बल प्रमुख, उत्तराखंड* के पद से अक्टूबर, 2020 में हुई। श्री जय राज का passion *वन, वन्यजीव और पर्यावरण* है, जिस कारण उन्होंने *वन सेवा* को अपना profession बनाया। *भारतीय वन सेवा* में चयन के लिए UPSC द्वारा आयोजित परीक्षा में कुल चयनित 120 उम्मीदवारों में उनका ऑल इंडिया रैंक *3rd* रहा! उनकी युवाओं को प्रेरित करने में विशेष रुचि है, जिस कारण वे आज आप सभी के समक्ष उपस्थित हैं! वे एक उच्च स्तर के *मोटिवेटर* हैं जिस कारण उन्हें विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, कॉर्पोरेट सेक्टर (ONGC) आदि में व्याख्यान हेतु समय-समय पर आमंत्रित किया जाता रहता है।

कार्यक्रम के दौरान पुस्तकालयाध्यक्ष जय भगवान गोयल, अतिरिक्त निदेशक आर्थिक एवं सांख्यिकी, उत्तराखण्ड डॉ. पंकज नैथानी, डॉ. लालता प्रसाद, कर्नल,डी पी डिमरी,सुंदर सिंह बिष्ट, जगदीश सिंह महर, राकेश कुमार सहित बड़ी संख्या में दून पुस्तकालय परिवार के सदस्य और अध्ययनरत युवा उपस्थित रहे.

Photos from Doon Library & Research Centre's post 16/05/2026

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र
एवं जन संस्कृति मंच आपको सादर आमंत्रित करता है

कवि मंगलेश डबराल स्मृति आयोजन
(वार्ता और कवितापाठ )

18 मई 2026, सोमवार,
1:30 बजे से 6:00 बजे तक

.C
दून पुस्तकालय का सभागार

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