25/03/2025
किन्नरों का आतंक: रेलवे में अवैध वसूली का खेल
भारतीय रेलवे में यात्रा करना एक आम बात है, लेकिन कुछ स्थानों पर यह यात्रा आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। मैं बात कर रहा हूं किन्नरों द्वारा रेलवे में अवैध वसूली की, जो यात्रियों को न केवल मानसिक तनाव देती है, बल्कि उनकी गरिमा और आत्म-सम्मान को भी ठेस पहुँचाती है।
हाल ही में मुझे एक ऐसी ही अप्रिय घटना का सामना करना पड़ा, जब मैं भोपाल से इंदौर की यात्रा कर रहा था। आरक्षित टिकट न मिलने के कारण, मुझे सामान्य डिब्बे में सफर करना पड़ा। इस दौरान मैंने देखा कि कुछ किन्नर यात्रियों से जबरन पैसे वसूल रहे थे। वे लोगों को धमकाकर और परेशान कर उनसे पैसे लेने की कोशिश कर रहे थे।
एक घटना विशेष रूप से दिल दहला देने वाली थी। एक पिता अपने छोटे बच्चे के साथ यात्रा कर रहा था। बच्चा जिद कर रहा था कि उसे आइसक्रीम चाहिए, लेकिन पिता के पास सीमित पैसे थे। जैसे-तैसे उन्होंने 5 रुपये की आइसक्रीम खरीदकर बच्चे को खुश कर दिया। तभी कुछ किन्नर वहां पहुंचे और उस व्यक्ति से जबरन 50 रुपये ले लिए। जब उसने मना किया, तो उसे थप्पड़ तक मार दिया। उस पिता के चेहरे पर असहायता और पीड़ा साफ झलक रही थी।
क्या रेलवे प्रशासन की मिलीभगत है?
इस तरह की घटनाओं को देखकर यह सवाल उठता है कि आखिर रेलवे प्रशासन इन घटनाओं पर अंकुश क्यों नहीं लगा पा रहा? क्या रेलवे अधिकारियों की इसमें मिलीभगत है? यदि नहीं, तो वे इस अवैध वसूली को रोकने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठा रहे?
किन्नरों द्वारा अवैध वसूली अब आम हो चुकी है। वे रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों से मनमाने पैसे मांगते हैं। यदि कोई यात्री पैसे देने से इनकार करता है, तो उसे गालियाँ दी जाती हैं, धमकाया जाता है, यहाँ तक कि कई बार मारपीट भी की जाती है।
यह सिर्फ यात्रियों की समस्या नहीं, रेलवे की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न है
यह समस्या न केवल यात्रियों को परेशान करती है, बल्कि रेलवे की सुरक्षा और व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। रेलवे प्रशासन को इस मुद्दे पर तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए।
समाधान क्या हो सकते हैं?
सख्त कानूनी कार्रवाई – रेलवे प्रशासन को अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने चाहिए। दोषियों को दंडित किया जाए ताकि भविष्य में कोई इस तरह की हरकत न कर सके।
यात्रियों के लिए हेल्पलाइन नंबर – रेलवे को एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी करना चाहिए, जहाँ यात्री ऐसी घटनाओं की तत्काल रिपोर्ट कर सकें।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो – रेलवे अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि वे नियमित निरीक्षण करें और ऐसी घटनाओं को रोकें।
सामूहिक जागरूकता – यात्रियों को भी जागरूक होना चाहिए और मिलकर ऐसी अवैध गतिविधियों का विरोध करना चाहिए। यदि सभी यात्री एकजुट होकर विरोध करें, तो इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
रेलवे में किन्नरों द्वारा अवैध वसूली एक गंभीर समस्या है, जिसे हल करने के लिए यात्रियों, रेलवे प्रशासन और कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को एक साथ आकर काम करना होगा। हमें एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए ताकि यात्रियों को एक सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिल सके।
अब समय आ गया है कि हम सिर्फ मूकदर्शक न बने रहें, बल्कि इस समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाएँ।