14/02/2026
2021 में राष्ट्रीय सनातन पार्टी की स्थापना हुई। तब बहुतों ने इसे हल्के में लिया।
2024 के लोकसभा चुनाव से राष्ट्रीय सनातन पार्टी ने सक्रिय चुनावी भूमिका निभानी शुरु की, शाहजहांपुर लोकसभा सीट पर राष्ट्रीय सनातन पार्टी के प्रत्याशी चौथे नंबर पर और नालंदा लोकसभा सीट पर सातवें नंबर पर रहे।
2024 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय सनातन पार्टी के प्रत्याशियों को मिले वोटों ने यह सिद्ध कर दिया कि देश में एक वैचारिक शून्य था — लोग ऐसे मंच की तलाश में थे जो सनातन को नारे से नहीं, सिद्धांत से देखें।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी राष्ट्रीय सनातन पार्टी की सक्रिय भागीदारी रहीं, नि:संदेह हम जीते नहीं, लेकिन पर्याप्त जन समर्थन पार्टी को प्राप्त हुआ है।
अब सनातन केवल एक शब्द नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया।
दशकों तक “हिन्दुत्व” की बात करने वाली पार्टियां भी "सनातन" की बात करने को मजबूर हो गई है।
यदि हमारे उदय के बाद कुछ दलों ने अपनी भाषा बदली है, तो यह लोकतंत्र की सफलता है। पर भाषा बदलने से नीति और चरित्र नहीं बदलते — उसके लिए साहस चाहिए।
राष्ट्रीय सनातन पार्टी की चुनावी भूमिका स्पष्ट है:
हम सनातन को राजनीतिक अवसरवाद से मुक्त करने आए हैं।
हम समाज को जातीय खाँचों में बाँटने की राजनीति को चुनौती देने आए हैं।
राष्ट्रीय सनातन पार्टी संविधान के भेदभावपूर्ण अनुच्छेदों और अल्पसंख्यक विशेषाधिकार, एससी एसटी एक्ट, समलैंगिकता, विवाहेत्तर संबंध, अंबेडकरवाद, यूजीसी जैसे समाज को बांटने वाले विषयों को जड़मूल से समाप्त करेंगी तथा सनातन धर्म को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करेंगी।
सनातन राष्ट्र की आत्मा है।
इसे अवसरवाद से मुक्त कराना ही हमारा संकल्प है।
और यह संकल्प अब जन आंदोलन बनेगा।
https://www.rashtriyasanatanparty.org
#सनातन_अधिकार_आंदोलन

28/12/2025
28/12/2025