NO PARTY NO CORRUPTION

NO PARTY NO CORRUPTION

Share

Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from NO PARTY NO CORRUPTION, Delhi.

Photos from Ravish Kumar's post 08/01/2020
30/11/2019

नोटबंदी के बाद से ही इकॉनमी पर दूरगामी की बूटी पिला रही है सरकार

नोटबंदी एक बोगस फ़ैसला था। अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा कर जनता के मनोविज्ञान से खेला गया। उसी समय समझ आ गया था कि यह अर्थव्यवस्था के इतिहास का सबसे बोगस फ़ैसलों में से एक है लेकिन फिर खेल खेला गया। कहा गया कि दूरगामी परिणाम होंगे। तीन साल बाद उन दूरगामियों का पता नहीं है।

अब विश्लेषणों में झाँसा दिया जा रहा है कि सरकार ने जो सुधार किए हैं उनका नतीजा आने में वक्त लगेगा। फिर दूरगामी वाली बूटी पिला रहे हैं सब। ये कौन सा सुधार है जो पहले अर्थव्यवस्था को ज़ीरो की तरफ़ ले जाता है। और वहाँ से ऊपर आने का ख़्वाब दिखाता है। साढ़े पाँच साल जुमले ठेलने में ही बीत गए। इसका नुक़सान एक पीढ़ी को हो गया। जो घर बैठा वो कितना पीछे चला गया। सरकार के पास आर्थिक मोर्चे पर नौटंकी करने के अलावा कुछ नहीं। पता है लोग बजट पर बात करेंगे तो वित्त मंत्री को लाल कपड़े में लिपटा हुआ बजट देकर भेज देती है ताकि चर्चा बजट पर न होकर परंपरा के शुभ-अशुभ मान्यताओं पर बहस होने लगे। उन्हें लक्ष्मी बना कर पेश किया गया जबकि साफ़ समझ आ रहा है कि वे भारत की अर्थव्यवस्था को जे एन यू समझ रहीं हैं। जो मन में आए बोल दो लोग ताली बजा देंगे।

जीडीपी का हाल बुरा है। कभी न कभी तो ठीक सब हो जाता है लेकिन हर तिमाही की रिपोर्ट बता रही है कि इनसे संभल नहीं रहा है। पिछली छह तिमाही यानि 18 महीने से अर्थव्यवस्था गिरती जा रही है। इस मंदी का लाभ उठा कर कारपोरेट ने अपने लिए टैक्स फ़्री जैसा ही मेला लूट लिया। कारपोरेट टैक्स कम हो गया। कहा गया कि इससे निवेश के लिए पैसा आएगा। ज़्यादातर कंपनियों के बैलेंसशीट घाटा दिखा रहे हैं। उनकी क़र्ज़ चुकाने की क्षमता कमज़ोर हो गई है।

अब आप सोचिए कि जिस देश में मैन्यूफ़ैक्चरिंग ज़ीरो हो जाए वहाँ रोज़गार की कितनी बुरी हालत होगी। सरकार को डेटा देना चाहिए कि छोटी बड़ी कितनी फैक्ट्रियां बंद हुई हैं। गुजरात, तमिलनाडू, पंजाब और महाराष्ट्र से पता चल जाएगा। खेती और मछली पालन में विकास दर आधी हो गई है। शहरों के कारख़ाने से बेकार हुए तो गाँवों में भी काम नहीं मिलता होगा। जो नौकरी में हैं उनकी हालत भी मुश्किल है। कोई बढ़ोत्तरी नहीं है। तनाव ज़्यादा है।

चैनलों पर जब जीडीपी के आँकड़े को लेकर बहस नहीं होगी। कोई उन बंद पड़े कारख़ानों की तरफ़ कैमरा नहीं भेजेगा जहां मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया खंडहर बने पड़े हैं। आप सभी को दूरगामी का सपना दिखाया जा रहा है। एक मज़बूत नेता और एक मज़बूत सरकार जैसे बोगस स्लोगनों का हश्र आप देख रहे हैं। कभी न कभी तो कुछ भी ठीक हो जाता है लेकिन साढ़े पाँच साल में एक भी सेक्टर ऐसा नहीं है जो
इनकी नीतियों से बुलंद हुआ हो या जिसमें बुलंदी आई हो।

24/11/2019

95000 करोड़ के आरोपी को मोदी ने बना दिया महाराष्ट्र का उप मुख्यमंत्री

95,000 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोपी अजित पवार को रातों रात एक खेमे से उठाकर राज्यपाल के सामने लाया जाता है। उन्हें देवेंद्र फड़णवीस के साथ शपथ दिलाई जाती है। जिस देवेंद्र फड़णवीस ने 70000 करोड़ के सिंचाई विभाग घोटाले को उठाकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई, वो उसी शख़्स को उप मुख्यमंत्री बना रहे थे। पिछले साल ही उनकी सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर अजित पवार को मुख्य आरोपी बताया था। यानि पहले कार्यकाल के 5 वर्षों में इस मामले में कुछ भी खास नहीं हुआ। एक तलवार लटका कर रखी गई ताकि अजित पवार बुरे वक्त में काम आ सकें।

इसी 22 अगस्त को बांबे हाई कोर्ट के आदेश पर मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने 25000 करोड़ के गबन का मामला दर्ज किया था। इसमें 70 लोग आरोपी बनाए गए जिनमें से एक अजित पवार भी थे। इसके बाद ED प्रत्यर्पण निदेशालय ने छापे भी मारे। यह केंद्र की एजेंसी है। आप ही बताएं जिस आरोपी का स्वागत प्रधानमंत्री करें, गृहमंत्री बधाई देंगे उस पर अब ईडी हाथ डालने की हिम्मत करेगा। या फिर ईडी से बचाने की गारंटी के नाम पर ही अजित पवार को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है? कांग्रेस की सरकार में होता तो बीजेपी कहती कि कांग्रेस ने 95000 करोड़ लेकर उप मुख्यमंत्री का पद बेच दिया। बीजेपी की सरकार है। बीजेपी जो करती है वो अच्छा ही करती है।


भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है जब देश के प्रधानमंत्री ने 95,000 करोड़ के घोटाले के आरोपी के नाम के आगे जी लगाकर डिप्टी मुख्यमंत्री बनने की बधाई दी हो। कांग्रेस सरकार के घोटालों के खिलाफ चुनाव लड़कर आए मोदी 95,000 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोपी का स्वागत कर रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह बधाई दे रहे हैं। मीडिया के प्रत्रकार इसे मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं।

NCP को नेचुरली करप्ट पार्टी कहने के बाद उसके विधायकों को ‘ईमानदारी’ से तोड़ कर सरकार बनाने की कला में माहिर प्रधानमंत्री ही बता सकते हैं कि जब पूरी पार्टी को ही नेचुरली करप्ट कहा था तो उस पार्टी से दर्जन भर विधायक ईमानदार कहां से निकल आए?

2015 में विश्वास मत के दौरान ही बीजेपी की एन सी पी ने मदद की थी। विश्वास मत के दौरान शिव सेना मत विभाजन चाहती थी लेकिन स्पीकर ने ध्वनिमत से पास कर दिया। शिवसेना खुल कर अपने मत के बारे में नहीं कह रही थी और बीजेपी जोखिम नहीं लेना चाहती थी। इसलिए एनसीपी की मदद लेनी पड़ी। नतीजा यह हुआ कि तीन साल तक सिंचाई घोटाला मामले में कुछ खास नहीं हुआ। नवंबर 2018 में बांबे हाईकोर्ट के नागपुर बेंच में सिर्फ हलफनामा दायर किया गया। भविष्य में पवार काम आने वाले थे इसलिए जांच के नाम पर जांच ही होती रही।

आरोप बीजेपी ने लगाया था। ज़िम्मेदारी बीजेपी की थी कि साबित करती। अजित पवार को सज़ा दिलाती। लेकिन अब तो अजित पवार उप मुख्यमंत्री हैं।

झारखंड में भी बीजेपी ने भानुप्रताप शाही को टिकट दिया है। इन पर 130 करोड़ के दवा घोटाले का ट्रायल चल रहा है। ईडी और सीबीआई ने चार्जशीट दायर किया है। जब प्रधानमंत्री रैली करने जाएंगे तो मंच पर दवा घोटाले का आरोपी भानुप्रताप शाही होगा और ऐसे घोटाले को उजागर करने वाले सरयु राय मंच से उतार दिए गए होंगे। उनका टिकट कट चुका है।

तेलुगु देशम पार्टी के राज्य सभा सांसद वाई एस चौधरी अपनी सदस्यता छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। चौधरी के खिलाफ भी ईडी और सीबीआई ने छापे मारे थे। सीबीआई ने चौधरी को 364 करोड़ के बैंक फ्राड के मामले में समन जारी किया था। अप्रैल 2019 में ED ने 315 करोड़ की मनी लाउंडरिंग और बैंक फ्राड मामले में चौधरी की संपत्ति अटैच कर ली थी। लोकसभा चुनाव के बाद चौधरी राष्ट्र निर्माण के लिए बीजेपी में शामिल हो गए।

अभी तक 150 करोड़ या 350 करोड़ के गबन के मामलों के आरोपी बीजेपी में शामिल हो रहे थे। लेकिन यह पहली बार हुआ है जब 95,000 करोड़ के मामले का आरोपी बीजेपी सरकार में उप मुख्यमंत्री बना है। शपथ दिलाई गई है। कई बार लगता है कि ईडी के छापे काले धन को मिटाने के लिए नहीं बल्कि उन पर हाथ डालने के लिए होते हैं। वर्ना छापे के बाद ऐसे लोगों को बीजेपी अपनी पार्टी और सरकार में क्यों लेती।

महाराष्ट्र पर कई लोग हैं जो मुझसे ज्यादा जानकार हैं। आप उनका लिखा पढ़ें। मैं न तो हर विषय पर लिख सकता हूं और न लिखना चाहिए। किसी ने यह नहीं कहा कि उन तीन कंपनियों के बारे में विस्तार से क्यों नहीं लिखते हैं जिन्होंने बीजेपी को 20 करोड़ का चंदा दिया है और केंद्र सरकार उन कंपनियों पर आतंकी फंडिंग के मामले में जांच कर रही है। किसी ने नहीं कहा कि इलेक्टोरल फंड पर क्यों चुप हैं? नितिन सेठी ने छह छह कड़ियों में दस्तावेज़ों के साथ बताया है कि कैसे वित्त मंत्रालय ने झूठ बोलकर यह बान्ड संसद से पास कराया और अब इसके ज़रिए काले धन को सफेद करने का बड़ा खेल चल रहा है।

महाराष्ट्र में अनैतिकता की राजनीति हो रही है। सबका चेहरा उजागर हो रहा है। अनैतिकता का भंडार विपक्ष के खेमे में भी है। वहां भी वैचारिक गठबंधन में घोर अनैतिकता है। लेकिन बीजेपी ने अजित पवार को उप मुख्यमंत्री बनाकर चाल चल दी है। उसके लिए सत्ता से ज्यादा कुछ नहीं है। अगर कोई भ्रष्टाचारी है, लुटेरा है तो वो मुख्यमंत्री है, उपमुख्यमंत्री है। ऐसे राजनेताओं से हम जनता की भलाई की उम्मीद करते हैं। सचमुच जनता भोली है। 95000 करोड़ के घोटाले के आरोपी को बीजेपी की उप मुख्यमंत्री बना सकती है। इससे पता चलता है कि यह दौर उसी का है।

30/08/2019
Want your business to be the top-listed Government Service in Delhi?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Culinary Team

Attire

Telephone

Address

Delhi