कदम आशा सेंटर्स के बच्चों ने अपने हाथों से 14 स्टॉल सजाए। किसी ने नींबू-शिकंजी बेची, किसी ने हाथ के बने गोलगप्पे, किसी ने झालमूड़ी।
डर नहीं, झिझक नहीं — बस आँखों में ग्राहक बुलाने का आत्मविश्वास।
बच्चों का जोश देख पैरेंट्स की छाती चौड़ी हो गई, टीचर्स की मेहनत सार्थक हो गई।
सच कहें तो आज सावदा ने सीखा — 'रोज़ी' तब बनती है जब 'खोज' का हौसला हो।
Wonderoom
Wonderoom is an innovative library located in the heart of Delhi. Its working to generate a love for The Wonderoom is open from 10 am to 6 pm on all days.
Wonderoom is an innovative Children’s library located in the heart of Delhi. It provides an opportunity for children in the age group of 8-15 years to explore the world of over 6000 interesting books. The children also actively participate in regular storytelling, art and craft, drama, fun science, and creative writing workshops. Regular movie shows, access to internet and support in reading also
#दीदीअगलामेलाकबलगेगा?
कल सावदा में लगे 'खोजी रोज़ी मेले' का सबसे खूबसूरत पल यही सवाल था।
2 जून को कदम आशा सेंटर्स के बच्चों ने 'खोजी रोज़ी मेले' में कमाल कर दिया।
कदम-दर-कदम सजते 14 स्टॉल्स, आँखों में चमक और आवाज़ में आत्मविश्वास — बच्चों ने दिखा दिया कि हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता।
मेले के खत्म होते ही हर बच्चे का एक ही सवाल था: "दीदी, अगला मेला कब है?"
यही जज़्बा, यही जुनून 'खोजी रोज़ी' की असली कामयाबी है।
बच्चे, पैरेंट्स, टीचर्स और पूरी टीम — सबके चेहरों पर बस एक बात लिखी थी: "हम कर सकते हैं!"
एक लाइन में कहें तो — "ये मेला नहीं, सीख और हौसले का त्योहार था।"
दिल से शुक्रिया और बधाई Kanta ji, Poonam ji और पूरी कदम टीम को। आप बच्चों के सपनों में रंग भर रही हैं ❤️
#खोजी_रोजी #सावदा ा #सक्षम_आशा
03/06/2026
कल यानी 2 जून को सावदा में शानदार खोजी रोजी मेले का आयोजन हुआ। कदम दर कदम मेला सजाने वाले बच्चे कदम आशा सेंटर्स के हैं। लगभग 14 स्टॉल्स बच्चों ने लगाए, पूरे आत्म विश्वास के साथ। और इतने उत्साहित थे कि हर बच्चे ने पूछा अगला मेला कब? यानी कर दिखाने का जज़्बा बच्चों, पैरेंट्स, टीचर्स और टीम में भरपूर दिखाई दिया।
एक लाइन में कहें तो "सीख से भरा सफल खोजी रोजी मेला"
02/06/2026
आज 'खोजी रोज़ी' के बच्चे बी-एबल फाउंडेशन के ऑफिस में पूरे सवाल-जवाब मोड में थे।
एचआर ने बताया - एचआर का मतलब और उसके काम; टीम कैसे बनती है, आईटी ने अपने काम को बताया, एकाउंट्स ने समझाया वे कैसे खर्चों का हिसाब रखते हैं।
फिर क्लाउड किचन की भाप, राइडर की बाइक की रफ़्तार और स्टोररूम की चिल्लपों — हर जगह बच्चों ने काम को अपनी आँखों से होते हुए देखा।
आज उन्होंने सीखा: हर कुर्सी, हर हेलमेट, हर रजिस्टर के पीछे एक कहानी है। और हर कहानी 'रोज़ी' है।
#खोजी_रोजी
01/06/2026
एक दौरा, दस प्रोफेशन, सौ जवाब!
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'खोजी रोज़ी कार्यक्रम' में आज बच्चे कैलाश कालोनी स्थित बी-एबल फाउंडेशन पहुँचे।
ऑफिस में एचआर से आईटी तक -- हर काम को जाना समझा; और जमरूदपुर में स्थित क्लाउड किचन में शेफ से राइडर तक — हर काम को देखा, हर वर्कर से बात की।
क्योंकि 'रोज़ी' को समझने के लिए क्लासरूम से निकलना पड़ता है।
#खोजी_रोजी
31/05/2026
जखीरा में आज मेला छोटा था, पर हौसले बहुत बड़े!
'खोजी रोज़ी मेले' में इस बार सिर्फ़ तीन बच्चे अपने फूड स्टॉल लेकर पहुँचे। न शोर, न भीड़ — बस सीखने का जज़्बा और कुछ कर दिखाने की लगन।
ये खुला मंच हर सेंटर की टीचर को बुलावा है — आइए, अपने बच्चों के साथ जुड़िए। क्योंकि बदलाव का पहला स्टॉल आपका इंतज़ार कर रहा है।
#खोजी_रोजी
#छोटे_कदम_बड़ी_उड़ान
काम वही जो दिखे नहीं...
'खोजी रोजी' के बच्चे सावदा बस्ती में घर-घर जाकर खोज रहे हैं उन कामों को जिनका मोल तो नहीं, पर महत्व बहुत है।
माँ का खाना बनाना, दादी का कहानी सुनाना, पापा का दफ्तर जाना, घर में ही छोटासा व्यापार शुरू कर देना — सब 'रोज़ी' है, बस रूप अलग है। कुछ बच्चे अपने आसपास के कामगारों से भी मिल रहे हैं।
देखिए, समझिए और सराहिए बच्चों की इस खोज को।
#कदमआशा, #खोजी_रोजी #आजीविका_की_समझ
#टीचर_पूनम_कांता
"आंटी, आप सुबह-सुबह रोटी क्यों बनाती हैं? उसका पैसा मिलता है?"
ऐसे ही सैकड़ों सवालों के साथ 'खोजी रोजी कार्यक्रम' के बच्चे सावदा बस्तियों की गलियों में निकले हैं।
पड़ोस के परिवारों से मिलकर वे समझ रहे हैं कि हर काम की कीमत रुपये में नहीं होती — कुछ काम ममता के, कुछ जिम्मेदारी के, और कुछ पेट भरने के होते हैं।
आर्थिक-अनार्थिक कार्यों का ये ज़मीनी पाठ, बच्चों की ज़ुबानी।
#खोजी_रोजी
#खोजी_रोजी
#सक्षम_आशा
#बच्चों_की_खोज #आजीविका_की_समझ
'खोजी रोजी कार्यक्रम' के नन्हे खोजी अब घर-घर पहुँच रहे हैं!
आशा सेंटरों के बच्चे पास-पड़ोस के परिवारों से मिलकर जान रहे हैं — कौन से काम से घर चलता है, कौन से काम बिना पैसे के दिल से किए जाते हैं।
आर्थिक और अनार्थिक, दोनों तरह की 'रोज़ी' को समझने की ये अनोखी पाठशाला है।
#कदमआशासेंटरसावदा
#टीचरकांता
31/05/2026
यमुना खादर में चल रहे आशा सेंटरों के बच्चों को मीडिया टीम के रिसोर्स पर्सन निशांत ने करायी डिजिटल दुनिया की सैर। फोटोग्राफर कुनाल ने की अपने काम की शेयरिंग।
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