11/10/2026
जिस देश में जनता को "शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार" न रहे, क्या उसे लोकतंत्र कहा जा सकता है? सरकारें तो आती जाती रहेंगी, लेकिन देश के लोकतंत्र का बचे रहना बहुत जरूरी है।
आज हर तरह के गैरकानूनी और अनैतिक हथकंडा अपनाकर आपके शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार छीना जा रहा है। सड़क पर चल रहे हजारों छात्रों युवाओं को गिरफ्तार किया गया है। इन हरकतों को कवर करने वाले पत्रकारों के साथ बदतमीज़ी हो रही है। देशभर में भारी संख्या में लोगों को हाउस अरेस्ट और नज़रबंद कर दिया गया है। ट्रेन फ्लाइट इंटरनेट और मेट्रो को बाधित करके जनता को परेशान कर दिया गया है। दिल्ली की इस कदर किलाबंदी की गई है कि आम लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। ये सब सिर्फ इसलिए कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के लिए अधिकृत जंतर मंतर पर कोई पहुंच न जाए।
सोचिए कितना शर्मनाक है ये किसी भी लोकतंत्र के लिए। ऐसा सिर्फ तानाशाहों की हुकुमत में होता है, लोकप्रिय और लोकतांत्रिक सरकारों में नहीं।
वक्त आ गया है कि हर देशप्रेमी इस निरंकुश सत्ता के खिलाफ आवाज बुलंद करे। पार्टी और नेताओं से ऊपर उठकर अपने नागरिक धर्म का पालन करना हमारा सबसे बड़ा कर्त्तव्य है।