25/04/2025
यू पी बोर्ड का परिणाम आने पर विद्यार्थी इस लिंक के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते है।
U.P. Board Results 2025 ~ FAROOQUI EDUCATION
Board results 2024 Results # result
19/02/2024
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लखनऊ जाना हुआ अब बस्ती से भी आसान!
मात्र 3 घण्टे में लक्ज़री A.C कार से पहुंचे।
जाने का समय सुबह 6 बजे, वापसी दोपहर 2 बजे।
इटवा, डुमरियागंज उतरौला से होते हुए गोण्डा से लखनऊ।
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बस से लखनऊ जाने का समय
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लखनऊ से वापसी शाम 5 बजे।
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18/02/2024
नगर पंचायत भारत भारी में कुल 15 वार्ड हैं
उनके नाम क्रमशः निम्नलिखित हैं।
1. महर्षि बाल्मिकी नगर
2. लवकुश नगर
3.श्रीराम नगर
4.लक्षमण नगर
5.शत्रुघन नगर
6. मांडवी नगर
7.भरत नगर
8.जानकी नगर
9. बजरंग नगर
10. उर्मिला नगर
11. श्रुतकीर्ति नगर
12. दशरथ नगर
13.कौशल्या नगर
14.गुरु गोरक्षनाथ नगर
15. आजाद नगर
18/02/2024
भारत भारी मंदिर उत्तर प्रदेश राज्य के सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज ब्लॉक में स्थित है। यह जिला मुख्यालय नौगढ़ से पश्चिम की ओर 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह डुमरियागंज से 05 किमी दूर और राज्य की राजधानी लखनऊ से 210 किमी की दूरी पर स्थित है। माधली (2 किमी), समदा (2 किमी), महुरा (4 किमी), औसान कुइयान (4 किमी), अजगरा (5 किमी) भारत भारी मंदिर के पास के गांव हैं। भारत भारी दक्षिण में रामनगर ब्लॉक उत्तर की ओर खुनियांव ब्लॉक, पूर्व की तरफ मिठवल ब्लॉक तथा दक्षिण की ओर रुधौली ब्लॉक है । यह स्थान सिद्धार्थ नगर और बस्ती जिले की सीमा पर स्थित है।
भारत-भारी में स्थित शिव मन्दिर और उसके सामने स्थित तालाब, जो लगभग 16 बीघे क्षेत्रफल में है और यह सागर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भगवान शिव के नाम से घोषित हो चुका है। तालाब के किनारे हनुमान, रामजानकी और दुर्गा जी के मन्दिर स्थित है। कार्तिक पूर्णिमा को यहां बहुत बडा मेला लगता है, जो लगभग एक सप्ताह चलता है, जिसमें लाखों दर्शनार्थी भाग लेते है। इसके अतिरिक्त चैतराम नवमी और शिवरात्रि के पर्व पर भी यहां मेला लगता है। यूनाइटेड प्राविसेंज आफ अवध एण्ड आगरा के वाल्यूम 32 वर्ष 1907 के पृष्ठ-96 और 97 में इस स्थल का उल्लेख है कि वर्ष 1875 में भारत भारी के कार्तिक पूर्णिमा मेले में 50 हजार दर्शनार्थियों ने भाग लिया था। इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व भी है। महाराज दुष्यंत के पुत्र भरत ने भारत भारी को अपनी राजधानी बनाया था। उस समय भारत भारी का नाम भरत भारी था। यह कहा जाता है कि जब पांडव अपने अज्ञातवास में आर्द्रवन से गुजर रहे थे तो उनसे मिलने भग्वान श्रीकृष्ण भारत-भारी गांव से ही गुजरे थे। यहां उन्होंने शिव मन्दिर देखा तो रूक गये और पास के सागर में स्नान करने के बाद मन्दिर में जाकर पूजा अर्चना की। यह भी किवदन्ती है कि जब राम और रावण के बीच युद्ध हुआ तो राम के भाई लक्ष्मण जब मुर्छित हो गये थे तो हनुमान जी संजीवनी बूटी भारत-भारी होकर ले जा रहे थे, जिन्हें देखकर भरत ने उन्हें राम का कोई शत्रु समझकर तीर मारा और हनुमान पर्वत लेकर वहीं गिर पडे, वहां गड्ढा हो गया जो तालाब के रूप में परिवर्तित हो गया। हनुमान को देखकर भरत को पछतावा हुआ और उन्होंने यहां शिव मंदिर की स्थपना करायी। यह भी जनश्रुति है कि महाराज दुष्यन्त के पुत्र भरत ने इसे अपनी राजधानी बनाया