Dulhan Ek Anmol Ratna Hai
This page works for Social awareness. This page post,The Rachna(Kavita,poems) of
My chacha ji shri Akhilesh Kumar Rai.
Aim of the this page: Women empowerment,Works towards eliminate dowry from our society and to walk in positive direction.
गीत: *अमृत कलश महाकुंभ का...*
अमृत कलश महाकुंभ का,
चलो जन जन तक पहुँचायें...|
हो सत्य सनातन ज्ञान की वर्षा,
हो...ओ...ओ....हो....ओ...ओ...
हो सत्य सनातन ज्ञान की वर्षा,
ऐसा चौपाल बनायें...|| (1)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
ये ज्ञान कुंभ, ये भक्ति कुंभ,
जीवन को दिव्य बनायें...|
ऑन लाइन मीटिंग के माध्यम से,
जन जन तक पहुँचायें...||। (2)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
अपने-अपने गाँव-नगर से,
आन लाइन ही जूड़ जायें ....|
एक घंटा साप्ताहिक चर्चा से,
प्रेरणा प्रकाश पायें ....|| (3)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
कलिकाल का कल्मष फैला,
उसकी चपेट में नहीं आयें..|
हर मोड़ पे शकुनि दुर्योधन दुशासन,
हम अर्जून बन जायें ...|| (4)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
आज पुकारे भारत माता,
दिल वाले सुन पायें ...|
उठो जागो एकजूट हो जाओ,
विकसित भारत बनायें..,
विकसित भारत बनायें..,
विकसित भारत बनायें..||। (5)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
राजगुरू सुखदेव भगत सिंह,
मेरे मन को भायें ....|
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को,
देशप्रेम का पुष्प चढ़ायें ..||। (6)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
चन्द्रशेखर आजाद हमारे
हौसले को बुलंद बनायें |
वीर शिवाजी की वंशज हम,
गद्दारों को धूल चटाएं ..|| (7)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
पग-पग पे है नकारात्मक ऊर्जा,
आप सतर्क हो जायें ....|
अगर सकारात्मक ऊर्जा नहीं बढ़ी तो,
कहीं आप भी न खो जायें ...|| (8)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
सुबह या शाम में आधा घंटा,
सामूहिक संकीर्तन गायें ...|
ये तन-मन का व्यायाम सरल है,
गाँव-मुहल्ले में अलख जगायें ..|| (9)
*अमृत कलश.... तक पहुँचायें*
समय अल्प और काम बहुत है,
पहले इंटरनेट पे संग आयें |
जग जाये हर गाँव मुहल्ला,
हम दीपक बन जायें ....
ऐसा अलख जगायें.....,|| (10)
आज पुकारे भारत माता...
हो..... ओ......ओ.......
आज पुकारे भारत माता.,
हम दुध की लाज बचायें...,,
हम दुध की लाज बचायें...,
सत्य सनातन की शक्ति को,
हो....... ओ........ ओ........
सत्य सनातन की शक्ति को,
अपने भीतर जगायें...
अपने भीतर जगायें...|| (11)
राष्ट्रहित सर्वोपरि
इसको हम जी पायें...,
इसको हम जी पायें...|
चाहे नेकी के बदले बदी मिले,
या मान के बदले अपमान,
अमृत के बदले विष मिले,
या मिले दुखों की खान...
या मिले दुखों की खान.....,
हमारे कदम नहीं रुक पायें...,
कदम नहीं रूक पायें...,
देश हमारा भारत प्यारा
विकसित भारत बनायें ...
विकसित भारत बनायें...
विकसित भारत बनायें... (12)
अमृत कलश महाकुंभ का,
जन जन तक पहुंचाये ....|
हो सत्य सनातन ज्ञान की वर्षा
ऐसा चौपाल बनायें....
ऐसा चौपाल बनायें....
ऐसा चौपाल बनायें....
🙏
सविनय निवेदन,
अखिलेश कुमार राय
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