28/03/2024
ED के छापे के बाद BJP को चंदे मिलना... ये क्यों सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है, आइए इसे संक्षेप में समझें.
👉 ये सबको मालूम है कि BJP ने दस साल में अच्छे काम नहीं किये. जब BJP सरकार 2014 में सत्ता में आई तो आते के साथ उद्योगपतियों के टैक्स 10% कम कर दिया. ये टैक्स ही होता है जिससे हम जनता को नौकरी दी जाती है, जनता के काम किये जाते हैं. तो 10% टैक्स का बोझ उद्योगपतियों से हटाया गया और इसे आम जनता से वसूला जाने लगा. इससे जनता पर बोझ पड़ा. पर फिर भी टैक्स पूरा नहीं हो पाया तो सरकार अपने दोस्तों को सरकारी कंपनियां बेचने लगी. सरकारी नौकरी खत्म हो गई. सरकार ने फिर डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ाये जिससे हर समान की ढुलाई की कीमत बढ़ी और हर सामान महंगा हो गया. फिर नोटबंदी किया सरकार ने जिससे छोटे उद्योग, खेती चौपट होने लगी. इसके बाद GST लगाया जिससे व्यापारी और जनता प्रभावित हुए, GST से महंगाई बढ़ी.
अब आइए वापस इलेक्टोरल बांड पर. BJP ने अच्छे काम नहीं किये इसलिए इनको आम जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा, तो प्रचार ज्यादा करना पड़ेगा, EVM सेटिंग, संस्थान सेटिंग वगैरह करना पड़ेगा. सेटिंग का मामला अलग कर दीजिए, अभी प्रचार के मामले पर आइए.
ज्यादा पैसे कैसे आये प्रचार के लिए इसके लिए BJP ने उद्योगपतियों को परेशान करना शुरू किया ED CBI से. और इस परेशानी से बचने के लिए उद्योगपतियों ने भारी चंदा देना शुरू किया. अब मान लीजिए कोई दवाई की कंपनी है, वो अगर मोटा चंदा देगी तो वसूलेगी किससे, मरीजों से ही ना, या फिर दवाई के कंपनियों के कर्मचारियों के वेतन में कमी करके. आपको दवाई महंगी मिलेगी इसकी फिक्र मोदी को नहीं है. दवा की कमी से जान भी जाती है. चंदा से ही संबंधी अब दूसरी बात की चर्चा करते हैं. ED से छापा लगवाया जाएगा मान लीजिए कि किसी इमारत और ब्रिज बनाने की कंपनी पर. तो वो भी मोटा चंदा देगी. फिर वो अपना फायदा कैसे निकालेगी, घटिया इमारत और ब्रिज बना कर ही ना. ये इमारत या पूल कमजोर बनेगी. हो सकता है ढह जाए, जनता की जान चली जाय इसमें, इसकी भी चिंता नहीं है मोदी को. मोदी जी ऐसे ही निर्माण कार्य करवाएंगे चंदे के लिए देश में. ये क्या देशप्रेम है.
अब और एक मुद्दा पर बात जानिए. इलेक्टोरल बांड में अडानी, अंबानी का नाम नहीं आया जबकि इन्हें तो मोदी सरकार ने न जाने कितने सरकारी कंपनियां औने पौने भाव में दे दिए. तो ये कैसे मोदी को पैसे देते होंगे. ये ट्रक से भेजवा सकते हैं कैश, कौन पकड़ेगा इन्हें. और आपने इलेक्टोरल बांड में देखा होगा कि SBI 466 करोड़ का हिसाब नहीं बता रही है, ये पैसे हो सकते हैं कि इन्ही के हों. इसके अलावे आपने देखा होगा कि इलेक्टोरल बांड में बहुत सी ऐसी कंपनी हैं जिनकी कमाई 2 करोड़ है और वो सैकड़ों करोड़ के चंदे दे रहे हैं. ऐसी कंपनी को शैल कंपनी कहते हैं. बड़े उद्योगपतियों ने इन्ही के द्वारा BJP को चंदे दिलवाए हों, इसकी बड़ी संभावना है. ये बहुत मोटा पैसे देते होंगे, क्योंकि ED CBI का छापा मरवाकर प्राइवेट एयरपोर्ट वगैरह भी मोदी ने इन उद्योगपतियों के नाम करवाये हैं.
समझे ना!!!

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