घर से बाहर निकलने के बाद वापिस सुरक्षित आना
भगवान का एक ऐसा आशीर्वाद है जिसे लोग गौर नहीं करते।
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पोस्ट बड़ी है पर अद्भुत है, इसे पढ़े और अपने ॠषि मुनियों और पूर्वजों के अलौकिक ज्ञान पर गर्व करें 🙏
घर के निकट ही है टाटा का कैंसर अस्पताल।संयोग से 4 बार वहाँ जाने का अवसर मिला और घण्टो प्रतीक्षा क्रम में जो जनसैलाब देखा,लगा मैं भारत में नहीं पाकिस्तान या बांग्लादेस के किसी अस्पताल में बैठी हूँ।संस्थान में कार्यरत एक परिचित से मैंने आग्रह किया कि क्या मुझे एक आंकड़ा मिल सकता है कि रोगियों में कौम विशेष का प्रतिशत क्या है,,क्योंकि मुझे तो लगता है 75 से 80 प्रतिशत वही हैं।उन्होंने कहा,यह डाटा तो मैं आपको नहीं दे सकता,किन्तु यह कह सकता हूँ कि आपका अनुमान लगभग सही है।
हमारे तरफ विवाह के समय समगोत्री विवाह तो नहीं ही होता,पिता की तरफ से 9 पीढ़ी और माता की तरफ से 5 पीढ़ी के समबन्ध देखे जाते हैं।आजकल तो लोग इतना नहीं मानते,किन्तु मेरे विवाह के समय यह देखा जाता था कि जिस गोत्र में कन्या दी गयी है,उस गोत्र से कन्या नहीं ली जाती थी।सास और बहू के मायके का गोत्र एक नहीं होना चाहिए।
भाई Kumar Satish ने इसी विषय पर इतना अप्रतिम लिखा है कि उसे साँझा किये बिना रहना सम्भव नहीं।सनातन की वैज्ञानिकता पढ़कर आप भी गर्वानुभूति करें,इस हेतु अग्रेसित है यह पोस्ट:-
कल मेरे एक बेहद घनिष्ट एवं एक कट्टर हिंदूवादी मित्र से धर्म पर ही चर्चा हो रही थी.
और, चर्चा के दौरान मैंने उसे बताया कि... हम सब स्वयंभू मनु की संतान हैं यार..
इसीलिए, हम सब एक हैं.
इस पर वो आश्चर्य से मुँह खोलते हुए बोला कि....
तो, इसका मतलब तो फिर ये हुआ कि हम सब भाई-बहन हुए .
तो, क्या हम सब आपस में भाई-बहन में ही शादी कर लेते हैं ??? 😲
उसकी ऐसी मासूमियत को देख मुझे जोर की हंसी आ गई..
लेकिन, ये सवाल सिर्फ मेरे मित्र का ही नहीं है बल्कि बहुत सारे हिनू इस बात पर कंफ्यूज होते हैं कि जब हम एक ही ओरिजिन (मनु-सतरूपा) से आये हैं तो इस लिहाज से हम सब आपस में भाई-बहन कैसे नहीं हुए ??
और, अगर ऐसा है तो फिर अपने ही भाई-बहन में शादी कैसे हो सकती है ???
लेकिन, इसका जबाब बहुत ही आसान है एवं इसका जबाब हमारी ही परंपराओं तथा मान्यताओं में छुपा हुआ है.
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि... हमारे धार्मिक ग्रंथ और हमारी सनातन हिन्दू परंपरा के अनुसार पुत्र (बेटा) को कुलदीपक अथवा वंश को आगे बढ़ाने वाला माना जाता है.....
अर्थात.... उसे गोत्र का वाहक माना जाता है.
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि.... आखिर ऐसा क्यों होता है कि सिर्फ पुत्र को ही वंश का वाहक माना जाता है ????
असल में इसका कारण.... पुरुष प्रधान समाज अथवा पितृसत्तात्मक व्यवस्था नहीं ....
बल्कि, हमारे जन्म लेने की प्रक्रिया में छुपा विज्ञान है.
अगर हम जन्म लेने की प्रक्रिया को सूक्ष्म रूप से देखेंगे तो हम पाते हैं कि......
एक स्त्री में गुणसूत्र XX होते है.... और, पुरुष में XY होते है.
इसका मतलब यह हुआ कि.... अगर पुत्र हुआ (जिसमें XY गुणसूत्र है)... तो, उस पुत्र में Y गुणसूत्र पिता से ही आएगा क्योंकि माता में तो Y गुणसूत्र होता ही नहीं है.
और.... यदि पुत्री हुई तो (xx गुणसूत्र) तो यह गुणसूत्र पुत्री में माता व् पिता दोनों से आते है.
XX गुणसूत्र अर्थात पुत्री
अब इस XX गुणसूत्र के जोड़े में एक X गुणसूत्र पिता से तथा दूसरा X गुणसूत्र माता से आता है.
तथा, इन दोनों गुणसूत्रों का संयोग एक गांठ सी रचना बना लेता है... जिसे, Crossover कहा जाता है.
जबकि... पुत्र में XY गुणसूत्र होता है.
अर्थात.... जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि.... पुत्र में Y गुणसूत्र केवल पिता से ही आना संभव है क्योंकि माता में Y गुणसूत्र होता ही नहीं है.
और.... दोनों गुणसूत्र अ-समान होने के कारण.... इन दोनों गुणसूत्र का पूर्ण Crossover नहीं... बल्कि, केवल 5 % तक ही Crossover होता है.
और, 95 % Y गुणसूत्र ज्यों का त्यों (intact) ही बना रहता है.
तो, इस लिहाज से महत्त्वपूर्ण Y गुणसूत्र हुआ.... क्योंकि, Y गुणसूत्र के विषय में हम निश्चिंत है कि.... यह पुत्र में केवल पिता से ही आया है.
बस..... इसी Y गुणसूत्र का पता लगाना ही गौत्र प्रणाली का एकमात्र उदेश्य है जो हजारों/लाखों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों ने जान लिया था.
इस तरह ये बिल्कुल स्पष्ट है कि.... हमारी वैदिक गोत्र प्रणाली, गुणसूत्र पर आधारित है अथवा Y गुणसूत्र को ट्रेस करने का एक माध्यम है.
उदाहरण के लिए .... यदि किसी व्यक्ति का गोत्र शांडिल्य है तो उस व्यक्ति में विद्यमान Y गुणसूत्र शांडिल्य ऋषि से आया है.... या कहें कि शांडिल्य ऋषि उस Y गुणसूत्र के मूल हैं.
अब चूँकि.... Y गुणसूत्र स्त्रियों में नहीं होता है इसीलिए विवाह के पश्चात स्त्रियों को उसके ""पति के गोत्र से जोड़ दिया"" जाता है.
वैदिक/ हिन्दू संस्कृति में एक ही गोत्र में विवाह वर्जित होने का मुख्य कारण यही है कि एक ही गोत्र से होने के कारण वह पुरुष व् स्त्री भाई-बहन कहलाए क्योंकि उनका पूर्वज (ओरिजिन) एक ही है.....
क्योंकि, एक ही गोत्र होने के कारण...
दोनों के गुणसूत्रों में समानता होगी.
आज की आनुवंशिक विज्ञान के अनुसार भी..... यदि सामान गुणसूत्रों वाले दो व्यक्तियों में विवाह हो तो उनके संतान... आनुवंशिक विकारों का साथ उत्पन्न होगी क्योंकि.... ऐसे दंपत्तियों की संतान में एक सी विचारधारा, पसंद, व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता एवं ऐसे बच्चों में रचनात्मकता का अभाव होता है.
विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष अर्थात् मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं.
शास्त्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से सगौत्र विवाह पर प्रतिबंध लगाया था.
और.... मुल्लों के जन्मजात मूर्ख होने का भी यही प्रमुख कारण है.... क्योंकि, वे अपनी माँ, बहन, मौसी और चाची तक से बच्चा पैदा करने में गुरेज नहीं करते.
खैर...... मलेछों को यही नाली में छोड़कर.... अपने गोत्र सिस्टम को आगे बढ़ाते हैं...
जैसा कि हम जानते हैं कि.... पुत्री में 50% गुणसूत्र माता का और 50% पिता से आता है.
फिर, यदि पुत्री की भी पुत्री हुई तो.... वह डीएनए 50% का 50% रह जायेगा...
और फिर.... यदि उसके भी पुत्री हुई तो उस 25% का 50% डीएनए रह जायेगा.
इस तरह से सातवीं पीढ़ी में पुत्री जन्म में यह % घटकर 1% रह जायेगा.
अर्थात.... एक पति-पत्नी का ही डीएनए सातवीं पीढ़ी तक पुनः पुनः जन्म लेता रहता है....
और, यही है "सात जन्मों के साथ का रहस्य".
लेकिन..... यदि संतान पुत्र है तो .... पुत्र का गुणसूत्र पिता के गुणसूत्रों का 95% गुणों को अनुवांशिकी में ग्रहण करता है और माता का 5% (जो कि किन्हीं परिस्थितियों में एक % से कम भी हो सकता है) डीएनए ग्रहण करता है...
और, यही क्रम अनवरत चलता रहता है.
जिस कारण पति और पत्नी के गुणों युक्त डीएनए बारम्बार जन्म लेते रहते हैं....
अर्थात, यह जन्म जन्मांतर का साथ हो जाता है.
अब सबसे महत्वपूर्ण बात कि... फिर, ""कन्यादान का रहस्य"" क्या है ???
तो, कन्यादान का रहस्य ये है कि....
माता पिता यदि कन्यादान करते हैं तो इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि वे कन्या को कोई वस्तु समकक्ष समझते हैं...
बल्कि, इस दान का विधान इस निमित किया गया है कि...
दूसरे कुल की कुलवधू बनने के लिये और उस कुल की कुल धात्री बनने के लिये, उसे गोत्र मुक्त होना चाहिए.
पुत्रियां..... आजीवन डीएनए मुक्त हो नहीं सकती क्योंकि उसके भौतिक शरीर में माता के वे डीएनए रहेंगे ही,
इसलिये मायका अर्थात माता का रिश्ता बना रहता है.
शायद यही कारण है कि..... विवाह के पश्चात लड़कियों के पिता को घर को ""मायका"" ही कहा जाता है.... "'पिताका"" नहीं.
क्योंकि..... उसने अपने जन्म वाले गोत्र अर्थात पिता के गोत्र का त्याग कर दिया है....!
और चूंकि..... कन्या विवाह के बाद कुल वंश के लिये रज का दान कर मातृत्व को प्राप्त करती है... इसीलिए, हर विवाहित स्त्री माता समान पूजनीय हो जाती है.
आश्चर्य की बात है कि.... हमारी ये परंपराएं हजारों-लाखों साल से चल रही है जिसका सीधा सा मतलब है कि हजारों लाखों साल पहले.... जब पश्चिमी देशों के लोग नंग-धड़ंग जंगलों में रह रहा करते थे और चूहा ,बिल्ली, कुत्ता वगैरह मारकर खाया करते थे....
उस समय भी हमारे पूर्वज ऋषि मुनि.... इंसानी शरीर में गुणसूत्र के विभक्तिकरण को समझ गए थे.... और, हमें गोत्र सिस्टम में बांध लिया था.
शायद अब आप समझ गए होंगे कि शादी के समय हमारे सनातन हिन्दू धर्म सात पुश्तों तक की बात क्यों की जाती है ???
और, सात पुश्तों के बाद उन्हें अलग क्यों मान लिया जाता है.
सात पुश्तों के बाद अपने रिश्तेदारों को अलग मान लेने का कारण ये कतई नहीं है कि... उतना मानने लगेंगे तो हमारा परिवार इतना बड़ा हो जाएगा कि संभालना मुश्किल हो जाएगा.
बल्कि, सात पुश्तों के बाद उन्हें अलग मान लेने का मतलब ये होता है कि... अब उस परिवार में हमारे परिवार का DNA नहीं बचा है.
और, वे दूसरे DNA के लोग हैं.
इस तरह... सात पुश्तों के बाद हम आपस में भाई-बहन नहीं रह जाते हैं.
और, सात पुश्त मतलब निकल रहा है कि...
अगर किसी को 30 वर्ष की आयु में बच्चे होते हैं..
तो, 30×7 = 210 साल के बाद उनके DNA बदल जाते हैं.
अब अगर मनु-सतरूपा को हम बहुत कम अर्थात मात्र 20-25 हजार साल ही पहले का ही मान लें..
तो, ये कल्पना की जा सकती है कि उसके बाद कितनी पुश्तें गुजर चुकी है.
इसीलिए... धार्मिक ग्रंथों से इतर विज्ञान की दृष्टि से भी हम सभी हिनू आपस में भाई-बहन नहीं हैं..
और, हमारी आपस में शादी भाई-बहन में शादी नहीं है.
असल में लोगों के मन में ये सब फालतू सवाल इसीलिए उपजते हैं क्योंकि अंग्रेजों ने जो हमलोगों के मन में एक कुंठा बो दी है.....
इसीलिए, अब जरूरत है हमें उस अंग्रजों द्वारा बोई गई कुंठा से बाहर आकर हमें अपने पुरातन विज्ञान को फिर से समझकर उसे अपनी नई पीढियों को बताने और समझाने की जरूरत है.
इसके साथ ही मैं अपनी बात फिर से दुहराता हूँ कि... आधुनिकतम विज्ञान एवं पावरफुल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के आने के बाद भी जिस DNA और क्रोमोजोम्स के विभक्तिकरण की प्रक्रिया को समझने में वैज्ञानिकों को पसीने आ जाते हैं...
इतने गूढ़ विषय को हमारे ऋषि मुनियों ने आज से हजारों साल पहले न सिर्फ अच्छी तरह समझ लिया था..
बल्कि, उन्होंने अपनी सात पीढ़ियों तक शादी नहीं करने की परंपरा बनाकर उसका समाधान भी बता दिया था कि हम इस प्रॉब्लम से ऐसे निपट सकते हैं.
तो... अब आधुनिकतम विज्ञान द्वारा अपने पूर्वज ऋषि-मुनियों की बातें और हमारे लिए बनाई परंपराओं के सत्यापित हो जाने के बाद आखिर हमें अपने विद्वान पूर्वजों एवं उनके ज्ञान पर क्यों गर्व नहीं होना चाहिए ???
जय सनातन...!!🚩
जय महाकाल...!!!
#चर्च_में_फ़ादर_के_साथ_क्रिश्चियनिटी_औरहिंदुत्व_पर.
।। #धार्मिक_बहस ।।
#क्रिश्चियनिटी के गाल पर #हिंदुत्व का थपेड़ा..*
जरूर पढ़ें..
मेरे साथ एक सीनियर हैं
जो 4 साल पहले हिंदू से क्रिस्चियन में कन्वर्ट हुए हैं,
वो दिन रात क्रिश्चियनिटी की प्रशंसा करते रहते और हिंदुत्व को गालियाँ देते रहते थे,
सो कल रविवार को बातों हिं बातों में उन्होंने मुझे क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट होने का ऑफ़र दे दिया
और क्रिश्चियनिटी के फ़ायदे बताने लगे।
मैंने उससे बहस करना जायज़ नही समझा।
*मैं बाइबिल को लेकर बड़े क्रिस्चियन फादर से बहस करना चाहता था*
सो मैंने उनका ऑफ़र स्वीकार कर लिया।
मैं अपने आठ जूनियर और उस सीनियर के साथ चर्च पहुँच गया,
वहाँ कुछ परिवार भी हिन्दू से क्रिस्चियन कन्वर्शन के लिए आये हुए थे,
और धर्म परिवर्तन कराने के लिए गोआ के किसी चर्च के फादर बुलाये गए थे।
चर्च में प्रेयर हुई फिर उन्होंने क्रिश्चियनिटी और परमेश्वर पर लेक्चर दिया
और होली वाटर के साथ धर्मान्तरण की प्रोसेस शुरू की।
मैंने अपने सीनियर से कहा की वो फ़ादर से रिक्वेस्ट करें की
सबसे पहले मुझे कन्वर्ट करें।
फिर फ़ादर ने मुझे बुलाया और बोला
" जीसस ने मुकेश पासवान को अपनी शरण में बुलाया है मैं मुकेश पासवान का क्रिश्चियनिटी में स्वागत करता हूँ"
मैंने फ़ादर से कहा की मुझे कन्वर्ट करने से पहले
*क्रिस्चियन और हिन्दू को कम्पेयर करते हुए उसके मेरिट और डिमेरित बताएँ।*
*मैं कन्वर्ट होने से पहले बाइबिल पर आपके साथ चर्चा करना चाहता हूँ*
कृपिया मुझे आधा घण्टे का समय दें और मेरे कुछ प्रश्नों का उत्तर दें।
फ़ादर को मेरे बारे में कोई जानकारी नही थी और उन्हें अंदाजा भी नही था की मैं यहाँ अपना लक्ष्य पूरा करने आया हूँ
और उन्हें पता ही नही था की मैं अपना काम अपने प्लान के मुताबिक़ कर रहा हूँ।
उस फ़ादर को इस बात का अंदेशा भी नही था की आज वो कितनी बड़ी आफ़त में फ़ंसने वाले हैं,
सो फ़ादर बाइबिल पर चर्चा करने के लिए तैयार हो गए ।
【मैंने पूछा फ़ादर " क्रिश्चियनिटी हिन्दूत्व से किस तरह बेहतर है, परमेश्वर और बाइबिल में से कौन सत्य है,अगर बाइबिल और यीशु में से एक चुनना हो तो किसको चुनें"】
अब फ़ादर ने क्रिश्चियनिटी की प्रसंशा और हिंदुत्व की बुराइयाँ करनी शुरू की और कहा
1.यीशु ही एक मात्र परमेश्वर है और होली बाइबिल ही दुनियाँ में मात्र एक पवित्र क़िताब है।
बाइबिल में लिखा एक एक वाक्य सत्य है वह परमेश्वर का आदेश है।
परमेश्वर ने ही पृथ्वी बनाई है।
2.क्रिश्चियनिटी में ज्ञान है जबकि हिन्दुओँ की किताबों में केवल अंध विश्वास है।
3.क्रिश्चियनिटी में समानता है जातिगत भेदभाव नही है जबकि हिंदुओं में जातिप्रथा है।
4.क्रिश्चियनिटी में महिलाओं को पुरुषों के बराबर सम्मान हैं
जबकि हिन्दुओँ में लेडिज़ का रेस्पेक्ट नही है ,
हिन्दू धर्म में लेडिज़ के साथ सेक्सुअल हरासमेंट ज़्यादा है।
5.क्रिस्चियन कभी भी किसी को धर्म के नाम पर नही मारते
जबकि हिन्दू धर्म के नाम् पर लोगों को मारते हैं
बलात्कार करते हैं हिन्दू बहुत अत्याचारी होते हैं।
6.हिंदुओ में नंगे बाबा घूमते हैं
सबसे बेशर्म धर्म है हिन्दू।
अब मैंने बोलना शुरू किया की फ़ादर मैं आपको बताना चाहता हूँ की
1. जैसा आपने कहा की परमेश्वर ने पृथ्वी बनाई है और बाईबल में एक एक वाक्य सत्य लिखा है और वह पवित्र है,
तो
*बाईबल के अनुसार पृथ्वी की उत्त्पति ईशा के जन्म से 4004 वर्ष पहले हुई*
*अर्थात बाइबिल के अनुसार अभी तक पृथ्वी की उम्र 6020 वर्ष हुई*
*जबकि साइंस के अनुसार(कॉस्मोलॉजि) पृथ्वी 4.8 बिलियन वर्ष की है ...*
*जो बाइबिल में बतायी हुई वर्ष के बहुत ज़्यादा है।*
आप भी जानते हो साइंस ही सत्य है
अर्थात
*बाइबिल का पहला अध्याय ही बाइबिल को झूँठा घोषित कर रहा है*
*मतलब बाइबिल एक फ़िक्शन बुक है जो मात्र झूँठी कहानियों का संकलन है,*
*जब बाइबिल ही असत्य है तो आपके परमेश्वर का कोई अस्तित्व ही नही बचता।*
2.आपने कहा की क्रिश्चियनिटी में ज्ञान है तो आपको बता दूँ की क्रिश्चियनिटी में ज्ञान नाम का कोई शब्द नही है ,
याद करो जब
*"ब्रूनो" ने कहा था की पृथ्वी सूरज की परिक्रमा लगाती है तो चर्च ने ब्रूनो को 'बाइबिल को झूंठा साबित करने के आरोप में जिन्दा जला दिया था*
*और गैलीलियो को इस लिए अँधा कर दिया गया*
*क्योंकि उसने कहा था 'पृथ्वी के आलावा और भी ग्रह हैं' जो बाइबिल के विरुद्ध था ।*
अब आता हूँ हिंदुत्व में तो फ़ादर हिंदुत्व के अनुसार पृथ्वी की उम्र ब्रह्मा के एक दिन और एक रात के बराबर है
जो लगभग 1.97 बिलियन वर्ष है
जो साइंस के बताये हुए समय के बराबर है ✔️
और साइंस के अनुसार ग्रह नक्षत्र तारे और उनका परिभ्रमण हिन्दुओँ के ज्योतिष विज्ञानं पर आधारित है ,
हिन्दू ग्रंथो के अनुसार 9 ग्रहों की जीवनगाथा वैदिक काल में ही बता दी गयी थी।
ऐसे ज्ञान देने वाले संतो को हिन्दुओँ ने भगवान के समान पूजा है
नाकि जिन्दा जलाया या अँधा किया।
केवल हिन्दू धर्म ही ऐसा है जो ज्ञान और गुरु को भगवान से भी ज़्यादा पूज्य मानता है जैसे
*"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवोमहेश्वरः*
*गुरुर्साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरूवे नमः।।*
और फ़ादर दुनियाँ में केवल हिन्दू ही ऐसा है जो कण कण में ईश्वर देखता है
और ख़ुद को "अह्मब्रह्मस्मि" बोल सकता है
इतनी आज़ादी केवल हिन्दू धर्म में ही हैं।
3. आपने कहा की 'क्रिश्चियनिटी में समानता है जातिगत भेदभाव नही है
तो आपको बता दूँ की
*क्रिश्चियनिटी पहली शताब्दी में तीन भागों में बटी हुई थी*
जैसे Jewish Christianity ,
Pauline Christianity,
Gnostic Christianity.
जो एक दूसरे के घोर विरोधी थे उनके मत भी अलग अलग थे।
फिर क्रिश्चियनिटी
Protestant,
Catholic Eastern Orthodoxy,
Lutherans में विभाजित हुई
*जो एक दूसरे के दुश्मन थे,*
जिनमें ' कुछ लोगों को मानना था की "यीशु" फिर जिन्दा हुए थे
तो कुछ का मानना है की यीशु फिर जिन्दा नही हुए,
और कुछ ईसाई मतों का मानना है की "यीशु को सैलिब पर लटकाया ही नही गया"
*आज ईसाईयत हज़ार से ज़्यादा भागों में बटी हुई है,*
*जो पूर्णतः रँग भेद (श्वेत अश्वेत ) और जातिगत आधारित है*
*आज भी पुरे विश्व में कनवर्टेड क्रिस्चियन की सिर्फ़ कनवर्टेड से ही शादी होती है।*
*आज भी अश्वेत क्रिस्चियन को ग़ुलाम समझा जाता है।*
फ़ादर
*भेदभाव में ईसाई सबसे आगे हैं*
*हैम के वँशज के नाम पर अश्वेतों को ग़ुलाम बना रखा है।*✔️
4. आपने कहा की क्रिश्चियनिटी में महिलाओं को पुरुष के बराबर अधिकार है, तो बाईबल के प्रथम अध्याय में एक ही अपराध के लिये परमेश्वर ने ईव को आदम से ज्यादा दण्ड क्यों दिया,
ईव के पेट को दर्द और बच्चे जनने का श्राप क्यों दिया
आदम को ये दर्द क्यों नही दिया
अर्थात आपका परमेश्वर भी महिलाओं को पुरुषों के समान नही समझता।
आपके ही बाइबिल में
*"लूत" ने अपनी ही दोनों बेटियों का बलात्कार किया*
*और इब्राहीम ने अपनी पत्नी को अपनी बहन बनाकर मिस्र के फिरौन (राजा) को सैक्स के लिए दिया।*
आपकी ही
*क्रिश्चियनिटी ने*
*पोप के कहने पर*
*अब तक 50 लाख से ज़्यादा बेक़सूर महिलाओं को जिन्दा जला दिया।*
ये सारी रिपोर्ट आपकी ही बीबीसी न्यूज़ में दी हुईं हैं।
आपकी ही
*ईसाईयत में*
*17वीं शताब्दी तक महिलाओं को चर्च में बोलने का अधिकार नही था,*
महिलाओं की जगह प्रेयर गाने के लिए भी
15 साल से छोटे लड़को को नपुंसक बना दिया जाता था
*उनके अंडकोष निकाल दिए जाते थे*
*महिलाओं की जगह उन बच्चों से प्रेयर करायी जाती थी।*
बीबीसी के सर्वे के अनुसार
*सभी धर्मों के धार्मिक गुरुवों में सेक्सुअल केस में सबसे ज़्यादा*
*"पोप और नन" ही एड्स से मरे हैं जो ईसाई ही हैं।*
फ़ादर क्या यही क्रिश्चियनिटी में नारी सम्मान है।
अब आपको हिंदुत्व में बताऊँ।
दुनियाँ में केवल हिन्दू ही है जो कहता है
*" यत्र नारियन्ति पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता"*
अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है वहीँ देवताओं का निवास होता है,।
5. फ़ादर आपने कहा की क्रिस्चियन धर्म के नाम पर किसी को नही मारते
तो आपको बता दूँ
*'एक लड़का हिटलर जो कैथोलिक परिवार में जन्मा उसने जीवनभर चर्च को फॉलो किया उसने अपनी आत्मकथा "MEIN KAMPF" में लिखा*
*' वो परमेश्वर को मानता है और परमेश्वर के आदेश से ही उसने 10 लाख यहूदियों को मारा है'*
*हिटलर ने हर बार कहा की वो क्रिस्चियन है।*
चूँकि हिटलर द्वितीय विश्वयुद्ध का कारण था
जिसमें सारे ईसाई देश एक दूसरे के विरुद्ध थे
इसलिए आपके चर्च और पादरियों ने उसे कैथोलिक से निकाल कर Atheist(नास्तिक) में डाल दिया।
फ़ादर मैं इस्लाम का हितेषी नही हूँ
लेकिन आपको बता दूँ क्रिस्चियनों ने सन् 1096 में ने
"Crusade War" धर्म के आधार पर ही स्टार्ट किया था
जिसमें पहला हमला क्रिस्चियन समुदाय ने मुसलमानों पर किया।
जिसमें लाखों मासूम मारे गए।
फ़ादर "आयरिश आर्मी" का इतिहास पढ़ो किस तरह कैथोलिकों ने धर्म के नाम पर क़त्ले आम किया जो आज के isis से भी ज़्यादा भयानक था।
धर्म के नाम पर क़त्लेआम करने में क्रिस्चियन मुसलमानों के समान ही हैं,
वहीँ आपने हिन्दुओँ को बदनाम किया तो आपको बता दूँ की
"हिन्दू ने कभी भी दूसरे धर्म वालों को मारने के लिए पहले हथियार नही उठाया है, बल्कि अपनी रक्षा के लिए हथियार उठाया है।
6. फ़ादर आपने कहा की हिन्दुओँ में नंगे बाबा घूमते हैं "हिन्दू बेशर्म" हैं
तो फ़ादर आपको याद दिला दूँ की बाइबिल के अनुसार यीशु ने प्रकाशितवाक्य (Revelation) में कहा है की
" nudity is best purity"
नग्नता सबसे शुद्ध है।
यीशु कहता है की मेरे प्रेरितों अगर मुझसे मिलना है तो एक छोटे बच्चे की तरह नग्न हो कर मुझसे मिलों क्योंकि नग्नता में कोई लालच नही होता।
फ़ादर याद करो यूहन्ना का वचन 20:11-25 और लूका के वचन 24:13-43 क्या कहते नग्नता के बारे में।
फ़ादर ईसाईयत में सबसे बड़ी प्रथा Bapistism है,
जो बाइबिल के अनुसार येरूसलम की यरदन नदी में नग्न होकर ली जाती थी।
अभी इस वर्ष फ़रवरी में ही न्यूजीलैंड के 1800 लोगों ने जिसमे 1000 महिलाएं थी ने पूर्णतः नग्न होकर बपिस्टिसम लिया।
और आप कहते हो की हिन्दू बेशर्म है।
अब चर्च के सभी लोग मुझ पर भड़क चुके थे
और ग़ुस्से में कह रहे थे आप यहाँ क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट होने नही आये हो आप फ़ादर से बहसः करने आये हो, परमेश्वर आपको माँफ नही करेगा।
मैंने फ़ादर से कहा की यीशु ने कहा है
" मेरे प्रेरितों मेरा प्रचार प्रसार करो"
अब जब आप यीशु का प्रचार करोगे
तो आपसे प्रश्न भी पूछे जाएँगे
आपको ज़बाब देना होगा,
मैं यीशु के सामने बैठा हुआ हूँ और वालंटियर क्रिस्चियन बनने आया हूँ ।
*मुझे आप सिर्फ़ ज्ञान के सामर्थ्य पर क्रिस्चियन बना सकते है*
*धन के लालच में नही।*
अब फ़ादर ख़ामोश बैठा हुआ था शायद सोच रहा होगा की आज किस से पाला पड़ गया।
मैंने फिर कहा फ़ादर आप यीशु के साथ गद्दारी नही कर सकते
*" आप यहाँ सिद्ध करके दिखाओ की ईसाईयत हिंदुत्व से बेहतर कैसे है"*
मैंने फिर फ़ादर से कहा की फ़ादर ज़वाब दो
आज आपसे ही ज़वाब चाहिए
क्योंकि आपके ये 30 ईसाई इतने सामर्थ्यवान नही है की ये हिन्दू के प्रश्नों का ज़वाब दे सकें।
फ़ादर अभी भी शाँत था, मैंने कहा फ़ादर अभी तो मैंने शास्त्र खोले भी नही है
शास्त्रों के ज्ञान के सामने आपकी बाइबिल कहीं टिकती भी नही है।
अब फ़ादर ने काफ़ी सोच समझकर रविश स्टाइल में मुझसे पूछा 'आप किस जाति से हो'
मैंने भी चाणक्य स्टाइल में ज़वाब दे दिया ,
*"मैं सेवार्थ शुद्र, आर्थिक वैश्य, रक्षण में क्षत्रिय, और ज्ञान में ब्राह्मण हूँ।*
*और हाँ फ़ादर मैं कर्मणा "फ़ौजी" हूँ और जाति से "हिन्दू"*
अब चर्च में बहुत शोर हो चूका था
मेरे जूनियर बहुत खुश थे
बाकि सभी ईसाई मुझ पर नाराज़ थे,
लेकिन करते भी क्या
मैने उनकी ही हर बात को काटने के लिए बाइबिल को आधार बना रखा था
और हर बात पर बाइबिल को ही ख़ारिज कर रहा था।
मैंने फ़ादर से कहा
*मेरे ऊपर ये जाति वाला मन्त्र ना फूँके, आप सिर्फ़ मेरे सवालों का ज़वाब दें।*
अब मैंने उन परिवारों को जो कन्वर्ट होने के लिए आये थे को कहा
*" क्या आप लोगों को पता है की वेटिकन सिटी एक हिन्दू से क्रिस्चियन कन्वर्ट करने के लिए मिनिमम 2 लाख रुपये देती है*
*जिसमें से आपको 1लाख या 50 हज़ार दिया जाता है*
*बाकि में 20 से 30 हज़ार तक आपको कन्वर्ट करने के लिए चर्च लेकर आने वाले आदमी को दिया जाता है*
*बाकि का 1 लाख चर्च रखता है।*
जब आप कन्वर्ट हो जाते हो तब आपको परमेश्वर के नाम से डराया जाता है
फिर आपको हर सन्डे चर्च आना पड़ता है
और हर महीने अपनी पॉकेट मनी या फिक्स डिपाजिट चर्च को डिपॉजिट करना पड़ता है,
*आपको 1 लाख देकर चर्च आपसे कम से कम दस लाख वसूल करता है,*
*अगर आपके पास पैसा नही होता ..*
*तो आपको परमेश्वर के नाम से डराकर आपकी जमीन किसी क्रिस्चियन ट्रस्ट के नाम पर डोनेट(दान) करा ली जाती है,*
अब आप मेरे सीनियर को ही देख लो,
इन्होंने कन्वर्ट होने के लिए 1 लाख लिया था
लेकिन 4 साल से हर महीने 15 हज़ार चर्च को डिपाजिट कर रहे हैं,
अभी भी वक्त है सोच लो।
आप सभी को बता दूँ की एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में धार्मिक आधार पर सबसे ज़्यादा जमीन क्रिस्चियन ट्रस्टों पर हैं,
जिन्हें आप जैसे मासूम कन्वर्ट होने वालो से परमेश्वर के नाम पर डरा कर हड़प लिया गया है।
अब मेरा इतना कहते ही सारे क्रिस्चियन भड़क चुके थे
तभी यहाँ के पादरी ने गोआ वाले फ़ादर से कहा की 11बज चुके हैं
चर्च को बन्द करने का टाइम है।
मैंने फ़ादर से कहा की आपने मेरे सवालों का ज़वाब नही दिया
मैं आपसे बाइबिल पर चर्चा करने आया था,
आप जो पैसे लेकर कन्वर्ट करते हो वो बाईबल में सख्त मना है
याद करो गेहजी, यहूदा इस्तविको का हस्र जिसनें धर्म में लालच किया।
जिस तरह परमेश्वर ने उन्हें मारा ठीक उसी तरह आपका ही परमेश्वर आपको मारेगा ,
*आप में से किसी भी क्रिस्चियन को ...*
*जो पैसे लेकर कन्वर्ट हुआ फ़िरदौस ( यीशु का राज्य) में प्रवेश नही मिलेगा।*
अब चर्च बंद होने का समय हो चूका था
मैंने जाते जाते फ़ादर को "थ्री इडियट" स्टाइल में कहा "
फ़ादर फिर से बाईबल पढ़ो समझों, और जहाँ समझ ना आये तो मुझे फ़ोन करके पूछ लेना
क्योंकि मैं अपने कमज़ोर स्टूडेंट का हाथ कभी नही छोड़ता,
और आते आते मैं सारे क्रिस्चियनों को बोल आया की "मेरे क्रिस्चियन भाइयों अपने वेटिकन वाले चचाओं को बता दो की भारत से ईसाईयत का बोरी बिस्तर उठाने का समय आ गया है
उन्हें बोल दो अब भारत में हिन्दू जाग चूका है
अब हिन्दू ने भी शस्त्र के साथ शास्त्र उठा लिया है जितना जल्दी हो यहाँ से कट लो"
जय हिन्द जय भारत...🚩🚩
◆ *मै काँग्रेस हूं।* ◆
◆मै हिंदुओं का यमराज हूं।
◆मैने ही ◆
◆हिंदूमुक्त पाकिस्तान बनाया।
◆21लाख हिंदुओंकी कत्ल होनेके बाद भी पाक को 55 करोड रुपये दिये।
◆जीतकर भी हिंदूमुक्त अलग बांगलादेश बनाया।
◆पाक से आये हिंदु लोगोंपर लाठीचार्ज करवाया।
◆धर्म के आधार पर बटवांरा करते हुयेभी 7 करोड मुस्लिमोंको देश मे रखा।
◆हिंदूमुक्त कश्मिर बनाया
◆मुस्लिम पर्सनल लाँ बोर्ड की स्थापना की।◆"सेक्युलर" शब्द संविधानमें घुसाया।
◆आठ राज्योंमें हिंदू अल्पसंख्यांक बनाये।◆JNU मे मुस्लिम शब्द लगाया।
◆BHU में हिंदू शब्द लगाने का विरोध किया।◆काश्मिर मसला जानबुझकर UN लेके गया।◆कश्मिर समस्या जटील बनायी।
◆JK में धारा 35A,370 लगाई।
◆पाक के 93,000 सैनिक छोडकर जीता हुआ POK वापस गिफ्ट किया।
◆90,000 sq km के साथ कैलाश मानसरोवर चीन को सुपुर्द किया।
◆JK में रोहिंग्याओं को बसाया।◆बांगलादेशीयों को देश में घुसाया। वोट बँक बढाई।
◆NRC का विरोध किया।
◆टुकडे गँग और नक्षलीयोंका समर्थन किया। ◆आतंकीयोंके बचाव के लिये रात दो बजे कोर्ट खुलवाये।
◆सरदार पटेल को PM बनने से रोका।◆सुभाष बाबुको काँग्रेस अध्यक्ष बननेसे रोका।◆2700 सिखोंका हत्याकांड किया।
◆दिवाली के दिन शंकरचार्य को खुन के झुटे आरोप में जेल डाला।
◆साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को झुटे आरोप में जेल में डाला।
◆"भगवा आतंकवाद" कहके हिंदुओंको बदनाम किया।
◆दुरदर्शन का "सत्यम शिवम सुंदरम" लोगो हटाया।
◆केंद्रिय नवोदय विद्यालयके लोगोमे से "असतो मा सत गमय" श्लोक हटाया।◆"वंदेमातरम्" को राष्ट्रगान करने के लिये विरोध किया।
◆26/11 के पिछे हिंदूओंका हात बताया।◆तीन तलाक की तुलना श्रीराम ने सिताको छोडने से की
◆आर्मीको धर्म के आधार पर गिनती कर बांटने की कोशिश की।
◆देशकी संपत्तीपर सबसे पहले "अल्पसंख्यकों" का अधिकार बताया।
◆मेरे वकिलोंने आतंकी और टुकडे गँग, नक्षलीयोंके केस लडे।
◆देश में इमर्जन्सी लगाकर लोकतंत्र का गला घोटा।
◆"भारतमाता की जय" "वंदेमातरम" का नारा किसीभी रँली मे नही देते।
◆गौरक्षा के लिये आंदोलन करने वाले साधुओं पर गोली चलाकर सैकडो साधुओंकी 1966 में हत्या की।
◆हज को सबसिडी दी और अमरनाथ यात्रा पर टँक्स लगाया।
◆सोमनाथ मंदिर बनाने के लिये सरदार पटेल का विरोध किया।
◆ सोमनाथ मंदिरका उद्घाटन करने जानेवाले राष्ट्रपती डाँ. राजेंद्र प्रसाद का विरोध किया।
◆ मंदिरमें लडके लडकीयाँ छेडने जाते ऐसा कहा।
◆विदेशोंमे जाकर देश को बदनाम किया।
◆RSS को "मुस्लिम ब्रदरहुड" जैसा आतंकी संघटन कहा।
◆करोडों दोगले हिंदु साथ होते हुये "काँग्रेस मुसलमानोंकी पार्टी" कहा।
◆"मै किसीभी प्रकार के हिंदुत्वपर विश्वास नही रखता" ऐसा कहा।
◆ PM मोदीको शैकडो गालीयाँ दी।
◆श्रीराम को "काल्पनीक" बताकर अँफेडेव्हिट दिया।और रामसेतू तोडनेकी कोशिश की।◆भारत को UN में मिलनेवाला विटो का अधीकार चीन को दिया।
◆ 2019 के घोषणापत्र में देशद्रोह कानुन हटानेकी और आर्मी के अधिकार कम करने की बात की। JK मे आर्मी हटानेकी भी बात की।
◆यदी आप सब "भोले" "सेक्युलर" हिंदूओंका साथ मिले, तो पुरा हिंदूस्तान हिंदू मुक्त बनायेंगे। और आरोप RSS पर लगा देंगे।★ ये मेसेज आपकी जानकारी के लिये है। गुगल करे। सोचे। कुछ झुठ लगे तो बताये। धन्यवाद।
🚩🚩जय परशुराम🚩🚩
अंजीत कुमार शुक्ला प्रदेश प्रवक्ता उत्तर प्रदेश।
27/05/2020
अभी एक ऑटो रिक्शा वाले को खचाखच सवारियाँ भरकर ले जाते देखा तो मैंने कहा, भाई आपको पता नहीं है क्या आप ऑटो रिक्शा में एक ज़्यादा सवारी नहीं बिठा सकते? वो बोला, किसने कहा ये ऑटो रिक्शा है, ये तो ‘बस’ है साहब।
😄
31/07/2018
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