02/05/2026
कभी-कभी, अकेले- अकेले खुद, को कैमरे में कैद करने का मन होता है...........
Proud to serve the nation
02/05/2026
कभी-कभी, अकेले- अकेले खुद, को कैमरे में कैद करने का मन होता है...........
01/05/2026
How does it look? Random clicks... 📸✨
ज़िन्दगी कैसी है पहेली, हाय! 🎈
कभी सोचा है कि ये ज़िंदगी हमें पल भर में हंसा देती है और अगले ही पल आँखों में नमी दे जाती है? फिल्म 'आनंद' का यह गीत महज़ एक धुन नहीं, बल्कि हम सबकी कहानी है।
हम सब यहाँ मुसाफिर हैं, यादों का मेला सजाते हैं और सपनों के पीछे भागते हैं। कभी सपने पूरे होते हैं, तो कभी अधूरे रह जाते हैं। पर शायद इस 'पहेली' का असली मज़ा इसे सुलझाने में नहीं, बल्कि हर पल को पूरी शिद्दत से जीने में है।
मुस्कुराते रहिए, क्योंकि अंत में सिर्फ यादें ही साथ रह जाती हैं। ✨
30/04/2026
चिंतन शिविर, चंडीगढ़ के कुछ यादगार पल......
Amar Jeet Singh
kumar
जल्दी जागना मतलब खुद को समय का उपहार देना। यह वो समय है जब आप अपने शरीर, अपने दिमाग और अपनी आत्मा पर काम करते हैं।
याद रखें, सुबह की शांति में ही सबसे बड़े बदलाव की नींव रखी जाती है।
जब कुछ लोग सो रहे होते हैं, उस समय जल्दी जागने वाले लोग उनसे दो कदम आगे बढ़ चुके होते हैं,
क्या आप आगे बढ़ने वालों में सम्मिलित हैं ?
30/04/2026
A refreshing morning at Sukhna Lake, Chandigarh 🌅
After a peaceful walk along the lake, we found ourselves waiting for a cup of tea—sharing thoughts, laughter, and meaningful conversations.
In this simple yet memorable gathering:
• Two Deputy Directors, Social Welfare, Uttar Pradesh
• A DGM from the Reserve Bank of India
• Staff Officer to Hon’ble Minister Asim Arun
• Chief of Staff (P) to Hon’ble Minister Asim Arun
“Different roles, diverse responsibilities—but united by purpose, humility, shared happiness, deep bonding, and learning from each other.”
29/04/2026
24–27 अप्रैल, चंडीगढ़ में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित चिंतन शिविर में शामिल होने का अवसर मिला।
यह अनुभव सीख, संवाद और प्रेरणा से भरपूर रहा।
इस अवसर के लिए असीम अरुण सर का हृदय से आभार 🙏
28/04/2026
चंडीगढ़ के यूटी गेस्ट हाउस में लगी यह वॉल पेंटिंग सच में अद्भुत है—इतनी जीवंत कि जैसे पानी सच में बह रहा हो।
हमारे प्रिय मित्र एवं बड़े भाई श्री अमरजीत सिंह जी (उपनिदेशक, समाज कल्याण उत्तर प्रदेश) ने बिना किसी तकनीकी सहारे ऐसा फोटो लिया, जिसमें मुझे उस बहते पानी के बीचों-बीच बिल्कुल स्वाभाविक रूप से सेट कर दिया। उनका नजरिया और कला वाकई कमाल की है।
प्रेरित होकर मैंने भी उनका उसी अंदाज़ में फोटो खींचने की कोशिश की… प्रयास ईमानदार था, लेकिन उनकी कलाकारी का स्तर कुछ अलग ही है। 😊
पहली बार में सब कुछ वैसा सीख पाना आसान नहीं होता—और यही फर्क साफ नजर भी आता है।
फिर भी, यह पूरा अनुभव और ये तस्वीरें मेरे लिए अविस्मरणीय बन गईं।
इस पोस्ट में:
पहली फोटो – खूबसूरत वॉल पेंटिंग
दूसरी – उनके द्वारा खींची गई मेरी तस्वीर
तीसरी – मेरे द्वारा खींची गई उनकी तस्वीर
सीख यही है — कला देखकर प्रेरणा मिलती है, और कोशिश करने से सीखने की शुरुआत होती है।
“जनाज़े में वो लोग भी शामिल होते हैं,
जो ज़िंदगी भर जीने नहीं देते…
और बस आँसू बहाकर अपना फ़र्ज़ निभा देते हैं।”
🎵 “ये शाम मस्तानी, मदहोश किए जाए…
मुझे डोर कोई खींचे, तेरी ओर लिए जाए…”
— Yeh Shaam Mastani
✨
“ये शाम मस्तानी” का मतलब सिर्फ एक सुंदर शाम नहीं,
बल्कि वो माहौल है जो इंसान को मदहोश, यानी अपने आप से बाहर और किसी खास एहसास में ले जाता है।
“मुझे डोर कोई खींचे…”
“डोर” एक अदृश्य खिंचाव
जो हमें किसी अपने, किसी सुकून, या किसी खास चीज़ की ओर ले जाता है।
ये “तेरी ओर” किसी इंसान के लिए नहीं,
बल्कि प्रकृति, सुकून और शांति के लिए है।
27/04/2026
Last day at Hotel The Lalit Chandigarh. Healthy breakfast and happy moments!
🍳😊
| Monday | 9am - 5pm |
| Tuesday | 9am - 5pm |
| Wednesday | 9am - 5pm |
| Thursday | 9am - 5pm |
| Friday | 9am - 5pm |