कानून की परिभाषा मे
शारारिक सम्पर्क और फायदा उठाना।
लैंगिक फ्क्षपात की मांग या अनुरोध करना।
अश्लील साहित्य दिरवाना।
लैंगिक प्रकृति का कोई अन्य निंदनीय शारारिक या गैर शाब्दिक आचरण करना।
ये सब यौन उत्पीडन माना जाता है कानून की दृष्टि मे,हमारे संविधान के अनुसार।SHWW ACT2013 धारा नम्बर
2/n
विचार करना चाहिये उन सभी लोगो को जो महिला खिलाङीयो के लिये आपत्तिजनक और संवेदनहीन टिप्पणी कर रहे है । शायद आप समझ पायेगे कि इस तरह का आचरण हमारे समाज मे कितना व्यवहारिक और चलन मे है।हमारे समाज की महिलाये अभयस्त हो गयी है रोज किये जाने वाले ऐसे आचरण की।अब कानून बना है और अपने सम्मान और सुरक्षा को लिये महिला ने आवाज उठाने का साहस किया है आप साथ नही देना चाहते ना दे ,किसी को आहत तो ना करे।
अनुराधा शर्मा
पूर्व चेयरपर्सन एल सी सी
हरियाणा सरकार।
POSH Act-A step towards women safety
हमारा उद्देश्य समाज के हित मे महिला स?
यौन उत्पीडन कानून की परिभाषा मे सिर्फ बलात्कार नही है,अपितु ये भी है---
1-व्यवसाय से सम्बंधित प्रलोभन देना।
2-सेक्सुलर पैलजर के लिये मानसिक उत्पीडन करना।जैसे काम मे अवरोध पैदा करना,अनावश्यक हस्तक्षेप करना,बिना कारण बेइज्जत का व्यवहार करना आदि।
3-धमकी देना महिला को ।यदि वो उत्पीडन की मंशा से व्यवहार करने वाले के यौन प्रस्ताव को स्वीकार नही करती।
4- ऐसा वातावरण पैदा कर देना कि प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से महिला का कार्य ,व्यवसाय,स्वास्थय,
सुरक्षा और भविष्य प्रभावित होता हो।
अतः यदि पुरूष की यौन इच्छाओ को स्वीकार ना करने पर उपरोक्त व्यवहार किया जाता हो तो उसे SHWW ACT 2013 को धारा 3 के तहत यौन उत्पीडन ही माना जायेगा।
क्रमशः
अनुराधा शर्मा
पूर्व चेयरपर्सन एल सी सी
हरियाणा सरकार।
27/09/2022
राह आसान ना थी,
काँटो से भरे थे रास्ते,
चुनौती थी पोश एक्ट को लागू करना ।
प्रथम चेयरपर्सन के तौर पर 2015 से 2018 तक।
लेकिन कदम रूके तो नही----
23/03/2021
SHWW ACT 2013 के औचित्व को ही समाप्त कर रहे है ।कारण एक्ट के विषय मे जानकारी का ना होना।
मित्रो ,
अभी तक हमने पोश एक्ट की परिभाषाओ को जाना। आज हम चर्चा करेगे कि यौन उत्पीडन को किन स्थितियो से समझा जा सकता है।कैसे जानेगे कि यौन उत्पीडन हुआ है या हो रहा है।
किसी भी कार्यरत महिला को उसके व्यवसाय मे लाभ ,या किसी प्रकार का दिया गया प्रलोभन जो यौन स्वीकृति के लिये हो यौन उत्पीडन की परिधि मे माना जायेगा।
कार्यरत महिला के व्यववसाय मे हानि पहुचाना या हानि की धमकी देना यौन अस्वीकृति के कारण यौन अपराध माना जायेगा।
अनाधिकृत हस्तक्षेप करना तथा प्रतिकूल कार्य वातावरण सृजित करना।
कार्यरत महिला की सुरक्षा और स्वास्थय को प्रभावित करने का लिये अवमानजनक व्यवहार करना यौन उत्पीडन की परीधि मे आयेगा।
अतः उपरोक्त स्थितियो मे से यदि किसी भी हालात का सामना कार्यरत महिला को करना पड रहा है तो उसे तुरन्त यौन उत्पीडन के खिलाफ कदम उठाना चाहिये और अपनी शिकायत आई सी अथवा एल सी सी मे करनी चाहिये।
क्रमशः
मित्रौ,
हम महिलाओ के यौन उत्पीडन को रोकने और बचाव के लिये बनाये गये कानून पोश एक्ट पर निरन्तर चर्चा कर रहे है।अफसोस की बात ये है कि हमारे देश मे जब कोई भी व्यक्ति कानून के शिकंजे मे या अपराध के शिकंजे मे आता है तभी अपने बचाव के लिये क्या करना है जानने दौडता है परन्तु मेरा मकसद ये बताना है कि कई बार अपराधी को या पीडित को ये पता ही नही होता कि उसे क्या करना चाहिये और क्या नही।
खैर पोश एक्ट की अगली परिभाषा पर चलते है।
कानून की परीधि मे कौन है नियोजक ?
घर या बाहर जँहा भी महिला काम कर रही है वहाँ उसकी सुरक्षा के लिये जिम्मेदार व्याक्ति,समीति अथवा बोर्ड नियोजक कहलाते है।
विस्तार से थोड़े शब्दो मे जानने के लिये किसी भी कार्यस्थल पर प्रबन्ध,नियमन और व्यवस्था के लिये आधिकृत व्यक्ति या समीति अथवा बोर्ड नियोजक है।
उनकी कानूनी जिम्मेदारी है कि
आई सी का गठन करे।
यौन उत्पीडन से पीडित कर्मचारी को कानूनी कार्यवाही कि आवश्यकता हो तो उपलब्ध कराये।
आई सी की सिफारिशो पर कार्यवाही करे।
आई सी की वार्षिक रिपोर्ट डी ओ कार्यालय मे जमा कराये।
पोश एक्ट के तहत क्योकि दुकान,माल और सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थान कवर होते है इसालिये ना सिर्फ यहाँ की कर्मचारी आपेतु यहां बाहर से आने वाली महिला जैसे खरीदार, या कम्पनी ऐजेन्ट या सफाई कर्मचारी आदि की भी सुरक्षा का दायित्व नियोजक का होता है।
क्रमशः
मित्रो,
पोश एक्ट यानि
The Sexual Harassment Of Women at Workplace { Prevention,Prohibition and Redressal } Act, 2013
कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न ( निवारण ,प्रतिषेध, और प्रतितोष ) आधिनियम,2013
जब हम पोश एक्ट के नाम मे कार्यस्थल शब्द पढते है तो ये जानना जरूरी हो जाता है कि कानून की ट्टाष्टि मे कार्यस्थल की परिधि मे क्या आता है।
पोश एक्ट के तहत सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थान ,विभाग,संस्थाये,
भवन,क्रीडा स्थल,क्लब,होटल,दुकाने एवम जो भी ऐसा स्थान हो जहाँ महिला वैतनिक अथवा अवैतनिक रूप मे कार्य करती है कार्यस्थल माना जायेगा।
कम्पनी के द्वारा दिया गया वाहन और रहने के लिये दिया गया होटल अथवा घर भी कम्पनी का कार्यस्थल माना जायेगा।
असंगठित क्षेत्र जैसे घरो मे काम करने वाली ,या ट्यूशन आदि देने वाली वैतनिक अथवा अवैतनिक महिलाये के विषय मे जिस घर मे वे काम करती है उनका कार्य स्थल माना जायेगा।
क्रमशः
पोश एक्ट के अनुसार किस कमेटी की कहाँ अधिकारिता है?
मित्रों,
अधिकारिता अर्थात यौन उत्पीडन की शिकायतों पर कौन सी कमेटी कहाँ सुनवाई करेगी आज इस विषय पर बात करते है।जानने के लिये कुछ महत्तवपूर्ण बिन्दु हम ध्यान मे रख सकते है।
1
जिस कार्यस्थल पर 10 या 10 से अधिक संख्या मे कर्मचारी कार्य करते है वहाँ आई सी सी कमेटी के अधीन ही यौन उत्पीडन की शिकायते सुनी जायेगी।
2
जिस कार्यस्थल पर 10 से कम संख्या मे कर्मचारी कार्य करते है वह कार्यस्थल लोकल कम्पलेन्ट्स कमेटी के अधीन आता है।
3
यदि किसी कार्यस्थल पर आई सी सी की अधिकारिता तो है परन्तु कमेटी नियोजक के द्वारा नही बनायी गयी है वहॉं भी पोश एक्ट के मुताबक एल सी सी की अधिकारिता रहेगी।
4
उक्त नियम संगठित कार्यक्षेत्र के लिये लागू होते है।
5
सभी असंगठित क्षेत्र एल सी सी की अधिकारिता मे ही पोश एक्ट के अनुसार आयेगे।
6
एल सी सी एवम आई सी सी दोनों स्वम् मे स्वतन्त्र अधिकार प्राप्त कमेटी है।एल सी सी बेशक जिला स्तर पर कार्य करती है परन्तु उसका कोई दखल आई सी की कार्यवाही मे नही होता है।
क्रमशः
क्या है यौन उत्पीडन---जिसके लिये बनाया गया एक्ट SHWW Act 2013
मित्रो ,
महिलाओ की सुरक्षा तथा उत्पीडन को रोकने के लिये पोश एक्ट के प्रावधान नम्बर 2/n के अन्दर किस कार्यकलाप को यौन उत्पीडन के अपराध की परिभाषा में लिया गया है झ्स पर बात करेगे।
1
शारारिक स्पर्श अथवा स्पर्श करने की चेष्टा करना।
2
यौन स्वीकृति की माँग करना अथवा अनुरोध करना।
3
काम रंजित टिप्पणी करना।
4
किसी भी प्रकार की कामउत्तेजक सामग्री का प्रर्दशन करना।
5
यौन सम्बन्धी कोई अन्य अशोभनीय शारारिक,मौखिक,या सांकेतिक आचरण।
उक्त सभी व्यवहार को पोश कानून के अनुसार अपराध की संज्ञा दी गयी है।
क्रमशः
मित्रो,
जिस प्रकार जिला स्तर पर एल सी सी कार्य करती है उसी प्रकार प्रत्येक कार्यस्थल पर आई सी सी बनाना पोश एक्ट के तहत अनिवार्य है।
आई सी सी अर्थात इन्टरनल कम्पलेन्टस कमेटी।
इस कमेटी के सदस्यों का मनोनयन एम्पलोयर यानि कार्यस्थल प्रमुख करता है।
उक्त कमेटी मे भी पचास प्रतिशत महिला सदस्य आनेवार्य है।
आई सी सी की चेयरपर्सन भी महिला हो आनेवार्य है।
कार्यस्थल के कर्मचारी सदस्यो मे से ही इस कमेटी के सदस्य बनाना आनेवार्य है।
आई सी बनाना कानूनी आनेवार्यता है।
इस नियम की कानूनी पालना कराने और उल्लंघन पर कार्यवाही करने का आधिकार डी ओ को होता है।
आई सी का कार्य काल भी तीन वर्ष होता है। क्रमंशः
मित्रो,
लोकल कम्पलेन्टस कमेटी यौन उत्पीडन की शिकायते सुनने के लिये बनायी जाने वाली कमेटी है।
जिला अधिकारी अर्थात डी० ओ0 इस कमेटी का गठन करता है।
यौन उत्पीडन की शिकायतो की जॉच करके अपनी सिफारिशे डी० ओ० को भेजना एल०सी० सी० का कार्य होता है।
एल० सी० सी० के द्वारा भेजी गयी न्यायिक सिफारिशो पर कार्यवाही करने का अधिकार डी० ओ० को होता है।
झ्स कमेटी मे पचास प्रतिशत महिला सदस्य होना अनिवार्य है।
कमेटी की चेयरपर्सन महिला होना अनिवार्य है।
शिक्षित ,सामाजिक अनुभव,पोश एक्ट की जानकारी,कानूनी समझ,तथा महिलाओ से जुडे क्षेत्रो मे काम कर चुकी महिलाओ मे से कमेटी सदस्यो का चयन किया जाता है।
पुरुष सदस्य भी कमेटी मे चयनित किये जाते ह्रै।
तीन वर्ष कमेटी का कार्वकाल होता है।। क्रमशः
मित्रो,
पोश एक्ट को पढा तो कही भी जा सकता है लेकिन यौन उत्पीडन की शिकायतो पर् सुनवाई करते हुए ये अनुभव किया कि बहुत छोटी छोटी बाते शिकायत को यौन उत्पीडन की परिधि यानि ज्यूरिडेकशन मे ला भी सकती है और निकाल भी सकती है।मैने देखा इतनी बड़ी बडी कम्पनीयो के पदो पर बैठे लोग भी एक्ट के बुनियादी विषयो से अनभिज्ञ है।इसलिये थ्योरी के साथ जो अहम प्रश्न मेरे सामने आये और जिनकी कानूनी निर्णय तक जाने मे महत्तवपूर्ण भूमिका रही उन्हे विस्तार से सामने रखने की कोशिश रहेगी।
प्रश्न नम्बर एक----
क्या है आई सी ,एल सी सी ।
क्रमशः
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