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जय भीम नमो बुद्धाय जय संविधान
20/08/2026

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जय भीम नमो बुद्धाय
18/08/2026

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जयहिन्द
26/05/2026

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 #कबपूछेगादेश
21/05/2026

#कबपूछेगादेश

ऐसा चाहूँ राज मैं जहाँ मिलै सबन को अन्न। छोट बड़ो सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न॥जगतगुरू संत शिरोमणि रविदास जी महाराज जी क...
01/02/2026

ऐसा चाहूँ राज मैं जहाँ मिलै सबन को अन्न।
छोट बड़ो सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न॥

जगतगुरू संत शिरोमणि रविदास जी महाराज जी की जयंती पर उनको कोटि कोटि नमन 👏👏

यह कहानी किसी फाइल में दर्ज नाम की नहीं है।यह कहानी उस आदमी की है।जिसने 400 रुपए के बदले अपनी पूरी जवानी नहीं, अपना पूरा...
21/12/2025

यह कहानी किसी फाइल में दर्ज नाम की नहीं है।
यह कहानी उस आदमी की है।
जिसने 400 रुपए के बदले अपनी पूरी जवानी नहीं, अपना पूरा जीवन भारत को सौंप दिया।
35 साल…
पाकिस्तान की अंधेरी कोठरी में।
और जब वह लौटा—तो जवान नहीं, एक चलती-फिरती कुर्बानी बन चुका था।

साल था 1973
पेशावर–रावलपिंडी रोड़
22 नंबर माइलस्टोन के पास एक शख्स बस से उतरा।
नाम बताया—इब्राहिम।

कपड़े, बोली, नमाज का तरीका, चलने-बैठने का ढंग—
सब कुछ ऐसा कि कोई शक की गुंजाइश नहीं।
होटल में रुकना हो या पहचान दिखानी—
हर कागज बिल्कुल दुरुस्त।

लेकिन कहते हैं ना।
किस्मत जब दुश्मन बन जाए तो परछाईं भी मुखबिर बन जाती है।

पाकिस्तानी इंटेलिजेंस की नजर उस पर टिक गई।
बिना किसी ठोस सबूत के
सिर्फ शक के आधार पर
उसे उठा लिया गया।

पूछताछ शुरू हुई।
पहले सवाल।
फिर चीखें।
और फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाला वह दौर—
जिसे यातना कहते हैं।

उससे कहा गया—
“मान ले, तू भारतीय जासूस है।”
लेकिन वह खामोश रहा।

क्योंकि इब्राहिम कोई आम आदमी नहीं था।
वह था भारतीय सेना का पूर्व जवान काश्मीर सिंह।

एक ऐसा सिपाही
जिसने नाम बदला, मजहब बदला, पहचान बदली
लेकिन वतन नहीं बदला।

महज 400 रुपए महीने के गुप्त कॉन्ट्रैक्ट पर
वह दुश्मन के देश में गया
और भारत की ढाल बनकर खड़ा हो गया।

गिरफ्तारी के बाद
जो उसके साथ हुआ, वह सुनकर रूह कांप उठती है।

नाखून उखाड़े गए।
बिजली के झटके दिए गए।
हड्डियाँ तोड़ने की कोशिश की गई।

लेकिन देश का राज उसके होंठों से बाहर नहीं आया।

आखिरकार उसे मौत की सजा सुना दी गई।
लेकिन फाँसी नहीं दी गई।

क्योंकि पाकिस्तान चाहता था।
वह जिंदा रहे और हर दिन मरे।

उसे एक अंधेरी कालकोठरी में डाल दिया गया।

लगातार 17 साल
एक अकेला सेल
हाथ-पैरों में जंजीरें
इतनी जगह भी नहीं कि सीधा लेट सके।

35 साल तक
उसने न सूरज देखा,
न खुला आसमान,
न किसी अपने का चेहरा।

जेल के पहरेदार उसे पागल समझने लगे।
धीरे-धीरे उसका दिमाग भी जवाब देने लगा।

लेकिन एक चीज कभी नहीं टूटी,
उसकी देशभक्ति।

उसे याद था—
अगर एक शब्द भी फिसल गया
तो देश को नुकसान होगा
और उसके परिवार की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी।

जब उसे पकड़ा गया था।
उसकी पत्नी परमजीत कौर की गोद में
तीन छोटे-छोटे बच्चे थे।
तीनों की उम्र 10 साल से कम।

पति गायब
दुनिया ने मान लिया—
काश्मीर सिंह मर चुका है।

लेकिन परमजीत नहीं मानी।

न उसने सफेद साड़ी पहनी।
न सिंदूर छोड़ा।
न चूड़ियाँ तोड़ीं।

उसका विश्वास अडिग था
“मेरा पति जिंदा है, और एक दिन जरूर लौटेगा।”

1986 में
पाकिस्तान ने कुछ भारतीय बंदियों की सूची जारी की।
तभी पता चला—
काश्मीर सिंह जिंदा है
लेकिन फाँसी का कैदी है।

इसके बाद भी
22 साल और बीत गए।

फिर आया साल 2008।

पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री
अंसार बर्नी
लाहौर जेल का निरीक्षण करने पहुँचे।

वहाँ उन्होंने देखा—
एक बेहद कमजोर, टूटा हुआ
लगभग खो चुका बुजुर्ग।

जाँच में सामने आया—
यह आदमी 35 साल से बिना किसी मुकदमे के कैद है।

मानवीय आधार पर
बर्नी ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से
उसकी रिहाई की सिफारिश की।

मंजूरी मिल गई।

4 मार्च 2008
बाघा बॉर्डर।

काँपते कदमों से
एक बूढ़ा आदमी
भारत की सीमा में दाखिल होता है।

सामने खड़ी थी—
उसकी पत्नी
उसके बच्चे

वह पल
सिर्फ मिलन नहीं था, वह इतिहास था।

अब तक वह खुद को
मानसिक रूप से अस्थिर
या आम नागरिक बताता रहा था।

लेकिन
भारतीय जमीन पर पैर रखते ही
उसकी रीढ़ सीधी हो गई।

गर्व से बोला—

“मैं भारतीय जासूस था।"
मैंने अपना फर्ज निभाया।
उन्होंने मुझे 35 साल कैद में रखा,
लेकिन मेरे मुँह से
एक शब्द भी नहीं निकलवा पाए।

यह थी
बेमोल देशभक्ति।

एक ऐसा योद्धा
जिसने 400 रुपए में
अपनी जवानी,
अपना जीवन,
अपना सब कुछ
भारत पर न्योछावर कर दिया।

काश्मीर सिंह ने साबित कर दिया—
देशभक्ति की कोई कीमत नहीं होती।
यह खून में होती है।

जयहिंद 🙏🇮🇳

 आज के समय में हर कोई अपने वाहन में एलईडी लाइट लगवा रहा है। रात के समय इन एलईडी लाइट के कारण सामने से आ रहे वाहन चालक को...
24/10/2025


आज के समय में हर कोई अपने वाहन में एलईडी लाइट लगवा रहा है। रात के समय इन एलईडी लाइट के कारण सामने से आ रहे वाहन चालक को कुछ दिखाई नहीं देता। जिस कारण हर रोज एक्सीडेंट हो रहे हैं, और बहुत सारे लोग हर रोज अपनी जान गवा रहे हैं। सरकार को चाहिए इन एलईडी लाइट का प्रयोग तुरंत बंद कर दिया जाए। ताकि एलईडी लाइट के कारण किसी और की जान ना जाए।

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