Dr. Randhir Kumar

Dr. Randhir Kumar

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Represented India-UN Conference, Hanoi,VNM. Govt.Off.,Author, Activist,PhD in English Lit., National Awardee,Guest Faculty,Soc.& Pol. of Biz. Profit) from 2014.

analyst, Alumns- Central University of Jharkhand, IIM Ranchi & London Schl. Admin.,
National President - NHRCCB. Dr. Randhir Kumar is Founder Chairman and National President of National Human Rights and Crime Control Bureau –NHRCCB (A Civil Society) since 7th November, 2017. He is also founder President& Chairman of Naman Foundation / Naman International Foundation for Education and Social Researc

02/06/2026

झारखंड की आत्मा को बचाना है तो उसके साहित्यकारों एवं कलाकारों को बचाइए।

दैनिक अखबार " अनुपम संदेश" में प्रकाशित मेरी लेख, समस्त साहित्यकारों, कलाकारों को समर्पित।

आभार विष्णु जी !




Hemant Soren Santosh Gangwar

Photos from Dr. Randhir Kumar's post 01/06/2026

आभार विहान छत्तीसगढ़ एवं अनुपम संदेश।



Office of Dr.Randhir Kumar

Photos from Dr. Randhir Kumar's post 31/05/2026

युवाओं को मानवाधिकार जागरूकता एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

आज NHRCCB राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर श्री प्रभात मिश्रा जी के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय ऑनलाइन वेबिनार "युवा, नेतृत्व एवं मानवाधिकार : भारत के भविष्य में NHRCCB की भूमिका" में देशभर के युवाओं, पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ।

मानवाधिकार संरक्षण केवल अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण, समावेशी एवं विकसित भारत के निर्माण का आधार भी है। युवाओं की ऊर्जा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।

सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं NHRCCB परिवार के सदस्यों का हार्दिक धन्यवाद।

31/05/2026

साहित्यकार और कलाकार समाज की आत्मा हैं—उनके सम्मान, सुरक्षा और कल्याण हेतु सामूहिक पहल आवश्यक है।

दैनिक अखबार " समृद्ध झारखंड" में प्रकाशित मेरी लेख , झारखंड के साहित्यकारों, कलाकारों को समर्पित।




Hemant Soren
Santosh Gangwar

सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, सुरक्षा भी चाहिए: झारखंड के साहित्यकारों और कलाकारों के लिए कल्याण कोष 30/05/2026

समृद्ध झारखंड में प्रकाशित मेरे लेख "झारखंड साहित्यकार- कलाकार कल्याण कोष की अनिवार्यता" में राज्य के साहित्यकारों एवं कलाकारों के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण की आवश्यकता पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं।

साहित्य और संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा हैं; इनके संरक्षण हेतु ठोस कल्याणकारी व्यवस्था समय की मांग है।

— डॉ. रणधीर कुमार

सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, सुरक्षा भी चाहिए: झारखंड के साहित्यकारों और कलाकारों के लिए कल्याण कोष की मांग

सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, सुरक्षा भी चाहिए: झारखंड के साहित्यकारों और कलाकारों के लिए कल्याण कोष झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने वाले साहित्यकारों और लोक कलाकारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को लेक...

30/05/2026

पिछले दिनों की एक खबर से मन बेहद व्यथित है।

जिस कलाकार ने अपने गीतों से झारखंड की संस्कृति, लोकभाषा, लोकपरंपरा और गांव की आत्मा को देश-दुनिया तक पहुँचाया, वही कलाकार अपने जीवन के अंतिम संघर्ष में आर्थिक तंगी और इलाज के अभाव से जूझता रहा।

खोरठा के स्वर कोकिल, लोक कलाकार, साहित्यकार और गीतकार सुरेश कुमार विश्वकर्मा (सुकुमार) ने “मांदर बाजे रे”, “मांय गो मांय” जैसे कालजयी गीतों से झारखंड की पहचान बनाई। उनकी रचनाएँ विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं, उन्हें सम्मान मिले, पुरस्कार मिले, लेकिन जब जीवन बचाने की बारी आई तो आर्थिक संकट के कारण उन्हें वेल्लोर से बिना समुचित इलाज लौटना पड़ा। बाद में उनका निधन हो गया। यह केवल एक कलाकार की मृत्यु नहीं है, यह हमारी सामूहिक संवेदनहीनता का प्रश्न है।

दुर्भाग्य से यह पहली घटना नहीं है।

झारखंडी भाषा, संस्कृति और लोक साहित्य के महान पुरोधा पद्मश्री गिरिधारी राम गौंझू भी कोविड काल में स्वास्थ्य सुविधाओं और उचित उपचार के संघर्ष की पीड़ा से गुज़रे थे। जिन लोगों ने अपना संपूर्ण जीवन झारखंड की भाषाओं, संस्कृति और पहचान को समर्पित कर दिया, उन्हें जीवन के सबसे कठिन समय में व्यवस्था से अपेक्षित सहारा नहीं मिल पाया।

यह सवाल केवल सरकार से नहीं, हम सभी से है। जब कोई कलाकार मंच पर होता है, हम तालियाँ बजाते हैं।जब उसकी किताब प्रकाशित होती है, हम प्रशंसा करते हैं।जब उसे सम्मान मिलता है, हम फोटो खिंचवाते हैं। लेकिन जब वही कलाकार अस्पताल के बिस्तर पर होता है, तब उसके साथ कितने लोग खड़े रहते हैं?

झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा से नहीं है।
झारखंड की असली पहचान उसके लोकगीत, लोकभाषाएँ, मांदर की थाप, जनजातीय परंपराएँ, लोककथाएँ और उन्हें जीवित रखने वाले साहित्यकार एवं कलाकार हैं।यदि ऐसे लोग असहाय होकर दुनिया से विदा होंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमसे पूछेंगी कि जिन लोगों ने हमारी संस्कृति को बचाया, हम उन्हें क्यों नहीं बचा सके?

आज आवश्यकता है कि झारखंड सरकार, सांस्कृतिक संस्थाएँ और समाज मिलकर एक “कलाकार एवं साहित्यकार कल्याण कोष” का निर्माण करें, जिससे राज्य के वरिष्ठ साहित्यकारों, लोक कलाकारों और भाषा आंदोलन से जुड़े लोगों को गंभीर बीमारी, वृद्धावस्था और आर्थिक संकट के समय सम्मानजनक सहायता मिल सके।

किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके कलाकारों और विद्वानों के सम्मान से होती है। सुकुमार जी की पीड़ा हमें झकझोरती है। गिरिधारी राम गौंझू जी का संघर्ष हमें याद दिलाता है।और यह दोनों घटनाएँ हमसे पूछती हैं—

क्या झारखंड अपनी संस्कृति के रक्षकों को केवल सम्मान-पत्र देगा, या उनके जीवन की भी जिम्मेदारी लेगा?

सुकुमार जी को विनम्र श्रद्धांजलि।

उनकी आवाज़, उनकी लेखनी और उनकी सांस्कृतिक विरासत सदैव झारखंड की आत्मा में जीवित रहेगी।



Office of Dr.Randhir Kumar
परिवर्तन झारखंड -Change Jharkhand

Photos from Dr. Randhir Kumar's post 29/05/2026

आज हजारीबाग में आयोजित कार्यक्रम में सपरिवार सम्मिलित होकर माननीय पूर्व सांसद श्री भुनेश्वर प्रसाद मेहता जी एवं आदरणीय श्रीमती शंकुतला देवी जी को वैवाहिक जीवन की 65वीं वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

माननीय भुनेश्वर प्रसाद मेहता जी झारखंड की राजनीति की एक सशक्त पहचान हैं। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, समाज सेवा के प्रति समर्पण एवं जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। साथ ही, वे एनएचआरसीसीबी के राष्ट्रीय संरक्षक के रूप में भी समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान कर रहे हैं।

ईश्वर से प्रार्थना है कि आप दोनों सदैव स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु रहें तथा आपका स्नेह, अनुभव एवं आशीर्वाद समाज को निरंतर प्रेरित करता रहे।

#65वींवर्षगांठ

24/05/2026

NHRCCB द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन 2026 में प्राप्त सम्मान मेरे जीवन के लिए अत्यंत गौरव एवं प्रेरणा का विषय है।

यह सम्मान मानवाधिकार, सामाजिक सेवा, शिक्षा एवं मानवता के प्रति समर्पित कार्यों को और अधिक ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान करता है।

मैं इस सम्मान के लिए NHRCCB परिवार एवं समस्त टीम के सभी सम्मानित सदस्यों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग, स्नेह एवं विश्वास ने मुझे सदैव समाजहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

मानव सेवा, सामाजिक न्याय एवं मानव अधिकारों की रक्षा हेतु हमारा संकल्प सदैव इसी प्रकार समाज के हित में कार्य करता रहे, यही कामना है।

“जब संस्कार जीवित रहते हैं, तभी मानवता सुरक्षित रहती है।”

21/05/2026

किरदार शिद्दत से निभाइए हकीकतों में,
कहानी एक ना एक दिन सबको होना है ।

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