Sikhwal Pragati Samaj

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Sikhwal Pragati Samaj "सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास"

19/09/2026
शोक संदेश:रामनिवास जोशी उम्र 48 वर्षसुपुत्र: रामेश्वरलाल जोशीपिपलिया खुर्द वाला का आकस्मिक निधन आज गुरुवार 10 सितंबर 202...
10/09/2026

शोक संदेश:

रामनिवास जोशी उम्र 48 वर्ष
सुपुत्र: रामेश्वरलाल जोशी
पिपलिया खुर्द वाला का आकस्मिक निधन आज गुरुवार 10 सितंबर 2026 को प्रातःकाल भाग्यनगर-हैदराबाद में हुआ ।

अंतिम यात्रा: आज गुरुवार 10 सितंबर 2026 दोपहर 12 बजे निवास स्थान: आगपुरा से स्थानीय मोक्षधाम ईमलीबन शमशान वाटिका जायेगी ।

शोकाकुल: जोशी परिवार पिपलियाखुर्द वाला
📲: 92465 25473
📲: 98480 25473

सभी को नागपंचमी की ढ़ेर सारी बधाईयाँ…,
22/08/2026

सभी को नागपंचमी की ढ़ेर सारी बधाईयाँ…,

15/08/2026

सिखवाल प्रगति समाज ऋष्य श्रृंग भवन फीलखाना भाग्यनगर-हैदराबाद द्वारा देश का 80 वा आजादी दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ...!

🇮🇳 !! जय हिन्द !! 🇮🇳भारत की स्वतंत्रता का 80वा स्वतंत्रता दिवस समारोह 15 अगस्त 2026आओ तिरंगा फहराएँ,देशभक्ति का दीप जलाए...
10/08/2026

🇮🇳 !! जय हिन्द !! 🇮🇳

भारत की स्वतंत्रता का 80वा स्वतंत्रता दिवस समारोह 15 अगस्त 2026

आओ तिरंगा फहराएँ,
देशभक्ति का दीप जलाएँ,
वीर शहीदों को शीश नवाएँ,
आजादी का पर्व मनाएँ...! 🇮🇳

सादर आमंत्रण👏
भारत की स्वतंत्रता के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आयोजित ध्वजारोहण एवं स्वतंत्रता दिवस समारोह में आपकी गरिमामयी उपस्थिति सादर अपेक्षित है...!👏

दिनांक : शनिवार 15 अगस्त 2026
⏰ समय : प्रातः 10:31 बजे

📍 आयोजन स्थल
ऋष्य श्रृंग भवन
(श्री राधाकृष्ण धाम)
ऋष्य श्रृंग मार्ग, फीलखाना, बेगमबाजार, भाग्यनगर, हैदराबाद

आइए, राष्ट्रध्वज के सम्मान एवं राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ इस गौरवमयी दिवस को हम सभी मिलकर अतिउत्साह एवँ हर्षोल्लास पूर्वक मनाएँ...!

🇮🇳 वन्दे मातरम् 🇮🇳
🇮🇳 भारत माता की जय 🇮🇳

निवेदक:
सिखवाल प्रगति समाज
ऋष्य श्रृंग भवन, फीलखाना
भाग्यनगर, हैदराबाद

परंपरा का सम्मान, समाज का उत्थान...,किसी भी समाज की पहचान केवल उसके वैभव, संख्या या भवनों से नहीं होती, बल्कि उसके संस्क...
06/08/2026

परंपरा का सम्मान, समाज का उत्थान...,

किसी भी समाज की पहचान केवल उसके वैभव, संख्या या भवनों से नहीं होती, बल्कि उसके संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से होती है, जब समाज स्वयं अपनी परंपराओं में समयानुकूल सुधार करता है, तभी वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनता है...!

चित्र में दर्शाए गए निर्णयों से समाज को कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों का संकल्प लेना होगा, जैसे मृत्यु भोज अवश्य करें लेकिन उसमें अनावश्यक खर्च पर रोक, विवाह समारोहों में फिजूलखर्ची कम करना, अफीम एवं अन्य नशों पर प्रतिबंध, रंग कि चोलिया जैसी अनुचित परंपराओं को समाप्त करना तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सामाजिक दायित्व तय करना, ऐसे निर्णय केवल नियम नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाले संकल्प बन सकते है...!

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम दिखावे की होड़ छोड़कर शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य और समाज सेवा को प्राथमिकता दें, लाखों रुपये रस्मों और आडंबर पर खर्च करने के बजाय यदि वही धन बच्चों की शिक्षा, गरीब परिवारों की सहायता, छात्रवृत्ति, चिकित्सा या समाज के विकास कार्यों में लगाया जाए, तो समाज की वास्तविक प्रगति संभव है, जिसका एक उदाहरण "अहमदाबाद में स्थित सिखवाल ब्राह्मण सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट" हैं, और दूसरा उदाहरण फर्जी घोषणाओं से सुसज्जित तथा समाज के धन का दुरुपयोग "लेबड़" वर्तमान में समाज के सामने हैं...!

परंपराएँ हमारी संस्कृति की धरोहर हैं, लेकिन हर परंपरा समय की कसौटी पर खरी उतरे, यह आवश्यक नहीं, जो परंपरा समाज पर आर्थिक, मानसिक या सामाजिक बोझ बन जाए, उसमें सुधार करना ही सच्ची समाज सेवा है, सुधार का विरोध नहीं, बल्कि उसका स्वागत होना चाहिए...!

समाज तभी मजबूत होगा जब प्रत्येक व्यक्ति यह समझे कि सम्मान खर्च से नहीं, संस्कार से मिलता है, सादगी में भी गरिमा होती है और अनुशासन में ही समाज की शक्ति छिपी होती है...!

आइए, हम सभी संकल्प लें:
"दिखावे से नहीं, विचारों से समाज महान बनेगा, फिजूलखर्ची नहीं, शिक्षा और सेवा हमारी पहचान बनेगी...!
परंपरा का सम्मान होगा, लेकिन समाजहित सर्वोपरि रहेगा...!"

यही जागरूक समाज की पहचान है और यही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे बड़ी विरासत होगी...!

सुरेश कुमार व्यास "जानम"
सिखवाल समाचार®
सत्य का "दर्पण" - समाज को "अर्पण"

भारतीय ऋषि परम्परा में महर्षि श्रृंगी का नाम नैष्ठिक ब्रह्मचर्य, पवित्रता और वेद-ज्ञान की पराकाष्ठा के रूप में लिया जाता...
05/08/2026

भारतीय ऋषि परम्परा में महर्षि श्रृंगी का नाम नैष्ठिक ब्रह्मचर्य, पवित्रता और वेद-ज्ञान की पराकाष्ठा के रूप में लिया जाता है, इन्हीं के वंशज सिखवाल / शृंगवाल / सुखवाल, श्रृंगी ब्राह्मण कहलाते हैं, यह समाज मुख्यतः राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार-बंगाल क्षेत्र में बसा हुआ है...!

1. महर्षि श्रृंगी का जन्म पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि श्रृंगी, महर्षि विभाण्डक और शापित देवकन्या मृगी / उर्वशी के पुत्र थे...!

एक कथा यह भी है कि उनके सिर पर सींग जैसा उभार था, इसलिए उनका नाम ऋष्यशृंग पड़ा, जिसका अर्थ है "हिरण के सींग वाला" कुछ विद्वानों का मत है कि वे ज्ञान में शिखर / श्रृंगवत थे, इसलिए श्रृंगी कहलाए...!

इनका जन्म त्रेता युग में आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में माना जाता है...!

2. अंगदेश आगमन और विवाह: एक समय अंगदेश (वर्तमान बिहार के कोसी तट) में भयंकर अकाल पड़ा, नारद जी के परामर्श पर राजा रोमपाद ने ऋष्यशृंग को वर्षा यज्ञ के लिए बुलवाया, उनके अंगदेश में प्रवेश करते ही मूसलाधार वर्षा हुई और फिर विधिवत वृष्टि यज्ञ से अकाल समाप्त हुआ...!

प्रसन्न होकर राजा रोमपाद ने अपनी दत्तक पुत्री शांता का विवाह महर्षि श्रृंगी से कर दिया, शाँता वास्तव में अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या की पुत्री थीं, जिन्हें निःसंतान मित्र रोमपाद को दत्तक रूप में दिया गया था...!

3. पुत्रेष्टि यज्ञ और श्रीराम जन्म में भूमिका: जब राजा दशरथ पुत्रहीनता से दु:खी थे, तब गुरु वशिष्ठ के कहने पर महर्षि श्रृंगी को अयोध्या बुलाया गया, उन्होंने अथर्ववेद के मंत्रों से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया...!

यज्ञ के अग्निकुंड से दिव्य खीर प्रकट हुई, जिसे दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को दिया और उसी से राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न का जन्म हुआ, इस प्रकार श्रृंगी ऋषि रिश्ते में भगवान राम के जीजा और गुरु दोनों हुए...!

4. सिखवाल ब्राह्मणों की उत्पत्ति: यज्ञ के बाद महर्षि श्रृंगी अंगदेश लौट आए, माता शाँता के गर्भ से उनके पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम शाँत-सारंग/शाँत-सारंग्य रखा गया...!

ऋषि श्रृंगी ने स्वयं पुत्र को वेदाध्ययन कराया, जिससे वे सारंग्य ऋषि के नाम से प्रसिद्ध हुए, उन्हीं से श्रृंग वंश अर्थात सिखवाल जाति का आविर्भाव हुआ...!

सारंग्य ऋषि के सात पुत्र हुए: ज्ञानेश्वर, वाराधीश/धाराशीश, भीमेश्वर, गोविंद, दुग्धेश्वर, अनिलेश्वर/अनिहेश्वर और जयेश्वर...!

इन सातों के 24 पुत्र हुए और इन 24 ऋषियों से सिखवाल समाज के 54-57 गोत्र प्रादुर्भूत हुए हैं...!

पिता विभाण्डक के आदेशानुसार: "एक पुत्र होने के पश्चात वन में लौट आना" महर्षि श्रृंगी अंत में वानप्रस्थ लेकर गंगा तट पर श्रृंगरामपुर में तप करने लगे, जहाँ आज भी उनका आश्रम और प्रतिवर्ष मेला लगता है...!

5. सिखवाल ब्राह्मण समाज की विशेषताएं: कुल: सारस्वत ब्राह्मणों की शाखा में गिने जाते हैं, एक प्राचीन उल्लेख में सिखवाल ब्राह्मणों के 4 गोत्र और 49 जातियां बताई गई हैं...!

संस्कृति: वेदपाठ, पंचमहायज्ञ, संध्या-अग्निहोत्र को आज भी गृहस्थ में रहते हुए भी निभाने की परम्परा इनमें है...!

स्वभाव: अपने मूल स्थान से रोजगार के लिए बाहर जाने पर भी अपनी परम्परा और संस्कारों को नहीं छोड़ने वाले समाज के रूप में इनकी पहचान है...!

निष्कर्ष:
महर्षि श्रृंगी केवल एक पौराणिक ऋषि नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन हैं, वन की पवित्रता में पले, राजमहल के भोग में भी सात्विक रहे और फिर आत्मचिंतन से पुनः तप की ओर लौट गए, उनके वंशज सिखवाल ब्राह्मण आज भी उसी ज्ञान, त्याग और पवित्रता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं...!

साभार: सोशल मीडिया
विशेष अनुरोध: किसी तरह की भूल हो तो कृपा कर प्रमाण सहित सुधार करने का निवेदन कर सकते हैं...!

सुरेश कुमार व्यास "जानम"
सिखवाल समाचार®
सत्य का "दर्पण" - समाज को "अर्पण"

🎉🎂!! जन्मदिन की हार्दिक बधाई ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ !! 🎂🎉मरुधरा की धरती गेमलियावास निवासी फेसबुक के सरताज सच के साथ खड़े रहन...
04/08/2026

🎉🎂!! जन्मदिन की हार्दिक बधाई ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ !! 🎂🎉

मरुधरा की धरती गेमलियावास निवासी फेसबुक के सरताज सच के साथ खड़े रहने वाले तथा झूठों को सच्चाई का आईना दिखाने वाले "60 में भी 18 का दम-खम" रखने वाले, सोशल मीडिया जगत के सुप्रसिद्ध व्यक्तित्व आदरणीय श्री रामजीवन जी तिवारी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई अनंत शुभकामनाएँ...!

आपकी ऊर्जा, सक्रियता, बेबाक लेखनी और समाज के प्रति समर्पण हर आयु सीमा को चुनौती देता है, उम्र केवल एक संख्या है, और आपने यह सिद्ध कर दिया है कि जोश, जुनून और जज़्बा कभी बूढ़ा नहीं होता, आज सम्पूर्ण भारत वर्ष में फेसबुक बादशाह के नाम से आपने अपनी अमिट छाप छोड़ी हैं...!

ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख, समृद्धि, यश और निरंतर जनसेवा का सामर्थ्य प्रदान करें, आपकी कलम यूँ ही समाज को सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए जागृत करती रहे और आपकी मुस्कान सदैव बनी रहे, ताकि जलने वालों की नजर न लगें...!

🎂 आपका जन्मदिन मंगलमय हो...!
💐ऋष्यराज श्रृंग माता शाँता के शुभाशीर्वाद से आप शतायु हों, स्वस्थ रहें, सदैव ऊर्जावान रहें...! 💐

सुरेश कुमार व्यास "जानम"
सिखवाल समाचार®
सत्य का "दर्पण" - समाज को "अर्पण"

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