03/09/2023
ISRO Aditya-L1 Mission: इसरो ने अपने पहले सूर्य मिशन 'आदित्य-एल1' (Aditya-L1) को लॉन्च कर दिया है। इस मिशन को दो सितंबर यानी आज सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। भारत के इस पहले सौर मिशन से इसरो सूर्य का अध्ययन करेगा।
03/09/2023
केंद्र सरकार ने एक देश, एक चुनाव को लेकर एक समिति का गठन कर दिया है। यह समिति देश में एक साथ चुनाव कराए जाने को लेकर कानूनी से लेकर संवैधानिक पहलुओं पर विचार विमर्श करेगी।
02/09/2023
भोपाल में आयोजित अतिथि शिक्षक पंचायत में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की बड़ी घोषणाएं।
27/08/2023
भारतीय इतिहास में 23 अगस्त की तारीख ऐतिहासिक तौर पर दर्ज हो चुकी है। इसी दिन भारत ने चांद की जमीन पर कदम रखे। अब इस 23 अगस्त को हर साल नेशनल स्पेस-डे (National Space Day) के रूप में मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इसका ऐलान किया है।
19/08/2023
As Chandrayaan-3 entered its penultimate stage before making a soft landing on the Lunar south pole next week, the race between the Indian spacecraft and Russia's Luna-25 has gained momentum.
20/06/2023
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जल संरक्षण में व्यक्तियों, संगठनों, जिलों और राज्यों द्वारा किए गए सराहनीय प्रयासों को मान्यता देते हुए और प्रोत्साहित करते हुए शनिवार को नई दिल्ली में चौथा राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रदान किया। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा घोषित पुरस्कारों का उद्देश्य पानी के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना और सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करना है। मध्य प्रदेश जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए सर्वश्रेष्ठ राज्य श्रेणी में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में उभरा।
मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2022 में सर्वश्रेष्ठ राज्य श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह मान्यता जल संरक्षण के प्रति राज्य के असाधारण समर्पण और अभिनव उपायों को रेखांकित करती है। सरकार ने विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर कुशल जल प्रबंधन सुनिश्चित करने और राज्य भर में टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए रणनीतियों को लागू किया है। मध्य प्रदेश की उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए इस महत्वपूर्ण संसाधन के संरक्षण में अपने प्रयासों को प्राथमिकता देने और बढ़ाने के लिए एक प्रेरणा के रूप में कार्य करती है।
17/06/2023
संरक्षण रिजर्व (Conservation Reserves) को संरक्षण आरक्षित भी कहा जाता है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, संरक्षण रिजर्व ऐसे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जो राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और आरक्षित/संरक्षित वनों के बीच बफर जोन या संयोजक और वन्यजीव गलियारे के रूप में कार्य करते हैं।
इन संरक्षित क्षेत्रों को पहली बार वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2002 में परिभाषित किया गया था।
राज्य सरकारें राज्य वन्य जीव बोर्ड और स्थानीय समुदायों के साथ परामर्श करने के पश्चात् संबन्धित राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन निम्नलिखित विशेषता वाले क्षेत्रों को संरक्षण रिजर्व घोषित कर सकती है:
ऐसे क्षेत्र जो राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के समीप स्थित हैं।
ऐसे क्षेत्र जो एक संरक्षित क्षेत्र को दूसरे संरक्षित क्षेत्र से जोड़ते हैं।
वनस्पतियों तथा प्राणियों और उनके आवास की सुरक्षा करने वाले भू-परिदृश्य एवं समुद्री परिदृश्य।
वन्य जीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और संरक्षित वनों के समान संरक्षित रिजर्व पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र नहीं होते है। हालांकि, संरक्षित रिजर्व के अंदर किसी भी विकासात्मक या कृषि गतिविधि को राज्य और केंद्रीय वन्यजीव बोर्ड से मंजूरी की आवश्यकता होती है।
15/06/2023
नई संसद भवन में फौकॉल्ट पेंडुलम भी वैज्ञानिक जाँच और वैज्ञानिक स्वभाव की भावना का प्रतिनिधित्व करता है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A में निहित है।
•फौकॉल्ट पेंडुलम का नाम 19वीं शताब्दी के फ्राँसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फौकॉल्ट के नाम पर रखा गया है, इसका उपयोग पृथ्वी के घूर्णन को प्रदर्शित करने के लिये किया जाता है।
•पेंडुलम में एक भारी बॉब होता है जो छत में एक निश्चित बिंदु से लंबे, मज़बूत तार के अंत में निलंबित होता है। जैसे ही पेंडुलम घूमेगा, तो पेंडुलम और घूमती हुई पृथ्वी के बीच सापेक्ष गति के कारण पेंडुलम समय के साथ धीरे-धीरे अपना अभिविन्यास बदलता हुआ प्रतीत होता है।
•फौकॉल्ट ने पहली बार सार्वजनिक रूप से वर्ष 1851 में पेरिस के पैंथियॉन में यह प्रयोग किया था, जहाँ उन्होंने 67 मीटर तार से 28 किलोग्राम लोहे की गेंद को लटका दिया था। यह पृथ्वी के घूर्णन का पहला प्रत्यक्ष दृश्य प्रमाण था।
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15/06/2023
A prominent figure in the history of India, Mahatma Gandhi never failed to express his opinion concerning the caste system, the inhumane treatment of untouchables and many problems plaguing the country. He espoused the ideas of brotherhood, non-violence and civil disobedience.
14/06/2023
गुजरात में 15 जून को बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजॉय की आहट है। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बीते पांच सालों में गुजरात तट को प्रभावित करने वाला चौथा बड़ा चक्रवात है। इससे पहले 2019 में चक्रवात वायु के चलते भूस्खलन हुआ फिर 2020 में महाराष्ट्र में आने वाले निसर्ग तूफान ने तटीय गुजरात में भीषण बारिश से नुकसान पहुंचाया। साल 2021 में तौक्ताई ने दीव-ऊना के पास एक भूस्खलन किया, जिससे व्यापक विनाश हुआ। गुजरात ने 1998 से अब तक 20 सालों में चार बड़े चक्रवातों का सामना किया। कांडला से टकराने वाले एक सुपर-चक्रवात ने तो मानव जीवन और संपत्ति को ऐसा नुकसान पहुंचाया, जिसके निशान 2018 तक देखने को मिले थे।
13/06/2023
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने के मौके पर एक स्मारक सिक्का जारी किया और ‘इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस’ (IBCA) की भी शुरुआत की। इस आईबीसीए में ऐसे देश शामिल हैं, जहां ‘मार्जार’ प्रजाति के सात पशु-बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, पुमा, जगुआर और चीता पाए जाते हैं। यह संगठन इन पशुओं के संरक्षण एवं सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगा। साथ ही पीएम मोदी ने बाघों की संख्या के नए आंकड़े जारी किए. इसके मुताबिक वर्ष 2022 में देश में बाघों की संख्या 3167 थी।पिछले 4 साल में 200 बाघ बढ़े। इससे पहले 2018 में ये संख्या 2967 थी। बता दें कि बाघों की संख्या का आंकड़ा हर चाल साल के अंतराल पर ही जारी किया जाता है।
1973 में जब प्रोजेक्ट टाइगर शुरू हुआ था, देश में 1,800 बाघ रह गए थे, वहीं 2006 में महज 1,411 ही बचे थे। इस लिहाज से 17 सालों में बाघों की आबादी 2.25 गुना बढ़ी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम के दौरान कहा, प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए गर्व की बात है। भारत ने आजादी के 75 साल पूरे कर लिए हैं; और साथ ही, दुनिया की 75% बाघ आबादी आज भारत में है। मध्य भारत में बाघों की संख्या 1033 से बढ़कर चार साल में 1,161 पर आई। महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश के कई नए क्षेत्रों में बाघ नजर आए। सुंदरबन में 100 बाघ मिले, जो 2018 में दर्ज 88 से अधिक हैं। पश्चिमी घाट में 2022 में 824 बाघ मिले।
12/06/2023
पृथ्वी पर ऐसे आद्र भूमि के क्षेत्र, जो जैव विविधता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है | उन महत्वपूर्ण स्थलों को रामसर संधि के तहत रामसर स्थल के रूप में सूचित किया जाता है, ताकि उनका संरक्षण किया जा सके, जिन्हे रामसर स्थल कहां जाता है | भारत में वर्तमान में 75 रामसर स्थल हैं।
2 फरवरी 1971 को ईरान के कैस्पियन सागर के तट पर स्थित रामसर शहर में आद्र भूमि के संरक्षण को लेकर एक संधि हुई थी, जिसे हम रामसर संधि कहते हैं । रामसर संधि का उद्देश्य था कि पृथ्वी पर स्थित आद्र भूमि का संरक्षण किया जाए । यह संधि 1975 से लागू हुई थी |
भारत में रामसर संधि पर 1 फरवरी 1982 को हस्ताक्षर किए थे।भारत की पहली रामसर स्थल उड़ीसा में स्थित चिल्का झील है ।चिल्का झील के साथ केवलादेव पक्षी अभ्यारण को भी रामसर स्थल घोषित किया था ।भारत में अब तक कुल 75 स्थानों को रामसर सूची में शामिल किया गया है ।2022 में पहले 5 और फिर 10 और रामसर स्थल को शामिल किया।वर्तमान में पूरे विश्व में 2465 रामसर स्थल है।विश्व आर्द्रभूमि दिवस प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है |
दुनिया की पहली रामसर साइट ऑस्ट्रेलिया में स्थित कोबोर्ग प्रायद्वीप थी ।भारत में सबसे ज्यादा रामसर स्थल तमिलनाडु (कुल 14) राज्य में है |