02/04/2024
बरगद एक लगाइये,पीपल रोपें पाँच।
घरघर नीम लगाइये,यही पुरातन साँच।।
यही पुरातन साँच,- आज सब मान रहे हैं।
भाग जाय प्रदूषण सभी अब जान रहे हैं।।
धरती पर त्रिदेव हैं- नीम पीपल औ बरगद।।
आप को लगेगा अजीब बकवास है किन्तु यह सत्य है.. ।
पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द किया गया है।
पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजार्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %*
अब इन पेड़ों से दूरी बना ली तथा इसके बदले विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो जमीन को जल विहीन कर देता है।
आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है।
अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही।
हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगाये तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त हिन्दुस्तान होगा।
पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं।
इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगायेंगें तो ही बात बनेगी..!!
28/12/2023
यदि आपके घर में कैक्टस का पौधा है तो जानिए क्या कहता है वास्तु...
आमतौर पर घर में तुलसी, नीम, शमी और मनी प्लांट जैसे पौधे लगाए जाते हैं और इन्हें सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। वहीं कुछ ऐसे भी पौधे हैं जो घर की समृद्धि के लिए अच्छे नहीं माने जाते हैं।
दरअसल यदि वास्तु की मानें तो घर में पौधों के होने से कई शुभ-अशुभ फल मिलते हैं। आइए जानें ऐसे ही पौधों में से एक कैक्टस से जुड़े कुछ वास्तु नियमों के बारे में और जानें कि क्या घर में इस पौधे का होना शुभ है या इससे कुछ नुकसान हो सकते हैं।
क्या हमें घर पर कैक्टस रखना चाहिए?
वास्तु विशेषज्ञ का कहना है कि कैक्टस आपके घर में बुरी ऊर्जा का संचार कर सकता है। ऐसा माना जाता है कि कैक्टस के पत्तों पर नुकीले और कांटेदार कांटे बुरी ऊर्जा लाते हैं। कैक्टस आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा ला सकता है और घर में रहने वालों के मन में भी बुरे भावों को बढ़ाता है।
इससे घर के लोगों के मन में चिंता और तनाव बना रहता है। इसी वजह से घर में इस पौधे को रखने की सलाह दी जाती है। वैसे यह भी कहा जा सकता है कि यदि इस पौधे को वास्तु के अनुसार सही दिशा में रखा जाता है तो ये नकारात्मकता का कारण नहीं बनते हैं।
यदि आप सजावट के लिए घर में कैक्टस का पौधा रख रही हैं तो आपको इसकी दिशा का सही ज्ञान होना चाहिए। अगर इसे सही जगह पर रखा जाए तो ये वास्तव में यह आपकी मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, जब इसे खिड़की या छत पर रखा जाता है, तो यह उस नकारात्मक ऊर्जा को दूरकर सकता है और घर में आने वाली ऊर्जा को रोकने में मदद करता है। इस अवस्था में कैक्टस का पौधा आपके घर का रक्षक बन जाता है।
24/12/2023
डाइफेनबैचिया का पौधा...
ये पौधा अपनी बड़ी पत्तियों वाली संरचना की वजह से दिखने में बहुत ज्यादा खूबसूरत लगता है और इसे डंब केन के नाम से भी जाना जाता है। ये एक ऐसा पौधा है जिसकी बहुत कम देखभाल करने पर भी ये दिखने में बेहद खूबसूरत लगता है। आइये जानें कि किस तरह से इस पौधे को घर में लगाना फायदेमंद हो सकता है और इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं इसलिए आपको लगाते समय कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए।
कम देखभाल में अच्छी ग्रोथ...
आमतौर पर डाइफेनबैचिया को डंब केन के रूप में जाना जाता है, डाइफेनबैचिया एक आदर्श हाउसप्लांट है जो बहुत कम देखभाल यानी न के बराबर देखभाल करने पर भी अच्छी तरह से बढ़ जाता है। इस पौधे को ज्यादा धूप और प्रकाश की भी आवश्यकता नहीं होती है। इसी वजह से ये एक आदर्श इंडोर प्लांट है। इसके कई प्रकार के चौड़े पत्ते घर की सजावट के काम आते हैं।
डाइफेनबैचिया एयर क्वॉलिटी में सुधार करता है
एक रिसर्च के अनुसार आजकल का बढ़ता प्रदूषण घर के बाहर की ही तरह भीतर की हवा को भी प्रदूषित कर रहा है। इसलिए घर के अंदर कुछ ऐसे प्लांट्स लगाना हमारी जरूरत बन रहा है जो हवा की क्वालिटी में सुधार करके प्रदूषण को दूर कर सके। घर में यदि प्रदूषण का प्रभाव होता है तो कई तरह की शारीरिक समस्याएं भी जन्म लेती हैं। डाइफेनबैचिया प्लांट एयर क्वॉलिटी को ठीक करने में मदद करता है। यह हाउसप्लांट जाइलीन और टोल्यूनि जैसे जहरीले यौगिकों को कम कर सकता है जो सबसे अच्छे डाइफेनबैचिया लाभों में से एक है।
कार्बनडाई ऑक्साइड को अब्ज़ॉर्ब करता है...
एक अध्ययन के अनुसार, डाईफेनबैचिया कार्बन डाइऑक्साइड को कुशलता से अवशोषित कर सकता है। यह पौधा ज्यादा से ज्यादा कार्बनडाई ऑक्साइड को अवशोषित करके ऑक्सीजन छोड़ता है। इसलिए यदि आप इस पौधे को घर में रखते हैं तो इससे अच्छी मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है।
बेस्ट लो लाइट प्लांट...
डाइफेनबैचिया धूप आने वाली खिड़कियों से दूर की स्थिति के लिए एक आदर्श पौधा है। यही कारण है कि ये बेस्ट इंडोर प्लांट्स में एक माना जाता है। इस पौधे को सूरज की रोशनी की आवश्यकता नहीं होती है और इसी वजह से इनडोर पौधों की अपनी सबसे वायरल सूची में शामिल किया है जिन्हें सूर्य की आवश्यकता नहीं है। आप इसे अप्रत्यक्ष प्रकाश में पूर्ण छाया में उगा सकते हैं। प्लांट एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस पौधे को ज्यादा देर तक धूप में रखने से इसकी पत्तियां पीली पद सकती हैं और ये देखने में खराब लग सकता है।
डाइफेनबैचिया प्लांट लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान....
*प्लांट एक्सपर्ट बताते हैं इस पौधों के फायदे के साथ कुछ नुकसान भी हैं।इस पौधे की पत्तियां जहरीली होती हैं, इसलिए यदि आपके घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं तो इसे उनकी पहुंच से दूर रखें, यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो ये पौधा घर में न लगाएं।
*यदि आप इस पौधे की पत्तियों को हाथ से छुएं या फिर इसे दूसरे गमले में ट्रांसप्लांट करें तो हाथों में ग्लव्स जरूर पहनें। यदि ग्लव्स नहीं पहन रहे हैं तो हाथों को अच्छी तरह से धोने के बाद ही कोई अन्य काम करें।
*इस पौधे को ओवर वाटरिंग से बचाएं। ज्यादा पानी से इसकी पत्तियां खराब हो सकती हैं और पौधा मर सकता है।
*इस पौधे को कभी भी तेज धूप के संपर्क में न रखें। यदि आप इसे कमरे के भीतर रखते हैं तो इसे खिड़की या दरवाज़े से दूर रखें जहां ज्यादा प्रकाश की संभावना होती है।
उपर्युक्त सभी बातों को ध्यान में रखकर आपको डाइफेनबैचिया प्लांट घर में लगाना चाहिए।
22/12/2023
अगर आपसे कोई पूछता है कि खजूर खरीदने के लिए सबसे पहले आप कहाँ जाते हैं, तो आपका जवाब क्या हो सकता है? संभवत, आप झट से बोले कि बाज़ार से खरीदना होता है। लेकिन, अगर आपसे यह बोला जाए कि गार्डन में ही खजूर का पौधा लगाकर बाज़ार से भी अधिक टेस्टी खजूर उगा सकते हैं, जी हां, अगर आपको गार्डिंग करने का शौक है, तो कुछ दिनों की मेहनत में आप आसानी से खजूर का पौधा उगा सकते हैं। आज हम आपको गार्डन में खजूर का पौधा उगाने के बारे में बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं।
इन चीजों को पड़ेगी ज़रूरत...
किसी भी सब्जी या फल को गार्डन में उगाने के लिए ज़रूरी है कि बीज कैसा है। अगर बीज सही नहीं है, तो आप कितना भी मेहनत कर लीजिए पेड़ कभी भी नहीं उगेगा। इसलिए बीज का सही चुनाव करना बहुत ज़रूरी है। इधर-उधर से बीज खरीदने से अच्छा है कि आप किसी बीज भंडार में भी जाकर बीज ख़रीदे। बीज भंडार में सस्ते और अच्छी पैदावर वाले बीज आसानी से मिल जाते हैं।
मिट्टी करें तैयार...
बीज खरीदने के बाद बीज लगाने के लिए मिट्टी को तैयार करना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए मिट्टी को अच्छे से खरोंच दें और एक दिन के लिए धूप में छोड़ दें। इससे मिट्टी सॉफ्ट हो जाती हैं। इसके बाद मिट्टी में एक से दो मग खाद डालकर अच्छे से मिक्स कर लें और मिट्टी को गमले में डाल दें। गमले में मिट्टी डालने के बाद बीज को गमले में लगभग 2 से 3 इंच गहरा ही लगाए। बीज लगाने के बाद ऊपर से खाद और पानी भी ज़रूर डालें।
गमले से निकालकर गार्डन में लगाए...
जी हां, जब तक पेड़ तीन से चार फीट बड़ा नहीं होता है तब तक गमले में रहने दें। जैसे ही पौधा बड़ा हो जाए उसे मिट्टी समेत निकाल लीजिए। इधर आप जिस जगह पेड़ को लगाना है उस जगह की अच्छे से सफाई कर लीजिए और गमले के आकार मिट्टी खोद लीजिए। मिट्टी खोदने के बाद मिट्टी सहित खजूर के पेड़ को डालें और सभी साइड से मिट्टी डालकर बराबर कर लीजिए। मिट्टी बराबर करने के बाद ऊपर से खाद और पानी डालकर छोड़ दीजिए।
समय-समय पर खाद, दवा का छिड़काव और पानी देना...
खाद के रूप में आप हमेशा ही जैविक खाद का ही इस्तेमाल करें। केमिकल युक्त खाद पेड़ को काफी नुकसान पहुंचा देते हैं। ऐसे में आप सब्जियों के छिलके, बचे हुए भोजन आदि का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके अलावा समय-समय पर नेचुरल स्प्रे का छिड़काव भी करती रहे हैं। आप नीम, पुदीना या फिर बेकिंग सोडा आदि से नेचुरल स्प्रे तैयार कर सकती हैं। दवा छिड़काव के बाद समय-समय पर पानी भी डालना नहीं भूलें।
खजूर फल का लीजिए आनंद....
अगर नियमित समय पर खाद, पानी देना और सही से देखभाल करते हैं तो लगभग बाहर से पंद्रह महीने के अंदर खजूर के पेड़ में फल तैयार हो जाते हैं। आप चाहें तो बाज़ार जैसा पकने के लिए पेड़ में छोड़ सकती हैं या फिर फल तोड़कर चावल, गेहूं में रखकर भी अच्छे से पका सकती हैं।
18/12/2023
ये तस्वीर हमारे देश के नही है लेकिन ये तस्वीर ये बताने के लिए मुकम्मल है कि पेड़ कितने महत्वपूर्ण है और हर हाल में उनकी रक्षा करनी चाहिए...
समझिए कि पेड़ है तो जीवन है।प्रकृति का और हमारा यही नाता है यानि प्राणों का समबन्ध है।
16/12/2023
आइये आज जानते हैं ड्रैगन फ्रूट के बारे में...
ड्रैगन फ्रूट, जिसे पिटाया या पिटाहया के नाम से भी जाना जाता है, एक उष्णकटिबंधीय फल है जो कैक्टस परिवार से संबंधित है। हालांकि सटीक उत्पत्ति स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति मध्य अमेरिका में हुई थी और इसका इतिहास कई शताब्दियों तक फैला हुआ है।
यह फल पारंपरिक रूप से मेक्सिको, मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में उगाया जाता था। बाद में यह वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस और मलेशिया जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में फैल गया। आज, ड्रैगन फ्रूट की खेती दुनिया भर के विभिन्न उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में की जाती है।
फल का नाम, "ड्रैगन फ्रूट", संभवतः इसकी पपड़ीदार उपस्थिति के कारण आया है, जो ड्रैगन जैसा दिखता है। दो मुख्य प्रकार हैं हिलोसेरियस अंडैटस, गुलाबी त्वचा और सफेद मांस के साथ, और हिलोसेरियस कोस्टारिकेंसिस, लाल या पीली त्वचा और लाल या गुलाबी मांस के साथ।
खेती के संदर्भ में, ड्रैगन फ्रूट कैक्टि अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और गर्म जलवायु में पनपता है। वे शुष्क परिस्थितियों में बढ़ने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं। पौधा बड़े, दिखावटी फूल पैदा करता है जो रात भर खिलते हैं, और परागण के तुरंत बाद फल विकसित होते हैं।
ड्रैगन फ्रूट ने अपनी अनूठी उपस्थिति, हल्के स्वाद और कथित स्वास्थ्य लाभों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल की। इसके पोषण संबंधी प्रोफाइल में विटामिन सी, फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट और विभिन्न खनिज शामिल हैं।
समय के साथ, ड्रैगन फ्रूट वैश्विक बाजारों में प्रमुख बन गया है, विभिन्न व्यंजनों में अपनी जगह बना रहा है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बन गया है। फल की लोकप्रियता में वृद्धि का श्रेय इसकी विदेशी उपस्थिति, पोषण मूल्य और पाक अनुप्रयोगों में बहुमुखी प्रतिभा को दिया जा सकता है।
14/12/2023
आंवला...
घर में शुभ पेड़-पौधे की बात होती है तो आंवले_के_पेड़ का जिक्र भी किया जाता है। घर में कष्ट के निवारण हेतु आंवले का पेड़ लगाना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि आंवला के वृक्ष की नित्य-पूजा अर्चना करना चाहिए। इससे जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार आंवला के वृक्ष पर सभी देवताओं का वास है। कार्तिक मास में स्वयं भगवावन विष्णु आंवले की जड़ में निवास करते हैं। इसका फल भगवान विष्णु को अति प्रिय है। घर में आंवले का पेड़ उत्तर अथवा पूर्व दिशा में हो तो यह आपके लिए अति लाभकारी होता है। यह वृक्ष मनुष्य की कामनाओं को भी पूर्ण करता है। शास्त्रों में ऐसा भी उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति आंवले का पेड़ लगाकर उसकी नियमित पूजा एवं देखभाल करता है तो उसे राजसूय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।
12/12/2023
पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृति का अंग है, परंतु मानव में अपने स्वार्थ के लिए प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की प्रवृत्ति ने पर्यावरण संकट की नई चुनौती को जन्म दिया है। कोविड-19 महामारी ने हमें साफ हवा की कीमत समझा दी है। पर्यावरण संरक्षण के निमित्त आमजन का सहयोग अनिवार्य हो गया है। आज मानव को हरित मानसिकता विकसित करने की आवश्यकता है। दैनिक कार्यों में प्लास्टिक का कम से कम प्रयोग किया जाए, ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। घरों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया जाना चाहिए। किसान जैविक खेती करें। कम से कम उर्वरक व कीटनाशकों का प्रयोग किया जाए। प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास गमलों में छोटे-छोटे पौधे लगाएं। कम बिजली, कम पानी, कम गैस का प्रयोग कर कोई भी व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण में महती भूमिका निभा सकता है। प्रदूषण रोकने के लिए जलाऊ लकड़ी का उपयोग कम करना जरूरी है, जिसके लिए विद्युत शवदाह गृहों का उपयोग करना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कम दूरी तय करने के लिए साइकिल एवं अधिक दूरी तय करने के लिए सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करें। छोटे-छोटे प्रयास करके भी पर्यावरण को ठीक रखा जा सकता है।
08/12/2023
खेती में विभिन्न तरह के प्रयोग और नवाचार हो रहे हैं। इसी कड़ी में सीड-बॉल जैसी तकनीक भी काम में ली जाने लगी है। बड़े खेेतों के लिए उपयोगी इस तकनीक से खेत में जमीन खोदकर बुआई करने के स्थान पर दूर से सीड बॉल को फेंक पर भी बीज डाले जा सकते हैं। अमेरिका में इस तकनीक का इस्तेमाल हुआ है और बड़े खेतों के साथ वनों में खूबसूरत फूलों वाले पौधों को लगाने के लिए इस तकनीक को काम में लिया जा रहा है। व्यक्तिगत खेत में घूमकर सीड बॉल डालने के अलावा गिलोल या हैलीकॉप्टर से भी इसे छिड़काव की तर्ज डाला जा सकता है। बारिश के मौसम से ठीक पहले डालने से ये सीड बॉल मिट्टी के साथ घुल मिल जाते हैं और इसमें अंकुरण होने लगता है। कुछ समय बाद ये पौध या वृक्ष का रूप भी ले लेते हैं।
कैसे तैयार करते हैं सीड बॉल...
सीड बॉल तैयार करने के लिए काली और चिकनी मिट्टी को काम में लिया जा सकता है। इसमें कोलीनाइट, स्मेक्टाइट या बेंटोनाइट को मिलाया जा सकता है। इसके अलावा कंपोस्ट खाद को इसमें मिलाया जा सकता है। इसके बाद पोषक तत्वों के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। इसमें जरूरत के हिसाब से एक या अधिक बीज डालकर इसे लड्डू की तरह गोल बनाकर सूखने के लिए रख सकते हैं। सूखने पर ये सीड बॉल बन जाती हैं। इसमें एक बार काम में ली गई मिट्टी को दोबारा काम में नहीं लेना चाहिए। इसमें मिट्टी का रंग कुछ भी हो सकता है। वैसे लाल मिट्टी में रेड (अॉक्सीडाइज्ड) ऑयरन ज्यादा होता है। जरूरत के हिसाब से बारिश के मौसम या सर्दियों में भी इसे खेत या जंगल में वनारोपण के लिए डाल सकते हैं। seed-ball.com नामक वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार इन बॉल को हाथों से खेत में फेंक कर बुआई की जा सकती है। बड़े जंगलों में इसका इस्तेमाल करना है, तो हेलीकॉप्टर या प्लेन से भी छिड़काव किया जा सकता है।
उन्नत किस्म के बीज....
सीड बॉल तैयार करने के लिए उन्नत किस्म के बीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। स्थानीय बीजों को भी काम में लिया जा सकता है, लेकिन वे जीवाणु रहित और रोगरोधक होने चाहिए, ताकि कोई शिकायत न रहे।
फुलवारी के लिए उपयोगी...
जंगल को सुनहरा बनाने और उसमें रंगरंगीले फूलों की फुलवारी बनाने के लिए सीड बॉल का इस्तेमाल काफी उपयोगी साबित हुआ है। कुछ स्थानों पर गुलेल से भी इस सीड बॉल को फेंक कर प्रयोग किया गया है, जो सही साबित हुआ है। अमेरिका के जंगलों में आकर्षक फूलों वाले पौधे लगाने के लिए इस विधि का सफल प्रयोग किया जा चुका है। भारत में इसका प्रायोगिक तौर पर कुछ स्थानों पर उपयोग शुरू हुआ है।
04/12/2023
प्रकृति और हम..!
प्रकृति का साथ हमेशा एक नयी ऊर्जा देता है। और प्रकृति के साथ समय बिताने का एक अच्छा तरीका है ...बागवानी...।
आप ने कभी ध्यान दिया हो कि जब हम पेड पौधो के सानिध्य मे रहते है तो बहुत खुश रहते है....यहाँ तक कि फोटो भी लेते हैं तो उसमे एक अलग सी ऊर्जा होती है....*
कवि एल्फ्रेड ऑस्टिन कहते है....
"बागवानी एक अनोखा अनुभव है...हाथ मिट्टी मे होते हैं..सिर को सूरज का ताप मिलता है...दिल प्रकृति मे रमा होता है...पेड- पौधा का ध्यान रखना आत्मा को पोषण देता है!"
प्रकृति से प्रेम मतलब खुद से प्रेम...!!
01/12/2023
औषधीय गुणों से भरपूर बेर खाने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं. चीनी सेब के नाम से भी जाना जाता है. जानते हैं इस बारे में...
लाल,गुलाबी और पीले रंग का छोटा सा फल बेर खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है. इसे चीनी सेब के नाम से भी जाना जाता है. ये एक मौसमी फल है और इससे ना सिर्फ स्वाद के लिए खाया जा सकता है बल्कि इसके औषधीय गुणों के चलते भी इसका सेवन करना चाहिए. इस फल का इस्तेमाल खाने के अलावा दवाइयों के बनाने में भी किया जाता है, वैसे तो इससे सेहत को अनेकों फायदे हैं लेकिन आज हम इससे मिलने वाले पांच फायदे के बारे में बात करेंगे..
बेर से सेहत को मिलने वाले फायदे...
अनिद्रा की समस्या दूर करे-अनिद्रा की समस्या में भी बेर फायदा पहुंचा सकता है बेर का इस्तेमाल चाइनीस मेडिसिन में इस्तेमाल किया जाता है इससे इनसोम्निया जैसे नींद की परेशानी को ठीक करने में मदद मिलती है. बता दें कि फल और इसके बीज दोनों में से सेपोनीन और पॉलिसैक्राइड्स जैसे फ्लेवोनॉयड प्रचुर मात्रा में होते हैं, सपोनिन को अच्छी और गहरी नींद लाने में सहायक माना जाता है. ये आपके नर्वस सिस्टम को शांत करता है और गहरी नींद आती है.
कब्ज की समस्या में फायदेमंद-स्टडी बताती है कि करीब 22 फीसदी भारतीय क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन से जूझते हैं. इसके इलाज में बेर का फल अहम भूमिका निभाता है. बेर में इतना फाइबर होता है कि आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को दुरुस्त करता है और आपका कॉन्स्टिपेशन कहां गायब हो जाएगा है आपको पता भी नहीं चलेगा. बेर फाइबर और कार्ब्स का एक अच्छा स्रोत है जो पाचन संबंधित समस्याओं को दूर करने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ावा देता है. इससे आप पूरे दिन ऊर्जावान रह सकते हैं.
ब्लड सर्कुलेशन ठीक करे-बेर में आयरन और फास्फोरस की बहुत अधिक मात्रा होती है, जिस वजह से ये ब्लड सरकुलेशन को भी रेगुलेट करता है. वहीं जिन लोगों को एनीमिया की समस्या होती है उनके लिए भी बेर काफी फायदा पहुंचाता है.ये आपके शरीर में आयरन की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है.ये शरीर में हीमोग्लोबिन की संख्या में सुधार करता है, जिससे हृदय भी स्वस्थ रहता है.
हड्डियों को मजबूत बनाए-एनसीबीआई की एक रिपोर्ट बताती है कि बेर में हड्डियों को स्वस्थ रखने के गुण होते हैं, क्योंकि इसमें कैल्शियम और फास्फोरस जैसे महत्वपूर्ण खनिज अधिक मात्रा में होते हैं. इसी कारण बेर का सेवन हड्डियों के कार्य और लचीलापन को प्रभावित करने वाले ऑस्टियोपोरोसिस जैसे विकारों को रोकता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है.
चेहरे को चमकदार बनाए-बेर चेहरे के लिए भी काफी फयादेमंद होता है, क्यों कि इसमें विटामिन सी और एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं.इसमें मौजूद तत्व चेहरे से फाइन लाइंस, पिगमेंटेशन दूर करने के अलावा त्वचा को चमकदार बनाने में कारगर होता है.
कैंसर के रोकथाम में मददगार-बेर में अमीनो एसिड, बायोएक्टिव पदार्थ और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो मानव कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में आवश्यक माने गए हैं, बेर में इनका मौजूद होना ये बताता है कि इसका सेवन कैंसर की रोकथाम के लिए प्रभावी हो सकता है. हालांकि बेर को कैंसर का उपचार नहीं मान सकते.
28/11/2023
शहतूत का फल खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उतना सेहतमंद भी. आयुर्वेद में शहतूत के ढेरों फायदों का बखान है. शहतूत में पोटैशियम, विटामिन ए और फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. आमतौर पर शहतूत दो प्रकार के होते हैं. शहतूत एक ऐसा फल है जिसे कई लोग कच्चा ही खाना पसंद करते हैं और कुछ पक जाने पर.
शहतूत खाने के फायदे:
1. शहतूत खाने से पाचन शक्ति अच्छी रहती है. ये सर्दी-जुकाम में भी बेहद फायदेमंद है.
2. यूरिन से जुड़ी कई समस्याओं में भी शहतूत बेहद फायदेमंद होता है.
3. शहतूत खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है. ये बढ़ती उम्र के लक्षणों को जल्दी आने से भी रोकता है.
4. गर्मियों में शहतूत के सेवन से लू लगने का खतरा कम हो जाता है.
5. शहतूत खाने से लीवर से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है. साथ ही यह किडनी के लिए भी बहुत फायदेमंद है.
इसके अलावा शहतूत के पत्तों को घाव या फोड़े पर लगाना भी फायदेमंद होता है. इसके प्रयोग से घाव बहुत जल्दी भर जाते हैं. अगर आपको खुजली की दिक्कत है तो इसके पत्तों का लेप फायदेमंद रहेगा. शहतूत की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से गरारे करने से गले की खराश दूर हो जाती है.