युवा किसी भी समाज और राष्ट्र के कर्णधार हैं, वे उसके भावी निर्माता हैं। चाहे वह नेता या शासक के रूप में हांे, चाहे डाॅक्टर, इन्जीनियर, वैज्ञानिक, साहित्यकार व कलाकार के रूप में हांे। इन सभी रूपों में उनके ऊपर अपनी सभ्यता, संस्कृति, कला एवम् ज्ञान की परम्पराओं को मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे ले जाने का गहरा दायित्व होता है। पर इसके विपरीत अगर वही युवा वर्ग उन परम्परागत विरासतों का वाहक बनने से इन्कार कर दे तो निश्चिततः किसी भी राष्ट्र का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
Bharat Mata Nav-Nirmaan Sena (B.M.N.S)
Bharat Mata Nav-Nirmaan Sena (B.M.N.S)
Bharat Mata Nav-Nirmaan Sena
आन्दोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि ये बताई जा रही है कि देश का युवा जागरूक हो कर भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर शांतिपूर्ण आन्दोलन की दिशा में अग्रसर हुआ है. ऐसा नहीं है कि देश में यह पहली बार हुआ हो. 1971 के बांग्ला मुक्ति युद्ध के समय इंदिरा गाँधी के पीछे यही शक्ति काम कर रही थी. इसी तरह जयप्रकाश नारायण के व्यवस्था परिवर्तन के आव्हान पर देश के युवा एक जुट हो गए थे. समय की बहत
जरूरत है कुछ ऐसे नौजवानों की जो....
झूठ से पटे बाजार, भ्रष्टाचारियों से भरी व्यवस्था और मुर्दा शांति से युक्त मीडिया से दो-दो हाथ करने वाले लड़ाकों की तलाश : 60 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जब वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर चर्चा करते हैं तो कई लोग आंखें फाड़ कर इसे सुनते-पढ़ते हैं. कुछ लोग सवाल पूछते हैं कि आखिर इस घोटाले की चर्चा नेशनल मीडिया, कारपोरेट मीडिया, दिग्गज मीडिया हाउस क्यों नहीं कर रहे?
किसी भी पार्टी के नेता लोग इतने बड़े घोटाले को मुद्दा क्यों नहीं बना रहे? 64 करोड़ के बोफोर्स घोटाले पर तो तूफान मच गया था. सरकार हिल गई और बदल गई थी. जनांदोलन खड़ा हो गया था. राजनीतिक ध्रुवीकरण हो गया था. पर बोफोर्स से हजार गुने बड़े 2जी घोटाले या टेलीकाम घोटाले पर कहीं कुछ नहीं हो रहा है. नेताओं के मुंह सिले हैं. सत्ता पक्ष के नेता सब कुछ दबाने-मैनेज करने में लगे हैं तो विपक्षी नेता शिखंडी बने बैठे हैं. उनकी जुबान पर भी जाने क्यों ताला लगा है. जाहिर है, घोटाले के तार विपक्षी नेताओं से भी जुड़े हैं. मतलब पूरा राजनीति जगत, सो-काल्ड मेनस्ट्रीम पालिटिक्स पर मुर्दनी छायी है इस मुद्दे को लेकर.
60 हजार करोड़
नमस्कार मित्र!
मेरा भारत यह मात्र शब्द नहीं है अपितु हर हिन्दुस्तानी के दिल की आवाज़ है। हर हिन्दुस्तानी का गौरव है। उसका सम्मान है और सबसे बड़ी बात उसकी पहचान है, यह भारतवर्ष। हम इस भूमि में पैदा हुए हैं। हमारे लिए यह इतना महत्त्वपूर्ण है जितना कि हमारे माता-पिता हमारे लिए। भारत सिर्फ एक भू-भाग का नाम नहीं है अपितु उस भू-भाग में बसे लोगों, उसकी संस्कृति, उसकी सभ्यता, उसके रीति-रिवाजों, उसके अमूल्य इतिहास का नाम है।
जरूरत है कुछ ऐसे नौजवानों की जो....
झूठ से पटे बाजार, भ्रष्टाचारियों से भरी व्यवस्था और मुर्दा शांति से युक्त मीडिया से दो-दो हाथ करने वाले लड़ाकों की तलाश : 60 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जब वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर चर्चा करते हैं तो कई लोग आंखें फाड़ कर इसे सुनते-पढ़ते हैं. कुछ लोग सवाल पूछते हैं कि आखिर इस घोटाले की चर्चा नेशनल मीडिया, कारपोरेट मीडिया, दिग्गज मीडिया हाउस क्यों नहीं कर रहे?
किसी भी पार्टी के नेता लोग इतने बड़े घोटाले को मुद्दा क्यों नहीं बना रहे? 64 करोड़ के बोफोर्स घोटाले पर तो तूफान मच गया था. सरकार हिल गई और बदल गई थी. जनांदोलन खड़ा हो गया था. राजनीतिक ध्रुवीकरण हो गया था. पर बोफोर्स से हजार गुने बड़े 2जी घोटाले या टेलीकाम घोटाले पर कहीं कुछ नहीं हो रहा है. नेताओं के मुंह सिले हैं. सत्ता पक्ष के नेता सब कुछ दबाने-मैनेज करने में लगे हैं तो विपक्षी नेता शिखंडी बने बैठे हैं. उनकी जुबान पर भी जाने क्यों ताला लगा है. जाहिर है, घोटाले के तार विपक्षी नेताओं से भी जुड़े हैं. मतलब पूरा राजनीति जगत, सो-काल्ड मेनस्ट्रीम पालिटिक्स पर मुर्दनी छायी है इस मुद्दे को लेकर.
युवा शब्द अपने आप में ही उर्जा और आन्दोलन का प्रतीक है। युवा को किसी राष्ट्र की नींव तो नहीं कहा जा सकता पर यह वह दीवार अवश्य है जिस पर राष्ट्र की भावी छतों को सम्हालने का दायित्व है। भारत की कुल आबादी में युवाओं की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है जो कि विश्व के अन्य देशों के मुकाबले काफी है। इस युवा शक्ति का सम्पूर्ण दोहन सुनिश्चित करने की चुनौती इस समय सबसे बड़ी है। जब तक यह ऊर्जा और आन्दोलन सकारात्मक रूप में है तब तक तो ठीक है, पर ज्यों ही इसका नकारात्मक रूप में इस्तेमाल होने लगता है वह विध्वंसात्मक बन जाती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर किन कारणों से युवा उर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है? वस्तुतः इसके पीछे जहाँ एक ओर अपनी संस्कृति और जीवन मूल्यों से दूर हटना है, वहीं दूसरी तरफ हमारी शिक्षा व्यवस्था का भी दोष है। इन सब के बीच आज का युवा अपने को असुरक्षित महसूस करता है, फलस्वरूप वह शार्टकट तरीकों से लम्बी दूरी की दौड़ लगाना चाहता है। जीवन के सारे मूल्यों के उपर उसे ‘अर्थ‘ भारी नजर आता है। इसके अलावा समाज में नायकों के बदलते प्रतिमान ने भी युवाओं के भटकाव में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फिल्मी परदे और अपराध की दुनिया के नायकों की भांति वह रातों-रात उस शोहरत और मंजिल को पा लेना चाहता है, जो सिर्फ एक मृगण्तृष्णा है। ऐसे में एक तो उम्र का दोष, उस पर व्यवस्था की विसंगतियाँ, सार्वजनिक जीवन में आदर्श नेतृत्व का अभाव एवम् नैतिक मूल्यों का अवमूल्यन ये सारी बातें मिलकर युवाओं को कुण्ठाग्रस्त एवम् भटकाव की ओर ले जाती हैं, नतीजन-अपराध, शोषण, आतंकवाद, अशिक्षा, बेरोजगारी एवम् भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ जन्म लेती हंै।
हम करें राष्ट आराधना
तन से मन से धन से
तन मन धन जीवनसे
हम करें राष्ट आराधना………………।।…धृ
अन्तर से मुख से कृती से
निश्र्चल हो निर्मल मति से
श्रध्धा से मस्तक नत से
हम करें राष्ट अभिवादन…………………। १
अपने हंसते शैशव से
अपने खिलते यौवन से
प्रौढता पूर्ण जीवन से
हम करें राष्ट का अर्चन……………………।२
अपने अतीत को पढकर
अपना ईतिहास उलटकर
अपना भवितव्य समझकर
हम करें राष्ट का चिंतन…।………………।३
है याद हमें युग युग की जलती अनेक घटनायें
जो मां के सेवा पथ पर आई बनकर विपदायें
हमने अभिषेक किया था जननी का अरिशोणित से
हमने शृंगार किया था माता का अरिमुंडो से
हमने ही ऊसे दिया था सांस्कृतिक उच्च सिंहासन
मां जिस पर बैठी सुख से करती थी जग का शासन
अब काल चक्र की गति से वह टूट गया सिंहासन
अपना तन मन धन देकर हम करें पुन: संस्थापन…………
कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, हारा वही है जो लड़ा नहीं.
मस्कार मित्र!
मेरा भारत यह मात्र शब्द नहीं है अपितु हर हिन्दुस्तानी के दिल की आवाज़ है। हर हिन्दुस्तानी का गौरव है। उसका सम्मान है और सबसे बड़ी बात उसकी पहचान है, यह भारतवर्ष। हम इस भूमि में पैदा हुए हैं। हमारे लिए यह इतना महत्त्वपूर्ण है जितना कि हमारे माता-पिता हमारे लिए। भारत सिर्फ एक भू-भाग का नाम नहीं है अपितु उस भू-भाग में बसे लोगों, उसकी संस्कृति, उसकी सभ्यता, उसके रीति-रिवाजों, उसके अमूल्य इतिहास का नाम है।
हम करें राष्ट आराधना
तन से मन से धन से
तन मन धन जीवनसे
हम करें राष्ट आराधना………………।।…धृ
अन्तर से मुख से कृती से
निश्र्चल हो निर्मल मति से
श्रध्धा से मस्तक नत से
हम करें राष्ट अभिवादन…………………। १
अपने हंसते शैशव से
अपने खिलते यौवन से
प्रौढता पूर्ण जीवन से
हम करें राष्ट का अर्चन……………………।२
अपने अतीत को पढकर
अपना ईतिहास उलटकर
अपना भवितव्य समझकर
हम करें राष्ट का चिंतन…।………………।३
है याद हमें युग युग की जलती अनेक घटनायें
जो मां के सेवा पथ पर आई बनकर विपदायें
हमने अभिषेक किया था जननी का अरिशोणित से
हमने शृंगार किया था माता का अरिमुंडो से
हमने ही ऊसे दिया था सांस्कृतिक उच्च सिंहासन
मां जिस पर बैठी सुख से करती थी जग का शासन
अब काल चक्र की गति से वह टूट गया सिंहासन
अपना तन मन धन देकर हम करें पुन: संस्थापन………………।
Bharat ka ek hi sang "bharat mata nav nirmaan sena" is sang se jude..... aur yuvao ka ek alag sangathan banaye. kyu ki yuvao ki vajah se hi y desh pragati kr rha h. aur yuva agar chah to sarkar utha bi skte h aur gira bi. agar corruption mitana h aur desh ki pragati chahte h to plz join this group.................... jai hind jai bharat....
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