IPS Amit Budania

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गुफ़्तगू ए दास्ताँ

05/10/2024

Inhale gratitude, exhale negativity.

Photos from IPS Amit Budania's post 02/10/2024

हम अभिभूत है।

थाना एक ऐसा स्थान है जिससे आमज़न का तब वास्ता पड़ता है जब वो अपराध से परेशान होता है। इसलिए समाज से आत्मीय जुड़ाव में मनोवैज्ञानिक अवरोध कहीं ना कहीं दिखाई पड़ता है। वर्तमान में यह अवधारणा बदलने लगी है जनता का जुड़ाव कहीं बढ़ा है। आज गांधी जयंती पर पुलिस मित्र, सीएलजी मेम्बर , सुरक्षा सखी सभी ने बढ़चढ़कर थानों के सफ़ाई अभियान में भाग लिया।

आपके इस सहयोग के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद

🙏

25/09/2024

कोटा डायरी

ज़िला व्यावहारिक प्रशिक्षण में मैंने कोटा रिपोर्ट किया। ऐसा शहर जहां बरसों पहले इंजीनियर बनने के सपने को संजोये आया था, उस वक़्त सोचा भी ना था इस शहर से दुबारा वास्ता वर्दी के साथ पड़ेगा। कई बार ख़्याल आया कि आईपीएस छोड़कर आईएएस के लिए कोशिश की जाये, उन्हीं उधेड़बुन में ट्रेनिंग भी चल रही थी। ख़ैर विचारों की इसी ख़यालात के बीच कोटा ट्रेनिंग का हिस्सा बना ।मैंने पुलिस गेस्ट हाउस में अपना बेग रखा ही था कि कुछ देर बाद कंट्रोल रूम से मेसेज आया-“ श्रीमान टाइगर सर का मेसेज है आप श्रीनाथपुरम स्टेडियम रिपोर्ट करिए। “मैं तुरंत रवाना हुआ, बार बार गूँजते कंट्रोल रूम के मेसेज से पता चला कि कोई हत्या हुई है। मेरे एसपी साहब अपने पिता के देहांत के कारण छुट्टी पर थे। मैं जैसे ही स्टेडियम की बाहरी रोड पर पहुँचा, पुलिस गाड़ियों का क़ाफ़िला, झिलमिलाती पुलिस बतियाँ , साइरन की आवाजे , मीडिया का जमावड़ा । इन सब के बीच मैं गाड़ी से उतारा। मेरे सामने मेरे एसपी दीपक भार्गव सर वर्दी में सड़क के बीच खड़े थे, इस तरह मैने पहला सैलूट मेरे एसपी को क्राइम सीन पर किया। ये रोंगटे खड़े कर देने वाला एहसास था। थोड़ी दूरी पर मृत शरीर था, रंजीसवश किसी गैंग के हाथों हत्या हुई। इस घटना के बाद मौक़े की कार्यवाही के बाद एसपी सर रात्रि के बाद देर सवेरे तक थाने में डटे रहे, ताकि बेहतर प्लानिंग के साथ मुलज़िम गिरफ़्तार हो। इस घटना ने अंतर्मन पर गहरे प्रभाव छोड़े। छुट्टी पर होने के बावजूद एसपी सर छुट्टी रद्द कर घटना स्थल आये, बड़ी आपराधिक घटना के बाद पुलिस टीम अपने पुलिस कप्तान के हार्डवर्क को देखती और महसूस करती है, तीसरा संगठित अपराध के द्वारा किया गया अपराध अन्य अपराधों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है, अतः उसकी कसावट उसी गंभीरता से हो।

अल सुबह एसपी सर क़रीब 4 बजे थाने से आवास के लिए प्रस्थान हुए। उन्हें गाड़ी में छोड़ते वक़्त सैलूट किया। सब उधेड़बुन ख़त्म हुए , पुलिस से बेहतर कुछ नहीं।

दीपक सर को तहे दिल से शुक्रिया ।
उनके सामने हमेशा प्रोबेशनर होने का एहसास होता है।

जय हिन्द

17/09/2024

कल के भविष्य कहीं भटक ना जाएँ!

हरमडा थाना क्षेत्र में क़रीब 4 रोज़ पहले तीन नाबालिग युवक घर से मस्ती के बहाने ग़ायब हो गए। छका देने वाली पुलिस की पुरज़ोर मेहनत के बाद आज उन्हें दस्त्याब ( रिकवर)किया गया। कल थाना क्षेत्र में उनके परिजनों से मुलाक़ात हुई , लगा हर ज़ुबान में अपने बच्चों के अल्हड़्पन से शिकायत है, लगा उनके लौट आने की बेसब्री रुलाने के सब्र को तोड़ रही है। पिछले एक सप्ताह में जयपुर पश्चिम से ऐसे 6 बच्चे घर से निकले , जिन्हें दस्तायब (रिकवर)करने में पुलिस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। वाजिब चिंता है - परिवार अपने बच्चों से निरंतर संवाद करें। बढ़ते सोशल मीडिया के दौर में जो खाई पैदा हो रही है, वो भयावह है। पिछले दिनों तीन ऐसी ही नाबालिग लड़कियों को घर से बरगलाकर देह व्यापार में धकेलने का प्रयास किया गया, जिस प्रयोजन को जयपुर पश्चिम पुलिस ने विफल कर दिया। लेकिन कहीं अधिक चिंताजनक है , यह उन्मादी व्यवहार बढ़ा है। हम इस गहरे भरोसे में है कि परिवारजन अपने फ़ोन से अलग थलग कर बच्चों से जुड़ाव शुरू करें।ताकि असहाय परिवारों की पीड़ा के ऐसे मुश्किल हालात ना बने।

आपकी सुरक्षार्थ - राजस्थान पुलिस

31/08/2024

ये खाकी का अपमान है ।

आज प्रमुख अख़बारों में यह एक विज्ञापन प्रमुखता से छपा है। व्यापार करते करते नैतिकता भूल जाए तो आपसे सवाल होंगे। हमारे थानेदार पुलिस संगठन के सबसे अहम भूमिका में खड़े होते है, उनके पदनाम का ग़लत इस्तेमाल करना निंदनीय है।

जय हिन्द

28/08/2024

काश हम बात कर पाते!

बाबूलाल की आत्महत्या की खबर व्यथित कर देने वाली है। बाबूलाल डीसीपी ऑफिस की अपराध शाखा में अटैच था पिछले क़रीब 20 दिन से भाखरोता थाने में मालखाना का चार्ज देने गया था।बाबूलाल के अपने कुछ पक्ष थे , जिनकी निश्चित तौर पर जाँच होगी। उससे इतर यह अत्यधिक पीड़ादायी है की बाबूलाल और मेरे बीच 10 गज़ का फ़ासला रहा होगा, उस फ़ासले में एक कॉरिडोर है , जिसमे दिन भर परिवादी मेरे ऑफिस आते है,वो कॉरिडोर पार करके काश वह अपनी बात कह पाता, काश मैं उसे सांत्वना दे पाता, उसे बता पाता की कोई भी समस्या उसके जीवन से बड़ी नहीं है।

बाबूलाल ने जो लास्ट काल अपने साथी पत्रकार बंधु को किया..उसने अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन करते हुए तुरंत मुझे सुचित किया। फिर बाबूलाल से संपर्क करने की हमने भरसक कोशिश की लेकिन फ़ोन ना उठाया। वो कॉल आते ही समानांतर रूप से तुरंत बाबूलाल की लोकेशन पर पुलिस टीम रवाना की गई।पुलिस पहुँचने से पहले बाबूलाल अपनी जान ले चुका था , पुलिस अपना साथी खो चुकी थी।
हमेशा कोशिश की कि पुलिसकर्मी की पीड़ा का समाधान निकले, ना निकलना संभव हो तो उसे तस्सली दे पाये। बाबूलाल से संवाद ना कर पाया, वो पीड़ा हमेशा रहेगी। बाबूलाल ने काश कुछ और देर पहले कॉल किया होता, तो हम शायद उसे बचा पाते। उसे ना बचा पाने की व्यक्तिगत पीड़ा हमेशा रहेगी।
बाबूलाल के सुसाइड नोट की सूचना में साथी बैचमेट उसके घर की ओर दोड़े , इस उम्मीद में कि शायद उसे बचा पाये। स्थानीय पुलिस टीम उसकी संभावित लोकेशन की ओर दोडी , लेकिन उनके पहुँचने के चंद मिनटों पहले वो अपनी जान ले चुका था। पुलिस अपने साथी को खोने की पीड़ा से उभर भी नहीं पायी कि उसके पोस्टमार्टम से पूर्व के लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी में उसके साथी बैचमेट सहित पूरे पुलिस परिवार के लोग ड्यूटी में लगे थे ,इससे अधिक पीड़ादायक कुछ हो नहीं सकता।
ईश्वर परिवार को दुख सहन करने की शक्ति दे।

शत शत नमन 🙏

28/08/2024

महिला क़ानूनों का दुरुपयोग बंद हो।

कल वैशाली पुलिस ने ऐसी महिला को गिरफ़्तार किया जो गरिमा हेल्पलाइन और झूठे मुक़दमों के माध्यम से एक्स्टोरशन करती है। इस महिला पर ख़ुद दर्जनों चोरी इत्यादि के मुक़दमे है उनसे ख़ास फ़ायदा ना होते देख फिर इसने मीठी बातों में उलझा कर लोगों पर पुलिस में झूठी शिकायत और मुक़दमे का डर दिखाना शुरू किया और ऐसे क़रीब दर्जन भर मुक़दमे पिछले 6-7 साल में करा दिये। इस महिला ने झूठी गरिमा हेल्पलाइन की शिकायत कर फिर उन शिकायतों पर कार्यवाही ना करने की रिपोर्ट पेश की उसका लेखा जोखा पुलिस खंगाल रही है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 308(6) में मुक़दमा दर्ज कर आरोपी महिला त्रिशा ख़ान का गिरफ़्तार किया है। इसके तहत 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
जयपुर पश्चिम पुलिस ने पिछले 2 महीने में ऐसी दूसरी गिरफ़्तारी की है। ये डरावना है कि किस तरह महिला क़ानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इन क़ानूनो का दुरुपयोग महिला न्याय का अपमान है।
हम ऐसे मुक़दमों का संकलन कर रहे है जिसमे एक ही महिला ने बारम्बार मुक़दमों को अलग अलग थानों में दर्ज कराया है।
जयपुर पुलिस कटिबद्ध है क़ानून का दुरुपयोग करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाही के लिए। कहा जाता है “अपराधी भले ही छूट जाए लेकिन निर्दोष को सजा ना मिले’ । निर्दोषों के मन में क़ानूनों का डर दिखा कर उन्हें और उनके पूरे परिवार को भय में रखने वाली इन अपराधी महिलाओं पर कड़ी कार्यवाही होगी। हम निर्दोष की सुरक्षा हैतु कटिबद्ध है।

राजस्थान पुलिस- आमज़न में विश्वास , अपराधियों में भय

09/08/2024

“माँ मैं हार गई कुश्ती जीत गई”

पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट की हार को अंतर्मन मानने को तैयार नहीं है। आज लगभग संपूर्ण देश के प्रमुख अख़बारों विनेश के हौसले को सलाम किया । वो देश का गौरव है, उसकी पीड़ा हर देश वासी की पीड़ा है। इन सबके के बीच विनेश का यह संदेश , मैं हार गई , कुश्ती जीत गई, कई मायनों में महत्वपूर्ण है। संघर्ष के चरम पर कभी कभी निराश होना ठीक है, थोड़ा भावुक होना ठीक है, पीड़ा में होना ठीक है, सहज बने रहना ठीक है, अपनी माँ को दिल की बात कह देना ठीक है। ओलंपिक के योद्धा के जीवन में भी निराशा के क्षण आते है। ऐसा समय जब पूरी पीढ़ी गहरे प्रतिस्पर्धा के दौर में जी रही है और हार का पचा लेने का साहस खो बैठी है। उनके लिए सबक़ है विनेश की यह संघर्ष यात्रा। हार जीत के मायनों से महत्वपूर्ण है की आपका संघर्ष कितना रौचक था। विनेश अपने संघर्ष के बदौलत जीत चुकी है।

बताया जा रहा है कि ओलिपिक में विनेश की अपील स्वीकार की जा चुकी है। मेडल की प्राप्ति कोई बड़ा प्रभाव ला पाएगी , ऐसा नहीं दिखता । एक संघर्ष की कहानी की जीत यह राष्ट्र स्वीकार कर चुका है।
Vinesh Phogat Olympics

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