05/09/2026
जसपुर की राजनीति: धर्म और जाति से आगे, विकास की बात कब होगी?
जसपुर की राजनीति आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ सवाल यह नहीं रह गया है कि कौन किस पार्टी में है, कौन किसके साथ है और कौन किसके खिलाफ है। असली सवाल यह है कि जसपुर के साथ कौन है?
आज कोई बिना टिकट चुनाव लड़ने की तैयारी में दिखाई देता है, तो कोई टिकट न मिलने पर दूसरी पार्टी का दरवाजा खटखटाता है। कोई चुनाव हारने के बाद भी ऐसे व्यवहार करता है जैसे जीत उसी की हुई हो। कोई हिंदुओं को अपने साथ जोड़ने की राजनीति कर रहा है, कोई मुसलमानों को साधने की कोशिश में है, कोई हिंदू-मुस्लिम दोनों को साथ लेकर चलने का दावा करता है, तो कोई मुस्लिम-दलित समीकरण को अपनी राजनीति का आधार बना रहा है।
लेकिन इन सबके बीच एक सवाल जसपुर की जनता को खुद से पूछना चाहिए—
क्या हमारी राजनीति सिर्फ वोटों के समीकरण तक सीमित रह गई है?
राजनीति में विचारधारा होनी चाहिए, संघर्ष होना चाहिए, विरोध होना चाहिए और चुनाव भी होना चाहिए। लेकिन चुनाव के बाद भी तो वही सड़क जनता को चलनी है, वही अस्पताल में इलाज कराना है, वही युवा रोजगार ढूंढेगा, वही किसान अपनी फसल बेचने जाएगा और वही व्यापारी अपने कारोबार को आगे बढ़ाएगा।
धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगना आसान है, लेकिन एक अच्छी सड़क बनवाना, रोजगार पैदा करना, अस्पताल में डॉक्टर लाना और युवाओं के लिए अवसर पैदा करना कठिन काम है।
यही कारण है कि अब जसपुर को ऐसी राजनीति की जरूरत है जिसमें नेता जनता को यह न बताए कि आप किस धर्म या जाति के हैं, बल्कि यह बताए कि आपके लिए उसने क्या किया और आगे क्या करने वाला है।
जसपुर को अब चुनावी समीकरण नहीं, विकास का रोडमैप चाहिए
जसपुर में वर्षों से कुछ बुनियादी मांगें चर्चा में रही हैं—रोडवेज बस अड्डा, स्टेडियम, बेहतर सड़कें, तहसील और प्रशासनिक सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार। हाल की विधानसभा कार्यसूची में भी सड़क, तहसील भवन, एसडीएम भवन, सरकारी स्कूलों के भवन, सीवर, पेयजल और सिविल न्यायालय जैसी जरूरतें दर्ज हैं।
तो फिर सवाल यह है कि जसपुर की राजनीति इन मुद्दों पर केंद्रित क्यों नहीं हो सकती?
क्यों हर चुनाव से पहले वही पुराने भावनात्मक मुद्दे सामने आते हैं?
क्यों यह चर्चा नहीं होती कि अगले पांच साल में जसपुर में कितने रोजगार पैदा होंगे?
क्यों यह तय नहीं होता कि कौन-सी सड़क कब बनेगी?
क्यों यह नहीं पूछा जाता कि हमारे युवाओं को अच्छी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के लिए बाहर क्यों जाना पड़ता है?
क्यों स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसी हो कि सामान्य इलाज के लिए भी लोगों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़े?
जसपुर को क्या चाहिए?
जसपुर को सबसे पहले एक स्पष्ट विकास एजेंडा चाहिए।
1. रोजगार और उद्योग
जसपुर की सबसे बड़ी जरूरतों में रोजगार होना चाहिए। युवाओं को सिर्फ चुनाव के समय याद करने से समस्या हल नहीं होगी।
स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा, नए छोटे-बड़े उद्योग, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, युवाओं के लिए रोजगार मेले और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने की ठोस योजना बननी चाहिए।
2. बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था
ऐसा स्वास्थ्य तंत्र होना चाहिए जहाँ सामान्य इलाज के लिए मरीजों को काशीपुर या दूसरे शहरों में रेफर न करना पड़े।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, जांच की सुविधा, जरूरी उपकरण और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
3. शिक्षा पर विशेष ध्यान
जसपुर के बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम होनी चाहिए।
स्कूलों की स्थिति सुधारने के साथ-साथ उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के संस्थान विकसित किए जाने चाहिए।
4. सड़क, पानी और सीवर
विकास का मतलब बड़े-बड़े भाषण नहीं होता।
विकास तब दिखाई देता है जब बरसात में सड़कें डूबती नहीं, गड्ढों में लोग गिरते नहीं, घरों में साफ पानी आता है और शहर में सीवर की समस्या नहीं रहती।
सड़कों की गुणवत्ता पर भी निगरानी होनी चाहिए—सिर्फ सड़क बनना पर्याप्त नहीं, सड़क टिकना भी जरूरी है।
5. रोडवेज बस अड्डा और बेहतर यातायात
जसपुर में रोडवेज बस अड्डे की मांग लंबे समय से उठती रही है और 2024 में भी इसे लेकर मुख्यमंत्री को मांगपत्र दिए जाने की खबर आई थी।
अब जरूरत इस बात की है कि यह मुद्दा सिर्फ घोषणा और राजनीति तक सीमित न रहे, बल्कि उसकी समयसीमा तय हो।
6. खेल और युवाओं के लिए सुविधाएं
जसपुर के युवाओं को मैदान चाहिए, स्टेडियम चाहिए, खेल की सुविधाएं चाहिए।
हर युवा को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती, लेकिन हर युवा को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर जरूर मिलना चाहिए।
7. किसान और ग्रामीण जसपुर
जसपुर सिर्फ शहर नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा गांवों में बसता है।
किसानों के लिए सिंचाई, सड़क, मंडी, बिजली, फसल की उचित कीमत और आवारा/वन्यजीवों से जुड़ी समस्याओं पर स्थायी समाधान की जरूरत है।
8. राजनीति में जवाबदेही
सबसे जरूरी सुधार राजनीति में होना चाहिए।
हर उम्मीदवार को जनता के सामने अपना पांच साल का विकास-पत्र रखना चाहिए।
और चुनाव के बाद हर साल जनता के सामने रिपोर्ट रखनी चाहिए—
कितना पैसा आया?
कहाँ खर्च हुआ?
कौन-सा काम पूरा हुआ?
कौन-सा अधूरा है?
और क्यों अधूरा है?
यही असली राजनीति होगी।
धर्म और जाति से ऊपर उठने का समय
हिंदू हो, मुस्लिम हो, दलित हो, पिछड़ा हो या कोई भी वर्ग—
सड़क सबके घर तक जाती है।
अस्पताल सबके लिए है।
स्कूल सबके बच्चों के लिए है।
पानी सबके घर में चाहिए।
रोजगार हर परिवार को चाहिए।
इसलिए वोट मांगते समय समाज को बांटना आसान है, लेकिन समाज को जोड़कर विकास करना असली नेतृत्व है।
जसपुर को ऐसा नेता नहीं चाहिए जो सिर्फ यह बताए कि कौन उसका वोट बैंक है। जसपुर को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो यह बताए कि वह पूरे जसपुर को कैसे आगे ले जाएगा।
आखिर में सवाल नेताओं से नहीं, जनता से भी है
नेता वही राजनीति करता है जिसकी मांग जनता करती है।
अगर जनता धर्म के नाम पर वोट देगी तो नेता धर्म की बात करेगा।
अगर जनता जाति के नाम पर वोट देगी तो नेता जातीय समीकरण बनाएगा।
लेकिन अगर जसपुर की जनता कह दे—
“हमें धर्म की राजनीति नहीं, विकास की राजनीति चाहिए।
हमें जाति का हिसाब नहीं, काम का हिसाब चाहिए।
हमें भाषण नहीं, परिणाम चाहिए।”
तो राजनीति को भी बदलना पड़ेगा।
चुनाव आएंगे, उम्मीदवार बदलेंगे, पार्टियां बदलेंगी, समीकरण बदलेंगे और चेहरे भी बदलेंगे।
लेकिन जसपुर तभी बदलेगा जब राजनीति का मुद्दा बदलेगा।
अब समय है कि जसपुर में यह सवाल पूछा जाए—
“आप किसके साथ हैं?” से ज्यादा जरूरी है—
“आप जसपुर के लिए क्या करने वाले हैं?”
क्योंकि अंततः जीत किसी नेता की नहीं होनी चाहिए।
जीत जसपुर की होनी चाहिए।