19/09/2026
#राजौंद के हालात ~
विकास के दावों के बीच जनता की बदहाल राह !!
राजौंद को भूली बैठी है सरकार कई सालों से - जैसे ये हरियाणा में है ही नहीं - जैसे इस जगह की किसी को पड़ी ही नहीं !!
इस सड़क की मौजूदा हालत देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विकास के दावे जमीन पर कहां दिखाई देते हैं?
सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, टूटी हुई सतह, उड़ती मिट्टी बदहाल किनारे सिर्फ एक सड़क की खराब स्थिति नहीं हैं, बल्कि यह उन हजारों लोगों की रोज़मर्रा की परेशानी है जिन्हें हर दिन इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।
इस सड़क से गुजरना वाहन चालकों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है, जबकि कार और अन्य वाहनों को भी गड्ढों के कारण नुकसान उठाना पड़ता है। बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है—कीचड़ मिट्टी !!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
सड़कें सिर्फ आवागमन का माध्यम नहीं होतीं। वे किसी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी जीवनरेखा होती हैं। खराब सड़क का असर किसान से लेकर विद्यार्थी, कर्मचारी, व्यापारी और मरीज तक—हर व्यक्ति पर पड़ता है।
किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो, किसी छात्र को रोज इस सड़क पर सफर करना पड़े या किसी किसान को अपनी उपज मंडी तक पहुंचानी हो—हर जगह खराब सड़क की कीमत आम आदमी चुकाता है।
सरकारें अक्सर नए प्रोजेक्ट, नए निर्माण और विकास के बड़े-बड़े आंकड़े गिनाती हैं। लेकिन जनता का एक सीधा सवाल है—
जो सड़क आज मौजूद है, उसकी मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
साथ ही यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि सड़क की मरम्मत के लिए कितना बजट स्वीकृत हुआ, किस एजेंसी को काम सौंपा गया, काम की समयसीमा क्या है और उसकी गुणवत्ता की निगरानी कौन करेगा।
जनता को भाषण नहीं, चलने लायक सड़क चाहिए।
यह कोई छोटी स्थानीय समस्या नहीं है। यह उस व्यवस्था की परीक्षा है जो जनता से टैक्स लेती है और बदले में सुरक्षित, सुगम और बेहतर बुनियादी सुविधाएं देने का दावा करती है।
अब समय है कि इस सड़क की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया तक सीमित न रहें। संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि मौके पर जाएं, स्थिति देखें और समयबद्ध कार्रवाई की सार्वजनिक घोषणा करें।
क्योंकि सड़क पर पड़े गड्ढे सिर्फ सड़क में नहीं होते— वे व्यवस्था की जवाबदेही में भी दिखाई देते हैं !!!
#श्वेता_ढुल