08/02/2025
वीर का कर्तव्य
राजधानी की सर्द सुबह थी। घना कोहरा हर दिशा को ढक चुका था। राजपथ पर एक युवा सैनिक अर्जुन अपनी पोस्ट पर तैनात था। ठंडी हवा उसके चेहरे को काटने जैसी लग रही थी, लेकिन उसके मजबूत हौसले के आगे ये ठंड कुछ नहीं थी। उसने अपने हाथों में बंदूक थाम रखी थी और उसकी आंखें हर आने-जाने वाले पर सतर्क थीं।
आज उसकी ड्यूटी का विशेष दिन था। गणतंत्र दिवस की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी। मन ही मन वह अपनी पत्नी और छोटे बेटे आर्यन को याद कर रहा था। आर्यन ने कल फोन पर कहा था, "पापा, जल्दी घर आना, हमें साथ पतंग उड़ानी है।" अर्जुन के होंठों पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब सा खालीपन था।
तभी अचानक सड़क की दूसरी ओर से एक संदिग्ध व्यक्ति आता दिखा। अर्जुन की नजरें तुरंत सतर्क हो गईं। उसने बिना समय गंवाए उसे रुकने का इशारा किया। व्यक्ति ठिठक कर खड़ा हो गया, लेकिन उसके हावभाव ठीक नहीं लग रहे थे। अर्जुन ने तुरंत उसे हिरासत में लिया और जांच के लिए पुलिस के हवाले कर दिया।
सब शांत हो गया। अर्जुन की सांसें हल्की हुईं। उसे गर्व था कि उसने अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाया। वह जानता था कि देश की सुरक्षा ही उसका पहला धर्म है।
शाम को जब उसकी ड्यूटी खत्म हुई, तो उसने फोन मिलाया। दूसरी ओर से आर्यन की खिलखिलाती आवाज आई, "पापा, आप हीरो हो! मुझे मम्मी ने सब बताया।" अर्जुन की आंखें भर आईं। उसने हल्के से कहा, "बेटा, देश की ड्यूटी पूरी करके जल्दी आऊंगा। फिर पतंग भी उड़ाएंगे और कहानियां भी सुनाएंगे।"
उस दिन अर्जुन ने महसूस किया कि देश और परिवार दोनों के लिए वह एक सच्चा सैनिक था। 💙
Writer : Shuham

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