01/05/2024
#भारत_के_प्रथम_चक्रवर्ती_सम्राट_चन्द्रगुप्त_मौर्य के #2369वें_जन्मदिवस पर
सभी को हार्दिक बधाई व धम्मकामनाएं
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देश के आन बान शान अद्वितीय प्रतिभा, विलक्षण बुद्धिबल, बाहुबल सम्पन्न, अपने दम पर यवनों के
#विशाल_साम्राज्य को ध्वस्त करके भारत की विजय पताका फहराने वाले, भारत के सभी राजवंशों को एकीकृत
कर राष्ट्र का निर्माण करने वाले, विशालतम हृदयसंपन्न, राजतंत्र में जनतंत्र का एहसास कराने वाले, प्राचीन
#भारतीय_सभ्यता_के_उन्नायक, #जम्बूद्वीप व #अखंड_भारत_के_राष्ट्रपितामह, #स्वाभिमानी_पुरुषार्थ व व्यक्तित्व के धनी,
राष्ट्रीय एकता व अखंडता के संस्थापक, #मोरीय_कुलश्रेष्ठ, #प्रथम_चक्रवर्ती_सम्राट_चन्द्रगुप्त_मौर्य
मोरीय गणराज्य के #सम्राट_चन्द्रवर्धन व #धम्ममोरिया के यशस्वी पुत्र, भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ईसा पूर्व में वैसाख प्रथम अष्टमी को हुआ था जो इस वर्ष 01 मई 2024 को है। भारत के लिखित इतिहास में चन्द्रगुप्त मौर्य के रुप में देश को पहली बार चक्रवर्ती सम्राट प्राप्त हुआ। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने सर्वप्रथम भारत में राजनैतिक एकता स्थापित की। उनकी गणना भारत के महानतम शासकों में की जाती है। कथा कहानियों से तो भारत में अनेकों मनगढ़ंत ग्रंथ भरे पड़े हैं। पर सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल से ही भारतीय इतिहास का तिथिक्रम सुनिश्चित होता है। इसलिए उनको प्रथम ऐतिहासिक सम्राट कहा जाता है ।
यूनानी इतिहासकार स्मिय लिखते हैं मौर्य शासनकाल इतिहासकारों को अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाता है। और वे यहां के बिखरे हुए अनेक छोटे-छोटे राज्यों को अपने अधिकार में करके उन्हें संगठित करते हैं। इसी काल में एक विशाल साम्राज्य का उत्कर्ष होता है। और भारत का संबंध विदेशों तक कायम होता है। भारत ने विदेशी राज्यों के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किये। परिणामतः भारतीय इतिहास की घटनाओं का कालक्रम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं के आधार पर भी निर्धारित किया जा सकता है ।
सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य अपने समय के एक योग्य और कुशल सेनानायक, विजेता और अच्छे प्रबंधक थे । वे भारत भूमि को विदेशी यूनानियों के चंगुल से मुक्त कराए। उन्होंने अपने बाहुबल, बुद्धिबल, से भारत को एक संपन्न, समृद्ध, और संगठित राष्ट्र के रुप में निर्मित किये। #सम्राट_चन्द्रगुप्त_मौर्य को इतिहासकारों ने सर्वसम्मति से अखंड भारत का प्रथम चक्रवर्ती सम्राट घोषित किया है। भारतीय इतिहास में पहली बार सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में ही #पाटलीपुत्र के राजदरबार में यूनान, ईरान, मिश्र जैसे दूर दूर के देशों के राजदूत आकर अपने प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया करते थे। वे भारत के पहले सम्राट हैं जिनकी #ऐतिहासिकता_प्रमाणित कालक्रम के ठोस आधार पर सिद्ध की जा सकती है। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ही ऐसे शासक थे जिन्होंने सम्पूर्ण भारत को राजनीतिक एकता के सूत्र में बांधे थे। मौर्य काल में लगभग समस्त भारतीय उपमहाद्वीप सम्मिलित होकर सांस्कृतिक रुप में एकजुट थे। उस समय भारत अलग अलग जातियों और प्रदेशों का विखंडित देश न होकर एक ईकाई के रुप में संपूर्ण देश को अपने में समेटे हुए था। देश में जो राजनीतिक एकता की भावना जगी थी वह सम्राट #चन्द्रगुप्त_मौर्य के पराक्रम और कुशल नेतृत्व से हर क्षेत्र में सफलताओं का परिणाम था ।
#चक्रवर्ती_सम्राट_चन्द्रगुप्त_मौर्य के जन्मदिन पर सम्पूर्ण भारतवासियों को हार्दिक बधाई व धम्मकामनाएं।
#सम्राट_अशोक_क्लब, भारत

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