ट्रंप विश्व के सभी देशो को युद्ध मे झोक देना चाहते है। कोई भी युद्ध मानवता को तबाह कर सकता है। अभी तक जो दूसरे देशो के युद्ध रुकवाने की ढींगे हाक रहा था अब वह स्वयं युद्ध कर रहा है। जिससे पूरे विश्व मे हाहाकार है।
Vyapar Mandal
समस्या नही समाधान बताये।
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07/06/2025
भारत को यदि विश्व की अर्थव्यवस्था में अग्रणीय, निडर और स्वावलंबी है तो GST के साथ सभी करो कि नियमावली को सरल करना ही होगा।
वास्तव में जी एस टी अपने आप बेहद उलझी हुई कर व्यवस्था बन गई है देश में जिससे केवल करदाताओं का उत्पीड़न ही हो रहा है। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी चरम पर है, छोटे और मझोले उद्योगों/व्यापारियों के लिए न्याय पाने का अवसर तक नहीं है। क्योंकि अधिकारियों की कोई जवाबदेही तय नहीं है। और सरकार की मंशा भी अंकुश लगाने की प्रतीत नहीं हो रही है।
परन्तु देश हित में इन सभी को सरल सहज करना ही होगा।
PMO (India) Priyanka Gandhi Vadra Nirmala Sitharaman Narendra Modi Akhilesh Yadav Rahul Gandhi CMOffice,UP PMO India GST - Goods & Services Tax, India GST Final Cm Yogi Adityanath
पाकिस्तान ने अमेरिका की औकात मिलाईं मिट्टी में।
सीजफायर 😀😀😀
योगी जी ने कहा था प्रदेश के रोड़ गढ्ढा मुक्त रहेंगे।
परन्तु अधिकारियों ने सूना है रोड़ गढ्ढा युक्त रहेंगे।
Pramila Pandey- प्रमिला पाण्डेय CMOffice,UP DM Kanpur Nagar Amar Ujala Kanpur Rahul Gandhi Akhilesh Yadav
ेश_एक_टैक्स_स्लैब
भारत में एकल GST दर अपनाने का विचार एक बड़ी बहस का विषय है ! GST, जिसे शुरुआत में "गुड एंड सिंपल टैक्स" कहा गया था, आज कई लोगों के लिए उतना सरल नहीं लगता। इसकी प्रमुख वजह है इसकी बहु-स्तरीय दर संरचना। वर्तमान में GST की पांच मुख्य दरें हैं: 0%, 5%, 12%, 18%, और 28%।5
भारत में GST दर के कारण, चारो ओर पॉपकॉर्न डिबेट चल रही है, सरकार के पॉपकॉर्न पर GST दर के कारण सोशल मिडिया पर पॉपकॉर्न मीम्स की बारिश हो रही है।
क्योंकि अब सरकार का मानना है कि आप किस प्रकार के पॉपकॉर्न को पसंद करते हैं, ये आपको तय करना है चूँकि जैसा पॉपकॉर्न आप पसंद करेंगे, सरकार पॉपकॉर्न पर आपसे उतना ही टैक्स बसूल करेगी |
पॉपकॉर्न पर सरकार :
1. आप कितना टैक्स देंगे – अगर आप अनपैकेज्ड पॉपकॉर्न पसंद करते हैं, तो 5% GST देना होगा।
2. अगर आप पैकेज्ड और रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न पसंद करते हैं, तो आपको 12% GST देना होगा ।
3. और अगर आप मीठे कारमेल फ्लेवर वाले पॉपकॉर्न पसंद करते हैं, तो आपको 18% GST देना होगा ।
सरकार से यह सब सुनकर थोड़ा अलग सा लगता है, कि टेस्ट और आपकी पसंद के अनुसार, जैसा पॉपकॉर्न आप पसंद करेंगे, सरकार उसी अनुसार पॉपकॉर्न पर आपसे टैक्स बसूल करेगी, 5%, 12% या 18%......!!!
सरकार के वित्त मंत्रालय के अनुसार मीठे कारमेल फ्लेवर वाले पॉपकॉर्न पर 18% GST लगाने कि वजह कारमेल में जो अतिरिक्त चीनी है, उस कारण मीठे-कारमेल-फ्लेवर-वाले-पॉपकॉर्न को कन्फेक्शनरी की केटागरी में रखना था इसपर 'शुगर टैक्स' लगना चाहिए। और इसी कारण सरकार चीनी वाली सभी कन्फेक्शनरी पर यही टैक्स 12% GST लगाती हैं।
आइये आपको एक अलग एंगल से समझाते हैं कि अगर मीठे-कारमेल-फ्लेवर-वाले-पॉपकॉर्न को थिएटर में 'लूज़' बेचा जाए तो उस पर 5% GST टैक्स लगेगा! और अगर यही मीठे-कारमेल-फ्लेवर-वाले-पॉपकॉर्न वाले पैक्ड पर 18% GST टैक्स लगेगा|
18% GST टैक्स के कारण, मीठे कारमेल फ्लेवर वाला पैक्ड पॉपकॉर्न भी अब कड़वा लगने लगेगा, 18% GST टैक्स की ये कहानी कुछ हजम नहीं हुई ........!!!
5% 12% 18% तीन तीन तरह के टैक्स स्लैब, टैक्स लगाने के इस स्टाइल को कुछ लोग 'बेतुका' भी कह रहे थे। सब ये भी आपस में पूछते हैं कि भारत में GST टैक्स रिजीम इतना जटिल क्यों बनाया गया है? हमें GST के अलग-अलग टैक्स स्लैब्स रखने की क्या आवश्यकता थी क्या एक GST टैक्स रेट से काम नहीं चल सकता था उसपर भी एक और जटिलता CGST, SGST और IGST से भी जूझना पड़ता है,
2017 में जब GST लागू हुआ| तो लोग बहुत उत्साहित थे, सब लोग चाहते थे कि पूरे भारत में GST दर/ GST टैक्स एक समान हो।
GST, जिसे शुरुआत में "गुड एंड सिंपल टैक्स" कहा गया था, आज कई लोगों के लिए उतना सरल नहीं लगता। इसकी प्रमुख वजह है इसकी बहु-स्तरीय दर संरचना।
वर्तमान में GST की पांच मुख्य दरें हैं: 0%, 5%, 12%, 18%, और 28%।
इसके अलावा, GST की दरें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं:
1. पैकेजिंग के आधार पर:
जैसे पॉपकॉर्न का मामला –
o अनपैकेज्ड पॉपकॉर्न पर 5%।
o पैकेज्ड और रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न पर 12%।
o कारमेल पॉपकॉर्न पर 18%।
यह उत्पादों की प्रकृति को वर्गीकृत करने और अलग-अलग दरें तय करने की प्रक्रिया को बहुत जटिल बनाता है।
1. कीमत के आधार पर:
जैसे मूवी टिकट्स –
o ₹100 से कम के टिकट पर 12%।
o ₹100 से अधिक के टिकट पर 18%।
यह कीमत-आधारित दर प्रणाली न केवल उपभोक्ताओं को भ्रमित करती है, बल्कि समान उत्पाद के लिए भिन्न-भिन्न टैक्स लगाने का आधार बनाती है।
क्या यह संरचना "सिंपल" है?
• यह संरचना व्यवसायों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए समझना और लागू करना मुश्किल बनाती है।
• अलग-अलग उत्पादों और सेवाओं के लिए अलग-अलग दरें तय करने से प्रशासनिक जटिलता बढ़ जाती है।
• विवादों और भ्रम की संभावना बढ़ती है, जैसा कि पॉपकॉर्न और अन्य समान मामलों में देखा गया।
समाधान क्या हो सकता है?
1. GST की दरों को सीमित करना:
पाँच की जगह 1-2 दरों तक इसे सीमित किया जा सकता है।
2. समानता का सिद्धांत लागू करना:
समान उत्पादों के लिए समान दरें तय की जाएँ, चाहे वे पैकेज्ड हों या अनपैकेज्ड।
3. कीमत-आधारित संरचना को खत्म करना:
किसी भी उत्पाद या सेवा पर एक ही दर लागू होनी चाहिए, भले ही उसकी कीमत कुछ भी हो।
इससे GST को सरल, पारदर्शी और वास्तव में "गुड एंड सिंपल टैक्स" बनाया जा सकता है। आपका क्या विचार है – क्या ऐसी संरचना संभव और उपयोगी हो सकती है?
जितनी जटिलताओं भरा नियम होगा उतना ही अधिक ज्यादा भ्रष्टाचार होगा।
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम को ढेरों शुभकामनाएं और बधाइयां।
परन्तु पुरुष क्रिकेट टीम को बड़े खिलाड़ियों को आराम करने दो।
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