rashtriya sanatan dharm sena

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03/10/2026

*🌞 मोक्ष कैसे मिले 🌞*

*संसार में तीन वस्तुएं हैं, साध्य, साधक और साधन। "'साध्य' का अर्थ है जिसे हम सिद्ध करना चाहते हैं या प्राप्त करना चाहते हैं। 'साधक' उसे कहते हैं जो साध्य को प्राप्त करना चाहता है। और 'साधन' उसे कहते हैं जिसकी सहायता से साधक अपने साध्य तक पहुंच पाता है।"*

*"इन वैदिक परिभाषाओं के अनुसार 'ईश्वर' या मोक्ष 'साध्य' है। 'आत्मा' 'साधक' है। और 'धन संपत्ति भोजन वस्त्र मकान आदि' मोक्ष प्राप्ति के 'साधन' हैं।"*

*संसार में कुछ लोग ईश्वर या मोक्ष प्राप्ति के लिए ईमानदारी से पुरुषार्थ करते हैं। वे लोग सच्चे साधक हैं। "वे धन भोजन वस्त्र मकान आदि साधन सीमित मात्रा में संगृहीत करते हैं। इन साधनों की सहायता से, और वेदों एवं दर्शन शास्त्रों की विद्या पढ़कर वे समाधि लगाते हैं। इनकी सहायता से वे अपने 'साध्य' ईश्वर या मोक्ष तक पहुंच जाते हैं। वही लोग वास्तव में सही दिशा में चल रहे हैं।"*

*अधिकांश लोग तो लक्ष्य या साध्य को समझते ही नहीं। जीवन में केवल खाना पीना भोग करना धन कमाना संपत्ति जमा करना, यही उनके जीवन का लक्ष्य या साध्य है। "वे अपनी सारी शक्ति धन आदि वस्तुओं के संग्रह में ही लगा देते हैं। ऐसे लोग थोड़ा बहुत धन भले ही इकट्ठा कर लें, तो भी उससे उनके जीवन का कल्याण तो नहीं होगा। वे धन संपत्ति को यहां संसार में यूं ही छोड़कर चले जाएंगे। और यदि इस धन संपत्ति प्राप्त करने के कार्य में भी उन्होंने झूठ छल कपट आडंबर आदि का सहारा लिया, तो अगले जन्मों में पशु पक्षी आदि योनियों में वे भयंकर दंड भोगेंगे। इसलिए यह मार्ग अच्छा नहीं है।"*

*अच्छा मार्ग तो यही है, कि "ईश्वर या मोक्ष को ही लक्ष्य बनाएं। वही वास्तविक साध्य है। धन संपत्ति आदि भौतिक साधनों को साधन के रूप में ही प्रयोग करें। दान पुण्य गौसेवा साधु सेवा करते रहें और सच्चे साधक बनकर ईश्वर या मोक्ष की प्राप्ति करें। इसी से जीवन सफल होगा। और आगे मोक्ष प्राप्त करके इस जन्म मरण चक्र से छूट कर सब दुखों की निवृत्ति होगी। मोक्ष में ईश्वर का आनंद भी बहुत लंबे समय तक मिलेगा।" "बुद्धिमान लोग ऐसा कार्य करते हैं। ऐसा ही बाकी सब लोगों को भी करना चाहिए।"*

*जय श्री राधे-जय श्री कृष्णा*
*आपका दिन मंगलमय हो*

*_प्रेषक:- दीपक साहनी संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी० मो नंबर 8112651130*
*8738965566*

|| वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ ||भगवान गणेश का स्वरूप हमें जीवन जीने ...
14/09/2026

|| वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ ||
भगवान गणेश का स्वरूप हमें जीवन जीने का अनूठा दर्शन सिखाता है। उनका विशाल मस्तक गंभीर चिंतन और विवेक का सूचक है, उनके बड़े कान ध्यान से दूसरों की बात सुनने की प्रेरणा देते हैं, और उनकी सूंड हर परिस्थिति में अनुकूल रहने का संदेश देती है। *राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन* इस पावन अवसर पर राष्ट्र के सभी नागरिकों से यह आह्वान करता है कि हम बप्पा के जीवन दर्शन को अपनाएं। सनातन धर्म का मूल आधार ही 'सेवा' और 'वसुधैव कुटुंबकम' है। आइए, इस उत्सव को मनाते हुए हम समाज के वंचित और जरूरतमंद भाई-बहनों की सेवा का संकल्प लें।

12/09/2026

भारत में कितने हिन्दू हैं जो चाहते हैं कि
सनातन बोर्ड की स्थापना भारत में बहुत जरूरी है कृपया कमेंट में अपना नाम और इनबॉक्स में अपना नाम मो नंबर सहित अपनी राय अवश्य लिखें

11/09/2026

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*_प्रेरक विचार...✍️_*

*जो व्यक्ति दूसरों को सहारा देता है*
*उसे अपने लिए सहारा मांगना नही पड़ता*
*परमात्मा स्वतः ही दे देता है*
*गाय को भोजन कराने का*
*पक्षियों को पानी पिलाने का*
*किसी गिरे हुए को उठाने का और..*
*किसी को सही राह दिखाने का*
*अवसर मिल जाये तो चूकना मत*
*ऐसा करने से आप कई ऋणों से*
*मुक्त हो जाओगे..!*

*☕ सुप्रभात ☕*
*आपका दिन मंगलयमय हो*
*🍁 दीपक साहनी संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी० (प्रेरक) 🍁*
संगठन से निःशुल्क जुड़ने हेतु संपर्क करें
*8112651130*

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आप सभी द्वारा दी गई बधाई एवं शुभकामनाएं के लिए हृदय से धन्यवाद आभार आप सभी का सदैव साथ, प्यार आशीर्वाद यूं ही मिलता रहे
04/09/2026

आप सभी द्वारा दी गई बधाई एवं शुभकामनाएं के लिए हृदय से धन्यवाद आभार आप सभी का सदैव साथ, प्यार आशीर्वाद यूं ही मिलता रहे

*🌳 निधिवन 🌳* एक बार कलकत्ता का एक भक्त अपने गुरु की सुनाई हुई भागवत कथा से इतना मोहित हुआ कि वह हर समय वृन्दावन आने की स...
02/09/2026

*🌳 निधिवन 🌳*

एक बार कलकत्ता का एक भक्त अपने गुरु की सुनाई हुई भागवत कथा से इतना मोहित हुआ कि वह हर समय वृन्दावन आने की सोचने लगा उसके गुरु उसे निधिवन के बारे में बताया करते थे और कहते थे कि आज भी भगवान यहाँ रात्रि को रास रचाने आते है उस भक्त को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था,

और एक बार उसने निश्चय किया कि वृन्दावन जाऊंगा और ऐसा ही हुआ। श्री राधा रानी की कृपा हुई और आ गया वृन्दावन उसने जी भर कर बिहारी जी का राधा रानी का दर्शन किया लेकिन अब भी उसे इस बात का यकीन नहीं था कि निधिवन में रात्रि को भगवान रास रचाते हैं।

उसने सोचा कि एक दिन निधिवन रुक कर देखता हू इसलिए वो वही पर रूक गया और देर तक बैठा रहा और जब शाम होने को आई तब एक पेड़ की लता की आड़ में छिप गया।

जब शाम के वक़्त वहा के पुजारी निधिवन को खाली करवाने लगे तो उनकी नज़र उस भक्त पर पड गयी और उसे वहाँ से जाने को कहा तब तो वो भक्त वहाँ से चला गया, लेकिन अगले दिन फिर से वहा जाकर छिप गया और फिर से शाम होते ही पुजारियों द्वारा निकाला गया और आखिर में उसने निधिवन में एक ऐसा कोना खोज निकाला जहा उसे कोई न ढूंढ़ सकता था, और वो आँखे मूंदे सारी रात वही निधिवन में बैठा रहा और अगले दिन जब सेविकाए निधिवन में साफ़ सफाई करने आई तो पाया कि एक व्यक्ति बेसुध पड़ा हुआ है और उसके मुह से झाग निकल रहा है।

तब उन सेविकाओं ने सभी को बताया तो लोगो कि भीड़ वहाँ पर जमा हो गयी सभी ने उस व्यक्ति से बोलने की कोशिश की लेकिन वो कुछ भी नहीं बोल रहा था, लोगो ने उसे खाने के लिए मिठाई आदि दी लेकिन उसने नहीं ली और ऐसे ही वो ३ दिन तक बिना कुछ खाए-पीये ऐसे ही बेसुध पड़ा रहा और ५ दिन बाद उसके गुरु जो कि गोवर्धन में रहते थे, बताया गया तब उसके गुरूजी वहाँ पहुँचे और उसे गोवर्धन अपने आश्रम में ले आये।

आश्रम में भी वो ऐसे ही रहा और एक दिन सुबह सुबह उस व्यक्ति ने अपने गुरूजी से लिखने के लिए कलम और कागज़ माँगा गुरूजी ने ऐसा ही किया और उसे वो कलम और कागज़ देकर मानसी गंगा में स्नान करने चले गए जब गुरूजी स्नान करके आश्रममें आये तो पाया कि उस भक्त ने दीवार के सहारे लग कर अपना शरीर त्याग दिया था, और उस कागज़ पर कुछ लिखा हुआ था।

उस पर लिखा था- "गुरूजी मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई है, पहले सिर्फ आपको ही बताना चाहता हूँ, आप कहते थे न कि निधिवन में आज भी भगवान रास रचाने आते है और मैं आपकी कही बात पर यकीन नहीं करता था, लेकिन जब मैं निधिवन में रूका तब मैंने साक्षात बांके बिहारी का राधा रानी के साथ गोपियों के साथ रास रचाते हुए दर्शन किया और अब मेरी जीने की कोई भी इच्छा नहीं है, इस जीवन का जो लक्ष्य था वो लक्ष्य मैंने प्राप्त कर लिया है और अब मैं जीकर करूँगा भी क्या..? श्याम सुन्दर की सुन्दरता के आगे ये दुनिया वालों की सुन्दरता कुछ भी नहीं है, इसलिए आपके श्री चरणों में मेरा अंतिम प्रणाम स्वीकार कीजिये।"

वो पत्र जो उस भक्त ने अपने गुरु के लिए लिखा था आज भी मथुरा के सरकारी संघ्रालय में रखा हुआ है और बंगाली भाषा में लिखा हुआ है।

कहा जाता है निधिवन के सारी लतायें गोपियाँ हैं, जो एक दूसरे कि बाहों में बाहें डाले खड़ी है। जब रात में निधिवन में राधा रानी जी, बिहारी जी के साथ रास लीला करती है तो वहाँ की लतायें गोपियाँ बन जाती हैं, और फिर रास लीला आरंभ होती है, इस रास लीला को कोई नहीं देख सकता,दिन भर में हजारों बंदर, पक्षी, जीव जंतु निधिवन में रहते है पर जैसे ही शाम होती है,सब जीव जंतु बंदर अपने आप निधिवन से बाहर चले जाते हैं। एक परिंदा भी फिर वहाँ पर नहीं रुकता, यहाँ तक कि जमीन के अंदर के जीव चीटी आदि भी जमीन के अंदर चले जाते हैं, रास लीला को कोई नहीं देख सकता क्योकि रास लीला इस लौकिक जगत की लीला नहीं है। रास तो अलौकिक जगत की "परम दिव्यातिदिव्य लीला" है कोई साधारण व्यक्ति या जीव अपनी आँखों से देख ही नहीं सकता. जो बड़े बड़े संत है उन्हें निधिवन से राधारानी जी और गोपियों के नुपुर की ध्वनि सुनी है।

जब रास करते करते राधा रानी जी थक जाती हैं तो बिहारी जी उनके चरण दबाते है, और रात्रि में शयन करते हैं। आज भी निधिवन में शयन कक्ष है जहाँ पुजारी जी जल का पात्र, पान, फुल और प्रसाद रखते हैं, और जब सुबह पट खोलते हैं, तो जल पीला मिलता है, पान चबाया हुआ मिलता है, और फूल बिखरे हुए मिलते है।

वृन्दावन धाम या बरसाना कोई घूमने फिरने या पिकनिक मनाने की जगह नहीं है, ये आपके इष्ट की जन्मभूमि लीलाभूमि व तपोभूमि है। सबसे ख़ास बात ये प्रेमभूमि है, जब भी आओ इसको तपोभूमि समझ कर मानसिक व शारीरिक तप किया करो, शरीर से सेवा व वाणी से राधा नाम गाया जाए, तब ही धाम मे आना सार्थक है।

एक अद्भुत मस्ती ताकत व् आनंद ले कर वापिस जाया करो.आप की धाम निष्ठां मे वृद्धि हो इसी कामना से बोलो..जय जय श्री राधे..🙏

*पोस्ट जानकारी अच्छी लगे तो अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं और पुण्य कमाएं..*

*_प्रेषक:- दीपक साहनी संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन भारत सरकार द्वारा रजी० मो नंबर 8112651130*
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*प्रतिदिन पंचांग एवं दो सुंदर, रौचक, पौराणिक, आध्यात्मिक, शिक्षाप्रद, प्रेरणास्रोत कहानियों के लिए "राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन" ग्रुप से जुड़ना चाहते हैं तो 8112651130 पर व्हाटसअप करें हम आपको ग्रुप का लिंक शेयर कर देंगे..🙏*

28/08/2026

जिस बहन के पास भाई नहीं है वो मुझे अपना भाई बना सकती हैं

*🍁 रक्षा बंधन कथा 🍁*       रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ लोक परंपरा का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि इसके साथ कई पौराणिक कथाएं भ...
28/08/2026

*🍁 रक्षा बंधन कथा 🍁*

रक्षाबंधन का त्योहार सिर्फ लोक परंपरा का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि इसके साथ कई पौराणिक कथाएं भी हैं. ऐसी ही एक कथा राजा बली, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी से जुड़ी है. कहते हैं कि मां लक्ष्मी ने ही राजा बली को सबसे पहले राखी बांधी थी. तभी से रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा चली आ रही है।

*येन बद्धो बलि राजा ,दानवेन्द्रो महाबलः।*
*तेन त्वाम प्रतिबद्धनामि ,रक्षे माचल माचलः ।।*

ये मंत्र तो आपने सुना ही होगा। जी हां, जब भी रक्षा सूत्र बांधा जाता है, तो यह मंत्र जरूर पढ़ा जाता है।

बहनें जब भाइयों को राखी बांधती हैं, तब भी इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है। क्या आप जानते हैं, यह मंत्र क्यों पढ़ा जाता है, इस मंत्र के पीछे की धार्मिक घटना क्या है? आइए रक्षा बंधन त्योहार के पवित्र मौके पर जानते हैं, इस मंत्र से रक्षा बंधन की कथा का क्या संबंध है और माता लक्ष्मी ने किसे राखी बांध कर भगवान विष्णु को मुक्त किया था?

एक बार दानवों और देवताओं में भीषण युद्ध छिड़ गया, जो बारह वर्षों तक चलता रहा। इस युद्ध में दानवों के राजा बलि ने देवताओं को पराजित कर इंद्र को स्वर्ग से बाहर कर दिया

जहाँ बहती है गंगा-यमुना, जहाँ पग-पग पर है मान,उस पावन भारत भूमि को, हम सब करते हैं प्रणाम।" 🙏🇮🇳आप सभी को स्वतंत्रता दिवस...
15/08/2026

जहाँ बहती है गंगा-यमुना, जहाँ पग-पग पर है मान,उस पावन भारत भूमि को, हम सब करते हैं प्रणाम।" 🙏🇮🇳आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!राष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन देश की उन्नति और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है। आइए इस राष्ट्रीय पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाएं।
*विनीत :दीपक साहनी संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्षराष्ट्रीय सनातन धर्म सेवा संगठन (भारत सरकार द्वारा पंजीकृत)मो. नंबर: 8112651130*

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