Prajatantrik Jansevak Party

Prajatantrik Jansevak Party

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The Prajatantrik Jansevak Party was established on 18 feb 2019 by Professor Kashiram Sahab

The Prajatantrik Jansevak Party was established on 18 feb 2019 by Professor Kashiram Sahab and professor Dr. Anilesh Kumar Pal, Shivpal Singh Rajput, Vinod Rajyogi Yadav are also among the founding members. The motive of the prajatantrik jansevak party is to provide free and fair education to the vulnerable, underprivileged part of the society for their social economical upliftment. The party beli

11/04/2026

11 अप्रैल का दिन भारतीय इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। महात्मा ज्योतिराव फूलें जी कि जयंती हम सब को प्रेरणा का उत्साह है।
वह केवल समाज सुधारक हि नहीं, क्रांति सुर्य थे जिन्होंने शिक्षा और समानता के द्वार उन लोगों के लिए खोलें जिनके लिए समाज ने उन्हें बंद करके रखा था।
सावित्री बाई फुले जी के साथ मिलकर उन्होंने जो मशाल जलाई थी, उसी का परिणाम है, समाज का हर वर्ग शिक्षा कि रोशनी तक पहुँच पा रहा है!
जय भीम💙 जय फूलें!

10/04/2026

अखंड भारत के निर्माता, मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जी की जयंती पर शत-शत नमन।
आचार्य चाणक्य के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने पराक्रम और दूरदर्शिता से भारत को एकता के सूत्र में पिरोकर राष्ट्रनिर्माण की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की।
#मौर्य_साम्राज्य

08/04/2026

सन 1857 की क्रांति के जनक व प्रथम शहीद
मातादीन वाल्मीकि जी के बलिदान दिवस पर उन्हें शत शत नमन!

08/04/2026

1857 की क्रांति के अमर नायक वीर मंगल पांडे जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
मंगल पांडे जी के अदम्य साहस और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी तथा पूरे देश में स्वाधीनता की लौ प्रज्वलित की।

मंगल पांडे जी का जीवन देशभक्ति, पराक्रम और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का अनुपम उदाहरण है। उनका त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता रहेगा।

08/04/2026

⚖️ बहुजन समाज एकजुट हो! शिक्षा और न्याय के लिए UGC कानून लागू होना ही चाहिए! 🙏✊💥🎉
साथियों, अब समय आ गया है कि हम अपने हक़ के लिए एक साथ खड़े हों! UGC कानून सिर्फ एक मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे दलित और बहुजन समाज के भविष्य की आवाज़ है। जब तक हम संगठित नहीं होंगे, हमारी आवाज़ नहीं सुनी जाएगी। शिक्षा हमारा अधिकार है, इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है!
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ऐसी ही दमदार और समाज हित की आवाज़ उठाने के लिए मेरे पेज को अभी फ़ॉलो करें!

⚠️ डिस्क्लेमर: यह तस्वीर AI द्वारा केवल समाज में जागरूकता फैलाने और एक वैचारिक संदेश देने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसका मकसद किसी भी राजनेता, अभिनेता या सम्मानित व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या उनकी छवि खराब करना बिल्कुल नहीं है।

07/04/2026

विश्व स्वास्थ्य दिवस की सभी देश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
आइए, आज के अवसर पर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और स्वास्थ्य के प्रति जन-जन तक जागरूकता का प्रसार करने हेतु संकल्पित हों।
#विश्व_स्वास्थ्य_दिवस

Photos from Prajatantrik Jansevak Party's post 06/04/2026

प्रजातान्त्रिक जनसेवक पार्टी (PJP) जिला कार्यालय - फिरोजाबाद #प्रजातान्त्रिक_जनसेवक_पार्टी

26/03/2026

अपने अद्वैत पराक्रम, महाकौशल व लोकसमता की नीतियों से समाज का उत्थान करने वाले शाक्य मौर्यवंश के अप्रतिम योद्धा देवानाम प्रियदर्शी
अखंड भारत के निर्माता महान चक्रवर्ती करुणा दया मैत्री के प्रति मूर्ति बुद्धिस्ट सम्राट अशोक के प्राकट्योत्सव (चित्तमासो दुतियो पक्ख अट्ठमी) अशोकाष्टमी की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं
चक्रवर्ती सम्राट असोक महान के शिलालेख दुनिया का पहला लिखित संविधान -
भारत के साथ-साथ दुनिया के इतिहास में चक्रवर्ती सम्राट असोक महान का नाम केवल एक विश्व विजेता सम्राट के रूप में ही नहीं, बल्कि एक महान प्रशासक और मानवतावादी शासक के रूप में लिया जाता है।
उनके शासनकाल में जो शिलालेख (Edicts)लिखवाए गए, वे केवल पत्थरों पर अंकित शब्द नहीं थे, बल्कि उस समय के शासन का आधार और जनता के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत थे। इसी कारण यह कहना उचित है कि चक्रवर्ती सम्राट असोक महान के शिलालेख ही उस समय का “संविधान” थे।
शिलालेखों का उद्देश्य -
चक्रवर्ती सम्राट असोक महान ने अपने शिलालेखों के माध्यम से जनता तक सीधे अपने विचार, नीतियाँ और आदेश पहुँचाए थे। ये शिलालेख पूरे साम्राज्य में स्तंभों, चट्टानों पर लोकभाषा में खुदवाए गए थे ताकि आम जनता भी उन्हें आसानी से पढ़ सके और समझ सके। इनका मुख्य उद्देश्य था धम्म, नैतिकता और सामाजिक समानता का प्रचार ताकि प्रजा खुशहाल रह सके उनके साथ कोई भेदभाव न हो सके किसी के हक अधिकारों का हनन न हो सके। जहां अन्य राजा प्रजा से हकीकत छुपाते उनका शोषण करते, वहीं चक्रवर्ती सम्राट असोक महान प्रजा को हकीकत बताते, उनके सुख दुःख में साथ देते, उनका कल्याण करते।
जहां अन्य राजा, प्रजा को अपना दास समझते, वहीं सम्राट असोक महानचक्रवर्ती सम्राट असोक महान प्रजा को अपना पुत्र मानते, और सोचिए जब राजा प्रजा को पुत्र कह दे तो भला कौन पिता अपने पुत्रों को दुःखी देखना चाहेगा, यही कारण है भारत विश्व गुरु, सोने की चिड़िया, महान बना, दुनियां में सबसे सशक्त, समृद्ध, शैक्षिक भारत बना। पूरी दुनिया भारत की ओर नतमस्तक हुई।
नालंदा, तक्षशिला विक्रमशिला इसके साक्षात प्रमाण हैं। चक्रवर्ती सम्राट असोक महान ने समूचे जम्बूदीप ही नहीं विश्व के अन्य देशों का कल्याण किया , आर्थिक सहयोग, चिकित्सालय बनवाए, औषधियों को भेजवाए, वहाँ रोपित भी करवाए, विद्यालय बनवाए।
शासन के नीति और नियम -
आज जिस प्रकार संविधान किसी देश के शासन को दिशा देता है, उसी प्रकार चक्रवर्ती सम्राट असोक महान के शिलालेखों में शासन के नियम और सिद्धांत स्पष्ट रूप से लिखे गए थे। प्रजा के प्रति दया और करुणा, समानता, न्यायपूर्ण शासन झलकता है, सभी के प्रति सम्मान जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत शामिल थे।
चक्रवर्ती सम्राट असोक महान ने “धम्म” को अपने शासन का केंद्र बनाया। यह कोई एक धर्म नहीं था, बल्कि एक नैतिक जीवनशैली थी जिसमें सत्य, अहिंसा, करुणा और सहिष्णुता जैसे मूल्यों को महत्व दिया गया। उनके शिलालेखों में बार-बार धम्म का पालन करने की प्रेरणा दी गई है। जनकल्याण की भावना असोक के शिलालेखों में केवल आदेश ही नहीं, बल्कि जनकल्याण के कार्यों का भी उल्लेख मिलता है। सड़कों के किनारे पेड़ लगवाना, यात्रियों के लिए कुएँ और विश्राम गृह बनवाना, पशुओं और मनुष्यों के लिए चिकित्सा की व्यवस्था, गांव में नहर, तालाबों का निर्माण कराना, ये सभी बातें यह दर्शाती हैं कि उनका शासन केवल सत्ता चलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि लोककल्याण और जनता की भलाई के लिए समर्पित था।
वर्तमान भारतीय संविधान, चक्रवर्ती सम्राट असोक महान के शिलालेखों का दस्तावेज है समता, स्वतंत्रता बंधुत्व और न्याय सब चक्रवर्ती सम्राट असोक महान के शिलालेखों से प्रेरित हैं अंतर सिर्फ इतना है कि आज का संविधान लिखित और विस्तृत दस्तावेज है, जबकि चक्रवर्ती सम्राट असोक महान के शिलालेख संक्षिप्त और प्रभावशाली संदेश थे जिसे लोग पढ़ते और विचार करते और उसी मार्ग पर चलते थे। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि चक्रवर्ती सम्राट असोक महान के शिलालेख उस समय के लिए एक जीवंत संविधान की तरह थे, जिन्होंने न केवल शासन को दिशा दी बल्कि समाज को भी नैतिकता और मानवता का मार्ग दिखाया।
आज भी उनके विचार हमें एक आदर्श समाज बनाने की प्रेरणा देते हैं। आज 26 मार्च 2026 (चित्तमासो दुतियो पक्ख अट्ठमी) को ऐसे लोककल्याणकारी चक्रवर्ती सम्राट असोक महान के प्राकट्योत्सव को सम्पूर्ण विश्व में हर्षोल्लास से मनाएं।
#सम्राटअशोक #अशोकसम्राट

25/03/2026

☸️सम्राट अशोक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ☸️

महान शासक सम्राट अशोक जी के आदर्श आज भी हमें सत्य, अहिंसा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। आइए इस शुभ अवसर पर हम सभी नफरत को छोड़कर प्रेम, शांति और मानवता का संदेश फैलाएं। उनके बताए रास्ते पर चलकर एक बेहतर समाज का निर्माण करें।
🌿 जय भारत | नमो बुद्धाय🌿

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