10/10/2025
Sadar Naman
"बहुजन की बात समाजवाद के साथ" Simple Living & High Thinking.
10/10/2025
Sadar Naman
26/03/2025
महादेवी वर्मा जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन
#हरिभान_यादव #भारतीय_किसान_यूनियन_अनंत
20/03/2025
Jyotiba Phule
20/03/2025
महारानी अवंतीबाई लोधी की पुण्यतिथि पर सादर नमन
#हरिभान_यादव #भारतीय_किसान_यूनियन_अनंत
15/03/2025
कांशीराम जी (1934-2006) एक प्रख्यात समाज सुधारक और बहुजन समाज के नेता थे, जिन्होंने दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने 1984 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य सामाजिक न्याय और राजनीतिक सशक्तिकरण था। कांशीराम जी ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाया और दलितों को संगठित कर उन्हें राजनीतिक ताकत बनाने का कार्य किया। उनका जीवन समानता, आत्मसम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष का प्रतीक है। उनकी जयंती पर हम उन्हें नमन करते हैं और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हैं।
#कांशीरामजयंती
14/03/2025
Happy holi
03/03/2025
अच्छी पहल
03/03/2025
जमशेद जी टाटा (1839-1904) भारत के एक महान उद्योगपति और "भारतीय उद्योग के जनक" माने जाते हैं। उन्होंने टाटा समूह की स्थापना की और भारतीय औद्योगिकीकरण की नींव रखी।
उनका जन्म 3 मार्च 1839 को गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में हुआ था। उन्होंने मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और अपने पिता नुसीरवानजी टाटा के व्यवसाय में शामिल हो गए। व्यापार में अनुभव प्राप्त करने के बाद उन्होंने 1868 में खुद का व्यवसाय शुरू किया।
उन्होंने भारत में इस्पात, कपड़ा, और शिक्षण संस्थानों की स्थापना का सपना देखा। 1907 में टाटा स्टील (तब टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी) की नींव रखी गई, जो भारत की पहली निजी इस्पात कंपनी बनी। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की स्थापना का भी सपना देखा, जिसे उनकी मृत्यु के बाद 1909 में पूरा किया गया।
टाटा का योगदान भारतीय उद्योग, शिक्षा और समाज के लिए अमूल्य रहा है। उनका दृष्टिकोण और प्रयास भारत में आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की नींव बने।
#हरिभान #अधिकार #लखनऊ
28/02/2025
बृजभूषण का मुकदमा खत्म
27/02/2025
चंद्रशेखर आजाद भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे । उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था । वे बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे और महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े ।
बाद में, काकोरी कांड (1925) के बाद वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के महत्वपूर्ण सदस्य बने । भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया ।
उन्होंने संकल्प लिया था कि वे कभी भी ब्रिटिश सरकार के हाथों जीवित नहीं पकड़े जाएंगे। 27 फरवरी 1931 को जब इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (अब चंद्रशेखर आजाद पार्क) में अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया, तो वे वीरतापूर्वक लड़े और अंत में अपनी पिस्तौल की अंतिम गोली खुद को मारकर शहीद हो गए ।
उनका जीवन साहस, त्याग और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है । आज भी वे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं ।
#चंद्रशेखरआज़ाद #भारत #क्रांतिकारी #काकोरीकाण्ड
25/02/2025
सराहनीय