19/12/2024
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता।
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19/12/2024
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता।
संस्कृत प्रतिभा खोज की राज्यस्तरीय प्रतियोगिता के विषय में प्रतिभागियों का वक्तव्य।
इस श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर हम श्रीकृष्ण के जीवन की गूढ़ता का एक अद्भुत उदाहरण देखते हैं -
वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण का जीवन, उनका चरित्र, जिस तरह व्यवहार में प्रवर्तमान है, उसमें भी एक प्रकार की विलक्षण गूढ़ता ही देखने को मिलती है। उनके जीवन में विलक्षण गूढ़ता भरी हुई है।
एक प्रसंग पढ़िए -
महाभारत के अश्वमेधिक पर्व में एक प्रसंग है कि द्वेष से भरे हुए अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में स्थित बालक (परीक्षित) को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र छोड़ा जिसका निवारण करना किसी के लिए भी संभव ना था । जब व्यास जी के आश्रम में अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र के प्रयोग का अपना मनोरथ व्यक्त किया था, तब भगवान श्री कृष्ण ने कहा था मैं तेरे मनोरथ को विफल करूंगा ।
उस अस्त्र के प्रभाव से अन्त:पुर में घबराहट फैल गई और उत्तरा अत्यंत व्याकुल हो गई थी। इस विषम एवं करुण प्रसंग पर श्रीकृष्ण ने अति शीघ्र जाकर उत्तरा को अभय प्रदान किया । ब्रह्मास्त्र एकदम आ पहुंचा था। उत्तरा को सांत्वना देते हुए श्री कृष्ण ने जलांजलि लेकर गंभीर स्वर से प्रतिज्ञा की। श्री कृष्ण की यह प्रतिज्ञा पठनीय है:-
प्रतिजज्ञे च दाशार्हः तस्य जीवितमच्युतः ।
अब्रवीच्च विशुद्धात्मा सर्वं विश्रावयन् जगत्॥
न ब्रवीम्युत्तरे मिथ्या सत्यमेतद् भविष्यति ।
एष संजीवयाम्येनं पश्यतां सर्वदहिनाम् ॥
नोक्तं पूर्वं मया मिथ्या स्वैरेष्वपि कदाचन।
न च युद्धात्परावृत्तः तथा संजीवतामयम् ॥ इत्युक्तो वासुदेवेन सबालो भरतर्षभ।
शनैः शनैर्महाराज प्रास्पंदत सचेतनः ॥
अर्थात् "मैं यदि जीवन में कभी मजाक में भी झूठ नहीं बोला, तथा पराजय के विचार से कभी युद्धभूमि से नहीं भागा, तो यह गर्भस्थ बालक जीवित हो जाय।"
इस गम्भीर वाणी में सत्य की कैसी प्रभावशीलता रही होगी कि इस अवसर पर प्रकृति के नियम का उल्लंघन हुआ और गर्भ में मृत्यु की शरण गया हुआ बालक जीवित हो गया। ऐसी है श्रीकृष्ण के जीवन की गूढ़ता। सत्य के आविष्कार का ऐसा प्रसंग इतिहास में अन्यत्र कहीं पढ़ने को नहीं मिलेगा।
स्थूल दृष्टि से देखेंगे तो पाएंगे कि श्रीकृष्ण ने हंस और डिम्भक के प्रसंग में झूठ बोला भी और नरो वा कुंजरो वा कहलवा कर युधिष्ठिर से झूठ बोलवाया।
रणछोड़राय तो नाम प्रसिद्ध है।
#श्रीकृष्णजन्माष्टम्याःशुभकामना:
गृहे-गृहे गोपवधू कदम्बा:
सर्वे मिलित्वा समवाप्ययोगम् ।
पुण्यानि नामानि पठन्ति नित्यं
गोविन्द दामोदर माधवेति ॥
श्रीकृष्णजन्माष्टम्याः शुभाशयाः।
🙏🙏नमांसि 🙏🙏
संस्कृताधीतिनः सन्तु सर्वे भारतभूमिजाः।
संस्कृतेनैव कुर्वन्तु व्यवहारः परस्परम्॥
आध्यात्मिक-ऊर्जायाः वेदचिन्तनस्य श्रावणीमहापर्वण:, भ्रातृभगिन्यो: पावनं पर्व- रक्षाबन्धनस्य संस्कृतदिवसस्य च भवद्भय: सपरिवारेभ्य: हार्दिक्य: मङ्गलकामना ।
सादरम्
*जगदानंद झा, लखनऊ*
#संस्कृत_प्रतिभा_खोज_2024
*संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता* जनपद, मंडल तथा राज्य इन तीन स्तरों पर होती है।
1. जनपद की प्रतियोगिता में संस्कृत भाषा दक्षता।
2. मंडल की प्रतियोगिता में संस्कृत भाषा दक्षता के साथ संस्कृत सामान्य ज्ञान ।
3. राज्य स्तर पर संस्कृत भाषा दक्षता, संस्कृत सामान्य ज्ञान के साथ संस्कृत विषयों का सामान्य ज्ञान।
👉 संस्कृत भाषा दक्षता में वर्ण ज्ञान, शब्दकोश, पर्यायवाची, विलोम शब्द, शब्दरूप, धातु रूप, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, अव्यय तथा उपसर्ग के साथ संस्कृत में वाक्य निर्माण से सम्बन्धित प्रश्न होते हैं।
👉 स्मरण रहे कि इन प्रश्नों को अनेक बोर्ड की पाठ्यपुस्तक के आधारपर बनाया गया है। सामान्य ज्ञान की प्रतियोगिता की तैयारी में बोर्ड की संस्कृत पुस्तकें सहायक सिद्ध होगी। इन प्रश्नों के द्वारा विद्यार्थियों में भाषा दक्षता और भाषा नियमों की समझ का मूल्यांकन किया जाता है।
👉 मंडल स्तर की प्रतियोगिता में संस्कृत भाषा दक्षता में कारक द्वारा वाक्य निर्माण तथा अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करना अतिरिक्त रूप से पूछा जाता है। यहां संस्कृत से जुड़ी सामान्य जानकारी भी पूछी जाती है।
👉 राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उपर्युक्त के साथ व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष आदि विषयों से जुड़े प्रारंभिक स्तर के प्रश्न पूछे जाते हैं।
👉 प्रतियोगिता का नमूनाप्रश्नपत्र अधोलिखित लिंक पर उपलब्ध हैं।
👇
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर (खंड 1) भाषाज्ञान
https://sanskritbhasi.blogspot.com/p/1.html
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर (खण्ड 2)
https://sanskritbhasi.blogspot.com/p/2_1.html
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर (खंड 3) विषयज्ञान
https://sanskritbhasi.blogspot.com/p/3_4.html
*जगदानन्द झा, लखनऊ*
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर (खंड 1) भाषा ज्ञान वर्तनी ज्ञान (वर्ण विच्छेद) सहित अंतिम वर्ण को बोलना । जैसे - कमल = क् + अ + म् + अ + ल् + अ (अकारान्त)
#संस्कृत_प्रतिभा_खोज_2024
गंगा दशहरा की शुभकामनाएं।
आज के दिन इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए 👇
अथ स्कन्दपुराणोक्त-गङ्गास्तोत्रम्
ब्रह्मोवाच
नमः शिवाये गङ्गाये शिवदायै नमोनमः ।
नमस्ते रुद्ररूपिण्य शाङ्कर्यै ते नमोनमः ॥१॥
नमस्ते विश्वरूपिण्यै ब्रह्ममूर्त्यै नमोनमः॥
सर्वदेवस्वरूपिण्यै नमो भेषजमूर्तये ॥ २ ॥
सर्वस्य सर्वव्याधीनां भिषक्श्रेष्ठ्यै नमोस्तु ते ।
स्थाणुजङ्गमसंभूतविषहन्त्र्यै नमोनमः ॥ ३ ॥
भोगोपभोगदायिन्ये भोगवत्यै नमोनमः ।
मन्दाकिन्यै नमस्तेस्तु स्वर्गदायै नमः सदा ॥ ४ ॥
नमस्त्रैलोक्यभूषायै जगद्धात्र्यै नमोनमः । नमस्त्रिशुक्लसंस्थायै तेजोवत्यै नमोनमः ॥५॥
नन्दायै लिङ्गधारिण्यै नारायण्यै नमोनमः ।
नमस्ते विश्वमुख्यायै रेवत्यै ते नमोनमः ॥ ६ ॥
बृहत्यै ते नमस्तेस्तु लोकधात्र्यै नमोनमः ।
नमस्ते विश्वमित्रायै नन्दिन्यै ते नमोनमः ॥ ७ ॥
पृथ्व्यै शिवामृतायै च सुवृषायै नमोनमः ।
शान्तायै च वरिष्ठायै वरदायै नमोनमः ॥ ८ ॥
उस्रायै सुखदोग्ध्यै च संजीविन्यै नमोनमः ।
ब्रह्मिष्ठायै ब्रह्मदायै दुरितघ्न्यै नमोनमः ॥ ९ ॥
प्रणतातिप्रभञ्जिन्यै जगन्मात्रे नमोस्तु ते ।
सर्वापत्प्रतिपक्षायै मङ्गलायै नमोनमः ॥ १० ॥ शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यातिहरे देवि नारायणि नमोस्तु ते ॥ ११ ॥ निर्लेपायै दुर्गहन्त्र्यै दक्षायै ते नमोनमः ।
परात्परतरे तुभ्यं नमस्ते मोक्षदे सदा ॥ १२ ॥
गङ्गे ममाग्रतो भूया गङ्गे मे देवि पृष्ठतः ।
गङ्गे मे पार्श्वयोरेहि त्वयि गङ्गेऽस्तु मे स्थितिः ॥ १३ ॥ आदौ त्वमन्ते मध्ये च सर्व त्वं गां गते शिवे ।
त्वमेव मूलप्रकृतिस्त्वं हि नारायणः परः ॥ १४ ॥
गङ्गे त्वं परमात्मा च शिवस्तुभ्यं नमः शिवे ॥ १५ ॥
य इदं पठति स्तोत्रं भवत्या नित्यं नरोऽपि यः । शृणुयाच्छूद्धया युक्तः कायवाक्चित्तसंभवैः ॥ १६ ॥
दशधा संस्थितैर्दोषैः सर्वैरेव प्रमुच्यते । सर्वान्कामानवाप्नोति प्रेत्य ब्रह्मणि लीयत्वे ॥ १७ ॥
ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता ।
तस्यां दशम्यामेतच्च स्तोत्रं गङ्गाजले स्थितः ॥ १८ ॥ यः पठेद्दाकृत्वस्तु दरिद्रो वापि चाक्षमः ।
सोपि तत्फलमाप्नोति गङ्गां संपूज्य यत्नतः ॥ १९ ॥
अदत्तानामुपादानं हिसा चैवाविधानतः ।
परदारोपसेवा च कायिकं विविधं स्मृतम् ॥ २० ॥
पारुष्यमनृतं चैव पैशुन्यं चापि सर्वशः । असंबद्धप्रलापश्च वाङ्मयं स्याच्चतुविधम् ॥ २१ ॥ परद्रव्येष्वभिध्यानं मनसाऽनिष्टचिन्तनम् । वितथाभिनिवेशश्च मानसं त्रिविधं स्मृतम् ॥ २२ ॥ एतानि दश पापानि हर त्वं मम जाह्नवि ।
दशपापहरा यस्मात्तस्माद्दशहरा स्मृता ॥ २३ ॥
त्रयस्त्रिंशच्छतं पूर्वान्पितृनथ पितामहान् ।
उद्धरत्येव संसारान्मन्त्रेणानेन पूजिता ॥ २४ ॥
नमो भगवत्यै दशपापहरायै गङ्गायै नारायण्यै रेवत्यै शिवायै दक्षाये अमृतायै विश्वरूपिण्यै नन्दिन्यै ते नमोनमः ।
सितमकरनिषण्णां शुभ्रवर्णा त्रिनेत्रां करधृतकलशोद्य त्सोत्पलामत्यभीष्टाम् । विधिहरिहररूपां सेन्दुकोटोरजुष्टां कलितसितदुकूलां जाह्नवीं तां नमामि ॥२५॥
आदावादिपितामहस्य निगमव्यापारपात्रे जलं पश्चात्पन्नगशायिनो भगवतः पादोदकं पावनम् ।
भूयः शंभुजटाविभूषणमणिजंतोर्महर्षेरियं देवीकल्मषनाशिनी भगवती भागीरथी दृश्यते ॥ २६ ॥
गङ्गागङ्गेति यो ब्रूयाद्योजनानां शतैरपि ।
मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति ॥ २७ ॥
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् के हाई स्कूल तथा इंटर कक्षा में संस्कृत विषय में सर्वाधिक अंक पाने वाले को उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की पुरस्कार योजना के अन्तर्गत ११ हजार की पुरस्कार राशि से सम्मान किया जाता है । इसी तरह संस्कृत बोर्ड के छात्रों के लिए भी व्यवस्था है।
इसके लिए मैंने डॉ. Hari Dutt Sharma तथा डॉ. राजेश्वर शास्त्री मुसळगाँवकर से सम्पर्क कर धनराशि की व्यवस्था करायी।
जो छात्र इस वर्ष संस्कृत विषय में ९८ से १०० प्रतिशत अंक प्राप्त कर आगामी कक्षा में संस्कृत विषय लेंगें, उन्हें यह सम्मान राशि मिलना तय है।
फेसबुक poke करने की सुविधा दिया है। यह poke शब्द पुष् पुष्टौ (दिवादि गण) धातु से बना है। पुष् धातु का अर्थ है - पुष्ट करना अथवा पालना ।
अब आप देखें कि पुष् धातु के लृट् लकार में किस तरह से poke शब्द बनता है -
पोक्ष्यति। पुष् धातु से लृट् लकार, तिप्, स्य, लघूपधगुण करके पोष्+स्यति बना। षढोः कः सि से स्य के सकार के परे होने के कारण पोष् के षकार के स्थान पर ककार आदेश हुआ- पोक्+स्यति बना।
फेसबुक वाले इसी पोक शब्द को व्यवहार में लाये हैं।
पोक् + स्यति में पोक् के ककार से परे सकार को आदेशप्रत्यययोः से षत्व होकर पोक्ष्यति बना। ककार और षकार के संयोग होने पर क्ष होकर पोक्ष्यति बनता है ।
याद रहे कि फेसबुक पर पोक करना, किसी दोस्त को नमस्ते कहने या उसका ध्यान आकर्षित करने का एक आसान तरीका है। पोक करने का मतलब है कि आप किसी से जुड़ना चाहते हैं।
30/04/2024
बिल्हण मेरे प्रिय कवियों में से एक हैं। आज मैंने अपने ब्लॉग #संस्कृतभाषी पर "कवि बिल्हण और उनका विक्रमांकदेवचरितम्" नाम से एक लेख प्रकाशित किया है।
चरित प्रधान यह काव्य कवि की गर्वोक्ति, वैदर्भी रीति और आंशिक ऐतिहासिकता के कारण मेरे कंठ में आज भी विराजित है।
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कवि बिल्हण और उनका विक्रमाङ्कदेवचरितम् संस्कृत साहित्य में कवि बिल्हण ही एक ऐसे कवि हैं, जिनका जीवनचरित और काल प्रकाशित है। बिल्हण संस्कृत साहित्य के उन .....
23/04/2024
सन् 1990 के आसपास मैं अयोध्या आना जाना आरंभ किया। तब की अयोध्या में जो आध्यात्मिक दीव्यता थी, वह अब खो चुकी है। अब वहाँ श्रद्धालु से अधिक पर्यटक आते हैं। सत्संग, भजन और ईश्वर प्रीति के स्थान पर व्यापार पांव पसार चुका है।
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