09/05/2026
जर्मनी में 35 और यूके में 20 रुपये दाम बढ़े पर भारत दृढ़ता से डटा हुआ है। नागरिकों को बड़ी राहत देने की यह प्रतिबद्धता ऐतिहासिक है और इसके लिए हमें नेतृत्व का आभार व्यक्त करना चाहिए।
गर्व है कि हम भारतीय और सनातनी है।
🚩🚩जय श्री राम 🚩🚩
09/05/2026
जर्मनी में 35 और यूके में 20 रुपये दाम बढ़े पर भारत दृढ़ता से डटा हुआ है। नागरिकों को बड़ी राहत देने की यह प्रतिबद्धता ऐतिहासिक है और इसके लिए हमें नेतृत्व का आभार व्यक्त करना चाहिए।
01/05/2026
250 एकड़ समाधियाँ… और 2.5 एकड़ पर सवाल? सोचिए ज़रा!
महात्मा गांधी की समाधि 44 ACRES, नेहरू की 52 ACRES, इंदिरा गांधी की 45 ACRES और राजीव गांधी की 15 ACRE — कुल मिलाकर लगभग 250 ACRE ज़मीन। लेकिन जैसे ही 2.5 ACRE में राम मंदिर बना, कुछ लोगों ने तुरंत सवाल उठाने शुरू कर दिए कि वहाँ हॉस्पिटल क्यों नहीं बना। यही बात आज लाखों लोगों के मन में बहस और नाराज़गी दोनों पैदा कर रही है। आस्था पर सवाल और इतिहास पर खामोशी — यह दोहरा रवैया लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है।
सवाल सिर्फ ज़मीन का नहीं, सोच का भी है। जब देश के बड़े नेताओं की याद में विशाल समाधियाँ बनाई गईं, तब विकास की बातें कहाँ थीं? तब किसी ने स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल की मांग इतनी ज़ोर से क्यों नहीं उठाई? आज जब करोड़ों लोगों की श्रद्धा का प्रतीक मंदिर बना है, तो अचानक विकास की बहस छिड़ जाना लोगों को पक्षपात जैसा लग रहा है।
राम मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं और सदियों के इंतज़ार का प्रतीक है। यह आस्था, संस्कृति और विरासत का प्रतीक बन चुका है। ऐसे में इसे सिर्फ ज़मीन के आंकड़ों से तौलना कई लोगों को गलत लगता है। वहीं दूसरी ओर विकास की बात भी अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर मुद्दे पर एक ही नज़रिया अपनाया जाता है?
देश में हर नागरिक को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन असहमति को नफ़रत और देशद्रोह की भाषा में बदल देना सही नहीं माना जाता। लोकतंत्र की ताकत यही है कि लोग बहस करें, सवाल पूछें और अपनी बात रखें। इसलिए इस मुद्दे पर गुस्से से ज़्यादा समझदारी और तथ्यों के साथ चर्चा होनी चाहिए।
आपकी क्या राय है? क्या 250 ACRE समाधियों के बाद 2.5 ACRE मंदिर पर सवाल उठाना सही है, या यह दोहरा मापदंड है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए और चर्चा को सभ्य तरीके से आगे बढ़ाइए।
04/04/2026
यदि मजहब के आधार पर बना नियम कानून आयोग मंत्रालय बोर्ड ट्रिब्यूनल स्कूल कॉलेज लोन वजीफा बंद नहीं हुआ
और लव जिहाद, लैंड जिहाद, ड्रग जिहाद, घुसपैठ जिहाद, धर्मांतरण जिहाद, जनसंख्या जिहाद तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ तत्काल कठोर कानून नहीं बना तो
2047 में वही होगा जो 1947 में हुआ था
29/03/2026
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते,
अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।।
ॐ सूर्य देवाय नमः 🙏🚩
27/03/2026
डीप स्टेट बहुत ताकतवर है।
याद है मोदीजी ने एक बार कहा था कि मुझे पता है कि मैने किन किन लोगों से दुश्मनी मोल ली है।
तो अब आप यह समझ लीजिए कि उन्होंने अपने अंतिम प्रहार की पटकथा लिख कर उसको अमल में लाना शुरू कर दी है।
पहले उन्होंने मोदी को घोर सांप्रदायिक और कट्टर हिंदू साबित कर मुस्लिम विरोधी बना कर बदनाम करने की कोशिश की लेकिन यह दांव उनका उल्टा पड़ा।
मोदी जी की लोकप्रियता इससे और कई गुना बढ़ गई।
वहां से इन्होंने यू टर्न लेते हुए अब मोदी को बदनाम कर उनके चरित्र हनन की कोशिश शुरू की ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जाए।
इस कड़ी में उन्होंने शुरुआत की चौकीदार चोर है से....
फिर अडानी अंबानी को देश बेचने से लेकर राफेल सौदे में पैसा खाने की बात तक हवा में उछाली गई मगर उससे भी कोई बात नहीं बनी तो, अब वे लोग उन्हें हिन्दू विरोधी, सवर्ण विरोधी साबित करने पर तुल चुके है।
मगर उन्होंने देखा कि यह सब प्रोपेगंडा भी कोई कमाल नहीं दिखा पाया तो अब वे लोग मोदी के चरित्र हनन पर उतर आए है।
इसी कड़ी में पहले एपिस्टिन फाइल का सामने आना, फिर सुब्रमण्यम स्वामी का मोदी जी पर महिलाओं से संबंध होने का आरोप लगाने के बाद अब एक "RND" मैदान में आई है।
नाम है ....??
वह मोदी जी के चरित्र पर कीचड़ उछालने का ठेका लेकर मार्केट में उतरी है।
आपको याद है राहुल ने एक बार बोला था कि मोदी की सबसे बड़ी
ताकत उसकी इमेज है मै उसको तोड़ दूंगा।
वह बयान उसी षड्यंत्र की पूर्व सूचना था।
आपको सावधान रहने की जरूरत है।
कुतिया जब हिट पर आती है तो कुत्तों के सामने लेटती ही है।
कुछ राजनैतिक कुतियाएं भी अब हिट पर आए हुई है।
जब डीप स्टेट राज्यसभा के सभापति को खरीद सकता है, जब देश के शंकराचार्यों को खरीद सकता है तो कुत्तों कुतिया को खरीदना क्या बड़ी बात है।
नेताओं की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश लेकिन रामनवमी पर नहीं
नेताओं के नाम पर एयरपोर्ट लेकिन भगवान श्रीराम के नाम पर नहीं
नेताओं की जीवनी स्कूल में पढ़ाते हैं लेकिन भगवान श्रीराम के बारे में नहीं
रामायण मजहबी नहीं बल्कि एक धार्मिक ग्रंथ है फिर भी स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है
Narendra Modi ji
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को नमन और वंदन🙏
स्वतंत्र का अर्थ है स्वयं का तंत्र लेकिन आजतक अंग्रेजों का कोई भी सिस्टम बदला नहीं गया।
शिक्षा व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था, कर व्यवस्था, व्यापार व्यवस्था, पुलिस व्यवस्था, प्रशासन व्यवस्था और न्याय व्यवस्था आज भी गुलामी की चल रही
02 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश लेकिन रामनवमी पर नहीं
नेताओं के नाम पर एयरपोर्ट लेकिन भगवान श्रीराम के नाम पर नहीं
स्कूल में नेताओं के बारे में पढ़ाते है लेकिन भगवान श्रीराम के बारे में नहीं
‘रामायण’ मजहबी नहीं बल्कि धार्मिक ग्रंथ है लेकिन स्कूल में नहीं पढ़ाते हैं Narendra Modi ji