खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।
Quality Time with Boss Sh. Bharat Bhushan Ashu ji
Gautam Kumar Sharma
हमारा लक्ष्य स्वच्छ समाज स्वस्थ समाज ?
ਰਾਜਾ ਵੜਿੰਗ ਸਾਹਿਬ ਥੋਨੂੰ ਸਰਟੀਫੀਕੇਟ ਲੈਣ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ਤੁਸੀ ਪਰਧਾਨ ਹੋ ਥੋਨੂੰ ਸਮਝ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕੀ ਬੋਲਣਾ ਕੀ ਨਹੀਂ। ਜੇ ਥੋਨੂੰ ਲਗਦਾ ਤੁਸੀ ਵਰਕਰਾਂ ਨਾਲ਼ ਖੜੇ ਹੁੰਦੇ ਆਏ ਹੋ ਤਾਂ ਦਿਓ ਜੁਆਬ ਜਦੋਂ ਥੋਡੇ ਲੋਕ ਸਭਾ ਹਲਕਾ ਦੇ ਵਰਕਰਾਂ ਨਾਲ ਧੱਕਾ ਹੋਇਆ ਥੋਡੇ ਹਲਕੇ ਦੇ ਨੁਮਾਇੰਦਿਆਂ ਤੇ ਝੂਠੇ ਮੁੱਕਦਮੇ ਦਰਜ਼ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਸੀ ਓਦੋਂ ਅਪਾ ਕਿੱਥੇ ਸੀ ? ਓਦੋਂ ਕਿੰਨਾ ਕੁ ਨਾਲ ਖੜੇ ਹੋਏ ਹਾਂ ਅਪਾ ਆਪਣੇ ਵਰਕਰਾਂ ਨਾਲ ?????
नेता तो बहुत है दिलों पर राज करने वाला राजनेता सिर्फ राहुल गांधी ही है।
RaGa Interact with the people of Bihar
02/02/2024
मैंने बजट स्पीच सुना। मैंने सोचा था कि वित्त मंत्री POOR और MIDDLE CLASS के लिए कोई नई योजनाएँ लाएगी। उनकी तकलीफ़ों को कम करने के लिए कुछ घोषणाएँ होगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
हर साल की तरह मोदी सरकार का अंतरिम बजट केवल रंग-बिरंगे शब्दों का मायाजाल था !
इसमें ठोस कुछ नहीं था, बड़े-बड़े और खोखले दावे करना इस सरकार की आदत है।
वित्त मंत्री ने में कहा कि वे 2014 और 2024 की तुलना करने के लिए White Paper सदन में रखेंगी। तो उनको बताना चाहिए कि -
1. पिछले 10 सालों में सरकार ने जितने वादे किए गए, उनमें से कितने पूरे हुए? कितने बाक़ी हैं? बजट में उन वादों का कोई ज़िक्र नहीं था।
सालाना 2 करोड़ नौकरियाँ, किसानों की आय दोगुनी करना, 2022 तक सभी को पक्का घर, 100 SMART CITIES, ये सभी वादें आज तक पूरे नहीं हुए।
2. 2014 में जो कृषि विकास दर 4.6% था, वो इस साल 1.8% कैसे हो गया। UPA के दौरान हमारी खेती 4% औसत से बढ़ती थी, वो आधा क्यों हो गया? क्यों 31 किसान हर रोज़ आत्महत्या करने पर मजबूर हैं?
3. 2014 में शिक्षा का बजट जो कुल बजट का 4.55% था, वो गिरकर 3.2% कैसे हो गया?
4. SC, ST, OBC & MINORITY WELFARE काकुल बजट की तुलना में share लगातार क्यों गिर रहा है?
5. रक्षा बजट और स्वास्थ्य बजट में लगातार गिरावट क्यों जारी है?
6. पूरे बजट मेंJobs शब्द केवल एक बार इस्तेमाल किया गया है। बेरोज़गारी 45 साल में सबसे अधिक क्यों हैं?
20-24 साल के युवाओं की बेरोज़गारी 45% पर क्यों है?
मोदी सरकार ने 3 करोड़ से ज़्यादा लोगों की नौकरियां क्यों छीनी? हर महीने पेपर लीक क्यों होते हैं?
7. आसमान छूती महंगाई से हर कोई परेशान है। ज़रूरी वस्तुओं पर 5% से18% GST क्यों लगाया? आटा, दाल, चावल, दूध, सब्ज़ियों के दाम क्यों बढ़ते जा रहें हैं? यह बतानेवाला कोई नहीं है।
8. वित्त मंत्री दावा करती हैं कि आम आदमी की income बढ़ी है। ये झूठ है, सच है कि पिछले 5 वर्षों में ग्रामीण भारत का वेतन घटा है। ग्रामीण दिहाड़ी 10 सालों में बढ़ने के बजाय गिरी है।
9. वित्तमंत्री जी ने पूरे बजट के भाषण में मनरेगा का नाम तक नहीं लिया। क्योंकि UPA के वक़्त 100 दिन का काम मिलता था, वो अब केवल साल में 48 दिन रह गया है।
10. महिला व बाल विकास मंत्रालय का बजट भी कुल बजट की तुलना में इस सरकार ने कम किया है। Female Labour Force Participation जो 2005 में 30% पर था वो अब 24% पर क्यों गिर गया?
11. Congress-UPA के दौरान देश का औसत आर्थिक विकास दर जो New Series के मुताबिक, 8% पर था, वो इस सरकार में लुढ़क कर 5.6 % पर क्यों पहुँच गया?
जब से मोदी सरकार बनी है, तब से बस बड़े-बड़े सपने दिखाने का काम हो रहा है। नाम बदल बदल कर योजनाएँ LAUNCH होती है। लेकिन ये नहीं बताया जाता कि पुराने वादों का क्या हुआ? जो नये सपनों दिखाए जा रहे, वो कैसे पूरे होगा?
दरअसल किसी भी बजट के दो काम होते है: एक पिछले साल का ब्योरा होता है और दूसरा आने वाले साल के लिए VISION होता है। इस बजट में ये दोनों ही चीजें MISSING थी।
किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा कर सत्ता में आई भाजपा के राज में आज 30 किसान रोज़ आत्महत्या करने को मजबूर हैं।
जब देश के किसानों पर कर्ज़ 2014 के मुक़ाबले 60% अधिक है तब मोदी सरकार ने 10 सालों में उद्योगपतियों का ₹7.5 लाख करोड़ कर्ज़ माफ कर दिया है।
फसल बीमा योजना में किसानों के हिस्से के ₹2700 करोड़ रोकने वाली निजी इंश्योरेंस कम्पनियां खुद ₹40,000 करोड़ मुनाफा कमा कर बैठी हैं।
महंगी खाद, महंगे बीज, महंगी सिंचाई, महंगी बिजली के कारण आसमान छूती कृषि लागत के बीच किसान MSP तक के लिए संघर्ष कर रहा है। बिना उचित MSP के किसान को प्रति क्विंटल गेंहू पर ₹200 और धान पर ₹680 का नुकसान हो रहा है।
कांग्रेस का लक्ष्य कृषि लागत को घटा कर किसानों को फसल की सही कीमत दिलाना है, क्योंकि किसानों की समृद्धि का रास्ता उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता है और यही उनके साथ वास्तविक न्याय।
हमारी सरकार ‘किसानों की सरकार’ होगी, कुछ ‘सरकारी उद्योगपतियों’ की नहीं।
30/01/2024
"सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन।"
प्रेम, भाईचारा, सत्य और अहिंंसा की जो विरासत हमें बापू से मिली है, हम उसी राह पर आगे बढ़ते रहेगें, मिलजुलकर भेदभाव मिटाएंगे, समानता लाएंगे।
महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन।
देश की आम जनता पिछले 10 साल में कमर तोड़ महंगाई से तंग आ चुकी है।
अमृतकाल में चीजें इतनी महंगी हो गई हैं कि घर के राशन-पानी तक का बजट बिगड़ गया है।
सुनिए, इन महिलाओं के मन की बात।
Happy 75th Republic day
24/01/2024
'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' देश की जनता के लिए न्याय का हक लेने की यात्रा है।
हमारी ‘न्याय की लड़ाई’ के 5 स्तंभ हैं:
1. युवा न्याय
2. भागीदारी न्याय
3. नारी न्याय
4. किसान न्याय
5. श्रमिक न्याय
देश को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए जनता को उसकी भागीदारी मिलनी बहुत आवश्यक है।
इसीलिए हम 'न्याय की सोच' को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
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