आई. जे. राय

आई. जे. राय

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जब तक मूर्खो की जमात धर्म की दुकान पर जाते रहेंगे, तब तक धर्म के ठिकेदारो का दुकान चलते रहेगा,,

Photos from आई. जे. राय's post 25/05/2026

बढ़ते हत्या, लुट, अपराध, महगाई एवं बेरोजगारी, गैस, डीजल और पेट्रोल के किल्लत के मुद्दे पर व्यापक जन आंदोलन की तैयारी पर चर्चा हुई। जिसके तहत ून_2026 को जिला मुख्यालय पर #विशाल_प्रदर्शन किया जाएगा।

21/05/2026

आखिर कितने लोगों को पता है कि कॉकरोच को हिंदी में तिलचट्टा कहा जाता है ??
तिलचट्टा इसीलिए नाम पड़ा क्योंकि यह घर में रखा हुआ तेल चट कर जाता है यानी चाट जाता है। अगर एक कॉकरोच या तिलचट्टा तेल को चाट सकता है तो फिर पूरे देश भर के बेरोजगार युवा जो आज कॉकरोच या तिलचट्टा के नाम से संबोधित किये जा रहे हैं, अगर वो सभी इकट्ठे हो जाएंगे तो क्या आज मोदी की निरंकुश सत्ता को चाट कर खत्म नहीं कर देंगे ??

अगर बिकाऊ चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के द्वारा देश के नौजवानों को कॉकरोच और कीड़ा - मकोड़ा कहा जा रहा है, तो फिर यही कीड़े - मकोड़े अपनी शक्ति बटोरकर निरंकुश सत्ता पर हमला करने की ताकत भी रखते हैं।

13/05/2026

मेरे नए टॉप फ़ैन्स का बहुत-बहुत आभार! Ajay Ajay, Dr-Yogesh Kumar Sharma, Akhtar Jamal, Ashok Kumar Saxena, Rajesh Roshan, Karim Siddiqui, Rajendra Singh, Rajendra Chaturvedi, Surjeet Singh, Suresh Kumar

06/05/2026

खण्ड-खण्ड में बंटे समाज से किसी का भला नहीं होता।
परिणाम:- अभी बहुत कुछ देखना पड़ेगा

05/04/2026

शोक संदेश

मधुबनी जिला के पंडौल विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सियाराम यादव का रविवार सुबह निधन हो गया। श्री यादव आपातकाल के बाद 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर पंडौल विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। आपातकाल के दौरान दो साल तक मधुबनी, दरभंगा व डाल्टेनगंज की जेलों में रहे पूर्व विधायक श्री यादव को जनता पार्टी ने 1977 में मधुबनी जिला के पंडौल विधान सभा से टिकट दिया था। उन्होंने चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कुमुद रंजन झा को पराजित किया था।
महान समाजवादी, चिंतक श्री सियाराम यादव बाबू का आज मधुबनी स्थित आवास पर निधन हो गया। सूचना प्राप्ति के बाद से स्तब्ध हुँ। उनके खूबी और विशेषताओं के बारे में क्या-क्या लिखूं? शब्द कम पर गए हैं। फिलहाल उन्हें शत - शत नमन! अश्रुपूरित श्रद्धांजलि!!

02/04/2026

लालू जी के द्वारा बिहार की कला एवं सांस्कृतिक विरासत के एक अहम् स्वरुप "लौंडा नृत्य " करवाए जाने पर कुछ लोगों की अनावश्यक आपत्ति है , ये ऐसे लोग हैं जिन्हें पूर्वाग्रह से ग्रसित हो कर कुछ भी बोलना है और जिन्हें बिहार की परंपरागत सांस्कृतिक विरासत के बारे में तनिक भी जानकारी नहीं है l

सरकारी समारोहों - राजकीय - महोत्सवों आयोजनों के मंचों पर बॉलीवुड के फूहड़ गानों पर अश्लील नृत्य की प्रस्तुति पर मौन रहने वाले लोगों को बयान देने से पहले ये जानना चाहिए कि 'लौंडा नृत्य ' बिहार और पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश) का एक पारंपरिक लोक नाट्य और नृत्य रूप है, जिसमें पुरुष महिलाओं के वेश में सामाजिक - सांस्कृतिक समारोहों और शादियों में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले महान लोक कलाकार स्व . भिखारी ठाकुर जी के द्वारा नृत्य की इस विधा को लोकप्रिय बनाया गया था और सदियों से चली आ रही ये नृत्य की परंपरा , सामाजिक संदेश और व्यंग्य सम्प्रेषण का एक सशक्त माध्यम है।

नृत्य की यह परंपरा सदियों पुरानी है, और उस समय से ज्यादा लोकप्रिय हुई जब महिलाओं को पुरुषों की सभाओं में नृत्य करने के पीछे असामाजिक निषेध - वर्जनाएं प्रभावी थीं और जिसके कारण पुरुषों को महिलाओं की भूमिका निभानी पड़ी। स्व. भिखारी ठाकुर जी के द्वारा पलायन, दहेज, शराबखोरी, विरह की जिंदगी जी रही विवाहिताओं और लैंगिक समानता जैसे सामाजिक मुद्दों को उजागर करने के माध्यम के रूप में इस नृत्य का प्रयोग किया गया और लालू जी भी एक अर्से से इस लोक परंपरा को विलुप्त होने से बचाने और वैचारिक सम्प्रेषण के लिए इसका आयोजन करवाते आ रहे हैं, लालू जी सामाजिक - सांस्कृतिक परम्पराओं को संजोने के लिए ही जाने जाते हैं l गौरतलब है कि पद्मश्री से सम्मानित रामचंद्र मांझी जी जैसे ख्यातिप्राप्त कलाकार ने भी इस परंपरा को जीवित रखने में अपना अहम् योगदान दिया और 90 वर्ष की आयु में भी इसका प्रदर्शन करते रहे।

जिन लोगों के पास जानकारी का अभाव है , वही नृत्य की इस शैली के बारे में अनर्गल बयानबाजी करते हैं और ये भूल जाते हैं की भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में आज भी ये एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रदर्शन है l कैरिबियन देशों में आज भी, जहाँ अच्छी खासी संख्या में भोजपुरी भाषी लोग हैं , इस का आयोजन किया जाता है l

02/04/2026

पिछले हफ़्ते मुझे अपनी पोस्ट्स पर 1,000 से ज़्यादा रिएक्शन मिले! मुझे सपोर्ट करने के लिए आप सभी का धन्यवाद! 🎉

01/04/2026

दो फूलों से हमेशा सावधान रहना...!
एक तो अप्रैल फूल से, दूसरा कमल के फूल से,
क्योंकि दोनो ही बेवकूफ बनाते है...!!😂

26/03/2026

जब पुलिस बल इतना निरंकुश होगा तो बिहार में अपराध और अपराधियों की कमी क्यों होगी?

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