05/09/2026
*धनी राम मामले के निर्णय को निगमों के कर्मचारियों पर सामान्य रूप से लागू करना उचित नहीं*
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धनी राम बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य में दिया गया निर्णय मूलतः प्रतिनियुक्ति (Secondment) के बाद सरकारी विभाग में स्थायी अवशोषण (Absorption) से संबंधित एक विशिष्ट मामला है। धनी राम वर्ष 2003 में हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम से समाज कल्याण विभाग में प्रतिनियुक्ति पर गए थे और बाद में वर्ष 2013 में उन्हें एक विशेष Absorption Policy dated 11.05.2012 के तहत सरकारी विभाग में absorb किया गया। वे वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हुए। उनकी मूल संस्था में लागू पेंशन व्यवस्था GPF/EPF/नई पेंशन व्यवस्था थी तथा वे CCS (Pension) Rules, 1972 के अंतर्गत नहीं थे। इसलिए न्यायालय ने संबंधित Absorption Policy की Clause 7 के आधार पर उनके मामले का निर्णय किया। सरकारी विभाग में absorption के बाद उनकी सेवा लगभग दो वर्ष ही रही और केवल इस आधार पर कि वे अंततः सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हुए, उन्हें CCS Pension Rules के अंतर्गत पुरानी पेंशन का अधिकार नहीं दिया गया।
अतः इस निर्णय को यह कहकर प्रस्तुत करना कि “हिमाचल प्रदेश के निगमों के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं मिलेगी”, तथ्यात्मक एवं कानूनी रूप से सही नहीं है। यह फैसला निगमों में कार्यरत सभी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन के अधिकार पर कोई सामान्य निषेध या blanket ruling नहीं है। यह निर्णय एक विशेष कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति, बाद में हुए absorption और उस absorption policy की विशिष्ट शर्तों के संदर्भ में दिया गया है। इसलिए प्रत्येक मामले में कर्मचारी की नियुक्ति की तारीख, मूल संस्था में उसकी पेंशन व्यवस्था, प्रतिनियुक्ति की प्रकृति, absorption की तारीख, लागू absorption policy तथा उस समय लागू पेंशन नियमों को अलग-अलग देखना आवश्यक होगा।
इसलिए इस निर्णय के आधार पर निगमों के सभी कर्मचारियों/पेंशनरों के लिए पुरानी पेंशन का रास्ता बंद होने की धारणा बनाना उचित नहीं होगा। निर्णय का वास्तविक दायरा और तथ्यात्मक पृष्ठभूमि समझकर ही इसके प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए।
*हीरा लाल वर्मा-JAC-HPSEBL*