17/04/2023
Meet The First Woman E-Rickshaw Driver Of J&K, Wants To Provide Better Education And Living To Her Children
The first female e-rickshaw driver in the valley not only works as a professional e-rickshaw driver carrying passengers but also makes good money out of it. She is a mother to three and believes...
17/04/2023
Women with electric rickshaws combat Delhi’s toxic air – and its sexism
Break into male-dominated public-transport helps tackle city’s pollution crisis and safety concerns
21/08/2020
हम, 'वर्चुअल स्टेप रिसर्च ग्रुप' 7 सदस्यों की एक टीम है, जिसने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की मान्यता के साथ PUKAR नामक NGO द्वारा आयोजित सामुदायिक आधारित भागीदारी कार्रवाई अनुसंधान (CBPAR) में एक वर्ष का डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूरा किया है। हमारे शोध का शीर्षक है- “क्या महिलाएं रिक्शा चला कर आत्मनिर्भर हो सकती हैं”?
ऑटो रिक्शा भारत में सार्वजनिक परिवाहन का एक अभिन्न अंग है । मुंबई जैसे शहरों में शेरिंग रिक्शा आम आदमी का दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है । लोकल ट्रेन से उतर कर लोग अपने घर जाने के-लिए ऑटो रिक्शा पर निर्भर है । अभी मुंबई में लगभग 2 लाख से अधिक ऑटो रिक्शा मौजूद है । इनमें से बहुत कम संख्या में महिला रिक्शा चालक को देखने मिलता है । लिंग भेदभाव (gender discrimination) हमारे समाज का एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, इसी-को ध्यान में रखते हुए हमने लिंग आधारित विषय पर शोध किया | हमारे समाज में रूढ़िबद्ध (Stereotype) धारणाये बना रखी है कि कुछ पेशे में सिर्फ पुरुष ही काम कर सकते है । भारत के परम्परावादी परिवारों में लड़कियों को बहुत कुछ तकलीफें झेलना पड़ता है लेकिन आज भारतीय नारी ने हर क्षेत्र में सफलताएँ हासिल की है | हम आशा करते हैं कि हमारे शोध से समाज में महिलाओं को हर एक पेशे में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की प्रेरणा मिलेगी ।