20/07/2021
वृक्षासन - Tree Pose
वृक्षासन - यह नाम संस्कृत के शब्द वृक्ष से लिया गया है जिसका अर्थ है "वृक्ष", "पेड़" और आसन जिसका अर्थ है "मुद्रा"। वृक्षासन मध्यवर्ती स्तर योग मुद्रा है। वृक्षासन को अंग्रेजी मे ‘Tree Pose’ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस योग को करने पर आपके शरीर की आकृति एकदम पेड़ की तरह दिखाई देती है। एक पेड़ की तरह लंबाई और मजबूती में खड़े होने वाली यह मुद्रा ढीली मांसपेशियों को मजबूत करने और उन्हें आकार में लाने में मदद कर सकती है। आपको बस इतना करना है कि इसे एक अच्छे खिंचाव के साथ जितनी देर हो सके इस मुद्रा में रहें। वृक्षासन योगासन को खली पेट करना चाहिए, कम से कम 4-5 घंटे का अंतर होना चाहिए । सुबह के समय वृक्षासन करने के लिए आदर्श है।
वृक्षासन योग करने की विधि
1. इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर सीधी खड़ी हो जाएं।
2. फिर दाहिने पैर को मोड़ें और अपने बाएं पैर के अंदरूनी जांघ पर रखें, ध्यान रखें कि आपकी अंगुलियां नीचे की ओर होनी चाहिए।
3. साथ ही दाहिना पैर बाएं पैर की सीध में होना चाहिए।
4. बाएं पैर को सीधा रखते हुए संतुलन (बैलेंस) बनाए रखें।
5. अच्छा संतुलन बनाने के बाद गहरी सांस अंदर लें।
6. फिर धीरे-धीरे अपनी हाथों को नमस्कार की मुद्रा में ऊपर की ओर लेकर जाएं।
7. रीढ़ की हड्डी और शरीर को तना हुआ रखें। कुछ देर इस अवस्था (पोजिशन) में रहें।
8. धीरे-धीरे सामान्य अवस्था (नॉर्मल पोजिशन) में आ जाएंगे।
9. इसी तरह इस आसन को दूसरी पैर से भी इस को दोहराएंगे ।
10. इस अवस्था मे रहते हुए 30-30 सेकंड की गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें।
11. दोनों पैरों से इस योगासन के 3-3 आवर्तन (सेट) करेंगे।
वृक्षासन करने के लाभ -
1. रोजाना इस आसन को करने से शरीर के वजन को कम किया जा सकता है। यह शरीर की चर्बी को कम करने में मदद करता है।
2. अगर छोटे बच्चे इस आसन को रोजाना करते हैं, तो उनकी हाइट तेजी से बढ़ती है।
3. घुटने के दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए इस आसन को रोजाना करें।
4. एड़ियों का दर्द कम होता है और उसमें लचीलपन बढ़ता है।
5. पैरों के मसल्स में मजबूती आती है।
6. इस करने से तनाव और चिंता को कम किया जा सकता है, और डिप्रेशन दूर होता है।
7. इसे करने से शरीर में संतुलन बढ़ता है।
8. यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत और हेल्दी बनाने में मदद करता है।
9. वृक्षासन करने से मस्तिस्क (ब्रेन) की सजगता बढ़ती है और काम मे ध्यान लगता है।
10. स्टैमिना बढ़ाने के साथ-साथ ये योगासन आपको बैलेंस बनाने, शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने, तनाव और चिंता को दूर करने में भी मददगार है।
महत्वपूर्ण बात -
भुजाओं को ऊपर उठाते समय श्वास लें, तनी हुई अवस्था में श्वास रोकें या सामान्य रूप से सांस लें। इसके बाद पूर्व की मुद्रा में आते समय श्वास छोड़ें।
वृक्षासन के संबंध मे सावधानीया - इस योग मुद्रा के कुछ महत्वपूर्ण सावधानी और दुष्प्रभाव नीचे दिए जा रहे हैं। इन मामले में इसका अभ्यास नहीं किया जाना चाहिए ।
1. अगर उच्च रक्त और कम रक्त चाप है तो इस आसन को ना करे।
2. माइग्रेन और नींद की समस्या से पीड़त है इसका अभ्यास नही करे।
3. घुटने की समस्या, कूल्हे की चोट यह सर्जरी हो तो डॉक्टर की सलाह ले।
किसी प्रकार की कठिनाई के समय आसान में बदलाव कर सकते है –
1. यदि एक पैर पर संतुलन चुनौतीपूर्ण लगता है, तो इस आसन का अभ्यास करते समय किसी दीवार के साथ पीढ़ लग कर सकते हैं।
2. यदि पैर को जांघ के हिस्से में नहीं रख सकते हैं, तो इसे घुटने के नीचे भी रख सकते हैं।

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